• Home
  • News
  • Agriculture News
  • कृषि इनपुट अनुदान योजना 2019-2020 - बिहार किसान सब्सिडी योजना- DBT Bihar Agriculture Registration

कृषि इनपुट अनुदान योजना 2019-2020 - बिहार किसान सब्सिडी योजना- DBT Bihar Agriculture Registration

कृषि इनपुट अनुदान योजना 2019-2020 - बिहार किसान सब्सिडी योजना- DBT Bihar Agriculture Registration

14 March, 2020

बिहार की रबी अनुदान योजना / kisan subsidy in bihar/ DBT Bihar Agriculture Registration

ट्रैक्टर जंक्शन पर किसान भाइयों का एक बार फिर स्वागत है। आज हम बात करते हैं बारिश और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को मिलने वाले अनुदान की। आप सभी लोग जानते हैं कि इस बार मानसून की मेहरबानी के कारण रबी की फसल कटाई से पहले खेत में पक रही थी। लेकिन आखिरी समय में बारिश व ओलावृष्टि से कई राज्यों में फसल को नुकसान हुआ है। किसी राज्य में ज्यादा तो किसी राज्य में रबी की फसल को कम नुकसान हुआ है। अब राज्य व केंद्र सरकार पीडि़त किसानों को राहत पहुंचने के लिए प्रयास कर रही है।

 

कृषि इनपुट अनुदान योजना 2019-2020 - बिहार किसान सब्सिडी योजना

 

सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1

 

फसल बीमा योजना से किसानों को लाभ

देश के कई राज्यों में रबी की फसल को कटाई से पहले बारिश और ओलावृष्टि के कारण नुकसान हुआ है। कुछ राज्यों में किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत नुकसान की भरपाई की जा रही है। लेकिन जिन राज्यों में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना नहीं है, वहां पर सरकार राज्य की योजना के अनुसार किसानों को लाभ पहुंचा रही है। इसी क्रम में बिहार की नीतिश सरकार ने राज्य के 11 जिलों के किसानों से रबी अनुदान योजना के तहत आवेदन मांगे हैं। रबी अनुदान योजना के तहत उन किसानों से आवेदन मांगे गए हैं जिनके पास स्वयं की भूमि है या वह बटाईदार है।

 

कृषि इनपुट सब्सिडी योजना की पात्रता 

कृषि इनपुट सब्सिडी योजना के लिए कुछ पात्रता निर्धारित की गई है। रबी सीजन में बारिश तथा ओलावृष्टि के कारण जिन जिलों में फसल का नुकसान अधिक हुआ है उन जिलों को रबी इनपुट के लिए शामिल किया गया है। बिहार सरकार ने अभी तक कुल 11 जिलों को चिन्हित किया है।

 

कृषि इनपुट सब्सिडी योजना में शामिल जिलों की सूची / किसान सब्सिडी योजना

कृषि इनपुट सब्सिडी योजना में बिहार के ये जिले शामिल हैं:-

  1. औरंगाबाद
  2. भागलपुर
  3. बक्सर
  4. गया
  5. जहानाबाद
  6. कैमूर
  7. मुजफ्फरपुर
  8. पटना
  9. पूर्वी चंपारण
  10. समस्तीपुर
  11. वैशाली

इन सभी जिलों के किसान कृषि इनपुट सब्सिडी योजना के तहत आवेदन कर सकते हैं।
 

यह भी पढ़ें : किसान क्रेडिट कार्ड योजना (KCC) क्या है ?

 

कृषि इनपुट सब्सिडी योजना का लाभ लेने के लिए पात्रता / बिहार कृषि योजना

  • रबी इनपुट 2019-20 योजना बिहार के 11 जिलों औरंगाबाद, भागलपुर, बक्सर, गया, जहानाबाद, कैमूर, मुजफ्फरपुर, पटना, पूर्वी चंपारण, समस्तीपुर और वैशाली जिलों के किसानों के लिए हैं। 
  • किसी भी वर्ग का किसान तथा बटाईदार इस योजना का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
  • योजना के अंतर्गत किसान अधिकतम 2 हैक्टेयर भूमि तक के लिए आवेदन कर सकते हैं।

