स्वराज ट्रैक्टर कोड लांच : बागवानी खेती के लिए बहुउद्देश्यीय ट्रैक्टर लांच

स्वराज ट्रैक्टर कोड लांच : बागवानी खेती के लिए बहुउद्देश्यीय ट्रैक्टर लांच

Posted On - 12 Nov 2021

स्वराज ट्रैक्टर कोड लांच : 12 एचपी का यह ट्रैक्टर पेट्रोल ईंधन में उपलब्ध

भारत के कृषि सकल घरेलू उत्पाद में बागवानी की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। भारतीय किसान परंपरागत कृषि को छोडक़र बागवानी, औषधीय खेती, सब्जियों की खेती, फलों की खेती आदि को अपना रहे हैं। बागवानी और सब्जियों की खेती के लिए एक सकरे या मिनी ट्रैक्टर की लंबे समय से दरकार थी, जो कृषि उपकरणों के साथ मल्टीपरपज कार्य कर सके। किसानों की समस्या को देखते हुए स्वराज ट्रैक्टर्स ने बागवानी खेती और सब्जियों की खेती के लिए स्वराज कोड ट्रैक्टर  (Swaraj code Tractor) लांच किया है। कोड ट्रैक्टर से किसानों की बागवानी खेती में मेहनत खत्म होगी और यह ट्रैक्टर बागवानी खेती के अधिकांश कार्य आसानी से कर सकेगा। 12 एचपी का यह ट्रैक्टर पेट्रोल ईंधन में दिया गया है। ट्रैक्टर जंक्शन की इस पोस्ट में आपको स्वराज कोड ट्रैक्टर बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है।

स्वराज कोड : बागवानी खेती में आएगी क्रांति 

भारतीय बागवानी खेती की परेशानी को देखते हुए स्वराज ट्रैक्टर कोड का निर्माण किया गया है। यह कृषि समाधान स्वदेशी रूप से डिजाइन किया गया है। सबसे संकरी और सबसे हल्की राइड-ऑन मशीन स्वराज कोड बागवानी खेती में क्रांति लाएगा। स्वराज ट्रैक्टर कोड का उपयोग करके किसान विभिन्न फलों और सब्जियों की खेती के लिए संकरी पक्तियों में इंटर कल्चर ऑपरेशन कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त, इस मशीन का छोटा टर्निंग रेडियस बागवानी फसलों की खेती करने वाले छोटे खेतों में बेहतर गतिशीलता प्रदान करता है।

सबसे पहले गुजरात, कर्नाटक, आंधप्रदेश और तेलंगाना में लांचिंग

स्वराज ट्रैक्टर कोड शुरू में गुजरात, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश और तेलंगाना में स्वराज डीलरशिप में लांच किया जाएगा और जल्द ही चरणबद्ध तरीके से अन्य राज्यों में शुरू किया जाएगा। आपको बता दें कि महिंद्रा ग्रुप के स्वराज ट्रैक्टर्स ने कोड ट्रैक्टर लांच किया है, जो देश में बागवानी खेती में बदलाव के लिए एक बहुउद्देश्यीय कृषि मशीनीकरण समाधान है।

स्वराज ट्रैक्टर कोड की कीमत किफायती, किसानों को होगा फायदा

स्वराज ट्रैक्टर कोड की कीमत किसानों के बजट के अनुसार तय की गई। कोड की लांचिंग के पीछे कंपनी का उद्देश्य किसान समुदाय को सस्ती और नवीन प्रौद्योगिकी तक आसान पहुंच प्रदान करना है। महिंद्रा एंड महिंद्रा के फार्म इक्विपमेंट सेक्टर के अध्यक्ष महेंद्र सिक्का के अनुसार भारत के कृषि सकल घरेलू उत्पाद में बागवानी की हिस्सेदारी बढ़ती जा रही है। उत्पादकता के हिसाब से इस सेगमेंट में विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। स्वराज कोड एक अभिनव कृषि मशीनीकरण समाधान है जो महिंद्रा फार्म इक्विपमेंट सेक्टर के ‘ट्रांसफॉर्म फार्मिंग एंड एनरिचिंग लाइफ’ के उद्देश्य से पूरी तरह से मेल खाता है। 

बागवानी में मशीनीकरण की बेहद संभावनाएं

स्वराज ट्रैक्टर कोड की विशेषताएं बताते हुए स्वराज ट्रैक्टर्स के सीईओ हरीश चव्हाण ने कहा कि देश के बागवानी खंड में मशीनीकरण की बहुत बड़ी संभावना है। स्वराज कोड एक विशेष रूप से तैयार की गई मशीन है जिसे गहन उपभोक्ता अंतर्दृष्टि के साथ विकसित किया गया है, जो बागवानी खेती में किसानों की जरूरतों को पूरा करता है। वर्तमान में बागवानी में मानव और पशुश्रम की बहुत ज्यादा भागीदारी है जिससे लागत ज्यादा आती है। स्वराज ट्रैक्टर कोड लांच करना इस खंड में मशीनीकरण लाने की दिशा में एक अग्रणी कदम है। स्वराज कोड को अद्वितीय क्षमताओं के साथ लांच किया गया है, कोड बागवानी खेती से जुड़ी सभी समस्याओं को दूर करने में मदद करता है। इसे 'खेती की दुनिया का सबसे पहला यस मशीन' कहा जा रहा है। कोड जैसी मशीनों की मदद से अधिक भूमि में खेती की जा सकती है जिससे किसानों की आय में वृद्धि होती है।

स्वराज ट्रैक्टर कोड के खास फीचर्स

ड्यूल ग्राउंड क्लीयरेंस : इस मशीन की सबसे खास बात यह है कि फसल की ऊंचाई के साथ-साथ इसका ग्राउंड क्लीयरेंस बढ़ाया जा सकता है जिससे मैन्युअल संचालन पर निर्भरता कम हो जाती है।

द्वि-दिशात्मक ड्राइविंग :  द्वि-दिशात्मक सुविधा मशीन के सामने लगे अटैचमेंट के साथ संचालन को सक्षम बनाती है जो इसे धान में रीपर ऑपरेशन के लिए बेहद उपयुक्त बनाती है।

छोटा टर्निंग रेडियस : इस मशीन का छोटा टर्निंग रेडियस बागवानी फसलों की खेती करने वाले छोटे खेतों में बेहतर गतिशीलता प्रदान करता है।

स्वराज ट्रैक्टर कोड की कीमत

स्वराज ट्रैक्टर्स के सीईओ हरीश चव्हाण के अनुसार स्वराज ट्रैक्टर कोड की कीमत अभी घोषित नहीं की गई हैं। कंपनी इस महीने के अंत में उत्पाद की कीमत की घोषणा करेगी। चव्हाण ने बताया कि वर्तमान में देश के कृषि सकल घरेलू उत्पाद में बागवानी खंड की हिस्सेदारी लगभग 30 प्रतिशत है। जबकि क्षेत्र का कवरेज सिर्फ 17 प्रतिशत है। लोग इस सेगमेंट में पीछे हैं क्योंकि उन्हें यह गतिविधि मुश्किल लगती है। बागवानी फसलें बहुत लाभकारी होती हैं और अगर अधिक भूमि पर खेती की जाए तो किसानों को बहुत ज्यादा फायदा पहुंचता है।

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