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सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाओं से किसानों को तोहफा

सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाओं से किसानों को तोहफा

सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाओं के लिए 3,971 करोड़ के सस्ते लोन मंजूर

केंद्र सरकार की ओर से कृषि क्षेत्र में काफी योजनाओं को मंजूरी दी जा रही है। उनमें से हाल ही में केंद्रीय कृषि मंत्रालय की ओर से सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाओं को लागू करने के लिए 3,971.31 करोड़ रुपए के ऋण को मंजूरी दी गई है। इससे तमिलनाडु, हरियाणा, गुजरात, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, पंजाब व उत्तराखंड राज्य के किसानों को फायदा होगा। मीडिया को दी जानकारी में केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने कहा कि उसने सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाओं को लागू करने के लिए 3,971.31 करोड़ रुपए के ऋण को मंजूरी दी है, जिसके लिए सब्सिडी दी जाएगी। सबसे अधिक ऋण तमिलनाडु के लिए मंजूर किया गया है। सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाओं को लागू करने के लिए राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के तहत बनाए गए सूक्ष्म सिंचाई कोष (एमआईएफ) के तहत ब्याज छूट के साथ कर्ज दिया जा रहा है। वर्ष 2019-20 में चालू किए गए इस फंड की कुल राशि 5,000 करोड़ रुपए है। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि एमआईएफ की संचालन समिति ने 3,971.31 करोड़ रुपए के ऋण के लिए परियोजनाओं को मंजूरी दी है।

 

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सूक्ष्म सिंचाई परियोजना : किस राज्य के लिए कितनी राशि मंजूर

इसमें तमिलनाडु के लिए सबसे अधिक 1,357.93 करोड़ रुपए का ऋण मंजूर किया गया है, जिसके बाद हरियाणा के लिए 790.94 करोड़ रुपए, गुजरात के लिए 764.13 करोड़ रुपए, आंध्र प्रदेश के लिए 616.13 करोड़ रुपए, पश्चिम बंगाल के लिए 276.55 करोड़ रुपए, पंजाब के लिए 150 करोड़ रुपए और उत्तराखंड के लिए 15.63 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं। हालांकि, नाबार्ड ने अभी तक राज्यों को कुल 1,754.60 करोड़ रुपए की ऋण राशि जारी की है। इसमें से लगभग 659.70 करोड़ रुपए हरियाणा, तमिलनाडु और गुजरात को दिए गए हैं।

 


राजस्थान में परियोजना सुरक्षा राशि जमा कराने की अंतिम तिथि अब 7 दिसंबर तक बढ़ाई

प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (कुसुम योजना (कंपोनेंट-ए) में किसानों की बंजर/अनुपयोगी भूमि पर राजस्थान विद्युत वितरण निगमों के 33 तथा 11 के.वी. के सब स्टेशन सेे 5 किलो मीटर के अंदर 500 किलोवॉट से 2 मेगावॉट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना के लिए परियोजना सुरक्षा राशि जमा करा कर विद्युत क्रय अनुबन्ध करने की अंतिम तिथि 7 दिसंबर 2020 कर दी गई है।

पहले इसकी अंतिम तिथि 10 नवंबर थी। राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. सुबोध अग्रवाल ने बताया कि कुसुम योजना -कंपोनेंट-ए के अंतर्गत प्रदेश में सौर ऊर्जा से विद्युत उत्पादन के लिए कुल 722 मेगावॉट क्षमता के लिए 623 सौर ऊर्जा उत्पादकों को आंवटन पत्र जारी किए गए थे, जिनमें से अब तक 168 मेगावॉट क्षमता के लिए 162 सौर ऊर्जा उत्पादकों द्वारा विद्युत क्रय अनुबन्ध हेतु अपने आवेदन प्रस्तुत किए जा चुके हैं।


सूक्ष्म सिंचाई योजना : मध्यप्रदेश में घरेलू संयोजनों पर सोलर रूफटाप लगाने के लिए रेट तय किए

