भविष्य में डीजल और पेट्रोल पर नहीं चलेंगे ट्रैक्टर, डीएमई इंजन होगा विकसित

भविष्य में डीजल और पेट्रोल पर नहीं चलेंगे ट्रैक्टर, डीएमई इंजन होगा विकसित

Posted On - 24 Mar 2020

ट्रैफे और आईआईटी कानप़ुर विकसित करेंगे डीएमई इंजन, ट्रैक्टरों में डीजल और पेट्रोल की निर्भरता घटेगी

भविष्य में ट्रैक्टर के इंजन बिना पेट्रोल और डीजल के चलेंगे, यह कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। देश में किसानों के खर्चों को कम करने के लिए ट्रैक्टर को बिना पेट्रोल और डीजल के लिए चलाने के लिए कई प्रयोग चल रहे हैं। इन्हीं प्रयोग की शृंखला में डीएमई इंजन का नाम भी शामिल होने जा रहा है। देश के सबसे प्रतिष्ठित ट्रैक्टर निर्माताओं में शामिल ‘ट्रैक्टर और फार्म इक्विपमेंट लिमिटेड’ (TAFE) और आईआईटी कानपुर मिलकर ट्रैक्टर इंजनों के लिए एक ऐसी प्रौद्योगिकी विकसित करेंगे जो डीजल और पेट्रोल जैसे ईंधन की बजाए डीआई मिथाइल ईथर  (DME) पर चलेंगे।

 

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लंबे समय से डीआई मिथाइल ईथर को पारंपरिक ईंधन का विकल्प माना जाता है, क्योंकि यह एक हरा ईंधन है जिसे बायोमास से भी उत्पादित किया जा सकता है। डीएमई की एक बहुत अच्छी उच्च संख्या है जिसका अर्थ है कि यह दबाव के तहत आसानी से प्रज्वलित कर सकता है। इस कारण इसे डीजल के एक आसान विकल्प के रूप में देखा गया है। इसे डीजल से चलने वाले वाहनों और ऑटोमोबाइल में ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

आईआईटी कानपुर के डा. अविनाश कुमार अग्रवाल और प्रोफेसर तरूण गुप्ता ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की पहल पर Imprint-2 के तहत डीएमई संचालित डीजल इंजनों के लिए प्रौद्योगिकी विकसित की है, जिसे अब परियोजना के लिए 1.60 करोड़ रुपए की राशि से मान्यता दी गई है।

टैफे इस परियोजना के साथ एक औद्योगिक भागीदार के रूप में जुड़ा हुआ है। एक औद्योगिक भागीदार के रूप में टैफे ने इस परियोजना के लिए वित्तीय प्रतिबद्धता दी है। शोधकर्ताओं ने बताया कि टैफे का उद्देश्य बेस डीजल इंजन में संशोधन करना है और इसे डीएमई अनुकूलन के लिए रेट्रोफिट कीट के लिए विकसित करना है। इस संशोधन के साथ मौजूद इंजनों को भी डीएमई पर चलाने के लिए बनाया जा सकता है। शोधकर्ताओं ने ट्रैक्टर इंजन के एक प्रोटो टाइप का निर्माण करने की भी योजना बनाई है जो डीएमई द्वारा पूरी तरह से संचालित किया जाएगा।

 

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डीएमई के उपयोग से लाभ

डीएमई पर चलने वाले ट्रैक्टर इंजन का विकास दुनिया के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है क्योंकि पर्यावरण के संरक्षण के लिए दुनियाभर में शोध चल रहे हैं। डीएमई जैसा हरे रंग का ईंधन पर्यावरण संरक्षण में स्थायी विकास प्राप्त करने में मदद कर सकता है। डीएमई, एक गैर विषैला और पर्यावरण के अनुकूल ईंधन है। इसलिए यह मिट्टी को जहर नहीं देगा, भले ही यह गलती से फैल जाए। यह पानी में नहीं डूबता है और मिट्टी द्वारा अवशोषित नहीं होता है, जो इसे ट्रैक्टरों पर उपयोग करने वाले किसानों को सुरक्षित बनाता है। जबकि डीजल रिसाव से मिट्टी खराब हो सकती है और मिट्टी की गुणवत्ता बहुत प्रभावित होती है। जैसा कि टैफे अपने मौजूदा इंजनों को संशोधित करता है, किसान निकट भविष्य में ऐसे कई डीएमई चलने वाले वाहनों की उम्मीद कर सकते हैं।

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