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सरकारी योजना 2020 क्या है - किसान खेत में ही बेच सकेंगे फसल ?

सरकारी योजना 2020 क्या है - किसान खेत में ही बेच सकेंगे फसल ?

राष्ट्रीय कृषि बाजार (eNAM) पोर्टल पर सरकार ने जोड़ी नई सुविधाएं ट्रैक्टर जंक्शन पर किसान भाइयों का एक बार फिर स्वागत है। कोरोना (कोविड-19) वायरस से किसानों को कोई नुकसान नहीं हो, इसके लिए सरकार नई-नई योजनाओं और राहतों की घोषणाएं कर ही है। अब केंद्र सरकार ने देश के करोड़ों लघु और सीमांत किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) पोर्टल पर तीन सुविधाएं लांच की है। इससे किसानों को अपनी उपज को बेचने के लिए थोद मंडियों में आने की जरूरत कम हो जाएगी। वे खेत के समीप या गांव स्थित वेयरहाउस में उपज को रखकर वहीं बेच सकेंगे। साथ ही एफपीओ अपने संग्रह से उत्पाद को लाए बिना व्यापार कर सकेंगे। साथ ही लॉजिस्टि मॉड्यूल के नए संस्करण को भी जारी किया गया है, जिससे देशभर के पौंने पांच लाख ट्रक जुड़ सकेंगे। कोरोना वायरस के संक्रमण काल में इस योजना से सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों की पालना होगी। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 ऑनलाइन ई-नाम पोर्टल के नए फीचर्स राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) प्लेटफ़ॉर्म की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने तीन नई सुविधाएं लॉन्च की है। तोमर ने बताया कि अनाज, फल और सब्जियों की आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखने में मंडियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। नई सुविधाओं से छोटे और सीमांत किसानों को काफी सहूलियत होगी। वे अपनी उपज को मान्यता प्राप्त गोदामों में रख पाएंगे, लॉजिस्टिक्स खर्चों को बचा सकेंगे और बेहतर आय अर्जित करते हुए देशभर में उपज को अच्छे तरीके से बेचकर खुद को परेशानी से बचा सकते हैं। मूल्य स्थिरीकरण समय और स्थान उपयोगिता के आधार पर किसान आपूर्ति और मांग की तुलना करते हुए फायदे में रहेंगे। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर द्वारा लांच किए गए तीन सॉफ्टवेयर मॉड्यूल इस प्रकार हैं:- ई-नाम में गोदाम से व्यापार की सुविधा के लिए वेयरहाउस आधारित ट्रेडिंग माड्यूल। एफपीओ का ट्रेडिंग माड्यूल जहाँ एफपीओ अपने संग्रह से उत्पाद को लाए बिना व्यापार कर सकते हैं। इस जंक्शन पर अंतर-मंडी तथा अंतरराज्यीय व्यापार की सुविधा के साथ लॉजिस्टिक मॉड्यूल का नया संस्करण, जिससे पौने चार लाख ट्रक जुड़े रहेंगे। यह भी पढ़ें : कोविड-19 लॉकडाउन में सरकारी बैंकों से ले इमरजेंसी लोन और छह महीने तक किश्त की चिंता नहीं ? कोरोना (कोविड-19) से लड़ाई में मददगार ई-नाम पोर्टल से किसानों का होगा फायदा कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई लडऩे के लिए सामाजिक दूरी बनाए रखते हुए कामकाज करने में भी यह मददगार है। तोमर ने कहा कि ये नई सुविधाएं कोविड-19 के खिलाफ हमारी लड़ाई की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, ताकि इस समय किसानों को अपने खेतों के पास ही बेहतर कीमतों पर अपनी उपज बेचने में मदद की जा सके। परिवहन के इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से उपयोगकर्ताओं तक कृषि उपज सुविधापूर्वक