इधर मध्यप्रदेश राज्य की मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने घरेलू संयोजनों पर सोलर रूफटाप लगाने के लिये निविदा के माध्यम से रेट तय कर ठेकेदारों (एजेंसियों) को कार्य आवंटित कर दिया है। तय रेट विगत वर्षों से काफी कम हैं जो कि तीन कि.वा. तक रेट 37000/- प्रति कि.वा. तथा 3 से 10 कि.वा. तक रेट 39,800/- प्रति कि.वा. है। इसमें 3 कि.वा. तक 40 प्रतिशत तथा 3 कि.वा. से अधिक शेष भार पर 20 प्रतिशत सब्सिडी शामिल है। रेट, सब्सिडी, अधिकृत एजेंसी व तकनीकी विवरण की विस्तृत जानकारी मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी की वेबसाइट portal.mpcz.in या निकटतम बिजली कार्यालय से प्राप्त की जा सकती है।


घर पर सोलर प्लांट लगाने पर कितना आएगा खर्चा / सोलर प्लांट

• एक कि.वा. से ऊपर – 3 कि.वा. तक – रुपए 37000/- प्रति कि.वा.
• 3 कि.वा. से ऊपर -10 कि.वा. तक- रुपए 39800/- प्रति कि.वा.
• 10 कि.वा. से ऊपर -100 कि.वा. तक – रुपए 36500/- प्रति कि.वा.
• 100 कि.वा. से ऊपर -500 कि.वा. तक – रुपए 34900/- प्रति किवा.

 

वेबसाईट / टोल फ्री नंबर

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने कहा है कि उक्त राशि में सब्सिडी शामिल है, सब्सिडी घटाकर एजेन्सी को भुगतान की जाने वाली राशि 3 कि.वा. हेतु 66600 रुपए और 5 कि.वा. पर 135320 रुपए है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि कंपनी द्वारा दिए तकनीकी विवरण के कार्य के लिए उक्त राशि से अधिक भुगतान नहीं करें। गु्रप हाउसिंग सोसायटी को कॉमन सुविधा वाले संयोजन पर 500 कि.वा. तक (10 कि.वा. प्रति घर) 20 प्रतिशत की सब्सिडी मिलेगी। कंपनी द्वारा अधिकृत एजेंसी, तकनीकी विवरण, सब्सिडी व भुगतान की जाने वाली राशि की जानकारी के लिए विद्युत वितरण कंपनी के निकटतम कार्यालय, कंपनी की वेबसाईट portal.mpcz.in पर देखें या टोल फ्री नंबर 1912 पर संपर्क किया जा सकता है।

 

 

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सौर ऊर्जा में युवाओं को मिलेगा रोजगार, सरकार देगी प्रशिक्षण

