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ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई यंत्र से पानी की 50 फीसदी बचत, उत्पादन बढ़ाएं

ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई यंत्र से पानी की 50 फीसदी बचत, उत्पादन बढ़ाएं

30 July, 2020

ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई यंत्र अपनाएं, पानी बचाएं, उत्पादन बढ़ाएं

वर्तमान में देश के अधिकांश राज्यों में जल स्तर बहुत नीचे जा चुका है। इससे हर तरफ पानी की कमी होने लगी है। इसका प्रभाव कृषि के क्षेत्र पर भी पड़ा है। पानी की कमी के कारण कई किसानों ने धान की खेती करना ही छोड़ दिया है और अन्य कम पानी में उगने वाली फसलों की तरफ अपना रूख कर लिया है क्योंकि धान की फसल उगाने में सबसे ज्यादा पानी खर्च होता है जो किसान के लिए बहुत महंगा पड़ रहा है। इसको देखते हुए हरियाणा सरकार ने राज्य के किसानों से धान की खेती नहीं करने का आग्रह तक कर दिया और धान की खेती छोडक़र अन्य फसल उत्पादन करने पर 7 हजार रुपए प्रति एकड़ देने की घोषणा तक की। इसके अलावा अन्य फसलों को उगाने वाले किसानों को अतिरिक्त पानी देने की पेशकश की गई।

 

सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1

 

इन सब बातों को देखकर आज आवश्यकता ऐसे सिंचाई यंत्रों का चुनाव करने की है जो पानी की बचत के साथ ही उत्पादन को भी बढ़ाने में सहायक हो। इसके लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत ड्राप मोर-माइक्रोइरीगेश कार्यक्रम किसानों के लिए बेहद मददगार साबित हो सकता है।

इस योजना के तहत किसानों ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई यंत्रों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इसके लिए सरकार इन यंत्रों को खरीदने के लिए अनुदान भी देती है। ये अनुदान हर राज्य की राज्य सरकारों के हिसाब से अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग हो सकता है। फिलहाल अभी यह योजना उत्तरप्रदेश में चल रही है। इस योजना के तहत ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई यंत्र हेतु लक्ष्य पूरे होने तक आवेदन किए जा सकते हैं।

 

 

क्या प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना

भारत सरकार द्वारा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना लागू की गई है जिसके उपघटक पर ड्रॉप मोर क्राप-माइक्रोइरीगेशन कार्यक्रम के अन्तर्गत ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली को प्रभावी ढंग से विभिन्न फसलों में अपनाने हेतु प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस सिंचाई पद्धति को अपनाकर 40-50 प्रतिशत पानी की बचत के साथ ही 35-40 प्रतिशत उत्पादन में वृद्धि एवं उपज के गुणवत्ता में सुधार संभव है। 

 

ड्रिप सिंचाई यंत्र की उपयोगिता

टपक सिंचाई में पेड़ पौधों को नियमित जरुरी मात्रा में पानी मिलता रहता है ड्रिप सिंचाई विधि से उत्पादकता में 20 से 30 प्रतिशत तक अधिक लाभ मिलता है। इस विधि से 60 से 70 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है। इस विधि से ऊंची-नीची जमीन पर सामान्य रुप से पानी पहुंचता है। इसमें सभी पोषक तत्व सीधे पानी से पौधों के जड़ों तक पहुंचाया जाता है तो अतिरिक्त पोषक तत्व बेकार नहीं जाता, जिससे उत्पादकता में वृद्धि होती है। इस विधि में पानी सीधा जड़ों तक पहुंचाया जाता है और आस-पास की जमीन सूखी रहती है, जिससे खरपतवार भी नहीं पनपते हैं। ड्रिप सिंचाई में जड़ को छोडक़र सभी भाग सूखा रहता है, जिससे खरपतवार नहीं उगते हैं, निराई-गुड़ाई का खर्च भी बच जाता है।

 

फव्वारा ( स्प्रिंकल ) सिंचाई यंत्रों की उपयोगिता

स्प्रिंकल विधि से सिंचाई में पानी को छिडक़ाव के रूप में किया जाता है, जिससे पानी पौधों पर बारिश की बूंदों की तरह पड़ता है। पानी की बचत और उत्पादकता के हिसाब से स्प्रिंकल विधि ज्यादा उपयोगी मानी जाती है। ये सिंचाई तकनीक ज्यादा लाभदायक साबित हो रहा है। चना, सरसों और दलहनी फसलों के लिए ये विधि उपयोगी मानी जाती है। सिंचाई के दौरान ही पानी में दवा मिला दी जाती है, जो पौधे की जड़ में जाती है। ऐसा करने पर पानी की बर्बादी नहीं होती।

