ग्रीनहाउस के लिए मिलेगी 70 प्रतिशत सब्सिडी, लॉटरी से होगा चयन

जानें, क्या है सरकार की योजना और इससे कैसे मिलता है लाभ

सरकार की ओर से किसानों के लिए कई प्रकार की योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। इन योजनाओं के माध्यम से किसानों को खेती की लागत कम करने और उनकी आय बढ़ाने के प्रयास जारी हैं। इसी क्रम में सरकार की ओर से राष्ट्रीय बागवानी मिशन एवं राष्ट्रीय कृषि विकास योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। इसके तहत किसानों को सुरक्षित खेती अपनाने के उद्देश्य से ग्रीन हाउस निर्माण के लिए 70 प्रतिशत तक सब्सिडी ( Greenhouse subsidy )दी जा रही है। आज हम ट्रैक्टर जंक्शन के माध्यम से आपको ग्रीन हाउस निर्माण के सरकार से मिलने वाली सहायता की जानकारी दे रहे हैं।  

लॉटरी सिस्टम से मिलेगा ग्रीन हाउस के लिए सब्सिडी का लाभ

जैसा कि आपको ऊपर बताया गया है कि सरकार की ओर से राष्ट्रीय बागवानी मिशन एवं राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत किसानों को सब्सिडी का लाभ प्रदान किया जाता है। इसके तहत किसानों को 2 से तीन हजार मीटर तक के क्षेत्र में ग्रीन हाउस निर्माण के लिए सब्सिडी दी जाती है। इस संबंध में राजस्थान के कृषि मंत्री लालचन्द कटारिया ने बताया कि ग्रीन हाउस बनाने के लिए किसानों को 70 फीसदी तक सब्सिडी दी जाती है। किसानों का चयन लॉटरी सिस्टम से किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पहले इस योजना में ‘पहले आओं पहले पाओं’ के आधार पर किसानों को ग्रीन हाउस हेतु सब्सिडी दी जाती थी। लेकिन पिछले वर्ष से योजना के तहत लॉटरी द्वारा चयनित किसानों को सब्सिडी स्वीकृत की जा रही है।

किसानों को श्रेणी वर्गानुसार मिलेगा सब्सिडी का लाभ

उपरोक्त योजनाओं के तहत ग्रीन हाउस निर्माण के लिए किसानों को श्रेणी वर्गानुसार सब्सिडी का लाभ प्रदान किया जाएगा। कृषि मंत्री के मुताबिक ग्रीन हाउस निर्माण के लिए राज्य के सामान्य श्रेणी के किसानों को राष्ट्रीय बागवानी मिशन एवं राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत 50 प्रतिशत सब्सिडी देय है। वहीं लघु, सीमान्त, अनुसूचित जाति एवं जनजाति के किसानों को उपरोक्त 50 प्रतिशत सब्सिडी के अलावा 20  प्रतिशत अतिरिक्त सब्सिडी राज्य योजना से उपलब्ध करवाई जा रही है। इस तरह से लघु, सीमांत, अनुसूचित जाति एवं जनजाति के किसानों को ग्रीन हाउस व पॉली हाउस में 70 सब्सिडी दी जा रही है। वर्ष 2022-23 के बजट में अधिसूचित जनजाति क्षेत्रों के किसानों को 25 प्रतिशत अतिरिक्त सब्सिडी देने का प्रस्ताव किया गया है।

लोहावट में इस किसान को मिलेगा सब्सिडी का लाभ

विधानसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में कटारिया ने बताया कि पिछले तीन वर्ष (2018-19 से 2020-21) में विधानसभा क्षेत्र लोहावट में ग्रीन हाउस निर्माण पर किसी भी किसान को सब्सिडी नहीं दी गई। विधानसभा क्षेत्र लोहावट में गत 3 वर्षों के दौरान 5 पत्रावलियां प्राप्त हुई हैं, जिनमें से एक किसान रावलचन्द पुत्र घेवरचन्द, निवासी-नोसर को शेडनेट हाउस निर्माण की प्रशासनिक स्वीकृति इस वित्तीय वर्ष में जारी की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि शेडनेट हाउस का निर्माण कार्य पूरा होने पर किसान को सब्सिडी से लाभान्वित कर दिया जाएगा। अन्य किसानों का लॉटरी प्रक्रिया में नंबर नहीं आने के कारण अनुदान से लाभान्वित नहीं किया गया है।