शीघ्रता से पहुंचाई जा सकेगी। इस अवसर पर तोमर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में ई-नाम पोर्टल 14 अप्रैल 2016 को शुरू किया गया था, जिसे अपडेट कर काफी सुविधाजनक बनाया गया है। पहले से ही 16 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों में 585 मंडियों को ई-नाम पोर्टल पर एकीकृत किया गया है। इसके अतिरिक्त 415 मंडियों को भी ई-नाम से जल्द ही जोड़ा जाएगा, जिससे इस पोर्टल पर मंडियों की कुल संख्या एक हजार हो जाएगी। ई-नाम पर इन सुविधाओं के कारण किसानों, व्यापारियों व अन्य को मंडियों का चक्कर काटने की जरूरत नहीं होगी। यह भी पढ़ें : युवा किसानों के लिए 50 हजार से 2 करोड़ रुपए तक का ऋण ई-नाम पोर्टल से छोटे और सीमांत किसानों को होने वाले लाभ / ई-नाम पोर्टल पर ऑनलाइन भुगतान की सुविधा तोमर के अनुसार एफपीओ को बोली के लिए अपने आधार/संग्रह केंद्रों से अपनी उपज अपलोड करने में सक्षम बनाया जा सकेगा। वे बोली लगाने से पहले उपज की कल्पना करने में मदद के लिए आधार केंद्रों से उपज और गुणवत्ता मापदंडों की तस्वीर अपलोड कर सकते हैं। एफपीओ के पास सफल बोली लगाने के बाद मंडी के आधार पर या अपने स्तर से उपज वितरण का विकल्प रहेगा। इन सबसे मंडियों में आवागमन कम होने से सभी को सुविधा होगी, परिवहन की लागत कम होगी. ऑनलाइन भुगतान की सुविधा मिलेगी। तोमर ने कहा कि मंडियों को किसानों व अन्य हितधारकों की सुरक्षा के लिए अत्यधिक स्वच्छता और सामाजिक दूरी बनाए रखने के उपाय अपनाने की सलाह दी गई है। राज्यों को थोक खरीदारों/प्रोसेसर और बड़े खुदरा विक्रेताओं द्वारा प्रत्यक्ष खरीद की सुविधा देने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि उन्हें मंडियों में कम से कम आना-जाना पड़े। सभी कंपनियों के ट्रैक्टरों के मॉडल, पुराने ट्रैक्टरों की री-सेल, ट्रैक्टर खरीदने के लिए लोन, कृषि के आधुनिक उपकरण एवं सरकारी योजनाओं के नवीनतम अपडेट के लिए ट्रैक्टर जंक्शन वेबसाइट से जुड़े और जागरूक किसान बने रहें।

कोविड-19  का बढ़ता प्रकोप से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की एडवाइजरी से किसानों को होगा लाभ

कोविड-19 का बढ़ता प्रकोप से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की एडवाइजरी से किसानों को होगा लाभ

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की एडवाइजरी से किसानों को भविष्य में होगा फायदा ट्रैक्टर जंक्शन पर किसान भाइयों का एक बार फिर स्वागत है। कोरोना (कोविड-19) का प्रकोप दुनियाभर में लगातार बढ़ रहा है। वायरस संक्रमण व मृत्यु के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। अन्य देशों की तुलना में भारत में स्थिति अभी नियंत्रण में कही जा सकती है। देश के सभी लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करके कोरोना को हराने के लिए संकल्प ले रहा है। देश में इस समय फसलों की कटाई का दौर चल रहा है और किसान अपनी फसल को बेचने के लिए तैयार हैं। देश का किसान भी सरकारी की एडवाइजरी के अनुसार सोशल डिस्टेंसिंग सहित अन्य नियमों को अपनाकर अपने काम में जुटे हुए हैं। किसानों के लिए सावधानी और सुरक्षा पालन करना बहुत ही जरूरी है, ताकि महामारी का फैलाव ना हो सके। