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आपकी किस्मत बदल देगी मोती की खेती

आपकी किस्मत बदल देगी मोती की खेती

मोती की खेती (Pearl Farming) का सीजन शुरू, कम जगह और थोड़ी सी लागत से लाखों रुपए का मुनाफा

ट्रैक्टर जंक्शन में किसान भाइयों का एक बार फिर स्वागत है। आज हम आपको मोती की खेती से कमाई संबंधित सभी जानकारी देंगे। देशभर में किसान पारंपरिक खेती के अलावा अन्य विकल्पों में भी अपना भाग्य आजमा रहे हैं और अपनी कमाई का जरिया बढ़ा रहे हैं। देश का किसान मोती की खेती से भी अपनी आय बढ़ा सकते हैं। मोती की खेती के लिए सरकार की ओर से ट्रेनिंग भी दी जाती है। साथ ही कई बैंकों की ओर से मोती की खेती के लिए आसान शर्तों पर लोन उपलब्ध कराया जाता है। तो आइए जानते हैं मोती की खेती के बारे में संपूर्ण जानकारी।

 

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मोती की खेती कैसे होती है? ( pearl cultivation )

यहां पर हम आपको मोती की खेती के मौसम, आवश्यक जगह, लागत, ट्रेनिंग सेंटर व बाजार में मोतियों की बिक्री व कीमत के बारे में जानकारी दे रहे हैं।


मोती की खेती के लिए मौसम

मोती की खेती से कम लागत और मेहनत में अधिक मुनाफा मिलने की संभावना है, इसलिए किसानों का रूझान मोती की खेती तरफ भी बढ़ा है। मोती की खेती के लिए सबसे अनुकूल मौसम शरद ऋतु यानि अक्टूबर से दिसंबर तक का महीना माना गया है।


मोती की खेती के लिए जमीन या जगह

मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है। किसान भाई अपने खेत या घर के आसपास छोटी जगह पर मोती की खेती कर सकते हैं। मोती की खेती के लिए 500 वर्गफीट का तालाब होना चाहिए। इस तालाब में 100 सीप पालकर मोती का उत्पादन शुरू किया जा सकता है।


मोती की खेती में लागत  

किसान भाई 500 वर्गफीट के तालाब में 100 सीप पालकर मोती का उत्पादन शुरू कर सकते हैं। बाजार में सीप की कीमत 15 से 25 रुपए प्रति नग होती है। वहीं तालाब बनाने पर करीब 15 से 20 हजार रुपए का खर्चा आता है। इसके अलावा वाटर ट्रीटमेंट और उपकरणों पर भी 5 हजार रुपए तक का खर्चा आता है। 


सीप को कैसे करें तैयार

मोती की खेती शुरू करने के लिए सबसे पहले तालाब या नदी आदि जगहों से सीपों को इकट्ठा किया जाता है। इसके अलावा सीपों को बाजार से भी खरीदा जा सकता है। सीप आप सरकारी संस्थानों से या मछुआरों से ले सकते हैं। सबसे पहले इन सीपों को खुले पानी में डाला जाता है। फिर 2 से 3 दिन बाद इन्हें निकाला जाता है। ऐसा करने से सीप के ऊपर का कवच और उसकी मांसपेशियां नरम हो जाती हैं। इनमें मामूली सर्जरी के माध्यम से उसकी सतह पर 2 से 3 एमएम का छेद किया जाता है। इसके बाद इस छेद में से रेत का एक छोटा सा कण डाला दिया जाता है। इस तरह से सीप में रेत का कण डाला जाता है, तो सीप में चुभन होती है और सीप अपने अंदर से निकलने वाला पदार्थ छोडऩा शुरू कर देता है। इसके बाद 2 से 3 सीप को एक नायलॉन के बैग में रखकर तालाब में बांस या किसी पाईप के सहारे छोड़ा जाता है। बाद में इस सीप से 15 से 20 महीने के बाद मोती तैयार हो जाता है। अब कवच को तोडक़र मोती निकाला जाता है।


भारत में मोती तैयार करने की विधि

भारत में मोती तैयार करने की तीन विधियां ज्यादा प्रचलित हैं। इनमें केवीटी, गोनट और मेंटलटीसू शामिल है। केवीटी में सीप के अंदर ऑपरेशन के जरिए फारेन बॉडी डालकर मोती तैयार किया जाता है। इसका इस्तेमाल अंगूठी और लॉकेट बनाने में होता है। चमकदार होने के कारण एक मोती की कीमत हजारों रुपए में होती है।
गोनट में प्राकृतिक रूप से गोल आकार का मोती तैयार होता है। मोती चमकदार व सुंदर होता है। एक मोती की कीमत आकार व चमक के अनुसार 1 हजार से 50 हजार रुपए तक होती है। मेंटलटीस पद्धति में सीप के अंदर सीप की बॉडी का हिस्सा ही डाला जाता है। इस मोती का उपयोग खाने के पदार्थों जैसे मोती भस्म, च्यवनप्राश व टॉनिक बनाने में होता है। बाजार में इसकी सबसे ज्यादा मांग है।

 


