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मोदी सरकार की फ्री सिलाई मशीन योजना : ५० हजार जरुरतमंद महिलाओं को नि:शुल्क मिलेगी

मोदी सरकार की फ्री सिलाई मशीन योजना : ५० हजार जरुरतमंद महिलाओं को नि:शुल्क मिलेगी

01 July, 2020

जरूरतमंद महिलाओं को स्वरोजगार के लिए मोदी सरकार देगी फ्री में सिलाई मशीन

कोरोना संक्रमण के दौरान केंद्र व राज्य सरकारों ने देश के सभी वर्गों के लिए कई लाभकारी योजनाओं की शुरुआत की है। इसमें सरकार की ओर से किसानों, व्यापारियों, प्रवासियों मजदूरों को आर्थिक रूप से लाभ पहुंचाने वाली अनेक योजनाएं चलाई गई है जिनका लोगों फायदा भी मिल रहा है। इन योजनाओं की धरातल पर क्रियान्विति होने से सरकार का आत्मनिर्भर भारत का सपना साकार होता नजर आ रहा है। सरकार का ऐसी योजनाएं चलाने के पीछे इसका मुख्य लक्ष्य लोगों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। कोरोना संक्रमण काल में इन योजनाओं को काफी गति मिली है। सरकार ने पुरानी योजनाओं जारी रखते हुए कई नई योजनाएं शुरू की है जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को फायदा हो और लॉकडाउन से हुए नुकसान से लोगों को उबारा जा सके ताकि उनकी जीवन की गाड़ी फिर से पटरी पर आ सके। इसी क्रम में केंद्र सरकार ने जरूरमंद महिलाओं को फ्री में सिलाई मशीन देने की योजना शुरू की है।

 

सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1

 

इससे उन महिलाओं को फायदा होगा जिनकी आय का स्त्रोत नहीं है और उनके उपर ही परिवार की जिम्मेदारी है। सरकार का मानना है कि इस योजना से ऐसी महिलाओं को आर्थिक रूप से संबल मिलेगा और वे सिलाई कार्य करके अपने परिवार का पालन कर सकेंगी। इस योजना के तहत केंद्र सरकार द्वारा हर राज्य में 50,000 से अधिक महिलाओं को निशुल्क सिलाई मशीन प्रदान की जाएगी। आइए जानते हैं क्या है मोदी सरकार की फ्री में सिलाई मशीन देने की योजना और इसकी आवश्यक शर्तें और आप इस योजना से कैसे लाभ उठा सकती हैं। 

 

क्या है फ्री सिलाई मशीन योजना ( silai machine yojna )

फ्री सिलाई मशीन योजना 2020 का शुभारंभ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश की महिलाओं को रोजगार प्रदान करने के लिए किया गया है। इस योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा देश की गरीब और श्रमिक महिलाओं को मुफ्त में सिलाई मशीन  दी जाएगी। इस के योजना से महिलाएं सिलाई मशीन प्राप्त कर घर बैठे स्वयं का रोजगार शुरू कर आर्थिक रूप से लाभान्वित हो सकेगी। इस योजना को चलाने के का उद्देश्य महिलाओं आत्मनिर्भर बनाना है। 

 

 

किन-किन राज्यों में चल रही है फ्री सिलाई मशीन योजना

अभी फिलहाल ये फ्री सिलाई मशीन योजना देश के कुछ राज्यों में ही चल रही है लेकिन जल्द ही देश के बाकी राज्यों  में भी इस योजना को चलाया जाएगा। इस समय यह योजना हरियाणा, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक,  राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार राज्यों में चलाई गई है। 

 

फ्री सिलाई मशीन योजना के उद्देश्य

  • निशुल्क सिलाई मशीन योजना का मुख्य उद्देश्य देश की आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को केंद्र सरकार द्वारा मुफ्त में सिलाई मशीन प्रदान करना।
  • फ्री सिलाई योजना के जरिये श्रमिक महिलाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करना जिससे वह घर बैठे सिलाई करके अच्छी आमदनी इकट्ठा कर सकेंगी। 
  • इस फ्री सिलाई मशीन योजना के जरिये श्रमिक महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना और इस योजना से ग्रामीण महिलाओं की स्थिति में भी सुधार आएगा।