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप -http://bit.ly/TJN50K1 भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की गाइडलाइन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने कोविड-19 के बढ़ते प्रकोप को ध्यान में रखते हुए रबी फसलों की कटाई एवं मड़ाई और फसल कटाई के बाद कृषि उपज के भंडारण एवं विपणन के लिए एडवाइजरी जारी की है। आइए जानते हैं एडवाइजरी की प्रमुख बातें। फसलों की कटाई और मड़ाई के लिए किसान क्या करें भारत के उत्तरी प्रांतों में गेहूं पकने की स्थिति में आ रहे हैं। अत: इनकी कटाई के लिए आवश्यक कम्बाइन कटाई मशीन का उपयोग एवं प्रदेशों के अंदर तथा दो प्रदेशों के बीच इनके आवागमन की अनुमति भारत सरकार के आदेश के तहत दी गई है। हालांकि, इस दौरान मशीनों के रखरखाव एवं फसल कटाई में लगे श्रमिकों की सावधानी एवं सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है। इसी प्रकार उत्तर भारत की सरसों रबी की महत्वपूर्ण फसल है जिसकी किसानों द्वारा हाथ से कटाई एंव कटी फसलों की मड़ाई का कार्य जोरों से चल रहा है। मसूर, मक्का और मिर्ची जैसे फसलों की भी कटाई एवं तुड़ाईचल रही है तथा चने की फसल पकने की स्थिति में आ रही है। गन्ने की कटाई जोरों पर है तथा उत्तर भारत में इसकी रोपाई (हाथ से करने) का भी समय है। ऐसी स्थिति में समस्त किसानों एवं कृषि श्रमिकों, जो फसलों की कटाई, फल एवं सब्जियों की तुड़ाई, अंडों और मछलियों के उत्पादन में लगे हैं, द्वारा इन कार्यों के क्रियान्वयन के पहले, कार्यों के दौरान एवं कार्यों के उपरांत व्यक्तिगत स्वच्छता तथा सामाजिक दूरी को सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। फसलों की हाथ से कटाई व तुड़ाई के दौरान बेहतर होगा कि 4-5 फीट की पट्टियों में काम किया जाए तथा एक पट्टी की दूरी में एक ही श्रमिक को कार्यरत रखा जाए। इस प्रकार कार्यरत श्रमिकों के बीच उचित दूरी सुनिश्चित की जा सकेगी। कार्यरत सभी व्यक्तियों/श्रमिकों को सुनिश्चित करना चाहिए कि वे मास्क पहनकर ही काम करें तथा बीच-बीच में साबुन से हाथ धोते रहें। एक ही दिन अधिक श्रमिकों को कार्य में लगाने के बजाय उस कार्य को अवधि/दिनों में बांट दिया जाए तथा खेतों में काम विभिन्न अंतराल में किया जाए। जहां तक संभव हो, परिचित व्यक्ति को ही खेतों के कार्य में लगाएं। किसी भी अनजान श्रमिक को खेत में काम करने से रोकें, ताकि वे इस महामारी का कारण न बन सकें। जहां तक संभव हो, कृषि कार्य उपकरणों व मशीनों से ही किया जाए, न कि हाथों से और इसके साथ ही केवल उपयुक्त व्यक्ति को ही ऐसे संयंत्रों को चलाने दिया जाए। कृषि कार्यों में लगे संयंत्रों को कार्यों के पूर्व तथा कार्यों के दौरान साफ (सैनिटाइज) किया जाना चाहिए। इसके साथ ही बोरी तथा अन्य पैकेजिंग सामग्री को भी साफ (सैनिटाइज) किया जाना चाहिए। खलिहानों में तैयार उत्पादों को छोटे-छोटे ढेरों में इक_ा करें जिनकी आपस में दूरी 3-4 फीट हो। इसके साथ ही प्रत्येक ढेर पर 1-2 व्यक्ति को ही कार्य पर लगाना चाहिए तथा भीड़ से बचना चाहिए। कटाई किए गए मक्के एवं खोदी हुई मूंगफली की मड़ाई हेतु लगाई गई मशीनों की उचित साफ-सफाई एवं स्वच्छता (सैनिटाइज) सुनिश्चित करें, खासकर यदि इन मशीनों को अन्य किसानों या कृषक समूहों द्वारा उपयोग किया जाना है। इन मशीनों के पार्ट्स (पुर्जो) को बार-बार छूने पर साबुन से हाथ धोना चाहिए। यह भी पढ़ें : कोविड-19 लॉकडाउन में सरकारी बैंकों से ले इमरजेंसी लोन और छह महीने तक किश्त की चिंता नहीं ? फसल कटाई के बाद कृषि उपज का भंडारण और विपणन के लिए सावधानियां प्रक्षत्रों पर कुछ खास कार्यों जैसे कि मड़ाई, सफाई, सुखाई, छंटाई, ग्रेडिंग, तथा पैकेजिंग के दौरान किसानों/श्रमिकों को चेहरे पर मास्क अवश्य लगाना चाहिए, ताकि वायु-कण एवं धूल-कण से बचा जा सके और श्वास से संबंधित तकलीफों से दूर रहा जा सके। तैयार अनाजों, मोटे अनाजों तथा दालों को भंडारण के पहले पर्याप्त सुखा लें तथा जूट की पुरानी बोरियों का उपयोग भंडारण हेतु न करें। नई बोरियों को नीम के 5 प्रतिशत घोल में उपचारित कर तथा सूखा कर ही अनाजों के भंडारण हेतु उपयोग करें। शीत भंडारों, सरकारी गोदामों तथा अन्य गोदामों द्वारा आपूर्ति की गई जूट की बोरियों का उपयोग अनाज भंडारण हेतु काफी सावधानीपूर्वक करें। अपने उत्पादों को बाजार-यार्ड अथवा नीलामी स्थल तक ले जाने के दौरान ढुलाई के वक्त किसान अपनी निजी सुरक्षा का भरपूर ध्यान रखें। बीज उत्पादक किसानों को अपने बीजों को लेकर बीज कंपनियों तक ढुलाई करने की इजाजत है, बशर्ते कि उन किसानों के पास संबंधित दस्तावेज हों तथा भुगतान के वक्त वे समुचित सावधानी बरतें। बीज प्रसंस्करण एवं पैकेजिंग, संयंत्रों द्वारा बीजों का आवागमन बीज उत्पादक प्रांतों से फसल उत्पादक प्रांतों तक आवश्यक है, ताकि गुणवत्ता युक्त बीजों की उपलब्धता आगामी खरीफ सीजन के लिए सुनिश्चित की जा सके (दक्षिण भारत से उत्तर भारत तक)। उदाहरण के लिए, अप्रैल के महीने में उत्तर भारत में हरे चारे की खेती हेतु बीज की आपूर्ति दक्षिण भारत के प्रांतों द्वारा की जाती है। इनके अतिरिक्त, किसानों द्वारा उनके प्रक्षेत्रों पर तैयार टमाटर, फूल गोभी, हरी पत्तेदार सब्जियां, खीरा तथा लौकी श्रेणी की अन्य सब्जियों के बीज के सीधे विपणन में किसानों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। यह भी पढ़ें : युवा किसानों के लिए 50 हजार से 2 करोड़ रुपए तक का ऋण खेतों में खड़ी फसलों से संबंधित सावधानियां जैसा कि देखा जा रहा है कि इस बार ज्यादातर गेहूं उत्पादक प्रांतों में औसत तापमान विगत अनेक वर्षों के औसत तापमान से कम है, अत: गेहूं की कटाई कम-से-कम 10-15 दिन आगे बढऩे की संभावना है। ऐसी दशा में किसान यदि 20 अप्रैल तक भी गेहूं की कटाई करें तो भी उन्हें कोई आर्थिक नुकसान नहीं होगा। इस प्रकार गेहूं की खरीदारी राज्य सरकारों व अन्य एजेंसियों द्वारा करना आसान होगा। दक्षिण भारत के प्रातों में शीतकालीन (रबी) धान की फसल के दाने पुष्ट होने की अवस्था में हैं तथा नेक ब्लास्ट रोग से प्रभावित हैं। अत: किसानों को सलाह दी जाती है कि वे संबंधित रोगनाशक रसायन का छिडक़ाव सावधानीपूर्वक करें। इन्हीं प्रांतों में धान की कटाई की अवस्था में यदि असामयिक बारिश हो जाए तो किसानों को 5 प्रतिशत लवण के घोल का छिडक़ाव फसल पर करना चाहिए, ताकि बीज अंकुरण को रोका जा सके। उद्यानिकी फसलें, खासकर, आम के पेड़ पर इस समय फल बनने की अवस्था है। आम के बागों में पोषक तत्वों के छिडक़ाव तथा फसल सुरक्षा के उपायों के दौरान रासायनिक कच्चे माल का समुचित संचालन, उनका सम्मिश्रण, उपयोग तथा संबंधित संयंत्रों की सफाई अत्यंत आवश्यक है। चना/सरसों/आलू/गन्ना/गेहूं के बाद खाली खेतों में जहां ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती होनी है वहां मूंग की फसलों में सफेद मक्खी के प्रबंधन हेतु उचित रसायनों के उपयोग के दौरान समुचित सुरक्षा का पालन करें, ताकि इन फसलों को पीले मोजैक (विषाणु) के प्रकोप से बचाया जा सके। सभी कंपनियों के ट्रैक्टरों के मॉडल, पुराने ट्रैक्टरों की री-सेल, ट्रैक्टर खरीदने के लिए लोन, कृषि के आधुनिक उपकरण एवं सरकारी योजनाओं के नवीनतम अपडेट के लिए ट्रैक्टर जंक्शन वेबसाइट से जुड़े और जागरूक किसान बने रहें।

मुख्यमंत्री कृषक उद्यमी योजना क्या है - मध्यप्रदेश ऋण की पूरी जानकारी

मुख्यमंत्री कृषक उद्यमी योजना क्या है - मध्यप्रदेश ऋण की पूरी जानकारी

युवा किसानों के लिए 50 हजार से 2 करोड़ रुपए तक का ऋण ट्रैक्टर जंक्शन पर किसान भाइयों का एक बार फिर स्वागत है। आज हम बात करते हैं सरकार की उन योजनाओं की जिनके माध्यम से सरकार युवा किसानों को उद्यमी बनाने के लिए प्रेरित कर रही है। मध्यप्रदेश में कृषक उद्यमी योजना के माध्यम से किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के प्रयास चल रहे हैं। मध्यप्रदेश में इस योजना का शुभारंभ 2014 में हुआ था। इस योजना में राज्य सरकार युवा किसानों को 50 हजार से 2 करोड़ रुपए तक का लोन उपलब्ध कराती है। योजना का लाभ 18 से 45 साल के युवा उठा सकते हैं। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 मुख्यमंत्री कृषक उद्यमी योजना का उद्देश्य मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष 2014 में कृषक पुत्र-पुत्रियों के लिए मुख्यमंत्री कृषक उद्यमी योजना की शुरुआत की थी। यह योजना मध्यप्रदेश के सभी जिलों एवं सभी वर्ग के किसानों के लिए लागू है। योजना का उद्देश्य कृषक पुत्र एवं पुत्री को उद्योग/विनिर्माण/सेवा/व्यवसाय आदि उद्यम स्थापित करने के लिए बैंकों के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराना है जिसमें कृषि आधारित/अनुषांगिक परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। योजना के तहत हितग्राहियों को मार्जिन मनी सहायता, ब्याज अनुदान, ऋण गारंटी एवं प्रशिक्षण का लाभ शासन द्वारा दिया जाएगा। मुख्यमंत्री कृषक उद्यमी योजना के तहत लोन वर्ष 2014 में मुख्यमंत्री कृषक उद्यमी योजना शुरू की गई थी। योजना की शुरूआत के बाद 2017 में इसमें कुछ संशोधन किए गए। फिर 23 अप्रैल 2018 को भी एक और संशोधन किया गया जो 2020 में अभी तक लागू है। फिलहाल इस योजना के तहत मध्य प्रदेश के युवा किसान किसी बिजनेस हेतु 50 हजार से लेकर 2 करोड रुपए तक की राशि का लोन बैंक से हासिल कर सकते हैं। यह भी पढ़ें : कोविड-19 लॉकडाउन में सरकारी बैंकों से ले इमरजेंसी लोन और छह महीने तक किश्त की चिंता नहीं ? मुख्यमंत्री कृषक उद्यमी योजना का क्रियान्वयन मध्यप्रदेश में स्वरोजगार संबंधित योजनाएं संचालित करने वाले समस्त 14 विभाग इस योजना का संचालन अपने-अपने विभागीय अमले और बजट से करते हैं। इस योजना के वार्षिक लक्ष्य निर्धारण, समन्वय एवं क्रियान्वयन संबंधी आंकड़े एकत्र करने हेतु सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग नोडल एजेंसी है। मध्यप्रदेश का किसान इन संबंधित विभागों में स्वरोजगार की स्थापना करने की योजना बनाकर लोन ले सकते हैं। 