 

कृषि इनपुट सब्सिडी योजना की खास बातें 

  • योजना का लाभ लेने के लिए किसान को सबसे पहले बिहार राज्य के कृषि विभाग के डी.बी.टी. पोर्टल पर आवेदन करना होगा।
  • यह पंजीयन नि:शुल्क है तथा आधार नंबर से किया जा सकता है।
  • पंजीयन कराने के बाद 13 अंकों का एक पंजीयन नंबर दिया जाएगा।
  • इस नंबर से रबी इनपुट के लिए आवेदन कर सकते हैं।
  • किसान का बैंक खाता आधार नंबर से लिंक होना जरूरी है।

 

रबी अनुदान योजना के लिए दस्तावेज / अनुदान योजना

रबी अनुदान योजना का लाभ उठाने के लिए किसान व बटाईदार के पास दस्तावेज होने चाहिए। दोनों के लिए अलग-अलग दस्तावेज निर्धारित है। किसान के पास एलपीसी/जमीन रसीद/वंशावली/जमाबंदी/विक्रय पत्र होना चाहिए। वहीं बटाईदार के पास वास्तविक खेतीहर+स्वयं भू-धरी की स्थिति में भूमि के दस्तावेज के साथ स्व घोषणा पत्र संलग्न करना अनिवार्य है।

 

कृषि इनपुट अनुदान योजना रबी के लिए आवेदन / kisan registration / कृषि इनपुट आवेदन

कृषि इनपुट अनुदान योजना 2019-20 के लिए आवेदनन  9 मार्च 2020 से शुरू हो गए हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 23 मार्च निर्धारित की गई है। पात्र किसान आवेदन स्वयं या सीएससी के माध्यम से कर सकते हैं। अगर किसान स्वयं आवेदन करता है तो उसे https://dbtagriculture.bihar.gov.in/ पर लॉगिन करना होगा। इस वेबसाइट पर आने के बाद वह आवेदन कर सकता है। यहां यह ध्यान रखने योग्य बात है कि आवेदन करने के बाद यदि आवेदन में कोई त्रृटि रह जाती है तो उसका बदलाव 48 घंटे के अंदर करना चाहिए। अन्यथा आवेदन उसी रूप में 48 घंटे के बाद संबंधित कृषि समन्वयक को जांच के लिए अग्रेषित हो जाएगा। इसके बाद संबंधित त्रृटि में कोई बदलाव संभव नहीं है।

 

 

यह भी पढ़ें : ई-ट्रैक्टर : बाजार में आया देश का पहला बि‍जली से चलने वाला ट्रैक्टर

 

किसान को ऐसे मिलेगा एक हेक्टेयर पर 13,500 रुपए का अनुदान 

बिहार के 11 जिलों के किसानों को भारत सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा निर्धारित सहायता मापदंडों के अनुसार अनुदान दिया जाएगा। कृषि इनपुट अनुदान योजना के तहत असिंचित क्षेत्र के किसान को 6800 रुपए प्रति हैक्टेयर की दर से अनुदान दिया जाएगा। सिंचित क्षेत्र के किसान को 13500 रुपए प्रति हैक्टेयर की दर से अनुदान दिया जाएगा। यह अनुदान प्रति किसान दो हैक्टेयर के हिसाब से दिया जाएगा। इस योजना के अंतर्गत सरकार द्वारा प्रभावित किसानों को कम से कम एक हजार रुपए का अनुदान दिया जाएगा।

 

DBT Agriculture Bihar Govt

कृषि इनपुट अनुदान योजना रबी में आवेदन के लिए किसान भाई https://dbtagriculture.bihar.gov.in/ पर लॉगिन कर सकता है।

सभी कंपनियों के ट्रैक्टरों के मॉडल, पुराने ट्रैक्टरों की री-सेल, ट्रैक्टर खरीदने के लिए लोन, कृषि के आधुनिक उपकरण एवं सरकारी योजनाओं के नवीनतम अपडेट के लिए ट्रैक्टर जंक्शन वेबसाइट से जुड़े और जागरूक किसान बने रहें।

