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कोरोना संक्रमण काल के बीच फसलों पर टिड्डियों का हमला

कोरोना संक्रमण काल के बीच फसलों पर टिड्डियों का हमला

15 May, 2020

किसान ऐसे करें अपनी फसल की सुरक्षा

कारोना संक्रमण काल के दौरान राजस्थान के अजमेर जिले में किसानों की फसलों पर टिड्डी दल ने हमला बोल दिया है। इससे फसलों को करीब तीन से पांच फीसदी नुकसान की आशंका जताई गई है। इससे पहले, 1993 में अजमेर में इस तरह का हमला हुआ था। इससे सब्जियों के साथ ही जामुन के पेड़ों को नुकसान पहुंच है। इधर प्रशासन ने भी इस समस्या से निजात पाने के लिए तैयारी शुरू कर दी है।  राजस्थान कृषि विभाग के उप निदेशक वीके शर्मा ने बताया कि अजमेर जिले में टिड्डी दल ने धावा बोला है। जिसको रोकने के लिए हमने कीटनाशकों का छिडक़ाव करने के लिए अग्निशमन विभाग की मदद ली है। शर्मा ने कहा कि नागौर से टिड्डियों का झुंड जिले में प्रवेश की सूचना पर विभाग द्वारा एक सर्वेक्षण टीम और एक नियंत्रण टीम गठित की गई है। 
 

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कृषि विभाग द्वारा कीटनाशक का किया जा रहा है छिडक़ाव

उन्होंने बताया कि जिले में 1,362 हेक्टेयर क्षेत्रफल में अभी तक कीटनाशकों का छिडक़ाव किया जा चुका है। इस काम में दस से अधिक दमकलकर्मियों को तैनात किया गया है तथा टिड्डी नियंत्रण संगठन द्वारा आठ वाहनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस संकट में किसानों की मदद के लिए करने के लिए सप्ताह में 24 घंटे काम करने वाला एक नियंत्रण कक्ष और हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है।

टिड्डियां क्या है, इन्हें कैसे पहचाने-

सयाजी के कृषि विज्ञानियों के अनुसार, टिड्डियों को अनके चमकीले पीले रंग और पिछले लंबे पैरों से उन्हें पहचाना जा सकता। आपको दूर से ऐसा लगेगा, मानो आपकी फसलों के ऊपर किसी ने एक बड़ी चादर बिछा दी हो। है। टिड्डियों का झुंड एकबारगी फसलों का सफाया कर देता है।

 

किसान ऐसे कर सकते है टिड्डी दल से फसलों की सुरक्षा-

  • सयाजी कीट वैज्ञानिको के अनुसार किसान भाई टिड्डी दल से बचने के लिए कई उपाय अपना सकते हैं-
  • फसल के अलावा, टिड्डी कीट जहां इक्ट्ठा हो वहां उसे फ्लेमथ्रोअर से जला दें।
  • टिड्डी दल को भगाने के लिए थालियां, ढोल, नगाड़े, लाउडस्पीकर या दूसरी चीजों के माध्यम से शोरगुल मचाएं जिससे वे आवाज सुनकर खेत से भाग जाए।
  • टिड्डी  जिस स्थान पर अपने अंडे दिये हो, वहां 25 किग्रा. 5 प्रतिशत मेलाथियोन या 1.5 प्रतिशत क्विनालफॉस को मिलाकर प्रति हेक्टेयर छिडक़े।
  • टिड्डी  दल के खेत की फसल पर बैठने पर, उस पर 5 प्रतिशत मेलाथीयोन या 1.5 प्रतिशत क्विानाल्फोस का छिडक़ाव करें।
  • टिड्डी दल को आगे बढऩे से रोकने के लिए 100 किग्रा. धान की भूसी को 0.5 किग्रा. फेनीट्रोथीयोन और 5 किग्रा. गुड़ के साथ मिलाकर खेत में डाल दें। इसके जहर से वे मर जाते है।
  • टिड्डी दल सवेरे 10 बजे बाद ही अपना डेरा बदलता है। इसलिए इसे आगे बढऩे से रोकने के लिए 5 प्रतिशत मेलाथियोन या 1.5 प्रतिशत क्विनाफॉस का छिडक़ाव करें।
  • 500 ग्राम एनएसकेई या 40 मिली नीम के तेल को 10 ग्राम कपड़े धोने के पाउडर के साथ या फिर 20-40 मिली नीम से तैयार कीटनाशक को 10 लीटर पानी में घोलकर छिडक़ाव करने से टिड्डे फसलों को नहीं खा पाते।
  • कीट की रोकथाम के लिए 50 प्रतिशत ईसी फेनीट्रोथीयोन या मेलाथियोन अथवा 20 प्रतिशत ईसी क्लोरपाइरिफोस 1 लीटर दवा को 800 से 1000 लीटर पानी में मिलाकर प्रति हेक्टेयर क्षेत्र में छिडक़ाव करें।
  • फसल कट जाने के बाद खेत की गहरी जुताई करें ताकि इनके अंडे नष्ट हो जाएं।

