प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 2020 ( PMFBY ) में बड़े बदलाव - जानें लाभ

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 2020 में नए प्रावधान

केंद्रीय मंत्रीमंडल ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) में बड़े बदलावों को मंजूरी दी है। इसके तहत अब किसान खुद तय कर पाएंगे कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ लें या नहीं। अब सीधे किसानों के केसीसी से पैसा नहीं कटेगा। सरकार ने इस योजना को अब स्वैच्छिक बना दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनवरी 2016 में इस योजना की शुरुआत की थी तथा इस बारे में कुछ शिकायतों के बाद केबिनेट की बैठक में यह निर्णय लिया गया।

 

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में संशोधन से किसानों को होगा फायदा

इस फसल बीमा योजना के तहत ऋण लेने वाले किसानों के लिए यह बीमा कवर लेना अनिवार्य था। मौजूदा समय में कुल किसानों में से 58 फीसदी किसान ऋण लेते हैं। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की उपलब्धियों के बारे में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि बीमा में 30 फीसदी खेती योग्य क्षेत्र को शामिल किया गया है। तोमर ने बताया कि फसल बीमा योजना को लेकर मिल रही लगातार शिकायतों के बाद सरकार ने ये कदम उठाए हैं। केंद्रीय केबिनेट ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और मौसम आधारित फसल बीमा योजना में कई संशोधन करके इसे किसानों के लिए फायदेमंद बनाने की कोशिश की है। तोमर ने बताया कि 60 हजार करोड़ रुपए के बीमा दावे को स्वीकृति दे दी गई है जबकि 13 हजार करोड़ रुपए का प्रीमियम एकत्रित किया गया है। 

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 2020 में नए प्रावधान

  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में ये बदलाव खरीफ-2020 से लागू होंगे।
  • किसान खुद तय कर पाएंगे कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का हिस्सा बनना है या नहीं।
  • अभी तक बीमा कंपनियां उन किसानों के खाते से प्रीमियम का पैसा पहले ही काट लेती थीं, जिन्होंने या तो फसल ऋण लिया होता था या किसान क्रेडिट कार्ड से कर्ज लेते थे।
  • ऐसे में किसानों को पता ही नहीं चल पाता था कि उनकी फसल का बीमा हो चुका है और उसका प्रीमियम बैंक से पहले ही बीमा कंपनी के पास जमा हो चुका है।
  • नए संशोधनों के बाद बीमा कंपनियों को व्यवसाय का आवंटन तीन साल तक के लिए किया जाएगा।
  • जिन जिलों में 50 प्रतिशत से अधिक सिंचित क्षेत्र होगा उस पूरे जिले को सिंचित माना जाएगा।
  • राज्यों और केंद्र की हिस्सेदारी में बदलाव किए गए हैं। इसके तहत पूर्वाेत्तर राज्यों में योजना में आने वाले खर्च का 90 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार वहन करेगी। जबकि राज्यों को केवल 10 फीसदी भार वहन करना होगा। देश के बाकि राज्यों में यह योजना 50:50 फीसदी के आधार पर लागू की जाएगी। 
  • योजना में पहले प्रशासनिक खर्चे का प्रावधान नहीं था, जिसे अब जोड़ दिया गया है। इसके तहत प्रशासनिक खर्च के लिए तीन फीसदी का प्रावधान किया गया है।
  • किसानों को उनकी फसल के नुकसान का आकलन करने वाली प्रणाली को स्मार्ट किया जाएगा। इसमें आधुनिक टेक्नोलॉजी का प्रयोग होगा।
  • अब योजना में राज्यों को सीजन के अनुसार 31 मार्च और 30 सितंबर तक अपना हिस्सा जमा कराना होगा। ऐसा नहीं करने वाले राज्य इसका फायदा नहीं ले सकेंगे।
  • इसके साथ ही अन्य फसलों के लिए जिनका एमएसपी (समर्थन मूल्य) घोषित नहीं किया गया है। उनके गेट (फसल की लागत) पर विचार किया जाएगा। 
  • राज्यों को अतिरिक्त जोखिम कवर जैसे बुवाई, स्थानीय आपदा, मध्य मौसम प्रतिकूलता और फसल के बाद नुकसान होने पर किसी भी विकल्प का चयन करने की ढील दी जाएगी।
  • इसके अलावा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत विशिष्ट जोखिम जैसे ओला से फसल को नुकसान होने की भी भरपाई कर सकते हैं।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में प्रीमियम दर