14 विभागों की सूची इस प्रकार है। सूक्ष्म, लघु और मध्य उद्यम विभाग कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग माटी कला बोर्ड हथकरघा और हस्तशिल्प निदेशालय मध्य प्रदेश सहकारी अनु.जाति वित्त एवं विकास निगम जनजातीय कार्यविभाग आदिवासी वित्त एवं विकास निगम पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग विमुक्त घुमाकड़ एवं अद्र्ध घुमक्कड़ जनजाति कल्याण विभाग पशुपालन विभाग मछुआ कल्याण तथा मत्स्य पालन विभाग किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग नगरीय विकास एवं आवास विभाग उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग कृषक उद्यमी योजना की पात्रता कृषक उद्यमी योजना का लाभ उन्हीं कृषक पुत्र-पुत्रियों को दिया जाएगा जो मध्यप्रदेश राज्य की सीमा में उद्यम स्थापित करना चाहते हैं। आवेदक मध्यप्रदेश का मूलनिवासी होना चाहिए। आवेदक कम से कम 10वीं कक्षा उत्तीर्ण होना चाहिए। आवेदन की आयु 18 से 45 वर्ष के मध्य होनी चाहिए। आवेदक कृषक पुत्र या पुत्री होना चाहिए अर्थात जिनके माता, पिता या स्वयं के पास कृषि भूमि होनी चाहिए। आवेदक का परिवार पहले से उद्योग/व्यापार क्षेत्र में स्थापित होकर आयकरदाता नहीं होना चाहिए। किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक/वित्तिय संस्था / सहकारी बैंक का डिफाल्टर नहीं होना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति किसी शासकीय उद्यमी/ स्वरोजगार योजना के अंतर्गत सहायता प्राप्त कर रहा हो , तो इस योजना के अंतर्गत पात्र नहीं होगा। इस योजना का लाभ सिर्फ एक बार ही दिया जाएगा। यह भी पढ़ें : सोनालिका ट्रैक्टर ने COVID-19 महामारी के बीच अपने मौजूदा ग्राहकों को वारंटी पर अतिरिक्त समय प्रदान किया मुख्यमंत्री कृषक उद्यमी योजना में शामिल परियोजनाएं योजना में उद्योग विनिर्माण, सेवा एवं व्यवसाय से संबंधित सभी प्रकार की परियोजनाएं शामिल हैं। इसमें कृषि आधारित परियोजनाएं जैसे एग्रो प्रोसेसिंग, फूड प्रोसेसिंग, कोल्ड स्टोरेज, मिल्क प्रोसेसिंग, कैटल फीड, पोल्ट्री फीड, फिश फीड, कस्टम हायरिंग सेंटर, वेजिटेबल, डीहाईद्रेशन, टिश्यू कल्चर, दाल मिल, राइस मिल, प्लोर मिल, बेकरी, मसाला निर्माण, सीड ग्रेडिंग/ शर्टिंग व अन्य कृषि आधारित/ अनुषांगिक परियोजनाएं शामिल है। योजना में समस्त प्रकार के वाहन क्रय प्रतिबंधित होंगे परन्तु कृषि आधारित/अनुषांगिक परियोजना अंतर्गत मशीन/ उपकरण वाहन क्रय किया जाता है तो वाहन का आरटीओ पंजीयन व्यावसायिक श्रेणी में करवाना अनिवार्य होगा अन्यथा आवेदक को शासन मार्जिन मनी / ब्याज अनुदान सहयता की पात्रता नहीं होगी। मुख्यमंत्री कृषक उद्यमी योजना में आवेदन जो भी कृषक पुत्र-पुत्री इस योजना के तहत कोई बिजनेस शुरू करने के लिए लोन प्राप्त करना चाहते है तो उन्हें सर्वप्रथम मध्य प्रदेश सरकार के ऑनलाइन पोर्टल पर निर्धारित प्रपत्र 1 में पूछी गई सभी बातों का सही जवाब भरकर जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र में ऑनलाइन जमा करना होगा। आपको ऑफिसियल वेबसाइट https://msme.mponline.gov.in/portal/services/msme2019/dept.aspx?Y=MMYUY पर जाकर सूक्ष्म , लघु और मध्यम उद्यम विभाग पर क्लिक करना होगा। वहां पर आपको अपना नाम, ईमेल पता, फोन नंबर जैसी जानकारी उपलब्ध करवानी होगी और आपको आगे से साइन इन करने के लिए एक पासवर्ड भी सत्यापित करना होगा। यह सब करने के