 

फ्री सिलाई मशीन योजना के लाभ

  • इस योजना का लाभ देश की श्रमिक महिलाओं को प्रदान किया जाएगा।
  • इस योजना के अंतर्गत देश की सभी श्रमिक महिलाओं को सरकार द्वारा निशुल्क सिलाई मशीन प्रदान की जाएगी।
  • फ्री सिलाई मशीन प्राप्त करके महिलाएं घर बैठे सिलाई कार्य कर अच्छी आमदनी अर्जित कर सकती है।
  • देश की ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं को इस योजना का लाभ दिया जाएगा।
  • देश की गरीब महिलाओं को इस योजना के जरिये रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे।
  • योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा हर राज्य में 50,000 के अधिक महिलाओं को निशुल्क सिलाई मशीन प्रदान की जाएगी।
  • इस योजना जरिये महिलाओं को रोजगार के लिए प्रेरित कर उन्हें आत्मनिर्भर व सशक्त बनाना है।

 

फ्री सिलाई मशीन योजना में शामिल होने के लिए पात्रता

  • इस योजना के लिए आवेदन करने वाली महिलाओं की आयु 20 से 40 वर्ष होनी चाहिए।
  • इस योजना के तहत श्रमिक महिलाओं के पति की वार्षिक आय 12000 रुपए से अधिक नहीं होनी चाहिए।
  • देश की आर्थिक रूप से कमजोर महिलाएं ही इस योजना के तहत पात्र होंगी।
  • देश की विधवा और विकलांग महिलाएं भी इस योजना का लाभ ले सकती हैं।

 

आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज

  • आवेदन करने वाली महिला का आधार कार्ड
  • आयु प्रमाण पत्र
  • आय प्रमाण पत्र
  • पहचान पत्र
  • यदि विकलांग है तो विकलांग चिकित्सा प्रमाण पत्र
  • यदि कोई महिला विधवा है तो उसका निराश्रित विधवा प्रमाण पत्र
  • सामुदायिक प्रमाण पत्र
  • मोबाइल नंबर
  • पासपोर्ट साइज फोटो

 

 

ऐसे करें योजना के लिए आवेदन

  • इस योजना के अंतर्गत जो इच्छुक श्रमिक महिलाएं आवेदन करना चाहती है तो उन्हें इसके लिए भारत सरकार की आफिशियल वेबसाइट https://www.india.gov.in/  पर जाना होगा।
  • आफिशियल वेबसाइट पर जाने के बाद आपको वहां से आवेदन फॉर्म को डाउनलोड करना होगा। आवेदन फार्म डाउनलोड करने के बाद आपको आवेदन फॉर्म में पूछी गई सभी जानकारी जैसे नाम, पता, मोबाइल नंबर, आधार कार्ड नंबर आदि भरना होगा।
  • सभी जानकारी भरने के बाद आपको अपने सभी दस्तावेजों की फोटो कॉपी को अपने आवेदन फॉर्म से अटैच करके अपने क्षेत्र के संबंधित कार्यालय में जाकर जमा करना होगा।
  • इसके बाद आपके आवेदन फार्म को कार्यालय के अधिकारी द्वारा सत्यापन किया जाएगा। सत्यापन करने के बाद आपको सिलाई मशीन प्रदान की जाएगी।
  • इस योजना के बारे में ओर अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए आप इसकी वेबसाइट https://www.india.gov.in/  पर विजिट कर जानकारी ले सकते हैं।

 

अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण,  दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।  

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स्टार्ट-अप्स क्या है : इससे किसानों को कैसे होगा फायदा, जाने पूरी जानकारी