मोती की खेती से लाभ

किसान भाई मोती की खेती से अच्छा लाभ कमा सकते हैं। एक सीप से एक मोती १५ से 20 महीने बाद तैयार होता है। वर्तमान में एक सीप का बाजार भाव करीब 20 से 30 रुपए के बीच है। बाजार में एक मिमी से लेकर 20 मिमी साइज के सीप के मोती का दाम करीब 300 रुपए से लेकर 2000 रुपए के बीच मिलता है। सीप से मोती निकालने के बाद सीप को बाजार में भी बेच जा सकता है। भारतीय बाजार की अपेक्षा विदेशों में मोती का निर्यात कर अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है। बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है। सीप की संख्या को बढ़ाकर कमाई को बढ़ाया जा सकता है। 


असली मोती की कीमत

अगर किसान भाई चाहें तो हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई जैसे शहरों में सीधे भी अपने मोती बेच सकते हैं। इन शहरों में हजारों कारोबारी हैं, जो मोती का के व्यवसाय में लगे हुए हैं। वहीं कई बड़ी कंपनियां देशभर में अपने एजेंटों के माध्यमों से मोतियों को खरीदती हैं। आप चाहें तो इन कंपनियों से भी संपर्क में रह सकते हैं। अगर आपको इंटरनेट की समझ है तो आप ऑनलाइन भी अपने मोती बेच सकते हैं। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार एक असली मोती की कीमत लगभग 360 रुपये / कैरेट और 1800 रुपये प्रति ग्राम होती है।


मोती की खेती की ट्रेनिंग

देश में मोती की खेती के लिए कई जगह ट्रेनिंग मिलती है। मोती की खेती थोड़ा वैज्ञानिक खेती है। इसलिए इसे शुरू करने से पहले किसानों को प्रशिक्षण की जरूरत होती है। इंडियर काउंसिल फॉर एग्रीकल्चर रिसर्च के तहत एक विंग देश में बना हुआ है। इस विंग का नाम सीफा यानी सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रेश वॉटर एक्वाकल्चर है। यह  मोती की खेती की ट्रेनिंग देता है। इसका मुख्यालय उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर में है। यह संस्थान ग्रामीण नवयुवकों, किसानों एवं छात्र-छात्राओं को मोती उत्पादन पर तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान करता है। यहां पर कोई भी 15 दिनों की ट्रेनिंग ले सकता है। भारत सरकार का सेंट्रल मेरिन फिसरिज रिसर्च इंस्टीच्यूट ने केरल के तिरुवनंतपुरम में व्यवसायिक रूप से मोती के उत्पादन का बड़ा केंद्र स्थापित किया है।


मोती की खेती के लिए लोन

मोती की खेती के लिए कई संस्थाओं व बैंकों द्वारा लोन उपलब्ध कराया जाता है। यह लोन नाबार्ड और कई बैंक से मिलता है। इस लोन पर कम ब्याज देना होता है और 15 सालों तक चुकाने के लिए समय भी मिलता है।  

 


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सोयाबीन और धनिया की कीमतें बढ़ी, मंडी में आईं नई सरसों