Top Agriculture News

ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई यंत्र से पानी की 50 फीसदी बचत, उत्पादन बढ़ाएं

ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई यंत्र से पानी की 50 फीसदी बचत, उत्पादन बढ़ाएं

ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई यंत्र अपनाएं, पानी बचाएं, उत्पादन बढ़ाएं वर्तमान में देश के अधिकांश राज्यों में जल स्तर बहुत नीचे जा चुका है। इससे हर तरफ पानी की कमी होने लगी है। इसका प्रभाव कृषि के क्षेत्र पर भी पड़ा है। पानी की कमी के कारण कई किसानों ने धान की खेती करना ही छोड़ दिया है और अन्य कम पानी में उगने वाली फसलों की तरफ अपना रूख कर लिया है क्योंकि धान की फसल उगाने में सबसे ज्यादा पानी खर्च होता है जो किसान के लिए बहुत महंगा पड़ रहा है। इसको देखते हुए हरियाणा सरकार ने राज्य के किसानों से धान की खेती नहीं करने का आग्रह तक कर दिया और धान की खेती छोडक़र अन्य फसल उत्पादन करने पर 7 हजार रुपए प्रति एकड़ देने की घोषणा तक की। इसके अलावा अन्य फसलों को उगाने वाले किसानों को अतिरिक्त पानी देने की पेशकश की गई। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 इन सब बातों को देखकर आज आवश्यकता ऐसे सिंचाई यंत्रों का चुनाव करने की है जो पानी की बचत के साथ ही उत्पादन को भी बढ़ाने में सहायक हो। इसके लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत ड्राप मोर-माइक्रोइरीगेश कार्यक्रम किसानों के लिए बेहद मददगार साबित हो सकता है। इस योजना के तहत किसानों ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई यंत्रों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इसके लिए सरकार इन यंत्रों को खरीदने के लिए अनुदान भी देती है। ये अनुदान हर राज्य की राज्य सरकारों के हिसाब से अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग हो सकता है। फिलहाल अभी यह योजना उत्तरप्रदेश में चल रही है। इस योजना के तहत ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई यंत्र हेतु लक्ष्य पूरे होने तक आवेदन किए जा सकते हैं। क्या प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना भारत सरकार द्वारा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना लागू की गई है जिसके उपघटक पर ड्रॉप मोर क्राप-माइक्रोइरीगेशन कार्यक्रम के अन्तर्गत ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली को प्रभावी ढंग से विभिन्न फसलों में अपनाने हेतु प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस सिंचाई पद्धति को अपनाकर 40-50 प्रतिशत पानी की बचत के साथ ही 35-40 प्रतिशत उत्पादन में वृद्धि एवं उपज के गुणवत्ता में सुधार संभव है। ड्रिप सिंचाई यंत्र की उपयोगिता टपक सिंचाई में पेड़ पौधों को नियमित जरुरी मात्रा में पानी मिलता रहता है ड्रिप सिंचाई विधि से उत्पादकता में 20 से 30 प्रतिशत तक अधिक लाभ मिलता है। इस विधि से 60 से 70 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है। इस