 

 

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मौसम विभाग की चेतावनी :  बिहार, झारखंड सहित कई स्थानों पर हो सकती है बारिश

मौसम विभाग की चेतावनी : बिहार, झारखंड सहित कई स्थानों पर हो सकती है बारिश

बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव का नया क्षेत्र, जानें, कैसा रहेगा देश में मौसम का हाल और होगी बारिश सर्दी के मौसम की शुरुआत हो चुकी है और अब दिन और रात के तापमान में भी अंतर आ चुका है। तापमान में गिरावट का दौर जारी रहेगा। इसी के साथ यह संभावना जताई जा रही है कि इस दौरान देश के कई भागों में मूसलाधार से लेकर हल्की बारिश हो सकती है जिससे सर्दी ओर बढ़ेगी। भारतीय मौसम विभाग आईएमडी के अनुसार तटीय आंध्र के ऊपर अलग-अलग स्थानों पर मूसलाधार बारिश होने की संभावना है। 20 और 21 अक्टूबर को ओडिशा में तेज बारिश हो सकती है। अगले चार दिनों के दौरान केरल को छोडक़र ओडिशा और प्रायद्वीपीय भागों में भारी से लेकर मध्यम बारिश हो सकती है। इस दौरान बिजली गिरने के साथ बारिश हो सकती है। इधर निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट के अनुसार पिछले 24 घंटों दौरान केरल, तमिलनाडु, तटीय आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ एक-दो जगहों पर भारी बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा कर्नाटक, रायलसीमा, अंडमान व निकोबार द्वीपसमूह, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, गुजरात, मध्य प्रदेश, तटीय ओडिशा, नागालैंड के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हुई। इधर आंतरिक ओडिशा, गंगीय पश्चिमी बंगाल, शेष पूर्वोत्तर भारत, दक्षिण-पूर्वी राजस्थान और विदर्भ में हल्की बारिश देखने को मिली। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 क्या है इस समय बारिश आने का कारण मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी पर एक नया निम्न दबाव का क्षेत्र विकसित हो गया है। यह जल्द ही और प्रभावी हो सकता है। इस सिस्टम के बंगाल की खाड़ी पर अगले & दिनों तक रहने की संभावना है, उसके बाद यह धीरे-धीरे प्रभावी होते हुए उत्तर और उत्तर पश्चिमी दिशा में ओडिशा के उत्तरी भागों और इससे सटे पश्चिमी बंगाल के तटों से टकराएगा। 21 अक्टूबर तक यह डिप्रेशन और 22 अक्टूबर तक डीप डिप्रेशन बन जाएगा। इससे देश के कई भागों में बारिश की संभावना है। वहीं निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट के अनुसार देश भर में जो मौसमी सिस्टम बन रहे हैं उनमें से बंगाल की खाड़ी पर एक निम्न दबाव का क्षेत्र विकसित हो गया है। इस सिस्टम से दक्षिणी प्रायद्वीपीय रा’यों से होते हुए अरब सागर के मध्य भागों तक एक ट्रफ रेखा विकसित हो गई है। इसके अलावा पश्चिमी विक्षोभ उत्तरी पाकिस्तान और इससे सटे भागों के पास दिखाई दे रहा है। इससे देश के कई भागों में बारिश के आसार बन रहे हैं। देश में कब-कहां हो सकती है बारिश 21 अक्टूबर को ओडिशा में तेज बारिश हो सकती है। उत्तरी तटीय ओडिशा और गंगीय पश्चिमी बंगाल में 21 और 22 अक्टूबर को तूफानी हवाओं के साथ मूसलाधार वर्षा होने की संभावना है। असम, मेघालय, नागालैंड और मणिपुर में 2& से 25 अक्टूबर के बीच भीषण बारिश की संभावना झारखंड और बिहार को भी 22 से 24 अक्टूबर के बीच हल्की से मध्यम बारिश के आसार उत्तरी छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में मौसम सामान्य रहने का अनुमान अगले 24 घंटों के दौरान देश में कैसा रहेगा मौसम मौसम ऐजेंसी स्काईमेट के अनुसार अगले 24 घंटों के दौरान आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, ओडिशा, गंगीय पश्चिमी बंगाल, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है। इसके अलावा आंतरिक ओडिशा, दक्षिणी छत्तीसगढ़, मध्य महाराष्ट्र, दक्षिणी गुजरात, कोंकण गोवा, मराठवाड़ा और तमिलनाडु में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इधर केरल और दक्षिणी मध्य प्रदेश में हल्की बारिश के आसार हैं। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