सोयाबीन और धनिया की कीमतें बढ़ी, मंडी में आईं नई सरसों

कृषि बाजार समाचार : जानें, प्रमुख मंडियों में विभिन्न उपजों के ताजा भाव इन दिनों बाजार में सोयाबीन और धनिया के भावों में तेजी का रूख रहा। इससे धनिया और सोयाबीन की कीमतों में मजबूती देखने को मिली। वहीं रिफाइंड सोया वायदा कीमतों में गिरावट आई है। इधर राजस्थान की सबसे बड़ी मंडी में खेड़ली में सरसों की आवक शुरू हो गई है। किसान अपनी सरसों की नई फसल लेकर मंडी पहुंच रहे हैं। यहां क्वालिटी के आधार पर सरसों 5000 से 5800 प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदी जा रही है। बता दें कि सरसों का सरकारी समर्थन मूल्य 2020-21 के लिए 4650 रुपए निर्धारित किया गया है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 सोयाबीन में आई तेजी, 4,850 रुपए प्रति क्विंटल हुआ भाव मीडिया में प्रकाशित खबरों के आधार पर मजबूत हाजिर मांग के कारण व्यापारियों ने ताजा सौदों की लिवाली की जिससे वायदा कारोबार में सोयाबीन की कीमत 25 रुपए प्रति क्विंटल की तेजी के साथ 4,850 रुपए प्रति क्विंटल हो गई। एनसीडीईएक्स में सोयाबीन के फरवरी माह में डिलीवरी वाले अनुबंध की कीमत 25 रुपये अथवा 0.52 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,850 रुपये प्रति क्विंटल हो गई जिसमें 1,055 लॉट के लिए कारोबार हुआ। इसी प्रकार सोयाबीन के मार्च माह में डिलीवरी वाले अनुबंध की कीमत 20 रुपए अथवा 0.42 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,838 रुपए प्रति क्विंटल हो गई जिसमें 2,16,645 लॉट के लिए कारोबार हुआ। बाजार सूत्रों ने कहा कि बाजार की अधिक मांग के बीच सटोरियों की ताजा लिवाली से मुख्यत: सोयाबीन वायदा कीमतों में तेजी आई। वहीं कमजोर मांग से रिफाइंड सोया वायदा कीमतों में गिरावट देखने को मिली जिससे रिफाइंड सोया तेल का दाम 2.8 रुपए की गिरावट के साथ 1,145 रुपए प्रति 10 किग्रा रह गया। नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्ज एक्सचेंज में फरवरी माह में डिलीवरी के लिये रिफाइंड सोया तेल के वायदा अनुबंध का भाव 2.8 रुपए यानी 0.24 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,145 रुपए प्रति 10 किग्रा रह गया। धनिया कीमतों में 42 रुपए की हुई बढ़ोतरी सोयाबीन के साथ ही बाजार में धनिया की कीमतों में भी तेजी दर्ज की गई हैं। इससे अब धनिया की कीमत 42 रुपए की तेजी के साथ 6,696 रुपए प्रति क्विंटल हो गई। एनसीडीईएक्स में धनिया के अप्रैल माह में डिलीवरी वाले अनुबंध की कीमत 42 रुपये अथवा 0.63 प्रतिशत की तेजी के साथ 6,696 रुपए प्रति क्विंटल हो गई जिसमें 2,915 लॉट के लिए कारोबार हुआ। धनिया के मई माह में डिलीवरी वाले अनुबंध की कीमत 80 रुपए अथवा 1.21 प्रतिशत की तेजी के साथ 6,570 रुपए प्रति क्विंटल हो गई जिसमें 85 लॉट के लिए कारोबार हुआ। यह भी पढ़ें : गोट बैंक : कर्ज में बकरियां ले जाओ, मेमने लौटाओ खेड़ली मंडी में पहले दिन 400 कट्टे आए, समर्थन मूल्य से काफी ऊंचे मिल रहे है दाम नए सीजन की शुरुआत में ही राजस्थान की सबसे बड़ी