विधि से ऊंची-नीची जमीन पर सामान्य रुप से पानी पहुंचता है। इसमें सभी पोषक तत्व सीधे पानी से पौधों के जड़ों तक पहुंचाया जाता है तो अतिरिक्त पोषक तत्व बेकार नहीं जाता, जिससे उत्पादकता में वृद्धि होती है। इस विधि में पानी सीधा जड़ों तक पहुंचाया जाता है और आस-पास की जमीन सूखी रहती है, जिससे खरपतवार भी नहीं पनपते हैं। ड्रिप सिंचाई में जड़ को छोडक़र सभी भाग सूखा रहता है, जिससे खरपतवार नहीं उगते हैं, निराई-गुड़ाई का खर्च भी बच जाता है। फव्वारा ( स्प्रिंकल ) सिंचाई यंत्रों की उपयोगिता स्प्रिंकल विधि से सिंचाई में पानी को छिडक़ाव के रूप में किया जाता है, जिससे पानी पौधों पर बारिश की बूंदों की तरह पड़ता है। पानी की बचत और उत्पादकता के हिसाब से स्प्रिंकल विधि ज्यादा उपयोगी मानी जाती है। ये सिंचाई तकनीक ज्यादा लाभदायक साबित हो रहा है। चना, सरसों और दलहनी फसलों के लिए ये विधि उपयोगी मानी जाती है। सिंचाई के दौरान ही पानी में दवा मिला दी जाती है, जो पौधे की जड़ में जाती है। ऐसा करने पर पानी की बर्बादी नहीं होती। विधि से लाभ इस विधि से पानी वर्षा की बूदों की तरह फसलों पर पड़ता है, जिससे खेत में जलभराव नहीं होता है। जिस जगह में खेत ऊंचे-नीचे होते हैं वहां पर सिंचाई कर सकते हैं। इस विधि से सिंचाई करने पर मिट्टी में नमी बनी रहती है और सभी पौधों को एक समान पानी मिलता रहता है। इसमें भी सिंचाई के साथ ही उर्वरक, कीटनाशक आदि को छिडक़ाव हो जाता है। पानी की कमीं वाले क्षेत्रों में विधि लाभदायक साबित हो रही है। कितना मिलता है अनुदान अनुदान देता है विभाग टपक व फव्वारा सिंचाई के लिए लघु एवं सीमांत किसान को 90 फीसदी अनुदान सरकार की तरफ से दिया जाता है। इसमें 50 प्रतिशत केंद्रांश व 40 फीसदी राज्यांश शामिल है। दस फीसदी धनराशि किसानों को लगानी होती है। सामान्य किसानों को 75 प्रतिशत अनुदान मिलेगा। 25 प्रतिशत किसानों को अपनी पूंजी लगानी होती है। किसान अपनी कोई भी पसंदीदा कंपनी से खरीद सकता है यंत्र प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत ड्राप मोर-माइक्रोइरीगेश कार्यक्रम के तहत लघु सीमांत किसानों को 90 प्रतिशत का और सामान्य किसानों को 80 प्रतिशत अनुदान डीबीटी के द्वारा दिया जाता है। चयनित होने के बाद किसान किसी भी अपनी पसंदीदा कंपनी से खरीददारी कर सकता है। स्प्रिंकलर पोर्टेबल और रैन गन के लिए किसान को पहले अपनी जेब से पैसा लगाना होगा। इसके बाद बिल और बाउचर विभाग में सम्मिट करने पर अनुदान की धनराशि किसान के खाते में दी जाती है। प्रशिक्षण, कार्यशाला व गोष्ठी का आयोजन योजनान्तर्गत लाभार्थी कृषकों के लिए समय-समय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण, प्रदेश से बाहर कृषक भ्रमण एवं मंडल स्तर पर कार्यशाला / गोष्ठी का आयोजन किया जाता है। इस विधा के अंगीकरण हेतु लाभार्थी कृषकों के लिए तकनीकी जानकारी एवं कौशल अभिवृद्धि की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। योजना