बाद जब आप फॉर्म सबमिट करोगे तो आपको आपका एप्लीकेशन नंबर प्रदान किया जाएगा। साइन अप करने के बाद आपको मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के अंदर अपने फोन नंबर और पासवर्ड द्वारा लॉगिन करना होगा। उसके बाद आपको अपने बिजनेस हेतु डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट विस्तृत रूप से प्रतिवेदन करनी होगी और यदि आप 10 लाख से अधिक का ऋण प्राप्त करना चाहते हैं तो आपको अपनी बिजनेस रिपोर्ट चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा सत्यापित करवाने की आवश्यकता होगी। मुख्यमंत्री कृषक उद्यमी योजना 2020 के तहत वित्तीय सहायता इस योजना के तहत बिजनेस के लिए न्यूनतम 50 हजार से अधिकतम 2 करोड़ रुपए की राशि आवंटित की जा सकती है। मुख्यमंत्री कृषक उद्यमी योजना 2020 के तहत फ्री योजना की पूंजीगत लागत पर मार्जिन मनी सहायता 15 प्रतिशत जो कि अधिकतम 12 लाख रुपए होता है और बीपीएल परिवार के लिए परियोजना के पूंजीगत लागत पर 20 प्रतिशत जोकि अधिकतम 18 लाख रुपए होता है वह सरकार द्वारा देय होगा। इस योजना के अंतर्गत आपके बिजनेस की पूंजीगत लागत पर पुरुषों को 5 प्रतिशत और महिलाओं को 6 प्रतिशत की दर से अधिकतम 7 वर्ष तक ब्याज अनुदान देय होगा। सभी कंपनियों के ट्रैक्टरों के मॉडल, पुराने ट्रैक्टरों की री-सेल, ट्रैक्टर खरीदने के लिए लोन, कृषि के आधुनिक उपकरण एवं सरकारी योजनाओं के नवीनतम अपडेट के लिए ट्रैक्टर जंक्शन वेबसाइट से जुड़े और जागरूक किसान बने रहें।

कोरोना वायरस से दूध की खपत 25 फीसदी घटी अब सरकार से  राहत की उम्मीद ?

कोरोना वायरस से दूध की खपत 25 फीसदी घटी अब सरकार से राहत की उम्मीद ?

कोरोना वायरस का दूध उत्पादक किसानों पर असर ट्रैक्टर जंक्शन पर किसान भाइयों का एक बार फिर स्वागत है। देशभर में कोरोना का साइड इफेक्ट लगातार बढ़ता जा रहा है। कोरोना संक्रमण के कारण मृत्यु के मामले और कोरोना पॉजिटिव लोगों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। देशभर में लॉकडाउन के चलते हर तबका मुसीबत में है, किसान भी इससे अछूते नहीं है। देश का किसान रबी फसल की कटाई में जुटा हुआ है। देश के कई प्रांतों के किसानों ने रबी फसल की कटाई का काम पूरा कर लिया है लेकिन वह अपनी उपज को बेच नहीं पा रहा है। पशुपालन से जुड़े किसानों पर भी लॉकडाउन का असर पड़ा है। देश में दूध की खपत करीब 25 फीसदी तक घट गई और किसानों को गांव में दूध कम दामों पर बेचना पड़ रहा है। ऐसे में किसानों को सरकार से उम्मीद है कि उनके लिए भी कुछ राहत भरे कदम उठाए जाएं। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 कोरोना से देश में दूध की खपत 25 फीसदी तक कम कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए देश में लॉकडाउन के चलते होटल, रेस्तरां, हलवाई की दुकानें और चाय की थडिय़ां बंद है। जिससे दूध की खतप करीब 25 फीसदी तक कम हो गई है। इससे पशुपालक किसानों की कमाई में 5 से 7 रुपए प्रति लीटर तक की कमी आई है। देश में मांग की तुलना में दूध की आपूर्ति बढ़ गई है। देश के कुछ इलाकों में तो किसान आधी कीमत पर दूध बेचने को मजबूर है। देश के दूरदराज इलाकों में परिवहन सेवाएं बंद होने के कारण निजी और सरकारी कंपनियां दूध की खरीद नहीं कर पा रही हैं। देश के प्रमुख दुग्ध उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक औ तमिलनाडू में कोविड-19 के पैर परसारने के कारण यह स्थिति पैदा हुई है। किसानों को गाय के दूध के 31 और भैंस के दूध के 50 रुपए लीटर मिलता है दाम अमूल ब्रांड से दुग्ध उत्पादक बेचने वाली देश की सबसे बड़ी दुग्ध कंपनी गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन संघ (जीसीएमएमएफ) के प्रबंध निदेशक आर.