मंडी, खेड़ली की कृषि मंडी में नई सरसों की आवक शुरू हो गई हैं, सोमवार को मंडी में 400 कट्टों की आवक हुई। मंडी में सरसों का भाव 5000 से 5800 प्रति क्विंटल तक चल रहा है। मंडी में भाव ऊंचे होने के कारण व्यापारियों के साथ ही किसानों में भी उत्साह नजर आ रहा है। बता दें कि सरसों का सरकारी समर्थन मूल्य 2020-21 के लिए 4650 रुपए निर्धारित किया गया है। इस तरह से देखा जाए तो खेड़ली मंडी में किसानों को सरसों के अच्छे दाम मिल रहे हैं जिसको लेकर किसानों में उत्साह है। नमी के आधार पर तय होते हैं सरसों के भाव मंडी में आ रही नई सरसों में अभी नमी 15 से 35 प्रतिशत तक है जो कि सामान्यत: 5-7 प्रतिशत के करीब रहती है। पुरानी सरसों के भाव फिलहाल करीब 6200 से 6600 प्रति क्विंटल के बीच हैं। नई सरसों में मौजूद नमी के अनुसार भाव 5000 से 5800 रुपए प्रति क्विंटल है। सोमवार को कस्बे की मंडी में नई सरसों की करीब 400 कट्टे की आवक रही। वहीं, पुरानी सरसों की आवक करीब 250 कट्टे की रही। पिछले साल के मुकाबले इस बार नई सरसों के भाव डेढ़ से दोगुने अधिक सरसों की किल्लत के चलते इस बार नई सरसों के भाव में किसानों को पिछले साल के मुकाबले डेढ़ से दोगुना लाभ मिल रहा है। इस दौरान सरसों लेकर आए एक किसान भनोखर निवासी खेमचंद ने मीडिया को बताया कि पिछले साल नई सरसों समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीद में बेची थी। जिसका भाव उसे 4425 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से मिला था। वहीं पिछले सीजन की शुरुआत में नमी वाली सरसों के भाव 3000 से 3500 रुपए प्रति क्विंटल रहे थे। सरसों के ताजा भाव पिछले साल के मुकाबले 1500 से 2000 रुपए प्रति क्विंटल अधिक है, जिससे किसानों को फायदा होगा। यह भी पढ़ें : कृषि यंत्रीकरण : इन 15 कृषि यंत्रों पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, अभी करें आवेदन प्रमुख ऑनलाइन मंडियों में उपजों के भाव राजस्थान की नोहर के मंडी: ग्वार 3702, सरसों 6030, चना 4530, मूंग 7100, मोठ 7000, अरंडी 4435, गेहूं 1750, तारामीरा 4650, बाजरी 1300, काला तिल 11100, भुरा तिल 7480, सफेद तिल 7700 रुपए क्विंटल के आसपास चल रहा है। हनुमानगढ़ कृषि उपज मंडी भाव: नरमा (कॉटन) का भाव 6000 से 6215 रुपए क्विंटल का दर्ज किया गया है। वहीं रावतसर मंडी में नरमें का भाव आज 6150 रुपये क्विंटल का रहा। हरियाणा की सिरसा मंडी के भाव: नरमा 6080, कपास 5725, ग्वार 3661, 1509 धान 2452, 1121 धान 3011, पीबी-1 धान 2999, 1401 धान 3151, 1718 धान 2750 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास चल रहा है। ऐलनाबाद मंडी भाव: नरमा 5990, कपास 5550-5670, ग्वार 3400-3625, कनक 1700-1721, मूंगफली 4400-4600, काला तिल 11200, तिल काला भुरा 7500-9700, 1401 धान का रेट 3181 रुपए प्रति क्विंटल चल रहा है। आदमपुर मंडी भाव: नरमा 6029, कपास रेट 5660, ग्वार 3660 एवं सरसों 6066 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास चल रहा है। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