विधि से लाभ इस विधि से पानी वर्षा की बूदों की तरह फसलों पर पड़ता है, जिससे खेत में जलभराव नहीं होता है। जिस जगह में खेत ऊंचे-नीचे होते हैं वहां पर सिंचाई कर सकते हैं। इस विधि से सिंचाई करने पर मिट्टी में नमी बनी रहती है और सभी पौधों को एक समान पानी मिलता रहता है। इसमें भी सिंचाई के साथ ही उर्वरक, कीटनाशक आदि को छिडक़ाव हो जाता है। पानी की कमीं वाले क्षेत्रों में विधि लाभदायक साबित हो रही है। 

 

कितना मिलता है अनुदान

अनुदान देता है विभाग टपक व फव्वारा सिंचाई के लिए लघु एवं सीमांत किसान को 90 फीसदी अनुदान सरकार की तरफ से दिया जाता है। इसमें 50 प्रतिशत केंद्रांश व 40 फीसदी राज्यांश शामिल है। दस फीसदी धनराशि किसानों को लगानी होती है। सामान्य किसानों को 75 प्रतिशत अनुदान मिलेगा। 25 प्रतिशत किसानों को अपनी पूंजी लगानी होती है। 

 

किसान अपनी कोई भी पसंदीदा कंपनी से खरीद सकता है यंत्र

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत ड्राप मोर-माइक्रोइरीगेश कार्यक्रम के तहत लघु सीमांत किसानों को 90 प्रतिशत का और सामान्य किसानों को 80 प्रतिशत अनुदान डीबीटी के द्वारा दिया जाता है। चयनित होने के बाद किसान किसी भी अपनी पसंदीदा कंपनी से खरीददारी कर सकता है। स्प्रिंकलर पोर्टेबल और रैन गन के लिए किसान को पहले अपनी जेब से पैसा लगाना होगा। इसके बाद बिल और बाउचर विभाग में सम्मिट करने पर अनुदान की धनराशि किसान के खाते में दी जाती है।

 

प्रशिक्षण, कार्यशाला व गोष्ठी का आयोजन

योजनान्तर्गत लाभार्थी कृषकों के लिए समय-समय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण, प्रदेश से बाहर कृषक भ्रमण एवं मंडल स्तर पर कार्यशाला / गोष्ठी का आयोजन किया जाता है। इस विधा के अंगीकरण हेतु लाभार्थी कृषकों के लिए तकनीकी जानकारी एवं कौशल अभिवृद्धि की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।

 

योजना का कार्यक्षेत्र

उत्तर प्रदेश के सभी जनपद योजना से आच्छादित हैं । प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में अतिदोहित (111 विकास खण्ड) क्रिटिकल (68 विकास खण्ड) सेमी क्रिटिकल (82 विकास खण्ड) के अतिरिक्त पर ड्रॉप मोर क्रोप के अदर इन्टरवेन्शन में निर्मित/जीर्णोद्धार किए गए तालाबों के क्लस्टर सम्मिलित हैं।

 

योजना के लाभार्थी / पात्रता

  • योजना का लाभ सभी वर्ग के कृषकों के लिए अनुमन्य है।
  • योजना का लाभ प्राप्त करने हेतु इच्छुक कृषक के पास स्वयं की भूमि एवं जल स्रोत उपलब्ध हों।
  • योजना का लाभ सहकारी समिति के सदस्यों, सेल्फ हेल्प गु्रप, इनकार्पोरेटेड कम्पनीज, पंचायती राज संस्थाओं, गैर सहकारी संस्थाओं, ट्रस्ट्स, उत्पादक कृषकों के समूह के सदस्यों को भी अनुमन्य।
  • ऐसे लाभार्थियों / संस्थाओं को भी योजना का लाभ अनुमन्य होगा जो संविदा खेती (कान्टै्क्ट फार्मिंग) अथवा न्यूनतम 7 वर्ष के लीज एग्रीमेन्ट की भूमि पर बागवानी/खेती करते हैं।
  • एक लाभार्थी कृषक/संस्था को उसी भू-भाग पर दूसरी बार 7 वर्ष के पश्चात् ही योजना का लाभ अनुमन्य होगा।
  • लाभार्थी कृषक अनुदान के अतिरिक्त अवशेष धनराशि स्वयं के स्रोत से अथवा ऋण प्राप्त कर वहन करने हेतु सक्षम व सहमत हों।

 