का कार्यक्षेत्र उत्तर प्रदेश के सभी जनपद योजना से आच्छादित हैं । प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में अतिदोहित (111 विकास खण्ड) क्रिटिकल (68 विकास खण्ड) सेमी क्रिटिकल (82 विकास खण्ड) के अतिरिक्त पर ड्रॉप मोर क्रोप के अदर इन्टरवेन्शन में निर्मित/जीर्णोद्धार किए गए तालाबों के क्लस्टर सम्मिलित हैं। योजना के लाभार्थी / पात्रता योजना का लाभ सभी वर्ग के कृषकों के लिए अनुमन्य है। योजना का लाभ प्राप्त करने हेतु इच्छुक कृषक के पास स्वयं की भूमि एवं जल स्रोत उपलब्ध हों। योजना का लाभ सहकारी समिति के सदस्यों, सेल्फ हेल्प गु्रप, इनकार्पोरेटेड कम्पनीज, पंचायती राज संस्थाओं, गैर सहकारी संस्थाओं, ट्रस्ट्स, उत्पादक कृषकों के समूह के सदस्यों को भी अनुमन्य। ऐसे लाभार्थियों / संस्थाओं को भी योजना का लाभ अनुमन्य होगा जो संविदा खेती (कान्टै्क्ट फार्मिंग) अथवा न्यूनतम 7 वर्ष के लीज एग्रीमेन्ट की भूमि पर बागवानी/खेती करते हैं। एक लाभार्थी कृषक/संस्था को उसी भू-भाग पर दूसरी बार 7 वर्ष के पश्चात् ही योजना का लाभ अनुमन्य होगा। लाभार्थी कृषक अनुदान के अतिरिक्त अवशेष धनराशि स्वयं के स्रोत से अथवा ऋण प्राप्त कर वहन करने हेतु सक्षम व सहमत हों। योजना के लिए कैसे कराएं पंजीकरण इच्छुक लाभार्थी कृषक किसान पारदर्शी योजना के पोर्टल http://upagriculture.com/ पर अपना पंजीकरण कराकर प्रथम आवक प्रथम पावक के सिंद्धात पर योजना का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। पंजीकरण हेतु किसान के पहचान हेतु आधार कार्ड, भूमि की पहचान हेतु खतौनी एवं अनुदान की धनराशि के अन्तरण हेतु बैंक पासबुक के प्रथम पृष्ठ की छाया प्रति अनिवार्य है। निर्माता फर्मों का चयन प्रदेश में ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली स्थापित करने वाली पंजीकृत निर्माता फर्मां में से किसी भी फर्म से कृषक अपनी इच्छानुसार आपूर्ति/स्थापना का कार्य कराने के लिए स्वतंत्र हैं। निर्माता फर्मों अथवा उनके अधीकृत डीलर/डिस्ट्रीब्यूटर द्वारा बी.आई.एस. मानकों के अनुरूप विभिन्न घटकों की आपूर्ति करना अनिवार्य होगा और न्यूनतम 3 वर्ष तक फ्री ऑफ्टर सेल्स सर्विस की सुविधा की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। भौतिक सत्यापन के बाद होगा अनुदान का भुगतान निर्माता फर्मां के स्वयं मूल्य प्रणाली के आधार पर भारत सरकार द्वारा निर्धारित इकाई लागत के सापेक्ष जनपद स्तरीय समिति द्वारा भौतिक सत्यापन के उपरान्त अनुदान की धनराशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांस्फर (डी.वी.टी.) द्वारा सीधे लाभार्थी के खाते में अन्तरित की जाएगी। विशेष - हालांकि हमने आपको योजना के संबंध में पूर्ण जानकारी देने का प्रयास किया है। यदि आप इस योजना के संबंध में ओर अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो http://upagriculture.com/ पर जाकर प्राप्त कर सकते हैं। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

