कोरोना संक्रमण काल के बीच फसलों पर टिड्डियों का हमला

Published - 15 May 2020

कोरोना संक्रमण काल के बीच फसलों पर टिड्डियों का हमला

किसान ऐसे करें अपनी फसल की सुरक्षा

कारोना संक्रमण काल के दौरान राजस्थान के अजमेर जिले में किसानों की फसलों पर टिड्डी दल ने हमला बोल दिया है। इससे फसलों को करीब तीन से पांच फीसदी नुकसान की आशंका जताई गई है। इससे पहले, 1993 में अजमेर में इस तरह का हमला हुआ था। इससे सब्जियों के साथ ही जामुन के पेड़ों को नुकसान पहुंच है। इधर प्रशासन ने भी इस समस्या से निजात पाने के लिए तैयारी शुरू कर दी है।  राजस्थान कृषि विभाग के उप निदेशक वीके शर्मा ने बताया कि अजमेर जिले में टिड्डी दल ने धावा बोला है। जिसको रोकने के लिए हमने कीटनाशकों का छिडक़ाव करने के लिए अग्निशमन विभाग की मदद ली है। शर्मा ने कहा कि नागौर से टिड्डियों का झुंड जिले में प्रवेश की सूचना पर विभाग द्वारा एक सर्वेक्षण टीम और एक नियंत्रण टीम गठित की गई है। 
 

सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1

 

कृषि विभाग द्वारा कीटनाशक का किया जा रहा है छिडक़ाव

उन्होंने बताया कि जिले में 1,362 हेक्टेयर क्षेत्रफल में अभी तक कीटनाशकों का छिडक़ाव किया जा चुका है। इस काम में दस से अधिक दमकलकर्मियों को तैनात किया गया है तथा टिड्डी नियंत्रण संगठन द्वारा आठ वाहनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस संकट में किसानों की मदद के लिए करने के लिए सप्ताह में 24 घंटे काम करने वाला एक नियंत्रण कक्ष और हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है।

टिड्डियां क्या है, इन्हें कैसे पहचाने-

सयाजी के कृषि विज्ञानियों के अनुसार, टिड्डियों को अनके चमकीले पीले रंग और पिछले लंबे पैरों से उन्हें पहचाना जा सकता। आपको दूर से ऐसा लगेगा, मानो आपकी फसलों के ऊपर किसी ने एक बड़ी चादर बिछा दी हो। है। टिड्डियों का झुंड एकबारगी फसलों का सफाया कर देता है।

 

किसान ऐसे कर सकते है टिड्डी दल से फसलों की सुरक्षा-

  • सयाजी कीट वैज्ञानिको के अनुसार किसान भाई टिड्डी दल से बचने के लिए कई उपाय अपना सकते हैं-
  • फसल के अलावा, टिड्डी कीट जहां इक्ट्ठा हो वहां उसे फ्लेमथ्रोअर से जला दें।
  • टिड्डी दल को भगाने के लिए थालियां, ढोल, नगाड़े, लाउडस्पीकर या दूसरी चीजों के माध्यम से शोरगुल मचाएं जिससे वे आवाज सुनकर खेत से भाग जाए।
  • टिड्डी  जिस स्थान पर अपने अंडे दिये हो, वहां 25 किग्रा. 5 प्रतिशत मेलाथियोन या 1.5 प्रतिशत क्विनालफॉस को मिलाकर प्रति हेक्टेयर छिडक़े।
  • टिड्डी  दल के खेत की फसल पर बैठने पर, उस पर 5 प्रतिशत मेलाथीयोन या 1.5 प्रतिशत क्विानाल्फोस का छिडक़ाव करें।
  • टिड्डी दल को आगे बढऩे से रोकने के लिए 100 किग्रा. धान की भूसी को 0.5 किग्रा. फेनीट्रोथीयोन और 5 किग्रा. गुड़ के साथ मिलाकर खेत में डाल दें। इसके जहर से वे मर जाते है।
  • टिड्डी दल सवेरे 10 बजे बाद ही अपना डेरा बदलता है। इसलिए इसे आगे बढऩे से रोकने के लिए 5 प्रतिशत मेलाथियोन या 1.5 प्रतिशत क्विनाफॉस का छिडक़ाव करें।
  • 500 ग्राम एनएसकेई या 40 मिली नीम के तेल को 10 ग्राम कपड़े धोने के पाउडर के साथ या फिर 20-40 मिली नीम से तैयार कीटनाशक को 10 लीटर पानी में घोलकर छिडक़ाव करने से टिड्डे फसलों को नहीं खा पाते।
  • कीट की रोकथाम के लिए 50 प्रतिशत ईसी फेनीट्रोथीयोन या मेलाथियोन अथवा 20 प्रतिशत ईसी क्लोरपाइरिफोस 1 लीटर दवा को 800 से 1000 लीटर पानी में मिलाकर प्रति हेक्टेयर क्षेत्र में छिडक़ाव करें।
  • फसल कट जाने के बाद खेत की गहरी जुताई करें ताकि इनके अंडे नष्ट हो जाएं।

 

 

सभी कंपनियों के ट्रैक्टरों के मॉडल, पुराने ट्रैक्टरों की री-सेल, ट्रैक्टर खरीदने के लिए लोन, कृषि के आधुनिक उपकरण एवं सरकारी योजनाओं के नवीनतम अपडेट के लिए ट्रैक्टर जंक्शन वेबसाइट से जुड़े और जागरूक किसान बने रहें।

Quick Links

scroll to top
Close
Call Now Request Call Back