• Home
  • News
  • Agriculture News
  • किसानों को इन 5 कृषि यंत्रों से होगा कम मेहनत में ज्यादा फायदा, जानें खास फीचर्स

किसानों को इन 5 कृषि यंत्रों से होगा कम मेहनत में ज्यादा फायदा, जानें खास फीचर्स

किसानों को इन 5 कृषि यंत्रों से होगा कम मेहनत में ज्यादा फायदा, जानें खास फीचर्स

22 June, 2020

इसके प्रयोग से बढ़ेगा उत्पादन, होगा भरपूर मुनाफा

आधुनिकता से परिपूर्ण स्मार्ट कृषि यंत्र अपनाकर बने स्मार्ट किसान, बढ़ाये आमदनी भारत में अधिकांश किसान परंपरागत तरीकों से खेती करते हैं। जिससे उन्हें फसल का कम उत्पादन प्राप्त होता है। परिणामस्वरूप उनकी आमदनी में कमी होने लगती है। वहीं आधुनिक संसाधनों व स्वचालित कृषि यंत्रों की सहायता से खेती कर किसान अपनी फसल उत्पादन बढ़ता है। इससे उसे अच्छा मुनाफा मिलता जिससे उसकी आमदनी में बढ़ोतरी होती है। आज स्मार्ट तरीके से खेती करने वाले किसान आधुनिक तकनीक से बने नवीन कृषि यंत्रों का प्रयोग कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं जिससे उनकी आमदनी में बढ़ोतरी हो रही है। आप भी स्मार्ट किसान बने और इन कृषि उत्पादन में बेहतर परिणाम देने वाले कृषि यंत्रों का प्रयोग कर अपनी आमदनी बढ़ाए। आज हम आपको 5 चुनिंदा कृषि यंत्रों के बारे में जानकारी देंगे जिनका उपयोग करके किसान कम मेहनत में अच्छी उपज प्राप्त कर भरपूर मुनाफा कमा सकता है। इस समय कंपनियों ने भी किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए अपने प्रोडेक्टस् के दामों में कमी की हुई है। आइए जानते है बाजार में उपलब्ध इन कृषि यंत्रों के बारे में-

 

सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1

 

2 एंड 4 स्ट्रोक स्प्रे पंप (कृषि  स्प्रेयर)

 

 

बाजार में कृषि कार्य में प्रयुक्त होने वाले कृषि स्प्रेयर 2 एंड 4 स्ट्रोक स्प्रे पंप में उपलब्ध हैं। ये कुछ खूबियों के साथ में बाजार में उतारे गए है। इसकी सहायता से किसान अपने खेतों में फसलों पर कीटाणुनाशक दवा का स्प्रे आसानी से कर सकता है। इसके अलावा वातावरण की स्वच्छता के लिए भी इनका इतेमाल किया जा सकता है। इन्हें चलाना बेहद आसान है। इन स्प्रे में दो कटेगिरी है। जिनमें एक बिजली  की आपूर्ति करने वाला स्प्रे पंप है तो दूसरा बिजली का उत्पादन करने वाला स्प्रे पंप। बिजली की आपूर्ति करने वाले स्प्रे पंप बिजली व इंजन दोनों से संचालित किए जा सकते है। बाजार में 2 स्ट्रोक स्प्रे पंप्स् में राजसन-89-999, स्पैरमैन 992 बिजली की आपूर्ति वाले पंप उपलब्ध है। वहीं स्पैयर मैन 999 ग्रीन कम 2 स्ट्रोक बिजली का उत्पादन स्पैयर है।