स्टार्ट-अप्स क्या है : इससे किसानों को कैसे होगा फायदा, जाने पूरी जानकारी

क्या है स्टार्ट अप्स? इससे किसानों को कैसे होगा फायदा, जाने पूरी जानकारी मोदी सरकार ने कृषि क्षेत्र से जुड़े स्टार्ट-अप्स रफ्तार देने के लिए इसे प्रोत्साहन देने की नीति बनाई है। इसके तहत 112 स्टार्र्ट-अप्स को सरकार की ओर से 1186 लाख रुपए की आर्थिक मदद दी जाएगी। इसके पीछे सरकार का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और युवाओं को रोजगार दिलाना है। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने मीडिया को बताया कि मोदी सरकार ने कृषि क्षेत्र के स्टार्ट-अप्स को प्रोत्साहित करने की नीति बनाई है। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY)- रफ्तार के तहत ‘नवाचार और कृषि-उद्यमिता विकास’ कार्यक्रम को अपनाया गया है। इसके पहले चरण में 112 स्टार्टअप को 1186 लाख रुपए की रकम दी जाएगी। बता दें कि आरकेवीवाई योजना कृषि एवं संबंद्ध क्षेत्रों में सार्वजनिक निवेश बढ़ाने के लिए राज्यों को प्रोत्साहित करती है। क्या है स्टार्ट अप्स भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है जिसका उद्देश्य देश में स्टार्टअप्स और नये विचारों के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र startup India का निर्माण करना है जिससे देश का आर्थिक विकास हो एवं बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर उत्पन्न हों। स्टार्टअप इंडिया स्टैंडअप इंडिया है, की घोषणा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस 2015 के भाषण में की गई थी। ये मोदी सरकार द्वारा देश के युवाओं की मदद करने के लिये एक प्रभावी योजना है। ये पहल युवाओं को उद्योगपति और उद्यमी बनने का अवसर प्रदान करने के लिये भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई है जिसके लिये एक स्टार्ट-अप नेटवर्क को स्थापित करने की आवश्यकता है। स्टार्ट-अप का अर्थ, देश के युवाओं को बैंको के माध्यम से वित्त प्रदान करना जिससे उनकी शुरुआत बेहतर मजबूती के साथ हो ताकि वो भारत में अधिक रोजगार सृजन कर सके। वहीं सरकारी योजनाओं के लिए इसकी परिभाषा कुछ इस प्रकार है- स्टार्टअप एक इकाई है, जो भारत में पांच साल से अधिक से पंजीकृत नहीं है और जिसका सालाना कारोबार किसी भी वित्तीय वर्ष में 25 करोड़ रुपए से अधिक नहीं है। यह एक इकाई है जो प्रौद्योगिकी या बौद्धिक सम्पदा से प्रेरित नये उत्पादों या सेवाओं के नवाचार, विकास, प्रविस्तारण या व्यवसायीकरण की दिशा में काम करती है। स्टार्ट अप्स को 29 एग्रीबिजनेस इंक्यूबेशन केंद्रों में दी ट्रेनिंग केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के अनुसार इन स्टार्ट-अप को 29 एग्रीबिजनेस इंक्यूबेशन केंद्रों में 2-2 महीने की ट्रेनिंग दी गई है। ये स्टार्ट-अप युवाओं को रोजगार प्रदान करेंगे व प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से किसानों की आय बढ़ाने में भी मददगार साबित होंगे। उन्होंने कहा, कृषि व इससे जुड़ी एक्टिविटी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के जिए आरकेवीवाई-रफ्तार, महत्वपूर्ण योजना है। योजना के तहत कृषि उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए ‘इनोवेशन एंड एग्री-एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट’ कार्यक्रम को जोड़ा गया है। इसी के तहत स्टार्ट-अप को आर्थिक सहायता दी जाएगी। तोमर ने बताया कि उन्होंने मंत्रालय स्तर पर आयोजित बैठकों में कृषि को प्रतिस्पर्धी बनाने, कृषि-आधारित गतिविधियों के लिए आवश्यक संबल प्रदान करने और नई तकनीक को जल्द से जल्द अपनाने को कहा है। सरकार का जोर कृषि क्षेत्र में निजी निवेश बढ़ाने पर है, इसलिए स्टार्ट-अप्स की जरूरत है। स्टार्ट अप्स से किसानों को क्या लाभ केंद्रीय कृषि मंत्री तोमर के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस महीने की शुरुआत में देश में कृषि अनुसंधान, विस्तार और शिक्षा की प्रगति की समीक्षा की थी। किसानों की मांग पर जानकारियां प्रदान करने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला था। तोमर ने बताया कि प्रधानमंत्री ने यह भी निर्देश दिया है कि चिन्हित समस्याओं को सुलझाने और कलपुर्जों व उपकरणों के लिए डिजाइन संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए साल में दो बार हैकाथॉन का आयोजन किया जा सकता है जिससे खेती-बाड़ी में कठिन परिश्रम को कम किया जा सकता है। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