एस. सोढ़ी के हवाले छपी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक देश में होटल, रेस्टोरेंट और चाय की दुकानें बंद होने से पिछले एक महीने के दौरान दूध की खपत में 25 फीसदी की कमी आई है। आइसक्रीम और दूध से बने उत्पादों की खुदरा दुकानें बंद होने से दूध की खपट घटी है। लेकिन घरों में घी, मक्खन और दूध की खपत बढ़ी है। सोढ़ी के अनुसार बड़ी दूध की कंपनियों को तो ऊंची कीमत चुकानी पड़ेगी क्योंकि उनका किसानों के साथ पुराना नाता है। जीसीएमएमएफ किसानों को गाय के दूध के लिए 31 रुपए प्रति लीटर और भैंस के दूध के लिए 50 रुपए प्रति लीटर का भुगतान करती है। यह भी पढ़ें : 8.69 करोड़ किसानों को अप्रैल के पहले सप्ताह में मिलेंगे 2 हजार रुपए अब कुछ किसान कम कीमत पर दे रहे हैं दूध एक मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दूध की खपत में कमी के कारण महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडू और गुजरात में किसानों को सस्ती कीमत पर दूध बेचना पड़ रहा है। गांवों में दूध की मौजूदा कीमत 30 से 31 रुपए प्रति लीटर है लेकिन कुछ किसान आधी कीमत पर ही दूध कंपनियों को दूध दे रहे हैं। इससे किसानों की कमाई 5 से 7 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से कम हुई है। आपको बता दें कि निजी और छोटी सहकारी कंपनियां ज्यादा आपूर्ति की स्थिति में किसानों को कम कीमत देकर मौके का फायदा उठाती है। निर्यात प्रभावित होने से स्किम्ड मिल्क पाउडर की कीमतों में भी गिरावट वहीं दुनियाभर में लॉकडाउन के कारण निर्यात प्रभावित होने से स्किम्ड मिल्क पाउडर की कीमतों में भी गिरावट आई है। यह स्थिति अभी कुछ हफ्ते और रहेगी। करीब एक महीने बाद गर्मियां शुरू होने के साथ ही दूध की आपूर्ति में कमी आएगी और कीमतें फिर से अपनी पुरानी स्थिति में पहुंच जाएंगी। अमूमन जब दूध की आपूर्ति खपत से अधिक होती है तो दुग्ध कंपनियां स्किम्ड मिल्क पाउडर (एसएमपी) बनाती हैं ताकि मांग बढऩे और आपूर्ति घटने पर इसे बेचा जा सके। निर्यात रुकने के कारण एसएमपी की कीमतों में भारी गिरावट आई है। खेप रोक दी गई और कोई ऑर्डर नहीं आ रहा है। बाजार में पर्याप्त मात्रा में एसएमपी उपलब्ध नहीं है। इसके बावजूद अतिरिक्त दूध को एसएमपी में बदलने और ज्यादा मांग के समय आपूर्ति के लिए रखना व्यावहारिक नहीं है। कई दुग्ध कंपनियों के पास कार्यशील पूंजी नहीं है। क्योंकि उन्हें बैंक से फंड नहीं मिल रहा है। मांग कम होने से घरेलू बाजार में एसएमपी 230 रुपए प्रति किलो के भाव से मिल रहा है जबकि एक माह पहले इसकी कीमत 310 रुपए प्रतिकिलो के आसपास थी। सभी कंपनियों के ट्रैक्टरों के मॉडल, पुराने ट्रैक्टरों की री-सेल, ट्रैक्टर खरीदने के लिए लोन, कृषि के आधुनिक उपकरण एवं सरकारी योजनाओं के नवीनतम अपडेट के लिए ट्रैक्टर जंक्शन वेबसाइट से जुड़े और जागरूक किसान बने रहें।

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