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कोरोना वैक्सीन की दूसरी डोज का अंतर किया कम, इन लोगों को मिलेगी प्राथमिकता

कोरोना वैक्सीन की दूसरी डोज का अंतर किया कम, इन लोगों को मिलेगी प्राथमिकता

कोरोना वैक्सीन : अब नहीं करना होगा 84 दिनों का इंतजार

देश और दुनिया में कोरोना के फैलाव को देखते हुए लोगों को टीका लगाने पर जोर दिया जा रहा है। भारत में कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए सरकार पूरा प्रयास कर रही है। अभी हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों को फ्री वैक्सीन लगाने की घोषणा भी की। लोग जागरूक होकर वैक्सीन लगावा  रहे हैं। बीते माह वैक्सीन की कमी से कई राज्य जुझ रहे थे जिस पर कोरोना की पहली और दूसरी डोज में अंतर को 84 दिनों तक बढ़ा दिया गया था। लेकिन अब दुबारा से इन दो वैक्सीनों के अंतर को कम कर दिया गया है। इसके लिए नई गाइडलाइन भी जारी की गई हैं। इसके अनुसार केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने एक बार फिर कोविशील्ड के पहले और दूसरे डोज के बीच का अंतर कम कर दिया है। दूसरे डोज का गैप दो बार बढ़ाया गया, लेकिन इस बार यह गैप घटाया गया है। ये सिर्फ उनके लिए है, जो विदेश यात्रा पर जा रहे हैं। नई गाइडलाइन के बाद अब कुछ श्रेणियों के लिए 84 दिन का इंतजार करने की जरूरत नहीं है। अब 28 दिन के बाद भी कोविशील्ड का दूसरा डोज लगाया जा सकता है। हालांकि, कोवैक्सीन के लिए दो डोज के बीच का अंतर अभी भी 28 दिन ही है। उसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है।

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कोविशील्ड के दोनों डोज के गैप में कितनी बार हुआ बदलाव

कोविशील्ड के दोनों डोज के गैप में तीसरी बार बदलाव किया गया। 16 जनवरी से शुरू हुए वैक्सीनेशन में पहले 28 से 42 दिन तका अंतर था। फिर 22 मार्च को यह गैप बढ़ाकर 6-8 हफ्ते कर दिया गया। इसके बाद 13 मई को यह अंतर 12-16 हफ्ते कर दिया गया।

 

क्या है इस नई गाइडलाइन में

मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य मंत्रालय की नई गाइडलाइन उनके लिए है, जिनको कोविशील्ड का पहला डोज लग चुका है और उन्हें विदेश यात्रा पर जाना है। यह विदेश यात्रा पढ़ाई, रोजगार और ओलंपिक टीम के लिए हो सकती है। ऐसे लोगों को कोविशील्ड के दूसरे डोज के लिए 84 दिन का इंतजार नहीं करना होगा। वह इससे पहले भी दूसरी डोज भी लगवाया जा सकता है।


कोरोना गाइडलाइन का पालन नहीं किया तो बढ़ सकते हैं आंकड़े

इन दिनों देश में कोरोना का ग्राफ तेजी से नीचे जाता दिखाई दे रहा है। कोरोना के दूसरी लहर भले ही कमजोर पड़ चुकी है लेकिन खतरा अभी भी बरकरार है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक कोरोना गाइडलाइन का पालन नहीं किया गया तो ये आंकड़े फिर से बढ़ सकते हैं। पिछले 24 घंटों की बात करें तो देश में कोरोना संक्रमण के 91 हजार 702 नए मामले सामने आए, जबकि 3403 मरीजों को अपनी जान गंवानी पड़ी। कोरोना के नए मामले सामने आने के बाद अब देश में कुल संक्रमित मरीजों की संख्या 2 करोड़ 92 लाख 74 हजार 823 हो गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, देश में अब तक कोरोना से 11 लाख 21 हजार 671 एक्टिव केस हैं, जबकि 2 करोड़ 77 लाख 90 हजार 73 लोग ठीक होकर अपने घर जा चुके हैं. देश में अब तक कोरोना से 3 लाख 63 हजार 79 लोगों की मौत हो चुकी है। 

 

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अब तक किन राज्यों में सबसे अधिक हुआ टीकाकरण

कोरोना की दूसरी लहर के बीच भारत के गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और राजस्थान राज्यों में सबसे अधिक टीकाकरण हुआ। महाराष्ट्र में अभी तक 2,10,48,169 लोगों का टीकाकरण हुआ है। जबकि उत्तर प्रदेश में 1,65,43,234, राजस्थान में 1,61,83,750 जबकि गुजरात में 1,57,02 376 लोगों का टीकाकरण हुआ है।


