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ये 10 खास कल्टीवेटर, खेतों की जुताई में बचाएंगें मजदूरी का पैसा

ये 10 खास कल्टीवेटर, खेतों की जुताई में बचाएंगें मजदूरी का पैसा

जानें, जमीन को कैसे उपजाऊ बनाता है कल्टीवेटर 

किसान भाइयों, ट्रैक्टर जंक्शन की इस पोस्ट में आपका स्वागत है। इस पोस्ट में हम आपको ट्रैक्टर कल्टीवेटर के बारे में बताएंगे। भारत में कौन-कौन से ऐसे कल्टीवेटर हैं जो किसानों के लिए सबसे अधिक उपयोगी साबित हो सकते हैं। इससे पहले यह जानते हैं कि कल्टीवेटर की क्या उपयोगिता है और इनके प्रयोग से कैसे फटाफट खेतों की बदल जाती है तस्वीर। 

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सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 


जमीन को उपजाऊ बनाने के लिए कल्टीवेटर बहुत जरूरी

जमीन को उपजाऊ बनाने के लिए कल्टीवेटर का प्रयोग बहुत जरूरी हो जाता है। किसानों को खेती करना तब तक मुश्किल भरा काम होता है जब तक जमीन तैयार नहीं होती। किसी भी फसल की बुआई से पहले जमीन की सतह वाली मिट्टी को हटाना पडता है। यह कल्टीवेटर से ही संभव है। पहले किसान बैलों के हल से या स्वयं खेत में जुताई करते थे। इसमें भारी श्रम करना पडता था। अब माडर्न जमाने में खेती करना बहुत आसान हो गया है। यह आप सभी जानते हैं कि कल्टीवेटर का प्रयोग ट्रैक्टर के साथ ही किया जाता है। जुताई से पहले खेतों में अवांछित पौधे या खरपतवार भी हो जाती है। इसके अलावा सतह वाली मिट्टी में कभी बीज नहीं उगाए जा सकते। कल्टवेटर के जरिए भूमि की गहराई तक की मिट्टी ऊपर आ जाती है और खेत में मिट्टी के ढेले भी खत्म हो जाते हैं। उदाहरण के तौर पर सरसों की बुआई से पहले किसानों को कम से कम चार या पांच जुताई करनी होती हैं। जब तक मिट्टी पूरी तरह से बारीक नहीं तब तक सरसों की बिजाई करना ठीक नहीं माना जाता। इसी तरह से सभी प्रकार के फसलों की बुआई से पहले खेतों की अच्छी तरह से जुताई करनी पडती है। कई बार पहले वाली फसलों की जडों के डंठल इतनी मात्रा में कल्टीवेशन के बाद निकलते हैं कि किसानों को इन डंठलों को इकट्ठा करना पडता है। यही नहीं यदि खेत की बढिया कल्टवेटर से जुताई की जाएगी तो अनेक प्रकार के भूमिगत कीट भी बाहर निकल आते हैं और इनको कई किसान मित्र पक्षी खाकर नष्ट कर देते हैं। 


खाद का होता है समुचित वितरण 

कल्टीवेटर्स से ना सिर्फ जुताई बल्कि खाद का सही तरीके से वितरण होता है। बुआई से पहले फसलों के हिसाब से नत्रजन या अन्य जरूरी उर्वरक भी डाले जाते हैं। यहां तक यदि गोबर से बनी खाद भी खेतों में मिलानी हो तो बिना कल्टीवेटर के यह काम आसान नहीं है। वहीं पुराने तरीकों से खाद-बीज डालने से उत्पादकता पर भी सीधा असर पडता है। किसान यदि स्वयं खाद मिलाने का काम करते हैं तो कहीं अधिक तो कहीं कम खाद का छिडकाव होता है लेकिन कल्टीवेटर से इस तरह की गलतियां नहीं होती। 


खेतों की सुधरती है सेहत 

कल्टीवेटर्स के जरिए खेतों की सेहत सुधारी जाती है। इससे जमीन की उर्वरा शक्ति बढती है। हम आपको ट्रैक्टर जंक्शन पर बताते हैं कि कल्टीवेटर्स का प्रयोग कब और कैसे किया जाए। आम तौर पर किसान कल्टीवेशन करते समय यह नहीं ध्यान देेते कि जमीन की सतह पर अधिक नमी तो नहीं है। अधिक नमी होने पर कल्टवेटर्स सहीं ढंग से काम नहीं करेंगे। इसलिए जमीन की सतह की मिट्टी सूखी होना बहुत जरूरी है। 


खरपतवार की होगी छुट्टी 

कई बार समय रहते खेतों की जुताई नहीं किए जाने से उनमें अत्प्राशित खरपतवार बढ जाती है।  इसे साफ करना जरूरी होता है। कल्टीवेटर्स के जरिए खेतों की खरपतवार को आसानी से हटाने में मदद मिलती है। बारिश के  सीजन में अनेक प्रकार के पौधे उग आते हैं। इनके बीज पकने से पहले यदि किसान  ध्यान रखें और समय रहते खेतों की जुताई करें। यदि सही समय पर खेतों की जुताई की जाती है तो कई प्रकार के फायदे किसानों को स्वत: ही मिल जाते हैं। 