कीमत की बात करें तो राजसन-89-999, 2 स्ट्रोक बिजली की आपूर्ति करने वाला स्प्रेयर मात्र 8,000 व स्पैरमैन 992, 2 स्ट्रोक  8, 500 रुपए में उपलब्ध है। वहीं बात करें स्पैयरमैन-999 ग्रीन कम 2स्ट्रोक बिजली का उत्पादन स्पैयर की तो इसकी कीमत तो यह आपको बाजार में 8,800 रुपए में मिल जाएगा। हम आपको बता दें कि जो उपर कीमत दी गई है वह कंपनी द्वारा छूट काटने के बाद की है जो 500 रुपए से लेकर 700 रुपए तक दी जा रही है। इससे पहले इन स्पे्रयर की कीमत 500-700 रुपए अधिक थी। इसलिए आपको अब इन्हें खरीदने में 500 से 700 रुपए की बचत होगी।

अब बात करते हैं 4 स्ट्रोक स्प्रे पंप्स् की तो यह अधिक क्षमता वाले पंप हैं जिनकी क्षमता 2 स्ट्रोक स्प्रे पंपों के मुकाबले दुगुनी है। बाजार में राजसन-89-1000, 4 स्ट्रोक बिजली आपूर्ति स्पैयर अब 11,000 की जगह 10,500 व स्पैरमैन-1000 बिजली आपूर्ति स्पैयर 12,000 की जगह 11,500 रुपए में मिल रहा है। वहीं स्पैरमैन1000 जीएक्स 35 होंडा टाइप 4 स्ट्रोक बिजली उत्पादन स्पैयर है जिसकी कीमत अब 13,000 रुपए की जगह 12,500 है। इस प्रकार इन दोनों 2 एंड 4 स्ट्रोक स्प्रे पंप (कृषि  स्प्रेयर) की कीमतों में काफी कमी की गई है जिसका किसान लाभ उठा सकते हैं। इसके अलावा स्पैयरमैन 1025 4 स्ट्रोक होंडा जीएक्स 25 पावर ओपनर स्पैयर है जिसकी कीमत में 1,000 रुपए की छूट दी गई है अब यह आपको 18,000 की जगह 17,000 में पड़ेगा। इसी प्रकार स्पैयरमैन 1035 4 स्ट्रोक होंडा जीएक्स 35 पावर ओपनर स्पैयर है जिसकी कीमत में भी इसी प्रकार छूट दी गई है जो आपको 20,000 की जगह 19,000 रुपए में मिलेगा। 

 

 

इंजन चालित पोर्टेबल कृषि स्प्रेयर 

 

कृषि स्प्रेयरों में इंजन चालित पोर्टेबल स्प्रेयर एक खास स्प्रेयर है। यह भी किटाणुनाशक व स्वच्छता कार्यों में प्रयुक्त किए जाने वाला उपयोगी स्प्रेयर है। यह बिजली की मोटर के आकार का होता है। इसे कम जगह पर आराम से रखा जा सकता है। इसे लाने ले जाने में भी आसानी होती है। यह कई आकर्षक फीचर्स के साथ दो केटेगिरी में बाजार में उतारे गए हैं। इसमें एक इंजन चालित पोर्टेबल स्प्रेयर है और दूसरा कीटाणुनाशक/स्वच्छता स्प्रेयर इंजन चालित पोर्टेबल स्प्रेयर है। अपनी खास खूबियों व क्षमता और कंपनी के अनुसार इनके बाजार में अलग-अलग रेट्स हैं। इंजन चालित पोर्टेबल स्प्रेयरों में स्प्रेडमैन- पीटी-1025 होंडा इंजन जो 30 एफटी पाइप के साथ उपलब्ध है जो पहले बाजार में 17,000 रुपए का आता था लेकिन अब ये 500 रुपए की छूट के साथ आपको 16,500 रुपए में मिल जाएगा। वहीं स्प्रैनमैन- पीटी 1035 पार्ट इंजन और 30 एफटी पाइप के साथ 19,000 रुपए की जगह अब आपको 18,500 रुपए में उपलब्ध हो जाएगा।