एक करोड़ से ज्यादा किसानों को सस्ते लोन मंजूर, केसीसी कार्ड धारकों को फायदा

एक करोड़ से ज्यादा किसानों को सस्ते लोन मंजूर, केसीसी कार्ड धारकों को फायदा

खरीफ की बुवाई में किसानों को मिलेगी मदद बैंकों ने किसान क्रेडिट कार्ड धारकों को 90 करोड़ रुपए के सस्ते लोन को मंजूरी दे दी हैं। इससे करीब 1.1 करोड़ किसानों को फायदा होगा। मीडिया को दिए अपने वक्तव्य में वित्त मंत्री निर्मला सीतारामण ने बताया कि बैंकों ने 1.1 करोड़ किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) धारकों को 89,810 करोड़ रुपए के सस्ते लोन मंजूर किए हैं। इससे खरीफ की बुवाई में किसानों को काफी मदद मिलेगी। वित्त मंत्री ने एक ट्वीट में कहा कि 24 जुलाई 2020 तक, आत्म निर्भर भारत पैकेज के तहत दो लाख करोड़ रुपए के रियायती ऋण में से 111.98 लाख किसान क्रेडिट कार्ड पर कुल 89,810 करोड़ रुपए के कर्ज को मंजूरी दी जा चुकी है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 इससे मछुआरों और डेयरी किसानों सहित कुल 2.5 करोड़ किसानों को फायदा होगा। उन्होंने कहा कि 30 जून तक 70.32 लाख केसीसी धारकों को 62,870 करोड़ रुपए के कर्ज को मंजूरी दी जा चुकी थी। बता दें कि सरकार ने 20.97 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज के तहत केसीसी के माध्यम से 2.5 करोड़ किसानों, मछुआरों और पशुपालन से जुड़े लोगों को कुल दो लाख करोड़ रुपए का रियायती कर्ज देने की घोषणा की थी। किसानों को क्या होगा फायदा किसानों के लिए यह जानकारी काफी महत्वपूर्ण है। इस समय खरीफ की फसल की बुबाई का समय चल रहा है। ऐसे में सरकार द्वारा बैंकों के माध्यम से किसानों सस्ता लोन मुहैया कराना किसानों के लिए बेहद मददगार साबित होगा। किसान को कृषि से संबंधित कई कार्यों के लिए धन की आवश्यकता होती है। स्थानीय स्तर पर साहूकारों से धन उधार लेने पर किसानों को ऊंची दर पर ब्याज देना पड़ता है जो किसानों के लिए काफी महंगा पड़ता है। इस लिहाज से बैंकों द्वारा सस्ता लोन दिए जाने से किसानों को सस्ता लोन मिल सकेगा जिससे उनके कृषि संबंधी कार्यों को पूरा करने में मदद मिलेगी। किसान क्रेडिट कार्ड से लोन लेने पर मिलने वाले लाभ किसान क्रेडिट कार्ड कम ब्याज दर पर लोन प्रदान करते हैं, भुगतान की आसान शर्तें प्रदान करता है। इसके अलावा, फसल बीमा और सिक्योरिटी-मुक्त बीमा भी उपयोगकर्ता को प्रदान किया जाता है। किसान क्रेडिट कार्ड लोन योजना में किसान को निम्नलिखित लाभ मिलते हैं- लोन पर दी जाने वाली ब्याज दर 2 प्रतिशत तक कम हो सकती है। बैंक 1.60 लाख रुपए तक के लोन पर सुरक्षा/ सेक्योरिटी नहीं मांगेंगे। विभिन्न आपदाओं के खिलाफ फसल बीमा कवरेज उपयोगकर्ताओं को दिया जाता है। किसान को स्थायी विकलांगता, मृत्यु होने पर बीमा कवरेज प्रदान किया जाता है, किसान को अन्य जोखिम भी प्रदान किए जाते हैं। भुगतान अवधि फसल की कटाई और उसकी व्यापार अवधि के आधार पर तय की जाती है। कार्ड धारक द्वारा अधिकतम 3.00 लाख रुपए तक का लोन लिया जा सकता है। किसान जो अपना पैसा किसान क्रेडिट कार्ड अकाउंट में जमा करते हैं, उन्हें उच्च दर पर ब्याज मिलेगा। शीघ्र भुगतान करने पर किसानों से साधारण ब्याज दर ली जाती है। कार्डधारकों द्वारा समय पर भुगतान करने में विफल रहने पर कंपाउंड ब्याज वसूला जाता है। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

कोरोना का असर : सब्सिडी पर कृषि यंत्र के आवेदन निरस्त, अब नए सिरे से होगी प्रक्रिया

कोरोना का असर : सब्सिडी पर कृषि यंत्र के आवेदन निरस्त, अब नए सिरे से होगी प्रक्रिया