किसानों को सरकार ने दी सौगात, अब आधे दाम पर मिलेंगे कृषि यंत्र

किसानों को सरकार ने दी सौगात, अब आधे दाम पर मिलेंगे कृषि यंत्र

उत्तर प्रदेश कृषि यंत्र अनुदान योजना 2020 ( UP Krishi yantra subsidy ) किसानों को खेती के कार्य में सहयोग देने के लिए केंद्र सरकार की ओर से कई लाभकारी योजनाएं चलाई जा रही है। इसमें अनुदान पर कृषि यंत्र उपलब्ध कराने की योजना भी है। कोविड-19 के कारण लगे लॉकडाउन के बाद किसानों को राहत पहुंचाने के लिए सरकार अपने स्तर पर प्रयास कर रही है। इसी क्रम में किसानों को अनुदान पर कृषि यंत्र देने के लिए संपूर्ण देश में सब मिशन ओन एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इसके अंतर्गत कई राज्यों ने किसानों को अनुदान पर कृषि यंत्र मुहैया कराने के लिए आवेदन शुरू कर दिए है। इसी कड़ी में उत्तरप्रदेश सरकार ने इस वित्तीय वर्ष पहली बार अनुदान पर कृषि यंत्र उपलब्ध कराने के लिए किसानों से आवेदन मांगे हैं। इसमें किसानों को कृषि यंत्रों पर 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जा रही है। इस बार खास बात ये है कि इस योजना के तहत ऐसे यंत्रों को भी शामिल किया गया है जो किसानों को रोजागर प्राप्त करने में सहायक होंगे। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 इन यंत्रों पर मिल रही है सब्सिडी किसानों कृषि यंत्र देने के लिए विभिन्न कृषि यंत्रों को जारी कर दिया गया है, जिसे किसान आसानी से सब्सिडी पर प्राप्त कर सकता है। यह कृषि यंत्र इस प्रकार है- हस्त चालित स्प्रैयर, शक्ति चालित स्प्रैयर, एम. बी.पलाऊ, लेजर लैंड लेवलर, हैरो कल्टीवेटर, रिजर, मल्टीक्राप थ्रेसर, पावर आपरेटेड चैफ कटर, स्ट्रा रीपर, मिनी राईस मिल, मिलेट मिल, मिनी दाल मिल, ऑयल मिल विद फिल्टर प्रेस, पैकिंग मशीन, रोटावेटर, रेज्ड बेड प्लान्टर, पावर टिलर, कम्बाइन हार्वेस्टर सुपर, एम.एम.एस, राइस ट्रांसप्लान्टर एवं योजनान्तर्गत निर्धारित अन्य यंत्र। कृषि यंत्रों पर सब्सिडी का निर्धारण उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए कृषि यंत्र सब्सिडी पर दिए जा रहा है। इसके लिए राज्य सरकार ने दो प्रकार का सब्सिडी व्यवस्था की है। इसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, लघु एवं सीमान्त और महिला कृषकों के लिए राज्य सरकार के तरफ से कृषि यंत्रों पर 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जा रही है। इसके अलावा अन्य श्रेणी के किसानों को 40 प्रतिशत तक की सब्सिडी पर कृषि यंत्र उपलब्ध कराएं जाएंगे। कृषि यंत्रों के लिए कितनी जमा करानी होगी जमानत राशि किसानों को कृषि यंत्र प्राप्त करने के लिए जमानत राशि जमा करना होगा। इसके लिए राज्य सरकार ने जमानत राशि कि सीमा जारी की है। यह जमानत राशि इस प्रकार है- 10 हजार या उससे कम राशि के सब्सिडी या अनुदान वाले कृषि यंत्रों के लिए शून्य रुपए की जमानत राशि जमा करनी होगी अर्थात ऐसे यंत्रों के लिए किसानों को किसी प्रकार की जमानत राशि नहीं देनी होगी। 