सौर ऊर्जा में युवाओं को मिलेगा रोजगार, सरकार देगी प्रशिक्षण

आवेदन की अंतिम तारीख 28 फरवरी, जानें, कौन ले सकता है प्रशिक्षण और कहां करें आवेदन? वर्तमान में सरकार की ओर से सौर ऊर्जा को काफी बढ़ावा दिया जा रहा है। इसको लेकर केंद्र सरकार की ओर प्रधानमंत्री कुसुम योजना चलाई जा रही है जिसके तहत किसानों को सोलर पंप दिए जा रहे है। इससे किसानों को सिंचाई में सुविधा होगी वहीं वे अतिरिक्त बिजली उत्पादन कर उसे ग्रिड को बेच सकेंगे। इससे उन्हें अतिरिक्त आमदनी होगी। किसानों के खेत में सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने के लिए सरकार सब्सिडी भी दे रही है। इसी के साथ अब राज्य सरकार की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन को लेकर युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि उन्हें सौर ऊर्जा के क्षेत्र में रोजगार मिल सके। इसी क्रम में मध्यप्रदेश में सौर ऊर्जा क्षेत्र में निवेश की असीम संभावनाओं और उपयोग को देखते हुए युवा उद्यमियों के लिए सौर ऊर्जा टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में कौशल विकास के लिए मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम और राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के साथ एनर्जी स्वराज फाउंडेशन 5 से 10 अप्रैल 2021 तक छह दिन का सशुल्क व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रैक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 प्रत्येक जिले से 10 लोगों को दिया जाएगा प्रशिक्षण योजना के तहत मध्यप्रदेश राज्य के प्रत्येक जिले से सिर्फ दस लोगों को प्रशिक्षण दिए जाने का लक्ष्य है। यह प्रशिक्षण आई.आई.टी बॉम्बे के प्रोफेसर, एनर्जी स्वराज फाउंडेशन के संस्थापक एवं मध्यप्रदेश के सौर ऊर्जा के ब्रांड एम्बेसेडर प्रोफेसर चेतन सिंह सोलंकी और उनके मास्टर ट्रेनर्स द्वारा राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, भोपाल में दिया जाएगा। प्रशिक्षण से युवाओं को क्या लाभ? प्रशिक्षण प्राप्त युवा उद्यमी सौर पी.वी. टेक्नोलॉजी एवं सिस्टम डिजाइन में सैद्धांतिक ज्ञान के अतिरिक्त सौर पी.वी. सिस्टम के इंस्टॉलेशन में पारंगत होंगे। वे सिस्टम के इंस्टालेशन की लागत-व्यय आदि की गणना सीखेंगे और साथ-साथ सोलर के वर्तमान मार्केट एवं व्यापार की संभावनाओं और नए विकल्पों से भी परिचित होंगे। प्रशिक्षण के बाद युवा उद्यमी ऑफ-ग्रिड रूफ टॉप सोलर पी.वी. सिस्टम को डिजाइन कर स्थापित कर पाएंगे। कौन कर सकता है प्रशिक्षण के लिए आवेदन सौर उर्जा टेक्नोलॉजी में प्रशिक्षण लेने हेतु आवेदन कोई भी आई.टी.आई/डिप्लोमा/इंजीनियरिंग/विज्ञान में स्नातक और अधिकतम 40 वर्ष आयु का व्यक्ति इस प्रशिक्षण में शामिल हो सकता है। स्नातक कर रहे विद्यार्थी या सरकारी क्षेत्र में पूर्णकालिक सेवाएं दे रहे लोग पात्र नहीं हैं। यह भी पढ़ें : ग्रामीण ऋण मुक्ति विधेयक : अब किसानों का ब्याज सहित कर्जा होगा माफ प्रशिक्षण के लिए कहां से प्राप्त करें आवेदन प्रदेश के हर जिले के केवल दस लोगों को पहले-आओ-पहले-पाओ के आधार पर चुना जाएगा। प्रशिक्षण में शामिल होने हेतु आवेदन की अंतिम तारीख 28 फरवरी है। आवेदन-पत्र ई-मेल ([email protected]) पर मेल करके प्राप्त किये जा सकते हैं। एनसीईआरटी ने तैयार किए प्रौढ़ शिक्षा के लिए 13 थीम एनसीईआरटी ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप प्रौढ़ शिक्षा अभियान के शिक्षार्थियों के लिए भाषा और गणित को शामिल करते हुए 13 विषयों (थीम) पर पाठ्य प्रवेशिका एवं मार्गदर्शिका तैयार की है। मीडिया में प्रकाशित खबरों के अनुसार एनसीईआरटी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रौढ़ शिक्षा अभियान के तहत वयस्क शिक्षार्थियों के लिए चार प्रवेशिकाएं तैयार की गई हैं। ये प्रवेशिकाएं समेकित रूप से बनाई गई हैं, जिनमें भाषा और गणित दोनों शामिल हैं। विषय सामग्री के रूप में 13 विषय (थीम) तय किए गए हैं। सरकार ने वर्ष 2030 तक शत-प्रतिशत साक्षरता हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी प्रौढ़ शिक्षा को लेकर कई सुझाव दिए गए हैं। ऐसे में एनसीईआरटी ने उड़ान शिक्षा की नाम से प्रौढ़ शिक्षा मार्गदर्शिका और चार प्रवेशिकाएं तैयार की हैं। इन प्रवेशिकाओं में परिवार एवं पड़ोस, बातचीत, पर्यावरण, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, कानूनी साक्षरता, आपदा प्रबंधन, डिजिटल साक्षरता आदि शामिल हैं। भाषा खंड के तहत इन्हीं विषयों से जुड़ी रोचक सामग्री को शामिल करते हुए हिन्दी भाषा और अंकगणित को पढऩा लिखना सुगम बनाया गया है। बता दें कि अधिकाश: प्रौढ़ शिक्षा केंद्रों गांवों में संचालित किए जाते हैं। इसका उद्देश्य गांव में रहने वाले कम पढ़े या अनपढ़ लोगों को शिक्षित करना है। प्राय: ये प्रौढ़ शिक्षा केंद्र रात्रि में संचालित किए जाते हैं ताकि गांव के किसान अपने खेती के काम के बाद यहां पढ़ाई कर शिक्षित हो सकें। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