मौसम विभाग की चेतावनी  :  इस बार पड़ेगी कंडाके की सर्दी, तापमान में गिरावट का दौर शुरू

मौसम विभाग की चेतावनी : इस बार पड़ेगी कंडाके की सर्दी, तापमान में गिरावट का दौर शुरू

जानें, क्या है इसकी वजह और क्या रखनी चाहिए इस मौसम में सावधानियां? इन दिनों मौसम में हो रहे बदलाव को लेकर मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के अनुसार इस साल पिछले साल की अपेक्षा अधिक सर्दी पडऩे का अनुमान है। मौसम विभाग की जारी चेतावनी के अनुसार इस साल सर्दी की शुरुआत भले ही देरी से हो रही हो लेकिन इस साल सर्दी कड़ाके की पडऩे वाली है। ऐसा इसलिए बताया जा रहा है कि इस समय आसमान से बादल गायब हो चुके हैं और चटक धूप पड़ रही है पर उमस कम हो गई हैं। हालांकि रात के तापमान में गिरावट का रूख देखा जा रहा है। सर्दी के मौसम के इस शुरुआती संकेतों से यह कहा जा रहा है कि आने वाले दिनों में सर्दी अपना असर दिखाना शुरू कर देगी। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि अक्टूबर माह से ही दिन के तापमान में भी कमी आने लगेगी, इसके बाद जाड़े की प्रारंभिक शुरुआत हो जाएगी। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार हवाओं का रुख बदलने लगा है। निम्न दवाब वाले उत्तरी क्षेत्रों में अब उच्च दबाव की वजह से हवाओं की रफ्तार बढ़ी है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 ला नीना की स्थिति कमजोर भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र के अनुसार इस वर्ष ला नीना की स्थिति के कारण कड़ाके की ठंड पड़ सकती। मीडिया को दी जानकारी में उन्होंने बताया कि यह नहीं समझना चाहिए कि जलवायु परिवर्तन से तापमान में बढ़ोतरी होती है, बल्कि इसके विपरीत इसके कारण मौसम अनियमित हो जाता है। महापात्र ने कहा, ‘चूंकि ला नीना की स्थिति कमजोर है, इसलिए हम इस वर्ष ज्यादा ठंड की उम्मीद कर सकते हैं। अगर शीत लहर की स्थिति के लिए बड़े कारक पर विचार करें तो अल नीनो और ला नीना बड़ी भूमिका निभाते हैं।’ ला नीना का यह हो रहा प्रभाव निजी मौसम ऐजेंसी स्काईमेट वेदर सर्विस से जुड़े वैज्ञानिक शर्मा द्वारा मीडिया को दी गई जानकारी के अनुसार इस समय ला नीना की स्थिति बन रही है। इसके चलते जहां सर्दी का मौसम लंबा हो सकता है। वहीं ठंड भी कड़ाके की पड़ सकती है। इसी वजह से मानसून की बारिश भी पूरे देश में सामान्य से ज्यादा हुई है। जबकि अल नीना की स्थिति में इसका उल्टा होता है। क्या है ला नीना और अल नीनो भारत में मौसम के रुख को तय करने में ला नीना