इसमें भी आपको 500 रुपए की बचत होगी। स्पैरमैन-पीटी 2135 संभावित स्प्रैयर जो कीटाणुनाशक/ स्वच्छता स्प्रैयर व इंजन चालित पार्टेबल स्प्रेयर है। यह 12,500 से 19,850 रुपए में की रेंज में बाजार में उपलब्ध है। इसी प्रकार स्पैरमैन-पीटी 2150 संभावित स्प्रेयर है जिसकी कीमत पहले 15,000 रुपए से 22,500 रुपए तक की कीमत में आपको मिल मिलेगा। अब बात करें बिज्स और स्ट्रेटटन इंजन के साथ स्पैरमैन-पीटी 3550 संभावित स्प्रेयर की, तो इसका पहले मूल्य 22,000 रुपए था लेकिन अब इसमें 500 रुपए की छूट दी जा रही है इसलिए अब यह आपको 21,500 रुपए का पड़ेगा। इसमें सीधी-सीधी आपको 500 रुपए की बचत हो रही है। इसी प्रकार स्प्रेडमैन- पीटी 4080 होंडा इंजन के साथ संभावित स्प्रेयर की पहले कीमत 23,000 रुपए थी

जो आपको अब 500 रुपए की छूट के साथ 22, 500 रुपए में मिल जाएगा। वहीं स्प्रेडमैन- पीटी 4100 होंडा इंजन के साथ संभावित स्प्रेयर की तो यह अब 500 रुपए कम में आपको अब 23,500 रुपए का बाजार में मिल जाएगा। इसकी पहले कीमत 24,000 रुपए थी। इसी प्रकार स्प्रेडमैन- पीटी 4160 होंडा इंजन के साथ संभावित स्प्रेयर जिसकी पहले बाजार में कीमत 29,000 रुपए थी जो अब आपको 500 रुपए की छूट के साथ 28,500 रुपए का पड़ेगा। बात करें स्प्रेडमैन- पीटी 4200 होंडा इंजन के साथ संभावित स्प्रेयर की तो अब 500 रुपए छूट के साथ 29,500 रुपए का मिल जाएगा। इससे पहले इसकी बाजार में कीमत 30,000 रुपए थी।  

 

मिनी स्प्रेयर

 

 

यह स्प्रेयर हाथ से संचालित होने के कारण छोटे किसानों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रहे हैं। इसमें न तो इंजन का खर्चा आता है और न ही बिजली का। इस कारण हर छोटा किसान इनको उपयोग कर सकता है। इनमें कई तरह के मिनी स्पे्रयर बाजार में हैं जो 1.2 लीटर से 5 लीटर में उपलब्ध है। किसान अपनी उपयोगिता के अनुरूप इसे बाजार में बहुत ही सस्ते दामों में खरीद सकता है। अलग-अलग कंपनी के अपने रेट्स हैं जो इस प्रकार है। इन मिनी स्पेयर में 30 से लेकर 100 रुपए की कमी करके आपको उपलब्ध करा रही है। इनमें मोहिन्द्र मिनी स्पैयर 1.2 लीटर 120 रुपए, मोहिन्द्र मिनी स्पैयर 3 लीटर 400 रुपए, स्पाइयरमैन मिनी स्पैयर- 1.5 एलटीआर भारी शुल्क 500 रुपए में उपलब्ध है। वहीं स्पाइयरमैन मिनी स्पायर 1.5 लीटर 200 रुपए, स्पैरमैन मिनी स्पैयर 1 लीटर 150 रुपए, स्पैरमैनैनैन मिनी स्पैयर 5 लीटर का 850 रुपए रुपए में मिल जाएगा।  

 

ट्रोली पंप 

 

 