ग्रामीण ऋण मुक्ति विधेयक : अब किसानों का ब्याज सहित कर्जा होगा माफ

ग्रामीण ऋण मुक्ति विधेयक : अब किसानों का ब्याज सहित कर्जा होगा माफ

जानें, क्या है ग्रामीण ऋण मुक्ति विधेयक और किन किसानों के कर्ज होंगे माफ? किसान आंदोलन के बीच एक खुशखबर आई है। अब किसानों का ब्याज सहित कर्जा माफ किया जाएगा। इसके लिए मध्यप्रदेश सरकार राज्य के किसानों को सूदखोर साहूकारों के चंगुल से मुक्त कराने के लिए जल्दी ही मध्यप्रदेश ग्रामीण ऋण मुक्ति विधेयक-2020 लाने वाली है। इससे राज्य के कई लाख किसानों को फायदा होगा। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रैक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 मध्य प्रदेश ग्रामीण ऋण मुक्ति विधेयक-2020 को मंजूरी मीडिया में प्रकाशित खबरों के हवाले से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ‘मध्य प्रदेश ग्रामीण ऋण मुक्ति विधेयक-2020’ ऐसे सूदखोर साहूकारों के चंगुल से जनता को मुक्त करेगा, जो बिना वैध लाइसेंस के मनमानी दरों पर ऋण देते और वसूलते हैं। ऐसे भूमिहीन कृषि श्रमिकों, सीमान्त किसानों तथा छोटे किसानों को 15 अगस्त 2020 तक लिए गए सभी ऋण शून्य किए जाएंगें। बता दें कि मंगलवार को हुई शिवराज केबिनेट की बैठक हुई जिसमें ग्रामीण ऋण विमुक्ति विधेयक 2020 को मंजूरी दे दी है। इसके तहत 15 अगस्त 2020 तक भूमिहीन कृषि श्रमिक, सीमांत और छोटे किसानों को गैर लाइसेंसी साहूकारों से लिया गया कर्ज और ब्याज की रकम न तो चुकानी होगी और न ही उनसे वसूली की जा सकेगी। क्या है ग्रामीण ऋण मुक्ति विधेयक राज्य के मंत्रिपरिषद ने मध्यप्रदेश ग्रामीण (सीमान्त व छोटे किसान तथा भूमिहीन कृषि श्रमिक ) ऋण विमुक्ति विधेयक 2020 के संबंध में संविधान के अनुच्छेद 304(बी) के परन्तुक के अनुसरण में विधेयक को विधान सभा में पुर्नस्थापित करने के पहले राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त एवं विधान सभा से पारित कराने की सभी कार्यवाही के लिए राजस्व विभाग को अधिकृत किया है। ग्रामीण क्षेत्रों के भूमिहीन कृषि श्रमिकों, सीमान्त किसानों तथा छोटे किसानों (राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों में निवासरत मध्यप्रदेश की अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों को छोडक़र) को, नियमों व प्रक्रिया के विरूद्व तथा अत्यन्त ऊँची ब्याज दरों पर दिये गये ऋण की समस्या का निरंतर सामना करना पड़ रहा है। इसका परिणाम ऐसे व्यक्तियों की वित्तीय हानि, मानसिक प्रताडऩा तथा शोषण के रूप में निकलता है। ऐसे भूमिहीन कृषि श्रमिकों, सीमान्त किसानों तथा छोटे किसानों को 15 अगस्त 2020 तक उन्हें दिए गए कतिपय ऋणों जिनमें ब्याज की राशि शामिल है, के उन्मोचन द्वारा राहत देने के लिए मध्यप्रदेश ग्रामीण (सीमान्त व छोटे किसान तथा भूमिहीन कृषि श्रमिक) ऋण विमुक्ति विधेयक, 2020 प्रस्तावित किया गया है। यह भी पढ़ें : ऋण समाधान योजना : 31 जनवरी से पहले ऋण जमा कराएं, 90 प्रतिशत तक छूट पाएं इन किसानों के कर्ज होंगे माफ इन किसानों को मिलेगा लाभ राजस्व मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया, विधेयक लागू होने से तीन श्रेणी के किसानों को इसका लाभ मिलेगा। पहला- भूमिहीन कृषि श्रमिक, जिनके पास जमीन नहीं है और वे अन्य किसी के खेत में मजदूरी करते हैं या बटाई पर खेती करते हैं। दूसरा - सीमांत किसान, जिनके पास आधा हेक्टेयर सिंचित या 1 हेक्टेयर तक सिंचित जमीन है। तीसरा- छोटे किसान, जिनके पास 1 हेक्टेयर तक सिंचित या 2 हेक्टेयर तक असिंचित जमीन है। उन्होंने बताया कि इससे पहले अनुसूचित क्षेत्रों के अनुसूचित-जनजाति वर्ग के व्यक्तियों को गैस लाइसेंसी साहूकारों से मुक्ति दिलाने का कानून लागू किया जा चुका है। विधेयक का उल्लंघन करने पर सजा व जुर्माने का प्रावधान यदि कोई गैस लाइसेंसी साहूकार इस विधेयक का उल्लंघन करता है, तो उसके लिए 3 साल की सजा और एक लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इतना ही नहीं, सिविल न्यायालय में गैर अधिनियम के दायरे में आने वाले प्रकरण की सुनवाई नहीं होगी। ऋण वसूली के लिए राजस्व प्रक्रिया के तहत चल रही कार्रवाई भी समाप्त हो जाएगी। विधेयक को राज्यपाल की मंजूरी के बाद सरकार इसे विधान सभा में पारित कराकर लागू करेगी। यह भी पढ़ें : गेहूं की फसल में अधिक सिंचाई से हो सकता है नुकसान वैध लाइसेंस धारी साहूकार दे सकेंगे ऋण मीडिया में प्रकाशित खबरों के अनुसार मुख्यमंत्री ने कहा मध्य प्रदेश ग्रामीण ऋण मुक्ति विधेयक-2020 में वैध लाइसेंस धारी साहूकार सरकार की ओर से तय दर पर ऋण दे सकेंगे। वे नियमानुसार ऋण देकर उसकी वसूली कर सकेंगे। इसके साथ ही ऐसे किसान जो मजदूरों को अग्रिम/ऋण देते हैं, उन पर भी कोई बंधन नहीं रहेगा। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के पांच वर्ष पूरे, 90 हजार करोड़ रुपए के दावों का भुगतान

