सरसों के भाव 6500 रुपए प्रति क्विंटल!, अब आगे क्या?

सरसों के भाव 6500 रुपए प्रति क्विंटल!, अब आगे क्या?

Posted On - 27 Oct 2020

जानिएं त्योहारी मांग के कारण सरसों सहित अन्य तिलहनों में आई कितनी तेजी

सरसों में तेजी रोजाना नए रिकॉर्ड बना रही है। पिछले साल 2019 में 25 अक्टूबर के आसपास सरसों के भाव 4500 रुपए प्रति क्विंटल था। इस बार अक्टूबर 2020 में सरसों के भाव जयपुर मंडी में 6000-6100 के आसपास चल रहे हैं। आगरा की कई बड़ी तेल कंपनियों द्वारा सरसों 6500 रुपए प्रति क्विंटल के भाव से खरीदने के समाचार भी हैं। सरसों के अलावा अन्य तिलहनों में भी तेजी बनी हुई। त्योहारी मांग के कारण सरसों का तेल 120 से 130 रुपए किलो बिक रहा है। अन्य तेलों के भावों में भी तेजी है। सरसों की नई फसल आने में अभी 5-6 महीने का समय है। इस बार सरसों उत्पादक क्षेत्रों में बारिश भी कम हुई है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार सरसों का स्टॉक कम है इसलिए भविष्य में सरसों में मंदी की संभावना कम है। सरसों सहित अन्य तिलहनों के भावों में कमी सरकार की नीतियों पर निर्भर करेगा।

 

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सरसों के भाव

त्योहारी मौसम में विशेषकर उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में सरसों की मांग वृद्धि होने से भी सरसों दाना सहित इसके तेल-तिलहन कीमतों में सुधार आया। जम्मू-कश्मीर में सरसों दाना (तिलहन फसल) की मांग में काफी वृद्धि हुई है, जहां की मंडियों में हरियाणा से खरीदी गई सरसों 6250 रुपये क्विन्टल के भाव से बिक रही है। जयपुर की हाजिर मंडी में सरसों दाना का हाजिर भाव बढक़र 6000-6100 रुपए क्विंटल हो गया है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार नफैड को अब सोच-समझ के साथ सीमित मात्रा में सरसों की बिकवाली करनी होगी, क्योंकि अगली पैदावार आने में अभी पांच-छह महीने का समय है और त्योहारों के साथ साथ सर्दियों की मांग और भी बढऩे वाली है।

 


मूंगफली का भाव

त्योहारी मांग के कारण तेल-तिलहन बाजार में तेजी बनी हुई है और भविष्य में भी तेजी की धारणा है। विदेशी बाजारों में मूंगफली दाना के साथ-साथ मूंगफली तेलों की भारी मांग ने भावों में तेजी को बल दिया है। नंबर एक गुणवत्ता वाले मूंगफली दाने की निर्यात मांग में भारी तेजी के कारण मूंगफली तेल-तिलहन कीमतों में तेजी बनी है। मूंगफली का सर्वाधिक उत्पादन भारत व चीन में होता है। नंबर वन मूंगफली दाने की कीमत 70 रुपए किलो तक पहुंच गई है।


सबसे सस्ते तेल सोयाबीन में तेजी / सोयाबीन का भाव

हल्के तेलों में शामिल सोयाबीन इस समय सबसे सस्ता है। इस साल सोयाबीन की खपत में पिछले साल के मुकाबले 40 फीसदी की वृद्धि हुई है। सूरजमुखी फसल के कम उत्पादन होने, सरसों जैसे हल्के तेल में 'ब्लेंडिंग' (सम्मिश्रण) की मांग बढऩे तथा उत्तर भारत के मौसम की वजह से सोयाबीन तेल मांग के बढऩे से इसके तेल कीमतों में तेजी आई है। 

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार अगस्त में कम बारिश के कारण मध्य प्रदेश में सोयाबीन की फसल और इसकी उपज प्रभावित हुई है। वहीं महाराष्ट्र में अधिक बारिश के कारण इसकी फसल प्रभावित हुई है, जिससे सोयाबीन किसानों की हालत पतली है और उनके लिए अपनी लागत निकालना मुश्किल हो रहा है। त्योहारी मांग होने और फसल को पहुंचे नुकसान से समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान सोयाबीन दाना और लूज की कीमतें 105-105 रुपये सुधरकर 4300-4325 रुपये और 4170-4200 रुपये प्रति क्विन्टल के आसपास चल रही हैं।

 

 

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