बड़े किसान वह है जो जिनके पास खेती के लिए कई बीघा जमीन है उन किसानों के लिए ट्रोली पंप अधिक उपयोगी है। इसमें कम समय में कीटाणुनाशक का छिडक़ाव किया जा सकता है। इससे किसानों का श्रम व समय बचेगा और उपज उत्पादन वृद्धि के साथ मुनाफे में भी बढ़ोतरी होगी। ये पंप कुछ महंगा जरूर होता है पर इसकी गुणवत्ता और उपयोग देखा जाए तो उसके आगे इसकी कीमत कोई मायने नहीं रखती है। बाजार में जो सबसे अच्छे ट्राली पंप उपलब्ध है। यह पोर्टेबल व ट्राली प्रकार स्प्रे पंप है। उनमें से स्पैरमैन-पीटी 200 ट्राली टाइप 200 एलटीआरएबल स्प्रेडर जिसमें होंडा जीएक्स 80 एज्जीन है। ये बाजार में 45,000 रुपए में मिलता है लेकिन इस समय कंपनी ने इस पर 5,000 रुपए कम किए है। इससे यह आपको अब 40,000 रुपए में ही मिल जाएगा। दूसरा मैराथन जीईसी मोटर के साथ स्पैरमैन- पीटी 200 एम ट्राली प्रकार 200 लीटर संभावित स्पैयर तीन हजार की छूट के साथ अब 35,000 रुपए में उपलब्ध है।

 

ट्रेलर पर लगे स्प्रेयर

 

 

ट्रेलर पर लगने वाले स्प्रेयर या ट्रैक्टर माउंटेन स्प्रेयर वह है जो ट्रेलर व टै्रक्टर के पीछे लगाकर उपयोग किए जाते हैं। इसका चुनाव किसान को अपनी आवश्यकता और उपयोग में सरलता को देखते हुए करना चाहिए। बाजार में कई प्रकार के ट्रैक्टर स्प्रेयर उपलब्ध हैं जो बेहद उपयोगी है। इनमें स्प्रीमैन 1000 लीटर  DIAPHRAGM पंप की बाजार कीमत पहले 1,70,000 रुपए थी जो अब आपको 1,60,000 रुपए में उपलब्ध होगा। यदि आप इसे खरीदते हैं तो यहां सीधे-सीधे आपकी 10,000 रुपए की बचत होगी। इसी प्रकार स्पैरमैन 1000 एलटीआर ट्रिक स्पैनर जो पहले 65,000 रुपए का था अब 58,000 रुपए का मिल जाएगा। स्पैरमैन 300 लीटर बास स्पायर पहले 75 हजार का था अब वही 70 हजार में उपलब्ध होगा।

स्पायरमैन 600 लीटर बेस स्पायर की कीमत 90 हजार रुपए है जो पहले 85 हजार रुपए थी। स्पैरमैन 600 लीटर DIAPHRAGM पंप की 90 हजार की जगह 85 हजार रुपए में मिल जाएगा। वहीं काफी आकर्षक पंखे की डिजाइन में तैयार किया गया स्पाइयरमैन 600 एलटीआरएमएल एटमाइजर अब 2,60,000 रुपए उपलब्ध हो जाएगा जिसकी पहले कीमत 3 लाख रुपए थी। देखा जाए जो इस समय कीमत में भारी कमी के साथ कंपनियां आधुनिक मॉडल्स उपलब्ध करा रही है जिसका किसान भाइयों को फायदा उठाना चाहिए।

 

सभी कंपनियों के ट्रैक्टरों के मॉडल, पुराने ट्रैक्टरों की री-सेल, ट्रैक्टर खरीदने के लिए लोन, कृषि के आधुनिक उपकरण एवं सरकारी योजनाओं के नवीनतम अपडेट के लिए ट्रैक्टर जंक्शन वेबसाइट से जुड़े और जागरूक किसान बने रहें।