10 हजार रुपए से अधिक तथा एक लाख रुपए तक के अनुदान वाले कृषि यंत्रों हेतु किसान को 2500 रुपए तक की जमानत राशि जमा करनी होगी। एक लाख रुपए से अधिक अनुदान वाले कृषि यंत्रों हेतु किसान को 5,000 रुपए तक की जमानत राशि जमा करनी होगी। कृषि यंत्र अनुदान हेतु आवेदन की प्रक्रिया अनुदान प्राप्त करने हेतु किसानों का विभाग पोर्टल पर पंजीकरण आवश्यक है। जिन किसानों का पूर्व से पंजीकरण नहीं है, वह अपने आधार कार्ड, बैंक पासबुक की छायाप्रति, मोबाइल नंबर और खतौनी के साथ अपने विकासखंड के राजकीय कृषि बीज भंडार प्रभारी अथवा जनपद के उप कृषि निदेशक कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। पंजीकृत किसान द्वारा कृषि यंत्र पर अनुदान के लिए विभागीय पोर्टल- upagriculture.com पर दिए गए लिंक यंत्र पर अनुदान हेतु पर क्लिक करने के बाद अपना आधार नंबर और मोबाइल नंबर डालने पर ओ.टी.पी. मोबाइल नंबर प्राप्त होगा। ओ.टी.पी. सत्यापन के बाद टोकन जनरेट होगा तथा बैंक में जमा की जाने वाली धनराशि का चालान फार्म प्राप्त होगा। चालान फार्म में दी गई अवधि के अंदर जमानत धनराशी अपने नजदीकी यूनियन बैंक के किसी भी शाखा में जमा करनी होगी। निर्धारित लक्ष्यों तक ही जनरेट होंगे टोकन, इसके बाद बनेगी प्रतीक्षा सूची निर्धारित लक्ष्यों तक टोकन जनरेट होंगे इसके बाद एक प्रतीक्षा सूची भी बनाई जाएगी, जो स्वीकृत किसानों के यंत्र नहीं लेने की स्थिति में उपयोग में लाई जाएगी। इसमें यदि स्वीकृत किसान कृषि यंत्र नहीं लेते हैं तो उसकी जगह प्रतीक्षा सूची में शामिल किए गए किसानों को प्राथमिकता दी जाएगी और उन्हें इसका लाभ देते हुए कृषि यंत्र उपलब्ध कराया जाएगा। जमानत राशि का चालान जमा कराने के 45 दिन के अंदर क्रय करना होगा कृषि यंत्र जमानत धनराशि का चालान जमा करने के 45 दिन के अंदर कृषि यंत्र खरीद कर बिल एवं आवश्यक अभिलेख विभागीय पोर्टल पर अपलोड करने होंगे अथवा जनपदीय उपकृषि निदेशक कार्यालय में अपलोड कराने हेतु उपलब्ध कराना होगा। इसके बाद लाभार्थी द्वारा क्रय किए गए कृषि यंत्रों के सत्यापन आदि के बाद डी.बी.टी. के माध्यम से नियमानुसार अनुदान का भुगतान किया जाएगा। विशेष - इस योजना के संबंध में और अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए आप अपने निकटतम कृषि विभाग या इसके विभागीय पार्टल upagriculture.com पर जाकर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