इस राज्य में अब भी सबसे कम टीकाकरण

दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु में अब तक सबसे कम लोगों ने कोरोना की वैक्सीन लगवाई है। मीडिया में प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार राज्य में अब तक केवल नौ फीसदी आबादी को ही टीका लगाया जा सका है। इस लिहाज से देखा जाए, तो वैक्सीन लगाने के मामलों में तमिलनाडु का नाम सबसे निचले पांच राज्यों में शामिल है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, असम, बिहार और झारखंड में भी टीके के आंकड़े भी इतने अच्छे नहीं है। आंकड़े के अनुसार 7 करोड़ आबादी वाले तमिलनाडु में केवल नौ प्रतिशत जनसंख्या को वैक्सीन का पहला डोज मिला है। 


यूपी के चार जिले हुए कोरोना मुक्त, वैक्सीनाइजेशन बढ़ाने पर जोर

उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमण की रफ्तार तेजी से थमती नजर आ रही है। उत्तर प्रदेश के 4 जिले गुरुवार को कोरोना मुक्त हो गए हैं। वहीं करीब 20 लाख से ऊपर की आबादी वाले अन्य 54 जिलों में भी किसी में एक तो किसी में 2 समेत कोरोना संक्रमण के मामले अधिकतम 10 अंकों तक सिमट गए हैं। मौजूदा समय में उत्तर प्रदेश में कोरोना की पॉजिटिविटी दर मात्र 0.3 फीसदी है, जबकि रिकवरी दर 98 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। यूपी में अब तक 02 करोड़ 15 लाख 88 हजार 323 लोगों का टीकाकरण किया जा चुका है। उत्तर प्रदेश में औसतन रोजाना 4 लाख लोगों को वैक्सीन लगाई जा रही है। सीएम के निर्देश पर आने वाले दिनों में 5 से 6 लाख लोगों को रोजाना वैक्सीन लगाने का लक्ष्य तय किया गया है। वहीं सीएम ने जुलाई माह में रोजाना 10 से 12 लाख लोगों का वैक्सीनेशन करने का लक्ष्य निर्धारित करते हुए वैक्सीन लगवाने वालो की भी संख्या बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाने के भी निर्देश दे दिए हैं।


वैक्सीन की वेस्टेज इन राज्यों में सबसे अधिक

स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से जारी किए गए डाटा के मुताबिक देश में तीन राज्य वैक्सीन वेस्टेज के मामले में टॉप पर है। इन राज्यों में हरियाणा, असम और राजस्थान में वैक्सीन वेस्टेज सबसे ज्यादा है। सबसे ज्यादा वैक्सीन का वेस्टेज हरियाणा में है, जोकि 6.49 फीसदी है. वहीं दूसरे नंबर पर असम है, जिसमें वैक्सीन वेस्टेज 5.92 फीसदी है. तीसरे नंबर पर राजस्थान है, जिसमें वैक्सीन वेस्टेज का आंकड़ा 5.68 फीसदी है। वैक्सीन वेस्टेज में चौथे नंबर पर मेघालय है, जहां 5.67 फीसदी कोरोना टीका वेस्ट हुआ है। वहीं बिहार में 5.20 फीसदी, मणिपुर में 5.19 फीसदी, पंजाब में 4.94 फीसदी, दादर एन्ड नागर में 4.85, तमिलनाडु में 4.13 जबकि नागालैंड में वैक्सीन वेस्टेज 3.36 फीसदी है।


इधर भारत की कोवैक्सीन को अमेरिका में नहीं मिली मंजूरी

मीडिया में प्रकाशित खबरों के हवाले से अमेरिका में भारत बायोटेक की कोवैक्सीन के इमरजेंसी यूज को मंजूरी नहीं मिल सकी है। अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन यानी एफडीए ने भारत बायोटेक की कोविड वैक्सीन के आपातकालीन उपयोग प्राधिकरण (ईयूए) के आवेदन को खारिज कर दिया है, जिससे अमेरिका में कंपनी को वैक्सीन लॉन्च में देरी हो रही है। बता दें कि बीते दिनों भारत बायोटेक की कोवैक्सीन के लिए अमेरिकी साझेदार ओक्यूजेन ने अमेरिकी दवा नियामक एफडीए के पास मास्टर फाइल भेजकर इस टीके के आपातकालीन इस्तेमाल की इजाजत मांगी थी। इधर, भारत बायोटेक के अमेरिकी पार्टनर ओक्यूजेन ने कहा कि कंपनी अब कोवैक्सिन की पूरी मंजूरी मांगेगी। दरअसल, यूएस एफडीए कंपनी को एक अतिरिक्त परीक्षण शुरू करने के लिए कह रहा है, ताकि कंपनी एक बायोलॉजिक्स लाइसेंस आवेदन (बीएलए) के लिए फाइल कर सके, जो कि एक पूर्ण मंजूरी है। बता दें कि कोवैक्सीन को लेकर यह डेवलपमेंट ऐसे समय में आई है, जब भारत बायोटेक भारत के टीकाकरण कार्यक्रम में कंपनी के टीके को शामिल किए जाने के लगभग छह महीने बाद अपने तीसरे चरण के क्लिनिकल ट्रायल के डेटा साझा नहीं करने के लिए भारत में आलोचना का शिकार हो रहा है। 

 

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