एआई (आर्टिफिशयल इंटेलीजेंस) बदल सकता खेती का भविष्य किसान को मिलेंगे अच्छे परिणाम
Published - 27 Aug 2020
by Tractor Junction
क्या है एआई तकनीक और इसका खेती में कैसे किया सकता है इस्तेमाल
आर्टिफिशयल इंटेलीजेंस ( एआई ) खेती का भविष्य बदल सकता है। जी हां आपने सही सुना। यह वह तकनीक है जो खेती को आधुनिक बनाने के साथ ही सुरक्षित बनाती है। इस तकनीक उपयोग करके यह जाना जा सकता है कि खेत की मिट्टी में किस पोषक तत्व की कमी है या किस खाद का इस्तेमाल कितनी मात्रा में करना है ऐसी कई महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की जा सकती है जो खेती को समृद्ध बनाने में मदद करती हैं। इस तकनीक इस्तेमाल कई देशों में किया जा रहा है और इसके अच्छे परिणाम देखने को भी मिले हैं। यदि भारत में भी इस तकनीक का इस्तेमाल किया जाए तो खेती का भविष्य बदल सकता है और उत्पादन के साथ ही आधुनिक खेती को बढ़ावा मिल सकता है जो किसानों के लिए लाभकारी रहेगा।
सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1
एआई तकनीक क्या है
कृषि के सामने सबसे प्रमुख चुनौती खेती के लायक सीमित जमीन के बावजूद आने वाले दशकों में दुनिया की लगातार बढ़ती जनसंख्या को भरपेट भोजन उपलब्ध कराना है। इसके लिए कृषि तकनीक का अधिक उपयोग ही एकमात्र उपाय है। जिन अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कृषि की इस चुनौती को पूरा करने में किया जा सकता है, उनमें से एक आर्टिफिशयल इंटेलीजेंस एआई है। इस तकनीक का कई चरणों में इस्तेमाल कर खेती को आसान बनाने काम किया जाता है।
मिट्टी में किस तत्व की कमी ये पता लगाना आसान
एआई तकनीक के इस्तेमाल से यह पता लगाना आसान हो जाता है कि खेत की मिट्टी में किस पोषक तत्व की कमी है। इसे जानने केे लिए इसमें सेंसर और आईओटी की कई तकनीकों का इस्तेमाल कर उपज और मिट्टी की निगरानी की जाती है। इस तकनीक में हर खेत, जिस में आईए का करना होता है, उसकी जियो टैगिंग की जाती है। इसमें कम्प्यूटर से मिट्टी और उपज से निकलने वाली भाप के रंग के आधार पर यह जाना जाता है कि उसमें किस तत्व की कमी है।
प्री - हार्वेस्ट विश्लेषण से मिल सकती हैं कई जानकारियां
इस तकनीक के इस्तेमाल से खेत की तैयारी से लेकर हार्वेस्ट तक हर स्तर खेती के लिए जरूरी जानकारियों की सूचना एकत्र की जा सकती है। एआई के इस्तेमाल से इस बात का सही आकलन किया जा सकता है कि किस समय बिजाई होनी चाहिए, किस समय किस मात्रा में कौन से खाद का इस्तेमाल किया जाना चाहिए और किस समय कौन सा कीटनाशक प्रयोग करने की आवश्यकता है।
किस खेत से आई उपज इसकी हो सकती है पहचान
कोई भी कृषि उपज किस खेत से आई है, इसकी पहचान को ट्रेसिबिलिटी कहते हैं। यह ट्रेसिबिलटी न केवल किसी खास पैकेट की उपज के खेत का पता बताता है, बल्कि उसमें कब, कितना और कौन से खाद या दवा इस्तेमाल किए गये, इसका पूरा ब्यौरा भी मिल सकता है। कई कंपनियों इसके लिए ब्लॉकचेन और एआई टेक्नोलॉजी का प्रयोग कर रही हैं। बता देें कि यूरोप के बाजार में ट्रेसिबिलिटी की बहुत मांग है। यहां तक कि भारत में भी ग्राहकों का एक वर्ग तैयार हो चुका है, जो सब्जियों और फलों की ट्रेसिबिलिटी के आधार पर प्रीमियम कीमत चुकाने को तैयार है।
भारत में इसके इस्तेमाल में क्या है बाधाएं
इस तकनीक को खेतों में उतारने की सबसे बड़ी बाधा यह है कि इसमें बहुत बड़े पैमाने पर निवेश की आवश्यकता होती है। इतना बड़ा निवेश किसी किसान या किसान समूह के लिए जुटा पाना कठिन है। यह तब ही संभव हो सकता है कि निजी क्षेत्र बड़े पैमाने पर इस ओर आकर्षित हो। इसके लिए सरकार की ओर से भी कई प्रयास किए गए है। इसके परिणाम स्वरूप घरेलू निजी क्षेत्र ने भी हाल के वर्षों में कृषि में खासी रुचि लेनी शुरू की है। दर्जनों ऐसे स्टार्ट अप हैं, जो सिर्फ कम कीमत पर खेतों तक टेक्नोलॉजी पहुंचाने के बिजनेस आइडिया के साथ करोड़ों के वैल्यूएशन तक पहुंच गये हैं। यदि भारत में इस तकनीक का इस्तेमाल किया जाए तो भारतीय कृषि को एक नई दिशा मिल सकती है।
अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