और अल नीनो प्रभाव का काफी अहम रोल है। ला नीना एक प्रक्रिया है, जिसके तहत समुद्र में पानी ठंडा होना शुरू हो जाता है। समुद्री पानी पहले से ही ठंडा होता है, लेकिन इसके कारण उसमें ठंडक बढ़ती है जिसका असर हवाओं पर पड़ता है। एल निनो में इसके विपरीत होता है, दोनों ही क्रियाओं का असर सीधे तौर पर भारत के मॉनसून और सर्दी के मौसम पर पड़ता है। शुरुआती सर्दी के दौर में क्या रखें सावधानियां सर्दी के शुरुआती दौर में मौसमी बीमारियों फैलने का खतरा अधिक रहता है। कहा भी जाता है कि आती सर्दी और जाती सर्दी दोनों स्वास्थ्य के लिहाज से परेशानी देने वाली होती है। वहीं वर्तमान में कोविड-19 का असर भी बरकरार है और डब्ल्यूएचओ ने इसका फैलाव सर्दियों में तेज होने को लेकर चेतावनी भी जारी की है तो इसे देखते हुए हमें इस सर्दी में अपना विशेष तौर पर ध्यान रखना जरूरी हो जाता है, तो आइए जानते हैं क्या सावधानी हमें इन सर्दियों में रखनी चाहिए ताकि बीमारी हमसे कोसो दूर रहे। कोविड-19 के इस दौर में जितनी बार संभव हो अपने हाथ साबुन से धोएं ताकि कीटाणु फैल नहीं सके। क्योंकि सबसे ज्यादा हाथों से ही कीटाणुओं का फैलाव होता है और यही कीटाणु बीमारियां फैलने का मुख्य कारण हैं। इसलिए हाथों की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। अधिक तनाव से बचें, क्योंकि यह आपके शरीर की बीमारियों और संक्रमण से लडऩे की क्षमता है उसमें बाधा उत्पन्न करता है। इसके लिए सुबह सैर पर जरूर जाएं। शरीर की रोगों से लडऩे की क्षमता को मजबूत करने के लिए प्रतिदिन करीब आधा घंटा व्यायाम अवश्य करना चाहिए। इससे शरीर चुस्त-दुरुस्त बनता है। जब कभी आप सर्दी, जुकाम या बुखार से पीडि़त हों, तो ज्यादा से ज्यादा आराम करने की कोशिश करें। साधारण भोजन को प्राथमिकता दें, चिकनाई युक्त भोजन से परहेज करें तो बहुत ही अच्छा है। सर्दी और फ्लू वायरस की वजह से होते हैं, इसलिए इनमें एंटीबायटिक मदद नहीं करतीं। इस दौरान जरूरत से ज्यादा कसरत न करें। साधारणत: सर्दी या फ्लू होने से पहले गला खराब हो जाता है। ऐसे में चाय, कॉफी या गुनगुना नींबू पानी व शहद का प्रतिदिन सेवन करें। हर आधा घंटे में नमक डालकर गुनगुने पानी से गरारे करें जिससे गले की खराश और सर्दी की अन्य समस्याओं में आराम मिलेगा। इसके अलावा जो बीमारियां आपको पहले से हैं उनका ध्यान अवश्य रखें। समय-समय पर डाक्टर को अपना चेकअप कराते रहे ताकि कोई परेशानी हो तो उसका समय रहते निदान हो सके। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