योजना के लिए कैसे कराएं पंजीकरण

  • इच्छुक लाभार्थी कृषक किसान पारदर्शी योजना के पोर्टल http://upagriculture.com/ पर अपना पंजीकरण कराकर प्रथम आवक प्रथम पावक के सिंद्धात पर योजना का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
  • पंजीकरण हेतु किसान के पहचान हेतु आधार कार्ड, भूमि की पहचान हेतु खतौनी एवं अनुदान की धनराशि के अन्तरण हेतु बैंक पासबुक के प्रथम पृष्ठ की छाया प्रति अनिवार्य है।

 

निर्माता फर्मों का चयन

  • प्रदेश में ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली स्थापित करने वाली पंजीकृत निर्माता फर्मां में से किसी भी फर्म से कृषक अपनी इच्छानुसार आपूर्ति/स्थापना का कार्य कराने के लिए स्वतंत्र हैं।
  • निर्माता फर्मों अथवा उनके अधीकृत डीलर/डिस्ट्रीब्यूटर द्वारा बी.आई.एस. मानकों के अनुरूप विभिन्न घटकों की आपूर्ति करना अनिवार्य होगा और न्यूनतम 3 वर्ष तक फ्री ऑफ्टर सेल्स सर्विस की सुविधा की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।

 

भौतिक सत्यापन के बाद होगा अनुदान का भुगतान

निर्माता फर्मां के स्वयं मूल्य प्रणाली के आधार पर भारत सरकार द्वारा निर्धारित इकाई लागत के सापेक्ष जनपद स्तरीय समिति द्वारा भौतिक सत्यापन के उपरान्त अनुदान की धनराशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांस्फर (डी.वी.टी.) द्वारा सीधे लाभार्थी के खाते में अन्तरित की जाएगी।

विशेष - हालांकि हमने आपको योजना के संबंध में पूर्ण जानकारी देने का प्रयास किया है। यदि आप इस योजना के संबंध में ओर अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो http://upagriculture.com/ पर जाकर प्राप्त कर सकते हैं। 

 

अगर आप अपनी  कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण,  दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।  

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कोरोना संक्रमण के दौरान सरकार ने दी किसानों को राहत