क्या होता है ग्रीन हाउस

हरितगृह या ग्रीनहाउस जिसे ग्लासहाउस भी कहा जाता है। यह एक इमारत की तरह होता है जहां पौधे उगाएं जाते हैं। ग्रीनहाउस विभिन्न तरह की आवरण सामग्रियों जैसे कांच या प्लास्टिक की छत और अक्सर कांच या प्लास्टिक की दीवारों के साथ बनी एक संरचना होती है। यह गर्म होता है, क्योंकि सूर्य द्वारा भेजे जा रहे दृश्य सौर विकिरण को पौधों, मिट्टी और भवन के भीतर स्थित अन्य चीजों द्वारा अवशोषित किया जाता है। कांच इस विकिरण के लिए पारदर्शी है। ग्रीनहाउस के भीतर गरम संरचनाएं और पौधे इस ऊर्जा को फिर से अवरक्त में विकीर्ण करते हैं, जिससे कांच आंशिक रूप से अपारदर्शी हो जाता है और वह ऊर्जा ग्रीनहाउस के भीतर कैद हो जाती है। हालांकि, प्रवाह के कारण उष्मा का कुछ नुकसान होता है, लेकिन इससे ग्रीन हाउस के अंदर ऊर्जा (और इस तरह तापमान) में विशुद्ध वृद्धि होती है। गर्म आंतरिक सतहों के ताप से गरम हुई हवा को छत और दीवार द्वारा ईमारत के अंदर बरकरार रखा जाता है। इन संरचनाओं का आकार छोटे से शेड से लेकर बहुत बड़ी इमारतों तक हो सकता हैं।

ग्रीन हाउस निर्माण का उपयोग और लाभ

  • फसलों को खराब मौसम, कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए ग्रीनहाउस या पॉलीहाउस का निर्माण करवाया जाता है। 
  • यह मौसम बारिश, आधी-तूफान और लू से फसलों को बचाता है।
  • ग्रीन हाऊस में पहले से लगी मशीन तापमान को नियंत्रित करती हैं।
  • इसमें पर्याप्त वेंटिलेशन और फॉगर सिस्टम के अलावा कोई पर्यावरण नियंत्रण प्रणाली नहीं देखने को मिलती है। इससे फसलों के उत्पादन में वृद्धि हो जाती है।
  • प्रकाश और तापमान नियंत्रण की वजह से ग्रीनहाउस कृषि के अयोग्य भूमि को कृषि योग्य भूमि में बदल देता है जिससे औसत पर्यावरणों में खाद्य उत्पादन की हालत में सुधार होता है।
  • चूंकि ग्रीनहाउस कुछ फसलों को वर्ष भर उगाने की अनुमति देता है, इसलिए ग्रीनहाउस उच्च अक्षांश पर स्थित देशों में खाद्य आपूर्ति के मामले में तेजी से महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। 
  • ग्रीनहाउसों का उपयोग अक्सर फूल, सब्जियां, फल और तंबाकू के पौधे उगाने में होता है। 
  • अधिकांश ग्रीनहाउस परागसेचन में परागण के लिए भौंरों को पसंद किया जाता है, हालांकि कृत्रिम परागण के साथ-साथ मधुमक्खी की अन्य प्रजातियों का भी उपयोग किया गया है। 
  • साथ ही ग्रीनहाउसों में हाइड्रोपोनिक्स (जल संवर्द्धन विधि) का इस्तेमाल किया जा सकता है, ताकि आंतरिक स्थान का ज्यादा से ज्यादा उपयोग हो सके।
  • सर्दियों के अंत और बसंत ऋतु के प्रारंभ में ग्रीनहाउसों में तम्बाकू के अलावा कई सब्जियों और फूलों को उगाया जाता है और फिर मौसम के गर्म होने के बाद बाहर प्रतिरोपित किया जाता है। 
  • आम तौर पर रोपाई के समय पौधे लगाने वालों को किसान बाजार में छोटे पौधे उपलब्ध होते हैं। कुछ फसलों की विशेष ग्रीनहाउस किस्मों, जैसे टमाटर का उपयोग आमतौर पर वाणिज्यिक उत्पादन के लिए किया जाता है।

ग्रीन हाउस के लिए सब्सिडी हेतु आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज

ग्रीन हाउस और नेटशेड पर सब्सिडी का लाभ प्राप्त करने हेतु आवेदन के लिए किसान भाइयों को जिन दस्तावेजों की आवश्यकता होगी। वे इस प्रकार से हैं-

  • किसान का भू स्वामित्व प्रमाण पत्र
  • स्थाई निवासी प्रमाण पत्र
  • लाभार्थी के पास सिंचाई के साधन के दस्तावेज
  • आधार कार्ड एवं आधार लिंक मोबाइल नंबर
  • बैंक पास बुक की कॉपी
  • आवेदक की पासपोर्ट साइज फोटो
  • क्षेत्र या खेत का नक्शा जहां पॉली हाउस/ ग्रीन हाउस/ शेडनेट हाउस संरचना बनाई जानी है।
  • मिट्टी व पानी की जांच रिपोर्ट
  • लघु, सीमांत, अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र, यदि लागू होता है।

ग्रीन हाउस के लिए सब्सिडी हेतु कहां करें आवेदन

राज्य के उद्यानिकी विभाग की ओर से समय-समय पर ग्रीनहाउस के लिए सब्सिडी का लाभ किसानों को प्रदान किया जाता है। इसके लिए उद्यानिकी विभाग की ओर से आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं। उसमें आवेदन करके किसान सब्सिडी का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। ग्रीन हाउस पर सब्सिडी और आवेदन की अधिक जानकारी के लिए किसान अपने क्षेत्र के उद्यान विभाग से संपर्क कर जानकारी ले सकते र्हैं।


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