दिन का बढ़ा हुआ तापमान से बुवाई में हो रही है देरी, किसानों को बीज के जलने का डर

दिन का बढ़ा हुआ तापमान से बुवाई में हो रही है देरी, किसानों को बीज के जलने का डर

मौसम के मिजाज से रबी की बुवाई में हो रही है देरी राजस्थान में अधिकतर स्थानों पर खरीफ की फसल कट चुकी है और उनके विक्रय का कार्य चल रहा है। वहीं दूसरी ओर खेत खाली पड़े हैं। किसानों ने अभी तक अगली फसल रबी की बुवाई अभी तक नहीं की है। सामान्यत: रबी की बुवाई का कार्य एक अक्टूबर से शुरू हो जाता है लेकिन इस बार तापमान में तेजी के कारण किसान रबी की बुवाई नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि सुबह और रात के तापमान में गिरावट आई है, पर दोपहर का तापमान रबी की बुवाई के लिहाज से काफी अधिक है। अभी भी दिन का तापमान 35-36 डिग्री चल रहा है जबकि रबी की बुवाई के लिए 23-30 डिग्री तापमान की जरूरत होती है। इस संबंध में कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को अभी कुछ दिन और इंतजार करने की सलाह दी है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार जब तक दिन का तापमान कम नहीं हो जाता तब तक बुवाई करना ठीक नहीं है। इधर किसान भी बीज जलने की आशंका से बुवाई करने से डर रहे हैं। बता दें कि रबी फसलों में सरसों की बुवाई जल्दी हो जाती है लेकिन तापमान की अधिकता से इस बार सरसों की बुवाई अभी तक नहीं हो पा रही है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 देश के सबसे अधिक तापमान वाले स्थानों में अधिकतर राजस्थान के निजी मौसम ऐजेंसी स्काईमेट के अनुसार शुक्रवार को मॉनसून की विदाई के बाद अधिकतम तापमान उत्तर भारत के कई राज्यों में 40 डिग्री के करीब दर्ज किया जा रहा है। पिछले 24 घंटों के दौरान देश के 10 गर्म शहरों की सूची में सबसे ऊपर रहा राजस्थान का चुरू, जहां अधिकतम तापमान 39.7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। इसके अलावा हरियाणा, गुजरात के कई जिलों में भी तापमान की तल्खी अभी भी बरकरार है। राजस्थान में चूरू 39.7, श्रीगंगानगर 39.5, बाड़मेर 39, बीकानेर 38.2, मिलानी 38.2, जैसलमेर 37.9 व जोधपुर में 37.4 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकार्ड किया गया है। वहीं राजस्थान के अन्य जिलों में भी सूरज की तल्खी बनी हुई है। इधर गुजरात राज्य के दिसा में 39.4 और अहमदाबाद में 39.9 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा। जबकि हरियाणा के नारनौल में 38.5 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। राजस्थान में रबी फसलों का संभावित बुवाई का लक्ष्य राजस्थान राज्य में इस बार रबी सीजन में 98.30 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई का लक्ष्य रखा गया है। कृषि विभाग के अनुसार रबी सीजन में 32 लाख हैक्टेयर में गेहूं, 16 लाख हैक्टेयर में चना और 3 लाख हैक्टेयर में जौ की बुवाई का लक्ष्य तय किया गया है। रबी फसलों की बुवाई के लिए कृषि विभाग की तैयारियाँ पूरी है लेकिन बढ़ा हुआ तापमान आड़े आ रहा है। कृषि विशेषज्ञों की क्या है राय रबी की बुवाई के लिए मिट्टी में नमी का होना बहुत जरूरी है और ये जब संभव है की दिन के तापमान में गिरावट आए। मिट्टी में नमी नहीं होने से बीज की लागत बढ़ जाती है और उत्पादन पर भी इसका असर पड़ता है। इस तल्ख तापमान में यदि बुवाई की जाती है तो बीज जल सकता है और इसके अंकुरण में दिक्कत होगी वहीं उत्पादन प्रभावित होगा वो अलग। इसलिए किसानों को अभी कुछ दिन और इंतजार करना चाहिए। जब तापमान कम हो जाए और मिट्टी में पर्याप्त नमी होने लगे तब रबी फसल की बुवाई शुरू करनी चाहिए। मौसम की प्रतिकूलता से साल दर साल घटता सरसों का रकबा मौसमी कारणों के चलते सरसों की बुवाई का रकबा पिछले कुछ बरसों से लगातार घटता जा रहा है। मौसम की अनुकूलता होने पर आम तौर पर सितंबर अंत से सरसों की बुवाई शुरू हो जाती है। लेकिन इस बार सितंबर जा चुका और अक्टूबर का एक सप्ताह बीत चुका है पर मौसम प्रतिकूल बना हुआ है। अभी तक सरसों की बुवाई नहीं हो पा रही है। बता दें कि राजस्थान में सबसे अधिक सरसों का उत्पादन श्रीगंगानगर में होता है। इसके बाद दूसरे नंबर पर अलवर व तीसरा नंबर भरतपुर का आता है। इसमें सबसे अधिक गुणवत्ता वाले सरसों के तेल के लिए भरतपुर पहचाना जाता है। यहां के सरसों के तेल की गुणवत्ता के लिहाज से इसका देश में प्रथम स्थान है। लेकिन मौसम की प्रतिकूलता और आयातित विदेशी तेल के कारण भरतपुर का काफी सरसों उत्पादित क्षेत्र आलू उत्पादित क्षेत्र में परिवर्तित हो गया है। इससे यहां साल दर साल इसके रकबे में कमी आती जा रही है। यही हाल अन्य जिलों का हो है। यहां भी सरसों का रकबा साल दर साल कम होता जा रहा है। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