कोरोना संक्रमण के दौरान सरकार ने दी किसानों को राहत

पूरे देश में लागू है यह योजना, 11 दिसंबर 2020 तक कर सकते हैं आवेदन कोरोना संक्रमण के चलते कर्ई जगह पर लगे लॉकडाउन को देखते हुए सरकार ने किसानों की मदद करने के उद्देश्य से ऑपरेशन ग्रीन स्कीम का दायरा बढ़ा दिया है। अब इस स्कीम के तहत किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए आलू, प्याज तथा टमाटर के साथ ही अब विभिन्न प्रकार के फलों और सब्जियों को भी इस योजना में शामिल किया गया है। इस योजना के तहत किसान को अधिक उत्पादन वाले स्थान से कम उत्पादन वाले स्थान पर परिवहन हेतु 50 प्रतिशत परिवहन अनुदान तथा भंडारण शीतगृह में योग्य फसलों के भंडारण हेतु 50 प्रतिशत अनुदान दिए जाने का प्रस्ताव किया गया है। इसके तहत किसानों को इस स्कीम में शामिल की गए फलों व सब्जियों के भंडारण व परिवहन के लिए अनुदान राशि दी जाएगी। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 क्या है ऑपरेशन ग्रीन स्कीम कोरोना संक्रमण के चलते उद्यानिकी की खेती करने वाले किसानों को आर्थिक नुकसानी से बचाने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा आपरेशन ग्रीन स्कीम के दायरे को बढ़ा जाने की घोषणा की गई है। इस स्कीम में आलू, प्याज तथा टमाटर के साथ अब विभिन्न प्रकार के फलों और सब्जियों को भी शामिल किए जाने की घोषणा आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तीसरे भाग में की गई है। इसके तहत अधिक उत्पादन वाले स्थान से कम उत्पादन वाले स्थान पर परिवहन हेतु 50 प्रतिशत परिवहन अनुदान तथा भंडारण शीतगृह में योग्य फसलों के भंडारण हेतु 50 प्रतिशत अनुदान का प्रस्ताव किया गया है। आपरेशन ग्रीन स्कीम मुख्य रूप से टमाटर, प्याज और आलू के सामूहिक विकास से संबंधित है जिसके दो प्रमुख घटकों में पहला मूल्य का स्थिरीकरण एवं संतुलन (कम अवधि) एवं दूसरा सामूहिक शृंखला का विकास करना (लंबी अवधि) है। कोरोना महामारी की वजह से यह श्रृंखला प्रभावित हुई है और किसान अपनी उपज बाजार में नहीं बेच पा रहे हैं। भारत शासन द्वारा जारी नए दिशा-निर्देश से लॉक डाउन की वजह से बाजार में सब्जियों एवं फलों की कम दर मे बिक्री और पोस्ट हार्वेस्ट में हुई हानि की भरपाई हो सकेगी। आपरेशन ग्रीन स्कीम में शामिल सब्जियां और फल आपरेशन ग्रीन स्कीम के अंतर्गत खाद्य प्रसंस्करण उधोग मंत्रालय के द्वारा योजना को टमाटर, प्याज और आलू से बढ़ाकर अब इसमें फलों में आम, केला, अमरुद, किवी, लीची, पपीता संतरा, अनानास, अनार एवं कटहल तथा सब्जियों में राजमा, करेला, बैंगन शिमला मिर्च, गाजर, फूलगोभी, भिंडी को शामिल किया गया है। इस योजना में इसके अलावा अन्य फल एवं सब्जियों को भविष्य में कृषि मंत्रालय की अनुसंशा पर जोड़ा जा सकता है। योजना में शामिल होने की अंतिम तिथि यह योजना इस वर्ष संपूर्ण देश लागू है योजना के लिए पंजीयन किया जा रहा है जिसे देश के सभी राज्यों के किसान आवेदन कर सकते हैं। यह योजना 11 दिसंबर 2020 तक प्रभावी होगी आवश्यकता होने पर केंद्र शासन द्वारा अवधि बढ़ाई जा सकती है। योजना में आवदेन के लिए पात्रता ऑपरेशन ग्रीन स्कीम के अंतर्गत खाद्य प्रसंस्करण, किसान उत्पादक संगठन एवं किसान उत्पादक संस्था, सहकारी समिति, व्यक्तिगत कृषक, अनुज्ञप्ति धारक प्रतिनिधि, निर्यातक राज्य विपणन, रिटेल आदि जो फलों एवं सब्जियों के विपणन एवं प्रसंस्करण कार्य में लगे हुए हैं, उन्हें इस योजना के क्रियान्वयन हेतु पात्र संस्था घोषित किया गया है। पंजीयन के लिए आवश्यक दस्तावेज आवेदक का पहचान पत्र- आधार कार्ड आवेदक के पते का फू्रफ आवेदक का पेन कार्ड आवेदक का मोबाइल नंबर कैसे करें योजना के लिए आवेदन प्याज, आलू, टमाटर आदि उद्यानिकी फसलों के भंडारण हेतु आवेदन खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के द्वारा इस योजना का क्रियान्वन किया जा रहा है। योजना में देश के सभी राज्यों को शामिल किया गया है। आत्मनिर्भर भारत के अन्तर्गत चलाया जा रहा ऑपरेशन ग्रीन स्कीम के लिए ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था की गई है। इच्छुक किसान सीधे खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की वेबसाइट https://sampada-mofpi.gov.in/OPGS_Subsidy/SubsidyReg.aspx से आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया ऑपरेशन ग्रीन में आनलाइन आवेदन करने के लिए आपको इसकी बेवसाइट https://sampada-mofpi.gov.in/OPGS_Subsidy/SubsidyReg.aspx पर जाना होगा। आपके सामने खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की बेवसाइट खुल जाएगी। इसमें आपको सब्सिडी के लिए फार्म दिखाई देगा। इस फार्म में पूछी गई सभी जानकारी को सही भरकर उसे सब्मिट कर दें। ऑनलाइन आवेदन में अगर कोई समस्या आ रही हो तो इसके लिए इसकी बेवसाइट पर दिए गए फोन नंबर 011-26406557, 26406545, 8851833175 पर कार्यालय समय सुबह 10 बजे से शाम को 5.30 बजे तक संपर्क किया जा सकता है। विशेष- हालांकि हमने यहां आपको आपरेशन ग्रीन स्कीम के बारे में पूर्ण जानकारी देने का प्रयास किया है। यदि आप इस योजना के संबंध में और अधिक जानना चाहते हैं तो इसकी बेवसाइट https://sampada-mofpi.gov.in/OPGS_Subsidy/SubsidyReg.aspx पर जाकर जानकारी ले सकते हैं। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