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को खरीफ की फसल के लिए 2 फीसदी प्रीमियम और रबी की फसल के लिए 1.5 फीसदी प्रीमियम का भुगतान करना पड़ता है। इसके अलावा यह योजना वाणिज्यिक और बागवानी फसलों के लिए भी बीमा सुरक्षा प्रदान करती है। बागवानी फसलों के लिए किसानों को पांच फीसदी प्रीमियम का भुगतान करना पड़ता है। फसल की बुवाई के 10 दिनों के अंदर किसान को पीएमएफबीआई का फार्म भरना जरूरी है।


प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का उद्देश्य/प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पात्रता

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का उद्देश्य किसी प्राकृतिक आपदा की स्थिति में किसानों को फसल के नुकसान की भरपाई करना है। यह स्कीम जलवायु परिवर्तन और अन्य जोखिम से खेती को नुकसान से बचाने का एक बड़ा माध्यम है। योजना के तहत कर्ज लेकर खेती करने वाले किसान को कम दर पर बीमा कवर दिया जाता है, जिन किसानों ने खेती के लिए ऋण नहीं लिया है वे भी इसका लाभ ले सकते हैं।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के ऑनलाइन और ऑफलाइन फार्म

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के लिए ऑफलाइन (बैंक जाकर) और दूसरा ऑनलाइन, दोनों तरीके से फॉर्म लिए जा सकते हैं। फॉर्म ऑनलाइन भरने के लिए आप इस लिंक पर जा सकते हैं - http://pmfby.gov.in/


अगर आप फॉर्म ऑफलाइन लेना चाहते हैं तो नजदीकी बैंक की शाखा में जाकर फसल बीमा योजना (PMFBY) का फॉर्म भर सकते हैं।

इसके अलावा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लिस्ट/प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना क्लेम/प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ/प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना ऑनलाइन फॉर्म/प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना फॉर्म पीडीएफ/प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना ऑनलाइन फॉर्म की जानकारी http://pmfby.gov.in/ से ले सकते हैं

 

केंद्रीय केबिनेट बैठक 2020 के प्रमुख निर्णय

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 19 फरवरी 2020 को आयोजित केंद्रीय केबिनेट की बैठक में कई महत्वपूर्ण निणर्य लिए गए। इसमें प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को स्वैच्छिक बनाने के साथ ही देश में 10 हजार कृषि उत्पाद संगठन (एफपीओ) बनाने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा डेयरी क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए 4558 करोड़ रुपए की योजना को मंजूरी दी।

देश में 10 हजार एफपीओ का गठन करेगी सरकार

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) का प्रयोग देश में बहुत सफल रहा है। एफपीओ के विनिर्माण और संवर्धन स्कीम के तहत 6865 करोड़ रुपए के कुल बजटीय प्रावधान के साथ 10 हजार नए एफपीओ बनाए जाएंगे। 

 

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डेयरी क्षेत्र के लिए 4558 करोड़ रुपए की योजना मंजूर

केंद्रीय केबिनेट की बैठक में सरकार ने डेयरी क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए 4 हजार 558 करोड़ रुपए की योजना को मंजूरी दी। इससे करीब 95 लाख किसानों को फायदा होगा। बैठक के बाद सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि इससे देश में दुग्ध क्रांति में नए आयाम जुड़ेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि मंत्रिमंडल ने ब्याज सहायता योजना में लाभ को दो फीसदी से बढ़ाकर ढाई फीसदी करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। जावड़ेकर ने कहा कि सरकार ने यह फैसला किसान समुदाय के हित के लिए किए हैं।

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