पेट्रोल, डीजल व रसोई गैस की कीमतों में लगी आग, सिलेंडर 50 रुपए महंगा

पेट्रोल, डीजल व रसोई गैस की कीमतों में लगी आग, सिलेंडर 50 रुपए महंगा

रसोई गैस की कीमत : जानें, क्या है कीमत बढऩे का कारण? पेट्रोल-डीजल के भाव में एक सप्ताह से लगातार बढ़ोतरी कोरोना महामारी के बाद अब लोगों पर महंगाई की मार जारी है। पेट्रोल-डीजल के भाव लगतार बढ़ रहे हैं। वहीं रसोई गैस के की कीमतों में भी भारी बढ़ोतरी हुई है। इससे आम उपभोक्ता का बजट गड़बड़ा गया है। जानकारी के अनुसार पिछले एक सप्ताह से लगातार पेट्रोल-डीजल के भावों में इजाफा हो रहा है। रसोई गैस की कीमत मेें 50 रुपए की वृद्धि हो गई है। वहीं पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भी 26 पैसे प्रति लीटर की बढ़त हुई है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 अब कितनी कीमत पर मिलेगा घरेलू सिलेंडर मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद अब गैर सब्सिडी वाले 14.2 किलो के घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम 769 रुपए हो गए है। इसके पहले यह 719 रुपए का था। यह कीमत 14 फरवरी रात 12 बजे से ही लागू हो गई है। कीमतों में बढ़ोतरी होने के बाद एलपीजी के भाव में इजाफा होने के बाद अब दिल्ली के लोगों को 14.2 किलो वाले रसोई गैस सिलेंडर के लिए 769 रुपए चुकाने होंगे। इससे पहले 4 फरवरी को दिल्ली में गैस सिलेंडर के रेट 20-25 रुपए बढ़ा दिए गए और दिल्ली में इसकी कीमत 719 रुपए हो गई। इसी फरवरी माह में ये दूसरी बार है कि राजधानी में घरेलू गैस की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है। 14 फरवरी 2021 में की गई बढ़ोतरी के बाद अब गाजियाबाद में 14.2 किलो वाले रसोई गैस सिलेंडर 767 रुपए में मिलेगा। कोलकाता में रसोई गैस सिलेंडर 795.50 रुपए का हो गया है। वहीं चेन्नई में अब रसोई गैस सिलेंडर के लिए 785.00 रुपए चुकाने होंगे। इससे पहले दिल्ली में सिलेंडर 719, कोलकाता में रसोई गैस सिलेंडर के भाव 745.50 रुपए, चेन्नई में सिलेंडर 735.00 रुपए था। इससे पहले कब-कब हुई रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि इससे पहले दिल्ली में गैर-सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर के भाव को 694 रुपये से बढ़ाकर 719 रुपए किया गया था। इसके अलावा दिसंबर 2020 में भी दिल्ली में रसोई गैस सिलेंडर की कीमत में 50 रुपए का इजाफा हुआ था। वहीं एक फरवरी को सिर्फ कमर्शियल गैस सिलेंडर के भाव में 190 रुपए की वृद्धि हुई थी। इस कटौती के बाद देश की राजधानी में 19 किलो वाले सिलेंडर का भाव 1533.00 रुपए, कोलकाता में 1598.50 रुपए, मुंबई में 1482.50 रुपए और चेन्नई में 1649.00 रुपए हो गए थे। इस वक्त घरेलू रसोई गैस के भाव में बदलाव नहीं किया गया था। अब 14 फरवरी को घरेलू रसोई गैस की कीमतों में 50 रुपए की वृद्धि की गई है। यह भी पढ़ें : मौसम अनुकूल खेती : बिहार व हिमाचल प्रदेश के किसानों को मिलेगा प्रोत्साहन पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी जारी मीडिया में प्रकाशित खबरों के अनुसार पिछले एक सप्ताह से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी जारी है। सोमवार को भी दिल्ली में पेट्रोल-डीजल के दाम में 26 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई। दिल्ली में पेट्रोल के दाम 89 रुपए प्रति लीटर के करीब पहुंच गई है। इसक अलावा देश के कई शहरों में पेट्रोल 99 का आंकड़ा पार कर 100 के करीब पहुंचता दिख रहा है। कीमतों में बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में पेट्रोल 88.99 रुपए और डीजल 79.35 रुपए लीटर हो गया है। इसी तरह मुंबई में पेट्रोल 95.46 रुपए और डीजल 86.34 रुपए लीटर, चेन्नई में पेट्रोल 91.19 रुपए और डीजल 84.44 रुपए लीटर तथा कोलकाता में पेट्रोल 90.25 रुपए और डीजल 82.94 रुपए लीटर तक हो गया है। देश के प्रमुख चार शहरों में पेट्रोल-डीजल व रसोई गैस की वर्तमान कीमतें एक नजर में दिल्ली- पेट्रोल- 88.99 रुपए प्रति लीटर, डीजल-79.35 रुपए प्रति लीटर, रसाई गैस-769.00 रुपए मुंबई- पेट्रोल- 95.46 रुपए प्रति लीटर, डीजल- 86.34 रुपए प्रति लीटर, रसाई गैस- 719.00 रुपए कोलकाता- पेट्रोल- 90.25 रुपए प्रति लीटर, डीजल- 82.94 रुपए प्रति लीटर, रसाई गैस- 795.50 रुपए चेन्नई- पेट्रोल- 91.19 रुपए, डीजल प्रति लीटर- 84.44 रुपए प्रति लीटर, रसोई गैस- 785.00 रुपए पेट्रोल, डीजल व रसोई गैस की कीमतें बढऩे का कारण केंद्र सरकार वर्तमान में उपभोक्ताओं को घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बिक्री पर सब्सिडी देती है। रसोई गैस कनेक्शन वाले परिवारों को सिलेंडर खरीदने के बाद सब्सिडी की राशि सीधे उपभोक्ता के बैंक खाते में जमा हो जाती है। एलपीजी सब्सिडी और बढ़ती कीमतों को लेकर तीन दिन पहले पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने संसद में एक प्रश्न के जवाब में यह जानकारी दी थी। उन्होंने यह भी बताया था कि खुदरा तेल कंपनियां एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में समय-समय पर संशोधन करती हैं। कीमतों में बढ़ोतरी मुख्य रूप से एलपीजी के अंतरराष्ट्रीय दरों और मुद्रा (अमेरिकी डॉलर और भारतीय रुपए) के विनिमय दर पर निर्भर करती है। इस बात से देखा जाए तो पेट्रोल, डीजल व रसोई गैस की बढ़ती या घटती कीमतों पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं होता है। इसमें खुदरा तेल कंपनियां की भूमिका होती है। वे अंतरराष्ट्रीय दरों उतार-चढ़ाव को देखते हुए कीमतों में बढ़ोतरी या कमी करती हैं। यह भी पढ़ें : प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना : किसानों को 16000 करोड़ रुपए आवंटित ऐसे चेक करें एलपीजी की कीमत रसोई गैस सिलेंडर की कीमत चेक करने के लिए आपको सरकारी तेल कंपनी की वेबसाइट पर जाना होगा. यहां पर कंपनियां हर महीने नए रेट्स जारी करती हैं। (https://iocl.com/Products/IndaneGas.aspx) इस लिंक पर आप अपने शहर के गैस सिलिंडर के दाम चेक कर सकते हैं। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