अब तीन वर्ष के लिए होगा फसल बीमा, सरकार ने किए महत्वपूर्ण बदलाव

अब तीन वर्ष के लिए होगा फसल बीमा, सरकार ने किए महत्वपूर्ण बदलाव

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में महत्वपूर्ण बदलाव किसानों को प्राकृतिक आपदाओं जैसे- सूखा, बाढ़, भूस्खलन, बेमौसम बारिश, प्राकृतिक आग और खड़ी फसल के लिए चक्रवात के साथ ही ओलावृष्टि से बचाव के लिए सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना चला रखी है। इसमें किसान को बुवाई से लेकर फसल कटाई तक होने वाले नुकसान की भरपाई की जाती है। हाल ही में सरकार ने इस योजना में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए है। इसलिए यदि आप किसान है और अपनी फसल का बीमा कराना चाहते हैं तो आपको इन बदलाव की जानकारी होना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं प्रधानमंत्री फसल बीमा में किए गए बदलावों के बारे में ताकि आप बिना नुकसान उठाए अपनी फसल का बीमा करवा कर क्षतिपूर्ण प्राप्त कर सकें। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 अब किसान की स्वैच्छा से होगा फसल बीमा पहले प्रत्येक किसान को अपनी फसल बीमा कराना अनिवार्य था। पर अब किसान अपनी स्वैच्छा से बीमा करा सकेंगे। पहले बीमा कराना अनिवार्य होने से बीमा कंपनियों द्वारा किसान के खाते से ओटोमैटिक राशि काट ली जाती थी लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। अब किसान चाहे तो अपनी फसल का बीमा कराए और न चाहे तो इस योजना से खुद को अलग कर सकता है। यह व्यवस्था सरकार ने दी है। गौरतलब है कि किसान लंबे समय से इस योजना को स्वैच्छिक करने की मांग कर रहे थे जिसे मोदी सरकार ने मान लिया। पीएम फसल बीमा से खुद को अलग करने के लिए क्या करें किसान यदि किसान अपनी फसल का बीमा नहीं कराना चाहता है तो बीमा के लिए तय की गई नामांकन की कट-ऑफ तारीख 31 जुलाई से सात दिन पहले यानी 24 तारीख तक अपने बैंक शाखा को एक घोषणा पत्र देना होगा। इसमें आपकों बताना होगा कि मैं इस योजना में शामिल नहीं होना चाहता हूं। ऐसा करके आप योजना से खुद को अलग कर सकते हैं। ऐसा नहीं करने पर बैंक से सीधे पीएम फसल बीमा योजना का प्रीमियम कट लिया जाएगा। फसल बीमा योजना में हुए ये तीन महत्वपूर्ण बदलाव योजना को फसल ऋण के साथ ही इसे स्वैच्छिक बनाया गया है। बीमा कंपनियों के लिए अनुबंध की अवधि को एक वर्ष से बढ़ाकर तीन वर्ष तक किया गया है। एकल जोखिम के लिए भी बीमा की अनुमति दी गई है। अब किसान अपनी फसलों के लिए अधिक महंगे बहु-जोखिम कारक, जिनमें से कई कारकों के किसी क्षेत्र विशेष में होने की संभावना न के बराबर होती है, के कवर के लिए भुगतान करने की बजाय उन जोखिम कारकों का चयन कर सकते हैं, जिसके लिए वे अपनी फसल का बीमा करवाना चाहते हैं। फसल बीमा में शामिल होने के लिए आवश्यक दस्तावेज यदि आप पीएम फसल बीमा योजना में शामिल होना चाहते हैं तो आपको निम्नलिखित दस्तावेजों को ले जाना होगा जो इस प्रकार हैं- आवेदक का आधार कार्ड आवेदक की बैंक पासबुक आवेदक का मोबाइल नंबर भूमि रिकार्ड / किरायेदारी समझौता स्व-घोषणा प्रमाण-पत्र मोबाइल से मिलेगी आवेदन की स्थिति की जानकारी किसान को इस योजना में आवेदन करने के लिए मोबाइल नंबर देना जरूरी होगा क्योंकि अब इस योजना के तहत नामांकित सभी किसानों को उनके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबरों पर नियमित एसएमएस के माध्यम से आवेदन की स्थिति के बारे में सूचित किया जाएगा। इससे किसान को इससे संबंधित हर सूचना अपने घर बैठे ही प्राप्त हो जाएगी। किसानों की सुविधा के लिए अधिकारी रहेंगे मौजूद किसानों के लिए परेशानी मुक्त नामांकन सुनिश्चित करने के लिए, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने बैंकों, बीमा कंपनियों, कॉमन सर्विस सेंटर (सीएसी), राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति ( एसएलबीसी ) और ग्राम स्तरीय 29,275 अधिकारियों को ट्रेनिंग दिया है। इससे किसानों को फसल बीमा कराने में कोई भी परेशानी आए तो वे इन अधिकारियों से जानकारी व सहायता ले सकेंगे। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

