सरकार का प्रयोग सफल : देशी गिर गाय से प्रतिदिन मिल रहा 20 लीटर दूध 

Share Product Published - 10 Dec 2021 by Tractor Junction

सरकार का प्रयोग सफल : देशी गिर गाय से प्रतिदिन मिल रहा 20 लीटर दूध 

जानें, कौनसी है गाय की ये नस्ल और इसकी विशेषताएं और लाभ

देशी गायों के संरक्षण और दूध उत्पादन बढ़ाने की दिशा में कई कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में मध्यप्रदेश के पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम की ओर से वर्ष 2014-15 में भोपाल में भ्रूण प्रत्यारोपण शुरू किया गया था। भोपाल के केरवा स्थित मदर बुल फार्म पर भ्रूण प्रत्यारोपण के बहुत अच्छे परिणाम अब देखने को मिल रहे हैं। सर्वोत्तम गिर नस्ल की गाय और सांड से आरंभ किए गए इस प्रोजेक्ट से आज फार्म पर सेरोगेसी से जन्मी 298 गाय मौजूद हैं। इनसे उच्च गुणवत्ता का दूध प्राप्त किया जा रहा है। 

प्रदेश में तेजी से बढ़ रही है गायों की संख्या

तेजी से बढ़ रही है गायों की संख्या प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम डॉ. एच.बी.एस. भदौरिया ने बताया कि वर्तमान में बुल मदर फार्म पर 386 देशी गाय हैं। देश की सर्वाधिक दूध देने वाली गिर, थारपरकर और साहीवाल नस्ल की इन गायों से उच्च गुणवत्ता का दुग्ध उत्पादन बढऩे के साथ ही गायों की संख्या तेजी से बढ़ रही है 7 मात्र 6 साल पहले गिर नस्ल के जोड़े से 15 गायों के साथ शुरू किए गए प्रयोग में वर्ष 2015-16 में 7 बछड़े और 8 बछियों के जन्म के साथ सफलता का क्रम आज भी जारी है। 

गिर नस्ल की गाय से हो रहा है अधिक दूध का उत्पादन

उन्होंने बताया कि 2 लीटर तक दूध देने वाली गाय में प्रत्यारोपित भू्रण से जन्मी बछिया आज 15 से 20 लीटर दूध प्रतिदिन दे रही है। गिर और साहीवाल नस्ल की गाय 15 से 20 लीटर और थारपरकर नस्ल की गाय 10 से 20 लीटर प्रतिदिन दूध दे रही हैं। एक गाय अपने जीवनकाल में केवल 7 से 8 बार गर्भ धारण करती है। इसके विपरीत सेरोगेसी तकनीक से सर्वोत्तम नस्ल की गाय से एक साल में ही 4-5 भू्रण तैयार किए जा रहे हैं। इससे गुणवत्तापूर्ण अधिक दूध देने वाली देशी गायों की संख्या निरंतर बढ़ रही है और अनुपयोगी गायों की कोख का भी सदुपयोग हो रहा है।

गिर गाय की क्या होती है विशेषताएं (Gir cow)

  • गिर भारत के एक प्रसिद्ध दुग्ध पशु नस्ल है। यह गुजरात राज्य के गिर वन क्षेत्र और महाराष्ट्र तथा राजस्थान के आसपास के जिलों में पाई जाती है। यह गाय अच्छी दुग्ध उत्पादकता के लिए जानी जाती है। इस गाय के दूध में सोने के तत्व पाए जातें हैं जिससे रोगप्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है।
  • इस गाय के शरीर का रंग सफेद, गहरे लाल या चॉकलेट भूरे रंग के धब्बे के साथ या कभी कभी चमकदार लाल रंग में पाया जाता है। कान लम्बे होते हैं और लटकते रहते हैं। इसकी सबसे अनूठी विशेषता उनकी उत्तल माथे हैं जो इसको तेज धूप से बचाते हैं। यह मध्यम से लेकर बड़े आकार में पायी जाती है। 
  • मादा गिर का औसत वजन 385 किलोग्राम तथा ऊंचाई 130 सेंटीमीटर होती है जबकि नर गिर का औसतन वजन 545 किलोग्राम तथा ऊंचाई 135 सेंटीमीटर होती है। इनके शरीर की त्वचा बहुत ही ढीली और लचीली होती है। सींग पीछे की ओर मुड़े रहते हैं।
  • यह गाय अपनी अच्छी रोग प्रतिरोध क्षमता के लिए भी जानी जाती है। यह नियमित रूप से बछड़ा देती है। पहली बार 3 साल की उम्र में बछड़ा देती है
  • गिर गायों में थन अच्छी तरह विकसित होते हैं। समान्यत: गिर नस्ल की गाय प्रतिदिन 12 लीटर से अधिक दूध देती है। इसके दूध में 4.5 प्रतिशत वसा होती है। गिर का एक बियान में औसत दुग्ध उत्पादन 1590 किलोग्राम है। ये पशु विभिन्न जलवायु के लिए अनुकूलित होते हैं और गर्म स्थानों पर भी आसानी से रह सकतें हैं।

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