पराली जलाने की समस्या से निबटने के लिए सरकार करेगी किसानों की मदद

पराली जलाने की समस्या से निबटने के लिए सरकार करेगी किसानों की मदद

क्या है पराली और इसका कैसे हो सकता है उपयोग हरियाणा और पंजाब में पराली जलाने की समस्या काफी पुरानी है। यहां के किसानों द्वारा पराली जलाने के बाद उठे धुंए से दिल्ली में भी पर्यावरण को नुकसान होने का अंदेशा जताया गया था। इस पर जमकर सियासत भी हुई थी। जिस पर यहां के किसानों ने अपनी मजबूरी भी बयां की। वहीं सरकार ने पराली जलाने वाले किसानों पर के प्रति कड़ा रूख भी अपनाया और कृषि विभाग की ओर से किसानों को नोटिस जारी कर जुर्माना लगाया गया और जुर्माना नहीं भरने वाले किसानों पर एफआईआर दर्ज कराई गई। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 इसके बाद पराली जलाने का सिलसिला कम जरूर हुआ पर बिलकुल खत्म नहीं। आखिरकार सरकार ने इस समस्या का हल किसानों से मिलकर निकालने की पहल की। इसी क्रम में हरियाणा सरकार द्वारा पराली जलाने की समस्या से निबटने के लिए किसानों की मदद करने का निश्चय किया है और इसके लिए फसल अवशेष प्रबंधन योजना की शुरुआत की गई। इस योजना के तहत किसानों की मदद के लिए हरियाणा राज्य सरकार ने 1,304.95 करोड़ रुपए जारी किए हैं। क्या है पराली पराली धान की फसल के कटने बाद बचा बाकी हिस्सा होता है जिसकी जड़ें धरती में होती हैं। किसान पकने के बाद फसल का ऊपरी हिस्सा काट लेते हैं क्योंकि वही काम का होता है बाकी अवशेष होते हैं जो किसान के लिए बेकार होते हैं, उन्हें अगली फसल बोने के लिए खेत खाली करने होते हैं तो सूखी पराली को आग लगा दी जाती है। पराली ज्यादा होने की वजह यह भी है कि किसान अपना समय बचाने के लिए आजकल मशीनों से धान की कटाई करवाते है। मशीनें धान का सिर्फ उपरी हिस्सा काटती हैं और और नीचे का हिस्सा भी पहले से ज्यादा बचता है। इसी बचे हुए हिस्से के अवशेष को हरियाणा व पंजाब में पराली कहा जाता है। पराली जलाने पर क्या है जुर्माने का प्रावधान एनजीटी के आदेशानुसार दो एकड़ में फसलों के अवशेष जलाने पर 2500 हजार रुपए, दो से पांच एकड़ भूमि तक 5 हजार रुपए, 5 एकड़ से अधिक जमीन पर धान के अवशेष जलाने पर 15 हजार रुपये जुर्माना किए जाने का प्रावधान है। इसके लिए जिम्मेदारी सरकार ने जिला राजस्व अधिकारी की तय की गई है। अवशेष प्रबंधन हेतु सरकारी की योजनाओं के लिए दिया गया बजट हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने राज्य में फसल अवशेष प्रबंधन के लिए 1,304.95 करोड़ रुपए की एक व्यापक योजना स्वीकृति प्रदान की है। इस योजना का उद्देश्य राज्य में फसल अवशेषों को जलाने से रोकना है। केंद्र सरकार द्वारा इस वर्ष इस योजना के तहत राज्य को 170 करोड़ रुपए मुहैया करवाए गए हैं। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री संजीव कौशल ने बताया कि राज्य सरकार ने फसल अवशेष के इन-सीटू प्रबंधन के लिए कृषि यंत्रीकरण को प्रोत्साहन योजना के तहत केंद्र सरकार को 639.10 करोड़ रुपए की वार्षिक योजना प्रस्तुत की है। पराली प्रबंधन के लिए सरकार किसानों को देगी 1,000 रुपए प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि पराली जलाने की समस्या से निबटने के लिए हरियाणा राज्य सरकार राज्य के किसानों को प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दे रही है जिसे इस वर्ष भी जारी रखा गया है। इस योजना को और भी व्यापक रूप से बढ़ाया जा रहा है। इसके लिए केंद्र सरकार के तरफ से हरियाणा राज्य सरकार को वित्तीय मदद भी दी गई है। साथ ही फसल अवशेष जलाने से रोकने के लिए इन-सीटू योजना के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के कृषि यंत्र सब्सिडी पर दिए जा रहे हैं जिसे किसान आसानी से ऑनलाइन आवेदन कर के प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा सर्वोच न्यायालय के निर्देशों के तहत गैर-बासमती उत्पादों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए सात दिनों के भीतर 1000 रुपए प्रति क्विंटल की दर से प्रोत्साहन भी दिया जा रहा है। राज्य सरकार ने पर्याप्त मशीनों और परिचालन लागत के रूप में 1,000 रुपए प्रति एकड़ प्रदान करके, गैर-बासमती तथा बासमती की मुच्छल किस्म उगने वाले छोटे और सीमांत किसानों की मदद की है। इन दोनों उद्देश्यों के लिए राज्य सरकार द्वारा राज्य बजट में पहले ही 453 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना सहित सरकार द्वारा किए गए अन्य उपाय योजना के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए श्री कौशल ने बताया कि राज्य सरकार फसल अवशेष प्रबंधन के लिए उपकरण वितरित करने, कस्टम हायरिंग सेंटर (सीएचसी) स्थापित करने और कृषि एवं किसान कल्याण निदेशालय में राज्य मुख्यालय पर समर्पित नियंत्रण स्थापित करने सहित धान की पुआल के प्रबंधन के लिए हर संभव उपाय कर रही है। हरियाणा सरकार द्वारा इन-सीटू प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए स्ट्रा बेलर इकाइयों की स्थापना को भी प्रोत्साहित किया गया है। इस पहल के तहत, 5 नवंबर 2019 तक 64 ऐसी इकाइयां जबकि 6 नंबर से 11 दिसंबर के बीच 131 इकाइयां स्थापित की गई। राज्य सरकार ने इन इकाइयों की खरीद के लिए किसानों को 155 परमिट भी जारी किए हैं। क्या और कैसे हो सकता हैं पराली का उपयोग पर्यावरणविदों के अनुसार पराली को ट्रैक्टर में छोटी मशीन (रपट) द्वारा काटकर खेत में उसी रपट द्वारा बिखेरा जा सकता है। इससे आगामी फसल को प्राकृतिक खाद मिल जाएगी और प्राकृतिक जीवाणु व लाभकारी कीट जमीन की उर्वरा शक्ति को बढ़ाने के लिए पराली के अवशेषों में ही पल जाएंगे। पराली को मशीनों से उखाडक़र एक जगह 2-3 फ़ीट का खड्डा खोदकर उसमें जमा कर सकते हैं। उसकी एक फुट की तह बनाकर उस पर पानी में घुले हुए गुड़, चीनी, यूरिया,गाय-भैंस का गोबर इत्यादि का घोल छिडक़ दें और थोड़ी मिट्टी डालकर हर 1-2 फुट पर इसे दोहरा दें तो एनारोबिक बैक्टीरिया पराली को गलाने में सहायक हो जाएं, अगर केंचुए भी खड्ड में छोड़ सकें तो और भी अच्छा है। आखिरी तह को मिट्टी के घोल में तर पॉलिथीन से ढक देना चाहिए। इतना ही नहीं पराली का प्रयोग चारा और गत्ता बनाने के अलावा बिजली बनाने के लिए भी हो सकता है। गैसीफायर द्वारा गैस बनाकर ईंधन के रूप में मिथेन गैस मिल सकती है। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