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के पांच वर्ष पूरे, 90 हजार करोड़ रुपए के दावों का भुगतान

पीएमएफबीवाई : ऐसे उठाएं इस योजना से फायदा, जानें, कैसे करें आवेदन? किसानों को प्राकृतिक आपदा जैसे- अति बारिश, आंधी, ओलावृष्टि, भूंकप आदि प्राकृतिक आपदा से फसल को हुई हानि की भरपाई के लिए केंद्र सरकार की ओर से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना शुरू की गई। सरकार ने इस योजना को 13 जनवरी, 2016 को लागू किया गया था। इस योजना ने 13 जनवरी 2021 को अपने पांच वर्ष पूरे कर दिए हैं। सरकार की ओर से शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य प्राकृतिक आपदा से हुए फसली नुकसान से किसानों को राहत प्रदान करना है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana : हर साल 5.5 किसान करते हैं आवेदन कृषि मंत्रालय के अनुसार, इस योजना में साल भर में 5.5 करोड़ किसानों के आवेदन आते हैं। अब तक, योजना के तहत 90,000 करोड़ रुपए के दावों का भुगतान किया जा चुका है। आधार सीडिंग ने किसान के खातों में सीधे दावा निपटान में तेजी लाने में मदद की है। सरकार के अनुसार कोविड लॉकडाउन अवधि के दौरान भी लगभग 70 लाख किसानों को लाभ हुआ और इस दौरान 8741.30 करोड़ रुपए के दावे लाभार्थियों को हस्तांतरित किए गए। बता दें कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसान के हिस्से के अतिरिक्त प्रीमियम का खर्च राज्यों और भारत सरकार द्वारा समान रूप से सहायता के रूप में दिया जाता है। पूर्वोत्तर राज्यों में 90 प्रतिशत प्रीमियम सहायता भारत सरकार देती है। पीएमएफबीवाई की औसत बीमित राशि बढ़ाकर 40,700 रुपए की सरकार ने कहा है कि किसानों को इस योजना आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी। पीएमएफबीवाई के तहत औसत बीमित राशि बढ़ाकर 40,700 रुपए कर दी गई है, जो पीएमएफबीवाई से पहले की योजनाओं में प्रति हेक्टेयर 15,100 रुपए थी। योजना में बुवाई से पूर्व चक्र से लेकर कटाई के बाद तक फसल के पूरे चक्र को शामिल किया गया है, जिसमें रोकी गई बुवाई और फसल के बीच में प्रतिकूल परिस्थितियों से होने वाला नुकसान भी शामिल है। यह भी पढ़ें : गेहूं की फसल में अधिक सिंचाई से हो सकता है नुकसान किसान अपनी स्वैच्छा से हो सकते हैं इस योजना में शामिल इस योजना में फरवरी 2020 में सुधार किया गया और लगातार सुधार के प्रयास किए गए। इसके तहत फसल बीमा को स्वैच्छिक कर दिया गया है। बता दें कि पहले सभी किसानों को अपनी फसल का बीमा कराना अनिवार्य था, लेकिन अब किसान की इच्छा पर निर्भर होगा कि वे अपनी फसल का बीमा कराना चाहता है या नहीं। इस बीमा योजना में बाढ़, बादल फटने और प्राकृतिक आग जैसे खतरों के कारण होने वाली स्थानीय आपदाओं और कटाई के बाद होने वाले व्यक्तिगत खेती के स्तर पर नुकसान को शामिल किया गया है। राज्यों को बीमा राशि को तर्कसंगत बनाने के लिए लचीलापन भी प्रदान किया गया है ताकि किसानों द्वारा पर्याप्त लाभ उठाया जा सके। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना प्रीमियम प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना तहत किसानों को खरीफ की फसल के लिए 2 फीसदी प्रीमियम और रबी की फसल के लिये 1.5 फीसदी प्रीमियम का भुगतान करना पड़ता है। पीएमएफबीवाई में प्राकृतिक आपदाओं के कारण खराब हुई फसल के मामले में बीमा प्रीमियम को बहुत कम रखा गया है। इससे पीएमएफबीवाई तक हर किसान की पहुंच बनाने में मदद मिली है। इस योजना में वाणिज्यिक और बागवानी फसलों के लिए भी बीमा सुरक्षा प्रदान की जाती है। हालांकि इसमें किसानों को 5 फीसदी प्रीमियम का भुगतान करना पड़ता है। भारतीय कृषि बीमा कंपनी (एआईसी या एआईसी) इस योजना को चलाती है। पीएमएफबीवाई में शामिल होने के लिए कैसे करें आवेदन?/ प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए ऑफलाइन (बैंक जाकर) और दूसरा ऑनलाइन, दोनों तरीके से फॉर्म लिए जा सकते हैं। फॉर्म ऑनलाइन भरने के लिए आप इस लिंक पर जा सकते हैं- http://pmfby.gov.in/. अगर आप फॉर्म ऑफलाइन लेना चाहते हैं तो नजदीकी बैंक की शाखा में जाकर फसल बीमा योजना का फॉर्म भर सकते हैं। यह भी पढ़ें : लेजर लैंड लेवलर : खेत को बनाएं समतल, पानी-खाद और ईंधन की करें बचत पीएमएफबीवाई में शामिल होने के लिए किन दस्तावेजों की है जरूरत?/ प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पात्रता किसान की एक फोटो, किसान का आईडी कार्ड (पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी कार्ड, पासपोर्ट, आधार कार्ड), किसान का एड्रेस प्रूफ (ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी कार्ड, पासपोर्ट, आधार कार्ड)। अगर खेत आपका अपना है तो इसका खसरा नंबर / खाता नंबर का पेपर साथ में रखें। खेत में फसल की बुवाई हुई है, इसका सबूत पेश करना होगा, इसके सबूत के तौर पर किसान पटवारी, सरपंच, प्रधान जैसे लोगों से एक पत्र लिखवा ले सकते हैं। अगर खेत बटाई या किराए पर लेकर फसल की बुवाई की गई है, तो खेत के मालिक के साथ करार की कॉपी की फोटोकॉपी जरूर ले जाएं, इसमें खेत का खाता/ खसरा नंबर साफ तौर पर लिखा होना चाहिए। फसल को नुकसान होने की स्थिति में पैसा सीधे आपके बैंक खाते में पाने के लिए एक रद्द चेक लगाना जरूरी है। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