स्प्रिंकलर सेट तथा ड्रिप सिस्टम सिंचाई यंत्र के लक्ष्य अभी नहीं किए निरस्त कोरोना वायरस संक्रमण व बजट की कमी के कारण मध्यप्रदेश में सब्सिडी पर कृषि यंत्र उपलब्ध कराने के लिए किसानों से मांगे गए आवेदनों को निरस्त कर दिया गया है। बता दें कि मध्यप्रदेश में किसानों को सब्सिडी पर कृषि यंत्र उपलब्ध करवाने के लिए किसानों से आवेदन मांगे गए थे परन्तु कई जिलों में लॉक डाउन एवं बजट की कमी के चलते जारी की गए कृषि यंत्रों के लक्ष्यों को निरस्त किया गया है। अब दुबारा से इनके लिए आवेदन आगे मांगे जाने की संभावना है, तब तक प्रदेश के किसानों को इंतजार करना होगा। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 गौरतलब है कि वित्तीय वर्ष 2020-21 को प्रारंभ हुए 3 माह से भी आधिक हो चुके हैं परन्तु अभी भी बहुत सी योजनाओं का क्रियान्वन सुचारू रूप से शुरू नहीं हो पाया है, इसका मुख्य कारण है कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने हेतु चल रहा लॉक डाउन। लॉक डाउन के कारण जहां बहुत सी पाबंदियां चल रही है वहीं इससे सभी को काफी आर्थिक नुकसान भी हो रहा है। ऐसे में बहुत सी योजनायें अभी तक प्रारंभ नहीं हो पाई है। कुछ योजनाएं राज्य सरकारों के द्वारा शुरू तो की गई हैं परन्तु कई जिलों में दोबारा लॉक डाउन की स्थिति के कारण किसान उसका लाभ नहीं ले पा रहे हैं। इन कृषि यंत्रों पर दी जाने वाली सब्सिडी के आवेदनों किए निरस्त कोविड-19 की स्थिति के कारण बजट उपलब्धता में कमी को देखते हुए ई-कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल पर चल रहे कृषि यंत्र स्वचलित रीपर तथा रीपर कम बाईंडर के लक्ष्य जिनके विरूद्ध दिनांक 20-07-2020 से आवेदन चल रहे थे। किसान इन यंत्रों के लिए 30 जुलाई 2020 तक आवेदन किए जाने थे एवं जिनकी लॉटरी दिनांक 05-08-2020 को नियत की गई थी, उन लक्ष्यों को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है। अत: इन लक्ष्यों के विरूद्ध प्राप्त आवेदनों पर लॉटरी आदि की कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी। इसके अतिरिक्त ऐसे बहुत से कृषि यंत्र जिनके लिए किसान मांग के अनुसार आवेदन कर सकते थे उसे भी बंद कर दिया गया है। केंद्रीय कृषि मंत्री हार्वेस्टर एवं ट्रेक्टर आदि कृषि यंत्रों पर अनुदान हेतु आवेदन सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के तहत कई प्रकार के कृषि यंत्र अनुदान पर दिए जाते हैं, इनमें हार्वेस्टर एवं ट्रेक्टर जैसे कृषि यंत्र भी शामिल है। इन कृषि यंत्रों के लिए भी जिलेवार लक्ष्य निर्धारित कर किसानों से आवेदन मांगे जाते हैं परन्तु इस वर्ष कोविड-19 महामारी के चलते कई जिलों में लॉक डाउन की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में सभी किसान समय पर इन कृषि यंत्रों के आवेदन अभी तक नहीं मांगे गए है। बजट की कमी के चलते इस वर्ष हो सकता है लक्ष्यों की संख्या में कमी आगे चल कर किसानों से आवेदन मांगे जा सकते हैं। अर्थात किसानों को ट्रेक्टर, हार्वेस्टर एवं अन्य कृषि यंत्रों के अनुदान हेतु आवेदन के लिए अभी इंतजार करना होगा। इन यंत्रों हेतु किए जा सकते हैं आवेदन स्प्रिंकलर सेट तथा ड्रिप सिस्टम हेतु आवेदन 1 अगस्त से राज्य सरकार द्वारा सिंचाई यंत्रों हेतु ई-कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल पर वर्ष 2020 -21 हेतु प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत सिंचाई यंत्रों ( स्प्रिंकलर सेट तथा ड्रिप सिस्टम) के जिलेवार लक्ष्य जारी किए जाने का प्रस्ताव है। इन लक्ष्यों के लिए किसान दिनांक 1 अगस्त 2020 से 10 अगस्त 2020 तक पोर्टल पर आवेदन कर सकेंगे। प्राप्त आवेदनों में से लक्ष्यों के विरुद्ध लॉटरी दिनांक 11 अगस्त 2020 को शाम 5 बजे लोटरी सम्पादित की जानी है। अभी तक सिंचाई यंत्रों हेतु आवेदन निरस्त नहीं किए गए हैं। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