राममंदिर भूमि पूजन से पहले पीएम मोदी ने लगाया पारिजात का पौधा

राममंदिर भूमि पूजन से पहले पीएम मोदी ने लगाया पारिजात का पौधा

कई रोगों में दवा के रूप में प्रयोग में लाया जाता है पारिजात 5 अगस्त 2020 का ऐतिहासिक दिन जिसका सवा सौ करोड़ देशवासियों को बरसों से इंतजार था। मौका था अयोध्या में भूमि पूजन का। इस मौके पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में श्री राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन से पूर्व पारिजात के पौधे को लगा देश की खुशीहाली का संदेश दिया। इसके साथ ही उन्होंने पौधे को पानी भी दिया और वहां उपस्थित लोगों से बात की। इसके बाद वे आगे के अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम को संपन्न कराने के लिए बढ़ गए। आप को बता दें पारिजात के पौधे में कई चमत्कारी गुण होते हैं। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 इस पौधे का आध्यात्मिक महत्व होने के साथ ही इसका औषधीय महत्व भी है। इसे रात में खिलने वाली चमेली भी कहते हैं। ऐसा माना जाता है कि ये पौधा बड़ा चमत्कारी होता है। इसके छूने मात्र से ही तनाव व थकावट दूर हो जाती है। इस बारे में महाभारत काल से जुड़ी एक कहानी भी आती है जिसमें इस बात का वर्णन मिलता है। उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा इसे संरक्षित रखने के प्रयास किए जा रहे हैं, क्योंकि ये पौधा विलुप्त होने के कगार पर है। उत्तरप्रदेश के बांराबंकी के एक गांव किंतूर में इसका पेड़ है। अन्य जगहों पर इसकी अन्य उप प्रजातियों के पौधे देखे जा सकते हैं। क्या है पारिजात पारिजात का दूसरा नाम हरसिंगार है। हरसिंगार का जिक्र कई प्राचीन ग्रन्थों में मिलता है। इसके फूल अत्यधिक सुगन्धित, छोटे पंखुडिय़ों वाले और सफेद रंग के होते हैं। फूल के बीच में चमकीला नारंगी रंग होता है। हरसिंगार का पौधा झाड़ीदार होता है। पारिजात का वानस्पतिक नाम निक्टैन्थिस् आर्बोर-ट्रिस्टिस् है और यह ओलिएसी कुल से है। पारिजात के पौधे को इन नामों से भी जाना जाता है- हरसिंगार, पारिजात, कूरी, सिहारु, सेओली, ट्री ऑफ सैडनेस, मस्क फ्लॉवर, कोरल जैसमिन, नाईट जैसमिन, गंगा सेयोली, गुलेजाफारी, पारिजातक, पारडिक, जयापार्वती आदि। भारत में कहां - कहां पाया जाता है पारिजात पारिजात का पौधा असम, बंगाल, मध्य प्रदेश, राजस्थान एवं गुजरात आदि राज्यों में पाया जाता है। यह 1500 मीटर की ऊंचाई तक की जाता है। भारत के उपहिमालयी क्षेत्रों में 300-1000 मीटर की ऊंचाई पर पारिजात का पौधा मिलता है। महाभारतकाल से जुड़ी पौराणिक कथा में पारिजात का वर्णन उत्तरप्रदेश के बाराबंकी शहर से 38 किलोमीटर दूर किंतूर गांव में पाए जाने वाले इस पेड़ का आध्यात्मिक महत्व है। इसके संबंध में एक पौराणिक कथा भी प्रचलित है। उसके अनुसार जब माता कुंती, पांडवों के साथ अज्ञातवास में थीं। तब इसी गांव में माता कुंती इस पेड़ के पुष्प लेकर शिव को अर्पित कर पूजा किया करती थीं। यह पेड़ अपने आप में विशाल है। माना जाता है कि इस पेड़ को छूने से सारी थकान उतर जाती है और व्यक्ति अपने आप को स्फूर्तिवान महसूस करता है। कुंती के नाम से ही इस गांव का किंतूर पड़ा था। माता लक्ष्मी को प्रिय है ये पौधा इस पेड़ के पुष्प माता लक्ष्मी को प्रिय है माना जाता है कि इसके फूलों से लक्ष्मी का पूजन करने से लक्ष्मी प्रसन्न होती है। वहीं घर के बगीचे में इसका पौधा लगाने से लक्ष्मी का वास रहता है। पारिजात का औषधीय महत्व पारिजात या हरसिंगार का आध्यात्मिक महत्व जितना है उससे कई ज्यादा इसका औषधीय महत्व है। इसका कई रोगों में दवा के रूप में इसका प्रयोग किया जाता है। इनमें से प्रमुख प्रयोग इस प्रकार है- रूसी (डैंड्रफ) की समस्या : रूसी या डैंड्रफ होने पर हरसिंगार के बीज को पीसकर पेस्ट बनाकर सिर पर लगाने से रूसी की समस्या कुछ ही सप्ताह में खत्म हो जाती है। गले के रोग में लाभकारी : यदि आपको गले से संबंधित रोग है तो आप हरसिंगार की जड़ को चबाएं। इससे गले विकारों में आराम मिलता है। खांसी दूर करने में सहायक : परिजात की छाल का चूर्ण बनाकर उसका सेवन करने से खांसी में आराम मिलता है। नाक, कान से खून बहना : हरसिंगार के पौधे की जड़ को मुंह में रखकर चबाने से नाक, कान, कंठ आदि से निकलने वाला खून बंद हो जाता है। पेट के कीड़े की समस्या : हरसिंगार के पेड़ से ताजे पत्ते का रस चीनी के साथ सेवन करने से पेट के कीड़े खत्म हो जाते हैं। बार-बार पेशाब करने की समस्या : पारिजात के पेड़ के तने के पत्ते, जड़, और फूल का काढ़ा सेवन करने से बार-बार पेशाब करने की परेशानी खत्म होती है। त्वचा पर होने वाले फोड़े-फुन्सी- पारिजात के बीज का पेस्ट बनाकर की सिर की त्वचा पर होने वाली फोड़े-फुन्सी या अन्य सामान्य घाव पर लगाने से ये ठीक हो जाते हैं। डायबिटीज में फायदेमंद : पारिजात के पत्ते का काढ़ा बनाकर सेवन करने से डायबिटीज में लाभ होता है। गठिया व जोड़ों के दर्द में आराम : पारिजात की जड़ का काढ़ा बनाएं बनाकर सेवन करने से गठिया में फायदा मिलता है। हरसिंगार के पत्ते को पीसकर, गुनगुना करके लेप बना बनाकर जोड़ों के दर्द पर लेप करने से बहुत फायदा होता है। इसके अलावा पारिजात के पत्तों का काढ़ा बनाकर इससे सेकने से भी जोड़ों का दर्द और गठिया आदि में लाभ होता है। दाद की समस्या : पारिजात के पत्तों को घिसकर रस निकाल दाद वाले स्थान पर लगाने से दाद ठीक हो जाता है। इसके अलावा पारिजात के पत्ते का काढ़ा एवं पेस्ट बना कर प्रयोग करने से दाद, खुजली, घाव, तथा कुष्ठ रोग आदि त्वचा विकारों में लाभ होता है। विशेष दवा के रूप में इसका प्रयोग करने से पहले किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह अवश्य लें ताकि निर्धारित मात्रा में इसका प्रयोग कर लाभ पूर्ण लाभ प्राप्त किया जा सके। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