गोधन न्याय योजना : वर्मी कम्पोस्ट खाद से किसानों को होगी अतिरिक्त आमदनी

गोधन न्याय योजना : वर्मी कम्पोस्ट खाद से किसानों को होगी अतिरिक्त आमदनी

गोबर खरीद करने वाला देश का पहला राज्य बना छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हरेली पर्व पर गोधन न्याय योजना ( Vermicompost ) का शुभारंभ किया। इसी के साथ इस योजना के तहत गौठानों पर पशुपालकों से गोबर की खरीद का कार्य शुरू कर दिया गया है। सरकार ने गोबर का परिवहन व्यय सहित दो रुपए प्रति किलो दाम तय किया है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में गौ-पालन को आर्थिक रूप से लाभदायी बनाने तथा खुले में चराई की रोकथाम तथा सडक़ों एवं शहरों में जहां-तहां आवारा घुमते पशुओं के प्रबंधन एवं पर्यावरण की रक्षा के लिए छत्तीसगढ़ राज्य में गोधन न्याय योजना शुरू की गई है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के लोगों को हरेली पर्व की शुभकामनाएं दी। बता दें कि इस योजना के तहत पशुपालकों से गोबर खरीदी का कार्य शुरू करने वाला छत्तीसगढ़ देश का सबसे पहला राज्य बन गया है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 छत्तीसगढ़ में हरेली पर्व का महत्व छत्तीसगढ़ में त्यौहारों की शुरुआत हरेली पर्व से होती है। इस दिन यहां पर उनके कुलदेवता की पूजा की जाती है। उत्सव के दिन किसान खेती में उपयोग होने वाले सभी औजारों की पहले अच्छे से साफ-सफाई कर उसे घर के आंगन में रखकर पूजा-अर्चना करते हैं। गाय-बैलों की भी पूजा की जाती है और इस पर्व पर गाय-बैलों को बीमारी से बचाने के लिए नमक भी खिलाया जाता है। गौठानों में शुरू हुई गोबर की खरीद खरसिया के तेंदूमुड़ी के 114 गोठानों में योजना के तहत गोबर खरीदी हुई। त्योहार पर लोग पूजा और आयोजन में व्यस्त रहे इसलिए गोबर बेचने वालों की संख्या पहले दिन कम रही। बता दें कि छत्तीसगढ़ राज्य देश का पहला राज्य है जो गोबर की खरीद करेगा। इस योजना में किसानों से दो रुपए किलो की दर से गोबर की खरीद की जा रही है। प्रतियोगिताओं का भी हुआ आयोजन हरेली के त्यौहार पर राज्य में कई जगह गेड़ी रेस हुई। भौंरा और नारियल फेंक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। योजना से किसानों की आय बढ़ेगी, पशुओं का होगा संरक्षण हरेली त्योहार पर खरसिया के तेंदूमुड़ी के गौठान में उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल ने गोधन न्याय योजना के शुभारंभ के अवसर पर कहा कि मुख्यमंत्री ने पिछले साल गांवों के विकास के लिए नरवा, गरवा, घुरवा औ बाड़ी योजना शुरू की थी। अब गोधन न्याय योजना शुरू की गई है। देश में दो रुपए किलो गोबर खरीदने वाला छत्तीसगढ़ पहला राज्य है। इस योजना से किसान और पशुपालकों की आय में वृद्धि होगी। पशुओं के प्रति लोगों में प्रेम बढ़ेगा और किसानों को वर्मी कम्पोस्ट खाद मिलने से जैविक खाद का इस्तेमाल बढ़ेगा। गोबर से बनेगी वर्मी कम्पोस्ट, जैविक खेती को मिलेगा बढ़ावा गौठानों में गोबर की खरीद का काम शुरू होने के साथ ही यहां वर्मी कम्पोस्ट बनाने का काम शुरू होगा। इससे किसानों को अतिरिक्त आदमनी होने के साथ ही जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा। सरकार ने इसकी योजना भी तैयार कर रखी है। यह योजना किसानों व पशुपालकों के लिए लाभकारी साबित होगी। वहीं पशुपालन को भी बढ़ावा मिलेगा। इस योजना को शुरू करने का सरकार का मकसद है कि पशुओं को खुले में छोडऩे पर रोक लगे और लोग का रूझान पशु को पालने की ओर जाए। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

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