बढऩे लगी खाद्य पदार्थों की कीमतें, लोगों की जेब पर पड़ेगा असर

बढऩे लगी खाद्य पदार्थों की कीमतें, लोगों की जेब पर पड़ेगा असर

जानें, किन रोजमर्रा की चीजों में आया उछाल और कितनी बढ़ी कीमतें? इन दिनों बाजारों में रोजमर्रा के काम आने वाली वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। विशेष कर खाद्य पदार्थों की कीमतों में यह बढ़ोतरी नजर आई है। पिछले पांच दिनों के दौरान प्याज, दालें, तेल, मसाले आदि की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे लोगों की जेब पर असर पड़ेगा। मीडिया से मिली जानकारी आधार पर विदेशी बाजारों में तेजी के रूख के बीच दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में मूंगफली, सरसों, मूंगफली तेल तिलहन और कच्चा पामतेल कीमतों में बढ़ोतरी दिखी है। वहीं इंदौर के संयोगितागंज अनाज मंडी में चना कांटा 125 रुपए, मसूर 100 रुपए, तुअर (अरहर) 300 रुपए और उड़द के भाव में 100 रुपए प्रति क्विंटल की तेजी आई। इससे चना की दाल 100 रुपए, मसूर की दाल 100 रुपए, तुअर की दाल 300 रुपए, मूंग की दाल 200 रुपए, मूंग मोगर 200 रुपए एवं उड़द मोगर 100 रुपए प्रति क्विंटल महंगी बिकी। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 धनिया के भाव भी चढ़े मसालों में धनिया वायदा में भी तेजी का रूख देखने को मिला है। मीडिया में प्रकाशित खबरों के हवाले से एनसीडीईएक्स में धनिया का अप्रैल वायदा कीमत 30 रुपए अथवा 0.48 प्रतिशत की तेजी के साथ 6,288 रुपए प्रति क्विंटल पहुंच गया। इसमें 2,195 लॉट का कारोबार हुआ। धनिया का मई वायदा भी 6,288 रुपए प्रति क्विंटल रहा, जिसमें पांच लॉट का कारोबार हुआ। विश्लेषकों के अनुसार हाजिर बाजार में मजबूती के रुख तथा उत्पादक क्षेत्रों से सीमित आपूर्ति के कारण धनिया वायदा में तेजी आई। बता दें कि अभी पिछले दिनों तक धनिया के भावों में मामूली गिरावट आई थी लेकिन अब फिर से इसके भावों में तेजी आने लगी है। रिफाइंड तेल की कीमतें उछली रिफाइंड सोया तेल वायदा में भी तेजी रही। एनसीडीईएक्स में इसका फरवरी वायदा 3.9 रुपए यानी 0.35 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,105 रुपए प्रति 10 किग्रा हो गया। इसमें 34,550 लॉट का कारोबार हुआ। इसी प्रकार रिफाइंड सोया तेल का मार्च वायदा 4.9 रुपए यानी 0.45 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,101.8 रुपए प्रति 10 किग्रा हो गया। इस अनुबंध में 25,105 लॉट का कारोबार हुआ। यह भी पढ़ें : न्यूनतम समर्थन मूल्य : मध्यप्रदेश में रबी फसलों की खरीद 15 मार्च से शुरू मेंथा ऑयल में तेजी, साबुन सैनिटाइजर व कफ सीरप बनने में होता है इस्तेमाल मेंथा ऑयल में तेजी देखने को मिली। इससे एमसीएक्स पर मेंथा ऑयल का फरवरी वायदा 9.20 रुपए या 0.96 फीसदी की तेजी के साथ 962.80 रुपए प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रहा था। इससे पहले मेंथा ऑयल का भाव 1.14 फीसदी की गिरावट के साथ 953.60 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ था। मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार ब्रोकरेज फर्म केडिया एडवाइजरी के एमडी अजय केडिया का कहना कि निचले स्तरों से मेंथा ऑयल में खरीदारी लौटी है क्योंकि भाव आकर्षक स्तरों पर आ चुके हैं। उनका कहना है कि इस साल मेंथा की बुआई में देरी के चलते आगे कीमतों को सपोर्ट मिल सकता है। बता दें कि फार्मा और एफएमसीजी कंपनियां साबुन, सैनिटाइजर और कफ सीरप बनाने में मेंथा ऑयल का इस्तेमाल करती हैं। इसके अलावा पान मसाला उद्योग में भी मेंथा ऑयल की काफी खपत होती है। प्याज भी आ रहा है अपने पुराने मिजाज में मंडियों में नया प्याज आने के बाद लग रहा था कि लोगों को महंगाई से राहत मिलेगी पर ऐसा होता नहीं दिख रहा। प्याज की कीमतें पिछले 5 दिनों 20 रुपये तक बढ़ गई हैं। उपभोक्ता मंत्रालय की वेबसाइट पर दिए गए आंकड़ों के मुताबिक एक फरवरी की तुलना में जयपुर में प्याज 25 रुपए से बढक़र 45 रुपए पर आ गया है। इस दौरान प्याज के रेट में 15 रुपए प्रति किलो की वृद्धि हुई है। इसके अलावा मुंबई, दिल्ली, मुजफ्फरपुर समेत देश के कई शहरों में प्याज की कीमतों में एक रुपए से लेकर 20 रुपए तक उछाल इन पांच दिनों में आया है। वैसे तो देश के अधिकतर शहरों में प्याज का खुदरा मूल्य 20 से 60 रुपए के बीच रहा, लेकिन अधिकतर शहरों में यह 50 रुपए के पार बिक रहा है। मुंबई में एक जनवरी को प्याज 44 रुपया था, जो