मानसून की विदाई के साथ ही शुरू होने लगा सर्दी का अहसास

मानसून की विदाई के साथ ही शुरू होने लगा सर्दी का अहसास

निम्न दबाव का क्षेत्र बनने से कई जगह बारिश की संभावना देश में मानसून विदा होने को हैं और सर्दी ने दस्तक देनी शुरू कर दी है। प्राय: सभी जगह मौसम में परिवर्तन होने लगा है। सुबह और शाम को हल्की सर्दी का अहसास होना शुरू हो गया है। इसी के साथ तापमान में भी गिरावट आनी शुरू हो गई है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इस बार सर्दी जल्द ही दस्तक देगी। इस दौरान वायुमंडल में घटती आर्द्रता, सूखी हवाएं और साफ हो रहा आसमान सर्दी के आने की आहट दे रहा है। पूर्वानुमान के मुताबिक अक्टूबर की समाप्ति तक दिन का पारा 30 डिग्री सेल्सियस और रात का तापमान 22 डिग्री के नीचे चले जाने का अनुमान लगाया जा रहा है। मौसम के पूर्वानुमान को लेकर निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट के अनुसार दक्षिण-पश्चिमी मॉनसून उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कुछ और भागों के साथ समूचे राजस्थान तथा गुजरात के कुछ हिस्सों से आज दोपहर या शाम तक अलविदा कह जाएगा। इस दौरान देश में कई मौसमी सिस्टम बन रहे हैं जिससे देश के कुछ हिस्सों में मध्यम व हल्की बारिश हो सकती है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 इस समय देश में बन रहे मौसमी सिस्टम ओडिशा और इससे सटे भागों पर एक निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। इस सिस्टम के साथ ही एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र भी बना हुआ है। इस सिस्टम से छत्तीसगढ़ होते हुए महाराष्ट्र के उत्तरी भागों तक एक ट्रफ बनी है। साथ ही एक ट्रफ दक्षिणी तटीय तमिलनाडु तक भी बनी हुई है। उत्तरी अंडमान सागर पर जल्द ही एक नया मौसमी सिस्टम विकसित हो सकता है। 9 अक्टूबर के आसपास इसके निम्न दबाव में और 11-12 अक्टूबर तक डिप्रेशन बनने की संभावना है। पिछले 24 घंटों के दौरान कैसा रहा देश के विभिन्न राज्यों में मौसम- बीते 24 घंटों की अवधि के दौरान बिहार, असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी बारिश दर्ज की गई। ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड, पश्चिम बंगाल, पूर्वोत्तर भारत, विदर्भ, पूर्वी मध्य प्रदेश, तटीय आंध्र प्रदेश, अंडमान व निकोबार द्वीपसमूह तथा उत्तरी कर्नाटक में कुछ जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश हुई। कोंकण गोवा, दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और लक्षद्वीप में एक-दो स्थानों पर हल्की बारिश देखने को मिली। अगले 24 घंटों के दौरान मौसम का पूर्वानुमान अगले 24 घंटों के दौरान पश्चिम बंगाल, तटीय ओडिशा, उत्तरी तटीय आंध्र प्रदेश, बिहार के कुछ हिस्सों, असम और अरुणाचल प्रदेश में हल्की से मध्यम वर्षा जारी रहेगी। एक-दो स्थानों पर भारी बारिश का भी अनुमान है। पूर्वोत्तर भारत, झारखंड, छत्तीसगढ़, पूर्वी मध्य प्रदेश, आंतरिक ओडिशा, तेलंगाना, विदर्भ, अंडमान व निकोबार द्वीपसमूह, दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक, दक्षिणी तटीय कर्नाटक और केरल में हल्की से मध्यम बारिश कुछ स्थानों पर हो सकती है। दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश, कोंकण गोवा और तमिलनाडु में एक-दो स्थानों पर हल्की बारिश होने की संभावना है। उत्तर भारत के पहाड़ी और मैदानी इलाकों समेत मध्य भारत के अधिकांश हिस्सों में मौसम साफ और शुष्क बना रहेगा। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

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