ट्रैक्टर कल्टीवेटर से किस तरह से होती है जुताई 

आपको बता दें कि ट्रैक्टर कल्टीवेटर्स से हर तरह की जुताई और कई फसलों की निराई होती है। जुताई भी अलग-अलग तरीके से की जाती है। इनमें गहराईयुक्त, छिछली, हलाई वाली जुताई प्रमुख होती है। गर्मी के मौसम में खेत की मेड से लेकर दूसरी मेड तक और मध्य से किनारे तक वाली जुताई की जाती है। इसके जिन पौधों की जडें कम गहराई वाली या यूं कहें कि झकडा जड होती हैं उनमें छिछली जुताई  की जाती है जबकि अधिक गहराई वाली जडों वाले  पौधों के लिए गहरी जुताई की जाती है। बाजार में अनेक मॉडल और विभिन्न कंपनियों के ट्रैक्टर कल्टीवेटर्स उपलब्ध हैं। इनमें 7 से 9 इंच और 24 इंच तक गहरी जुताई की जा सकती है।  


ये हैं टॉप ट्रैक्टर कल्टीवेटर 

टै्रक्टर जंक्शन पर आप देख सकते हैं कौन-कौन से ऐसे श्रेष्ठ क्वालिटी और चर्चित मॉडल के ट्रैक्टर कल्टीवेटर्स हैं। सबसे पहले टॉप 4 कल्टीवेटर्स के बारे में जानते हैं। इनमें स्पिंग टाइन,  कठोर टाइन कल्टीवेटर,  फावडा आकार कल्टीवेटर, बार प्वाइंट कल्टीवेटर। 

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ट्रैक्टर कल्टीवेटर्स निर्माता कंपनियां  

वर्तमान में देश-विदेशों में जो कंपनियां ट्रैक्टर कल्टीवेटर्स उत्पादन कर रही हैं उनके नाम इस प्रकार हैं-


कहां से करें खरीद 

अगर आपको ट्रैक्टर कल्टीवेटर्स की खरीद के लिए बेहतर जानकारी हासिल करनी हो तो आप ट्रैक्टर जंक्शन की विजिट अवश्य करें। यहां आपको मिलेेंगे सभी प्रकार के कल्टीवेटर्स के एक से बढ कर एक मॉडल। इसके अलावा कृषि भूमि, दुधारू पशु भी बेचने हों तो उसकी फोटो टै्रक्टर जंक्शन की साइट पर डाल सकते हैं। 


कल्टीवेटर खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान 

किसान भाइयों को चाहिए कि वे किसी भी कंपनी का कल्टीवेटर खरीदते समय जरूरी बातों का ध्यान रखें। सबसे पहले तो कल्टीवेटर की क्षमता परखें। यानि जो कल्टीवेटर खेत की कठोर मिट्टी की गांठों या परतों को तोडने में सक्षम हो उसका चयन अवश्य करें। अब आपको यह भी बता दें कि अलग-अलग हार्ज पावर वाले ट्रैक्टरों में कितने हल वाले कल्टीवेटर बेहतर तरीके से काम करते हैं।  25- 30 हार्जपावर के ट्रैक्टर में सात हल वाला, 30-40 हार्स पावर वाले टै्रक्टर में 9 हल वाला और 45 एचपी के ट्रैक्टर में 13 हल वाला कल्टीवेटर लगाए जाने चाहिएं। 


कल्टीवेटर पर सब्सिडी 

कल्टीवेटर्स की खरीद करने पर सरकार की ओर से देय सब्सिडी योजना का भी लाभ लिया जा सकता है। अमूमन यह सब्सिडी उपकरण के कुल लागत मूल्य पर दी जाती है। इसका मापदंड 25 से 50 प्रतिशत तक होता है। अलग-अलग राज्यों में सरकारों की सब्सिडी के नियम हैं। राजस्थान में ई कृषि यंत्र अनुदान 2021 के तहत विभिन्न कृषि यंत्रों पर आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। ट्रैक्टर चलित यंत्रों पर सब्सिडी प्राप्त करने के लिए ट्रैक्टर का पंजीयन उसके मालिक के स्वयं के नाम से होना आवश्यक है। 


केंद्र सरकार की कृषि यंत्र अनुदान वितरण कार्यक्रम योजना 

राज्य सरकारों की तरह केंद्र सरकार की ओर से भी किसानों को कृषि यंत्रों की खरीद पर सब्सिडी देने की योजना चल रही है।  योजना में पहले आओ, पहले पाओ योजना के आधार पर आवेदक किसानों को चालीस से पचास प्रतिशत तक सब्सिडी मिलती है। आवेदन करने के लिए किसानों को सभी आवश्यक दस्तावेजों की प्रतिलिपि  संलग्र करना जरूरी है। सब्सिडी स्वीकृत होने पर आवेदक  बैंक एकाउंट में सीधी भेजी जाती है इसलिए आधार कार्ड बैंक खाते से लिंक होना चाहिए। 

 

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