बढक़र अब 54 रुपए पर पहुंच गया है। वहीं इंफाल, बालासोर, राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र वयनाड में 50 रुपए किलो है। जयपुर, रांची और लखनऊ में भी प्याज 50 रुपए प्रति किलो बिक रहा है। हालांकि रायगंज, इंफाल, श्रीनगर, नागपुर और कानपुर जैसे शहरों में प्याज एक से 10 रुपए तक सस्ता भी हुआ है। खाद्य पदार्थों की कीमतें बढऩे का क्या है कारण? मीडिया से मिली जानकारी के आधार पर तेल उद्योग के जानकार सूत्रों के अनुसार मलेशिया एक्सचेंज में लगभग 2.5 प्रतिशत और शिकागो एक्सचेंज में लगभग एक प्रतिशत का सुधार आया जिसकी वजह से सीपीओ तेल कीमत में सुधार देखने को मिली। उन्होंने बताया कि सरसों की अगली फसल आने में 15-20 दिन का समय रह गया है और इस बार बंपर फसल की उम्मीद की जा रही है। लेकिन बाजार में पुराने सरसों की मांग होने से सरसों दाना और उसकी तेल कीमतों में पर्याप्त सुधार देखने को मिली। उन्होंने कहा कि निर्यात की मांग होने के कारण मूंगफली दाना और उसके तेल कीमतों में भी पर्याप्त सुधार आया। सूत्रों ने कहा कि कच्चे सोयाबीन तेल की देश में आपूर्ति इस बार गुजरात की जगह मध्य प्रदेश से हो रही है और यहां से गुजरात को भी कच्चे सोयाबीन तेल की आपूर्ति की जा रही है। यह भी पढ़ें : मल्चर की पूरी जानकारी : खेत में चलाएं, मिट्टी की उर्वरा शक्ति और बढ़ाए खाद्य वस्तुओं के बाजार में थोक भाव बाजार में खाद्य पदार्थों की वस्तुओं के थोक भावों में सरसों तिलहन - 6,175 - 6,225 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपए प्रति क्विंटल, मूंगफली दाना - 5,590- 5,655 रुपए प्रति क्विंटल, मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात)- 14,000 रुपए प्रति क्विंटल, मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड तेल 2,240 - 2,300 रुपए प्रति टिन, सरसों तेल दादरी- 12,600 रुपए प्रति क्विंटल, सरसों पक्की घानी- 1,900 -2,050 रुपए प्रति टिन, सरसों कच्ची घानी- 2,030 - 2,145 रुपए प्रति टिन, तिल तेल मिल डिलिवरी - 11,100 -15,100 रुपए प्रति क्विंटल, सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 12,100 रुपए प्रति क्विंटल, सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 11,700 रुपए प्रति क्विंटल, सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 10,900 रुपए प्रति क्विंटल, सीपीओ एक्स-कांडला- 9,800 रुपए प्रति क्विंटल, बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 10,200 रुपए प्रति क्विंटल, पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 11,300 रुपए प्रति क्विंटल, पामोलिन कांडला 10,550 (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल, सोयाबीन तिलहन मिल डिलीवरी 4,675- 4,725 रुपए प्रति क्विंटल, लूज में 4,525- 4,560 रुपए प्रति क्विंटल, मक्का खल (सरिस्का) 3,525 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास चल रहा है। इंदौर मंडी भाव : दलहन: चना (कांटा) 4800 से 4825 प्रति क्विंटल, मसूर 5250 से 5300 प्रति क्विंटल, तुअर (अरहर) नई निमाडी 6100 से 6750 रुपए प्रति क्विंटल, तुअर सफेद (महाराष्ट्र) 6800 से 6900 प्रति क्विंटल, तुअर लाल (कर्नाटक) 7200 से 7300 प्रति क्विंटल, मूंग 7800 से 8200 रुपए प्रति क्विंटल, मूंग हल्की 6000 से 7000 रुपए प्रति क्विंटल, उड़द 7800 से 8400 रुपए प्रति क्विंटल, उड़द हल्की 6000 से 7500 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास रहा। दाल : तुअर (अरहर) दाल सवा नंबर 9100 से 9200 रुपए प्रति क्विंटल, तुअर दाल फूल 9300 से 9400 प्रति क्विंटल, तुअर दाल बोल्ड 9600 से 9800 प्रति क्विंटल, नई तुअर दाल 9900 से 10200 प्रति क्विंटल, चना दाल 5550 से 6050 प्रति क्विंटल, मसूर दाल 6250 से 6550 प्रति क्विंटल, मूंग दाल 8600 से 8900 प्रति क्विंटल, मूंग मोगर 9300 से 9700 प्रति क्विंटल, उड़द दाल 8600 से 9000 प्रति क्विंटल, उड़द मोगर 10300 से 11100 रुपए प्रति क्विंटल रहा। चावल : चावल में बासमती (921) 9000 से 9500, तिबार 7500 से 8000, दुबार 6500 से 7000, मिनी मोगरा 3500 से 5500, बासमती सैला 6500 से 8500, काली मूंछ 5000 से 7000, राजभोग 5900 से 6000, दूबराज 3500 से 4000, परमल 2500 से 2600, हंसा सैला 2450 से 2550, हंसा सफेद 2200 से 2300, पोहा 3200 से 3700 रुपए प्रति क्विंटल रहा। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