कोरोना वैक्सीन : देशभर में टीकाकरण की शुरुआत 16 जनवरी से

कोरोना वैक्सीन : देशभर में टीकाकरण की शुरुआत 16 जनवरी से

कोरोना टीकाकरण : जानें, अभी किन शहरों में हुई वैक्सीन की डिलीवरी और कैसे लगेगा टीका? पूरी दुनिया को अपनी गिरफ्त में लेने वाले कोरोना वायरस के संक्रमण से निबटने के लिए कई देशों में वैक्सीन का निर्माण किया जा रहा है। भारत में भी 10 वैक्सीन ट्रायल पर चल रही हैं। इनमें से अंतिम चरण में ट्रायल पर चल रहीं दो वैक्सीन जिनमें सीरम इंस्टीट्यूट ‘ऑक्सफोर्ड कोविशील्ड’ और भारत बायोटेक द्वारा निर्मित ‘कोवैक्सीन’ शामिल हैं, को हाल ही में भारत सरकार ने आपातकालीन (इमरजेंसी) उपयोग के लिए हरी झंडी दी गई है। इन दो वैक्सीनों को हरी झंडी मिलने के बाद देश में कोरोना संक्रमण को मात देने की तैयारी कर ली है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रैक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 प्रत्येक टीके पर जीएसटी समेत 210 रुपए की लागत मीडिया में प्रकाशित जानकारी के अनुसार सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने भारत सरकार को ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की कोविशील्ड वैक्सीन की डिलीवरी कर दी है और इसकी पहली खेप पुणे स्थित उत्पादन केंद्र से देश के अलग-अलग वैक्सीन सेंटर के लिए रवाना कर दी गई हैं। कोरोना वैक्सीन की पहली खेप दिल्ली भेजी गई है जिसका पूरे देश में वितरण किया जाएगा। बता दें कि सरकार ने एसआईआई से ऑक्सफोर्ड के कोविड-19 टीके कोविशील्ड की 1.1 करोड़ खुराक खरीदने का सोमवार को ऑर्डर दिया था। प्रत्येक टीके पर जीएसटी समेत 210 रुपए की लागत आ रही है। दिल्ली के अलावा, देश के अलग-अलग 12 जगहों पर सात अन्य फ्लाइट से वैक्सीन की डिलीवरी की जा रही है। वैक्सीन भेजने के लिए 9 उड़ानें होगी संचालित मीडिया में प्रकाशित समाचारों के आधार पर सीरम के कोरोना टीकों को पुणे से जिन स्थानों पर डिलीवरी की गई है, उनमें अहमदाबाद, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, करनाल, हैदराबाद, विजयवाड़ा, गुवाहाटी, लखनऊ, चंडीगढ़, पटना और भुवनेश्वर शामिल हैं। नागर विमानन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने जानकारी दी कि चार विमानन कंपनियां पुणे से देश के 13 शहरों में कोविड-19 टीकों की 56.5 लाख खुराक ले जाने के लिए आज नौ उड़ानें संचालित हुई हैं, जिनमें से कई जगह वैक्सीन पहुंच भी गई और कई जगह पहुंचने वाली है। बता दें कि सबसे पहले पुलिस सुरक्षा में कोविशील्ड वैक्सीन सीरम के उत्पादन केंद्र से पुणे एयरपोर्ट पहुंची, जहां से अब देशभर के लोकेशन पर उसकी डिलीवरी की जा रही है। यह भी पढ़ें : राष्ट्रीय कामधेनू आयोग : देसी गाय के फायदे पर होगी परीक्षा शुरुआत में इन शहरों में भेजी जा रही है वैक्सीन की डिलीवरी अभी फिलहाल देश में