फसल नुकसान की भरपाई के लिए किसानों को मिलेगा 30.39 करोड़ का मुआवजा

फसल नुकसान की भरपाई के लिए किसानों को मिलेगा 30.39 करोड़ का मुआवजा

इन जिलों के किसानों को मिलेगा मुआवजा बेमौसम बारिश एवं ओलावृष्टि से किसानों की फसलों हुए नुकसान की भरपाई के लिए सरकार ने 30.39 करोड़ रुपए की मुआवजा राशि जारी की है। यह राशि वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए जारी की गई है। हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण तथा पशुपालन मंत्री जेपी दलाल ने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नेतृत्व में राज्य सरकार ने किसान हित में हर फैसला तत्काल लिया है जिसके तहत किसानों को फसल नुकसानी की भरपाई के लिए 30.39 करोड़ रुपए की मुआवजा राशि जारी की गई है। उन्होंने कहा कि अक्टूबर 2019-20 की खरीफ और रबी फसलों को तेज बारिश व ओलावृष्टि में हुए खराबे हेतु मुआवजे के लिए 30 करोड़ 39 लाख 75 हजार रुपए से अधिक राशि जारी की है। असमय बारिश एवं ओलावृष्टि की वजह से किसानों की गेहूं, सरसों आदि की फसलें प्रभावित हुई थी। राज्य सरकार द्वारा प्रभावित फसलों की स्पेशल गिरदावरी करवाई गई थी जिसके आधार पर यह मुआवजा राशि जारी की गई है। इन जिलों के किसानों को मिलेगा मुआवजा मंत्री जेपी दलाल ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इस राशि में भिवानी जिले के किसानों के लिए 14 करोड़ 66 लाख 40 हजार रुपए, रोहतक जिला के किसानों के लिए 7 करोड़ 28 लाख 49 हजार, महेंद्रगढ़ जिला के लिए 7 करोड़ 56 लाख 18 हजार तथा यमुनानगर जिले के किसानों के लिए 88 लाख 67 हजार रुपए की मुआवजा राशि दिया जाना शामिल है। मंत्री दलाल ने बताया कि खराबे के कारण भिवानी जिला के उपमंडल लोहारू एवं तोशाम के अंतर्गत आने वाले विभिन्न गांवों के किसानों की 6235 एकड़ में खड़ी फसलें प्रभावित हुई थी। उन गांवों में कासनी कला, कासनी खुर्द, सुरपुरा कला और सुरपुरा खुर्द, सिधनवां, सेरला, गोपालवास, हरियावास व मंढोली कला गांव शामिल हैं। कई राज्यों में पीएम फसल बीमा योजना के तहत किया जा रहा है मुआवजे का वितरण कई राज्यों में जिन किसानों ने पीएम फसल बीमा योजना में अपनी फसल का बीमा करवा रखा था उन किसानों को भी बीमा राशि का वितरण किया जा रहा है। पीएम फसल बीमा योजना के तहत किसानों को बहुत ही कम प्रीमियम पर फसल सुरक्षा प्रदान की जाती है। जिन किसानों ने किसान क्रेडिट कार्ड से फसली कर्ज लिया हुआ है, उनकी फसल खुद ही बीमा के दायरे में आ जाती है। बाकि किसान अपनी मर्जी के मुताबिक फसल का बीमा करा सकते है। अब सरकार ने फसलों का बीमा स्वैच्छिक कर दिया है। किसान अपनी मर्जी से बीमा करा सकता है। फसल नुकसान की स्थिति में इस योजना के तहत सत्यापन के बाद किसान को बीमा राशि का भुगतान किया जाता है। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

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