ग्वार सीड और धनिया के भावों में गिरावट, ग्वारगम में तेजी

ग्वार सीड और धनिया के भावों में गिरावट, ग्वारगम में तेजी

कृषि बाजार समाचार : जानें, प्रमुख मंडियों में फसलों के भाव इन दिनों बाजार में ग्वार सीड और धनिया के भावों में गिरावट आई है। वहीं ग्वारगम में तेजी देखने को मिली है। मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार ग्वार सीड की वायदा कीमतें कमजोर होने के कारण नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज में फरवरी डिलीवरी के लिए ग्वार सीड कॉन्ट्रैक्ट 13 रुपए या 0.33 फीसदी की गिरावट के साथ 3,903 रुपए प्रति क्विंटल था। इसमें 34,630 लॉट के लिए कारोबार हुआ। वहीं मार्च डिलीवरी के लिए ग्वार सीड की कीमतें 14 रुपए या 0.35 फीसदी घटकर 3,947 रुपए प्रति क्विंटल रही। इसी तरह वायदा कारोबार में ग्वार गम की कीमतें 1 रुपए की मजबूती के साथ 6,200 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गई। विश्लेषकों के अनुसार हाजिर में मांग आने से व्यापारियों ने अपने दांव लगाए जिससे ग्वार गम की कीमतों में बढ़ोतरी हुई। मार्च में डिलीवरी वाले अनुबंध की कीमत 4 रुपए या 0.06 प्रतिशत की गिरावट के साथ 6,268 रुपए प्रति पांच क्विंटल रही। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 धनिया के वायदा भाव में आई गिरावट वायदा कारोबार में धनिया के भवों में गिरावट देखने को मिली। नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज में अप्रैल में धनिया अनुबंध 24 रुपए या 0.38 प्रतिशत की गिरावट के साथ 6,220 रुपए प्रति क्विंटल हो गया। बाजार विश्लेषकों ने अनुसार हाजिर बाजार में मुख्य रूप से मांग घटने से धनिया की कीमतों में गिरावट आई। विभिन्न मंडियों में प्रमुख फसलों के भाव जोधपुर ऑनलाइन मंडी ग्वार का भाव 3300 से 3750 रुपए क्विंटल के आसपास रहा। रामगंज मंडी नया धनिया न्यूनतम 3800 - अधिकतम 6200 रुपए, धनिया बदामी न्यूनतम 5200 - अधिकतम 5151 रुपए, धनिया ईगल न्यूनतम 5500 - अधिकतम 5450, धनिया स्कुटर न्यूनतम 6000 रुपए- अधिकतम 5900 रुपए, धनिया रंगदार न्यूनतम 6100 - अधिकतम 7200 रुपए, धनिया रेन टच न्यूनतम 4500 रुपए- अधिकतम 4500 रुपए चल रहा है। वहीं अन्य फसलों में सोयाबीन न्यूनतम 3800 रुपए- अधिकतम 4511 रुपए, सरसों न्यूनतम 4500- अधिकतम 5521 रुपए, चना देशी न्यूनतम 3500 - अधिकतम 3950 रुपए, गेहूं न्यूनतम 1400 - अधिकतम 1700 रुपए, उड़द न्यूनतम 2500 - अधिकतम 6901 रुपए, अलसी न्यूनतम 4500 - अधिकतम 5000 रुपए, मसूर न्यूनतम 4500 - अधिकतम 5200 रुपए, इसबगोल न्यूनतम 8000 - अधिकतम 10000 रुपए, तारामीरा न्यूनतम 3000 - अधिकतम 3500 रुपए, लहसुन न्यूनतम 2000 - अधिकतम 8000 रुपए प्रति क्विंटल का भाव बना हुआ है। यह भी पढ़ें : हॉप शूट्स : दुनिया की सबसे महंगी सब्जी, कीमत 82 हजार रुपए प्रतिकिलो मंदसौर मंडी नया धनिया न्यूनतम 3000- अधिकतम 4800 रुपए, सोयाबीन न्यूनतम 3500 - अधिकतम 4800 रुपए, उड़द न्यूनतम 5000- अधिकतम 6800 रुपए, मसूर न्यूनतम 4000 - अधिकतम 5000 रुपए, अलसी न्यूनतम 4800 - अधिकतम 5400 रुपए, मक्का न्यूनतम 1000 - अधिकतम 1525 रुपए, इसबगोल न्यूनतम 9000 - अधिकतम 11000 रुपए, रायड़ा न्यूनतम 4000 - अधिकतम 5611 रुपए, गेहूं न्यूनतम 1500 - अधिकतम 1850 रुपए, विशाल चना न्यूनतम 3700 - अधिकतम 4300 रुपए, देशी चना न्यूनतम 3500 - अधिकतम 4300 रुपए रहा। नया ऊटी लहसुन न्यूनतम 1500 - अधिकतम 10500 रुपए के आसपास बना रहा। इंदौर मंडी भाव धनिया न्यूनतम 4000 - अधिकतम 5600 रुपए, सोयाबीन एवरेज न्यूनतम 3800 - अधिकतम 4660, गेहूं न्यूनतम 1400 - अधिकतम 1950, मक्का न्यूनतम 1000 - अधिकतम 1400 रुपए, मूंग न्यूनतम 4000 - अधिकतम 6150 रुपए, उड़द न्यूनतम 4500 - अधिकतम 6300 रुपए, तुअर न्यूनतम 4000 - अधिकतम 5000 रुपए, सरसों न्यूनतम 4800 - अधिकतम 5100 रुपए, तिल्ली न्यूनतम 7000 - अधिकतम 8000 रुपए, लहसुन बढिय़ा फूल गोल माल न्यूनतम 7000 - अधिकतम 10000 रुपए, लहसुन बढिय़ा लड्डू माल न्यूनतम 5000 - अधिकतम 8500 रुपए, लहसुन छोटा लड्डू न्यूनतम 4000 - अधिकतम 5500 रुपए, लहसुन हल्का लड्डू माल न्यूनतम 3500- अधिकतम 4500 रुपए, लहसुन मीडियम न्यूनतम 3000- अधिकतम 3800 रुपए के आसपास बना रहा। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

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