दिल्ली, अहमदाबाद, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु, करनाल, हैदराबाद, विजयवाड़ा, गुवाहाटी, लखनऊ, चंडीगढ़, पटना, शिलांग, भुवनेश्वर शहरों में वैक्सीन की डिलीवरी की जा रही है। इसके बाद अन्य शहरों में वैक्सीन पहुंचाई जाएगी। सूत्रों ने कहा कि कोविशील्ड वैक्सीन की खुराक को शुरुआत में 60 थोक केंद्रों पर भेजा जाएगा, जहां से उन्हें पूरे भारत के विभिन्न टीकाकरण केंद्रों में वितरित किया जाएगा। कोविशील्ड की 2,54,500 से अधिक खुराकें दिल्ली के केंद्रीय भंडारण, राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, ताहिरपुर में वितरित की जानी हैं। ‘स्वास्थ्य मंत्रालय ने टीका की खरीद के लिए खरीद एजेंसी के रूप में 11 जनवरी को एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड को नामित किया है। इसके लिए स्वास्थ्य मंत्रालय खरीददार एजेंसी है और एलएलएल लाइफकेयर लिमिटेड खरीद एजेंसी है।’ टीकाकरण के लिए क्या है तैयारियां और किन्हें लगेगा सबसे पहले टीका देश में 16 जनवरी से कोविड-19 के टीकाकरण अभियान की शुरुआत होगी। इसके लिए दिल्ली में कुल एक हजार वैक्सीनेशन बूथ और 609 कोल्ड चैन प्वाइंट तैयार किए गए हैं। मगर केंद्र ने फिलहाल हमें 89 केंद्र निर्धारित करने को कहा था, जिसे कर लिया गया है। इसमें 40 सरकारी और 49 निजी अस्पताल को चिन्हित किया गया है। कोविड -19 वैक्सीन दिशा-निर्देशों के अनुसार, टीकाकरण की शुरुआत सबसे पहले हेल्थकेयर वर्कर्स और अग्रिम पंक्ति के कोरोना योद्धाओं से की जाएगी। उसके बाद 50 साल से अधिक उम्र के व्यक्तियों को खुराक दी जाएगी। इसके बाद 50 साल से कम उम्र के व्यक्ति को संक्रमित होने की स्थिति में खुराक मिलेगी। कैसे लेनी होगी वैक्सीन स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, टीकाकरण अनुसूची को पूरा करने के लिए एक व्यक्ति को टीका की दो खुराक 28 दिनों में लेना चाहिए। फिर दूसरी खुराक लेने के दो सप्ताह बाद एंटीबॉडी का सुरक्षात्मक स्तर आमतौर पर विकसित होता है। यह भी पढ़ें : ब्रश कटर (Brush Cutter) मशीन : आधुनिक खेती के लिए बहुउपयोगी उपकरण कोविड 19 वैक्सीनेशन (Covid-19 Vaccination) : महाअभियान के लिए सरकार ने दिया है 6 करोड़ डोज का आर्डर केन्द्र सरकार ने देश में 16 जनवरी से शुरू होने वाले टीकाकरण अभियान से पहले सोमवार को सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) और भारत बायोटेक को कोविड-19 टीके की छह करोड़ से अधिक खुराक के लिए ऑर्डर दिया था। वहीं, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बातचीत की थी और कहा था कि कोविड-19 के लिए टीकाकरण पिछले तीन-चार हफ्तों से लगभग 50 देशों में चल रहा है और अब तक केवल ढाई करोड़ लोगों को टीके लगाए गए हैं जबकि भारत का लक्ष्य अगले कुछ महीनों में 30 करोड़ से अधिक लोगों को टीका लगाना है। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

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