अब चंबल के बीहड़ों में लहलहायेंगी फसलें, तीन लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कृषि का लक्ष्य

अब चंबल के बीहड़ों में लहलहायेंगी फसलें, तीन लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कृषि का लक्ष्य

विश्व बैंक से ली जाएगी मदद, एक महीने में तैयार होगी रिपोर्ट चंबल के बीहड़ों का नाम सुनते ही हमारे जहन में चंबल के डाकूओं की तस्वीर उभर कर सामने आ जाती है। चंबल के बीहड़ पहले इसी के लिए मशहूर थे। यहां पर डाकूओं का बसैरा हुआ करता था। इन चंबल के बीहड़ों की पहुंच पहले डाकूओं तक ही थी और इस पर कई फिल्में भी बनी। पर अब समय के साथ-साथ न तो डाकू रहे और न ही इन डाकूओं का अब यहां बसैरा है। अब यह इलाका पूरी तरह शांत है। इस इलाके की अधिकांश भूमि उबड़-खाबड़ है जो कृषि योज्य नहीं है लेकिन हाल ही में सरकार द्वारा दिए गए वक्तव्य में इस इलाके को कृषि योज्य बनाने की बात कही गई है जो निश्चय ही इन बीहड़ों को हराभरा करने की एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगी। क्या है योजना केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर मीडिया में दिए अपने वक्तव्य में बताया कि मध्य प्रदेश के ग्लावियर-चंबल क्षेत्र के बीहड़ इलाकों में जल्द फसलें लहलहाएंगी। केन्द्र सरकार इस इलाके को खेती योग्य बनाने जा रही है। उन्होंने कहा कि इस बारे में शुरुआती रिपोर्ट एक महीने में तैयार हो जाएगी। उन्होंने कहा कि शुरुआती रिपोर्ट तैयार होने के बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के साथ बैठक होगी। इसके बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। विश्व बैंक करेगा इस परियोजना में मदद इस परियोजना के लिए विश्व बैंक से मदद ली जाएगी। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि विश्व बैंक के प्रतिनिधि आदर्श कुमार के साथ वर्चुअल बैठक में यह फैसला हो चुका है। कुमार ने कहा कि विश्व बैंक मध्य प्रदेश में काम करने का इच्छुक है। इससे इस परियोजना को पूरा करने में सहयोग लिया जाएगा। तीन लाख हेक्टेयर से अधिक उबड़ - खाबड़ जमीन में सुधार की आवश्यकता तोमर ने इस आनलाइन बैठक में कहा कि अभी तीन लाख हेक्टेयर से अधिक उबड़-खाबड़ जमीन खेती योग्य नहीं है। यदि इस क्षेत्र में सुधार किया जाता है, तो इससे ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के बीहड़ों के एकीकृत विकास में मदद मिलेगी। तोमर ने कहा कि इस परियोजना से सिर्फ कृषि विकास और पर्यावरण सुधार में ही मदद नहीं मिलेगी, बल्कि इससे रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे जिससे क्षेत्र का उल्लेखनीय विकास होगा। तोमर ने कहा कि ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के बीहड़ों में विकास की काफी गुंजाइश है। इस इलाके में चंबल एक्सप्रेसवे का निर्माण होगा। कृषि मंत्रालय में संयुक्त सचिव विवेक अग्रवाल ने कहा कि प्रस्तावित परियोजना पर काम शुरू करने से पहले प्रौद्योगिकी, बुनियादी ढांचे, पूंजी लागत और निवेश जैसे सभी पहलुओं पर गौर किया जाएगा। उसके बाद न्यूनतम बजट आवंटन के साथ परियोजना पर काम शुरू होगा। बैठक में भाग लेते हुए कृषि उत्पादन आयुक्त के के सिंह ने कहा कि पुरानी परियोजना का पुनरूद्धार किया गया है और इसे कृषि मंत्री के निर्देशन में आगे बढ़ाया जाएगा। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

close Icon

Find Your Right Tractor and Implements

New Tractors

Used Tractors

Implements

Certified Dealer Buy Used Tractor