Top Agriculture News

भारत में अगस्त माह तक बना रहेगा टिड्डी दल का खतरा, किसान बरतें सावधानी

भारत में अगस्त माह तक बना रहेगा टिड्डी दल का खतरा, किसान बरतें सावधानी

नई टिड्डियों के कुछ झुंड भारत के पूर्वी व उत्तरी राज्यों सहित नेपाल पहुंचे, मचा सकते हैं तबाही भारत में टिड्डी दल का खतरा अगस्त महीने तक बना रहने की संभावना है। इसे देखते हुए किसानों को सावधानी बरतनी चाहिए। खाद्य एवं कृषि संगठन के टिड्डी स्टेटस अपडेट के अनुसार मानसून की बारिश से पहले भारत-पाक सीमा की ओर जाने वाले वसंत ऋतु में पैदा हुए टिड्डियों के कई झुंडों में से कुछ भारत के पूर्वी और उत्तरी राज्यों में पहुंचे हैं। कुछ समूह नेपाल तक पहुंच गए। ऐसा पूर्वानुमान है कि मानसून की शुरुआत के साथ टिड्डियों का ये समूह राजस्थान लौटेगा और ईरान और पाकिस्तान से अब भी आ रहे अन्य टिड्डियों के समूहों के साथ मिल जाएगा। इनके जुलाई के मध्य के करीब अफ्रीका के हॉर्न से आ रहे टिड्डियों के समूह के साथ भी मिल जाने की संभावना है। भारत-पाकिस्तान सीमा पर टिड्डियों में प्रजनन समय से पहले ही शुरू हो चुका है, जहां जुलाई में टिड्डियों के पर्याप्त बच्चे हो जाएंगे जो अगस्त के मध्य में गर्मियों के मौसम में पैदा होने वाले टिड्डियों के झुंड के रुप में सामने आएंगे। भारत में अभी राजस्थान राज्य के जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, जोधपुर, नागौर, दौसा तथा भरतपुर और उत्तर प्रदेश के झांसी और महोबा जिलों में गुलाबी टिड्डियों और वयस्क पीली टिड्डियों के झुंड अभी भी सक्रिय बने हुए हैं। टिड्डियों का यह सिलसिला अगस्त माह तक चलने वाला है अत: किसानों को अपनी फसलों को इनसे बचाने के लिए पहले से ही कारगर कदम उठाने चाहिए ताकि संभावित हानि से बचा जा सके। वैसे प्रशासन अपने स्तर पर काम करता ही है। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

धान की फसल में अब रोग लगने का मौसम, ये उपाय अपनाएं और अधिक उत्पादन पाएं

धान की फसल में अब रोग लगने का मौसम, ये उपाय अपनाएं और अधिक उत्पादन पाएं

धान की उन्नत खेती : ये उपाय अपनाएं, स्वस्थ और अधिक उत्पादन पाएं कई बार महंगे बीजों की खरीद के बावजूद किसान की फसल में कई रोग लग जाते हैं जिससे उत्पादन में कमी आ जाती है। बात करें धान की तो इस फसल की बुवाई से लेकर कटाई के बीच कई रोग लगते हैं जो इसके उत्पादन को कम कर देते हैं। इससे किसान को काफी मेहनत करने के बाद भी भरपूर लाभ नहीं मिल पाता। जैसा की हम जानते हैं इस बार अच्छे मानसून का अनुमान होने से देश भर में धान की बुवाई का कार्य जोरों पर है। यदि धान की बुवाई ( Paddy Sowing ) करते समय ही कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो इसमें लगने वाले रोगों से सुरक्षा कर संभावित हानि से बचा जा सकता है। इसके अलावा बुवाई के बाद से लेकर कटाई तक भी इस फसल का ध्यान रखना बेहद जरूरी है क्योंकि इसमें इस दौरान भी कई रोगों का प्रकोप बना रहता है जो इसके उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। आइए जानतें हैं धान की स्वस्थ खेती के तरीके जिनसे उत्पादन में वृद्धि कर अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 बुवाई से पहले बीजों का शोधन क्यों जरूरी धान की बुवाई से पूर्व इसके बीजों का शोधन किया जाना बेहद जरूरी है। धान की बुवाई या रोपाई से कटाई के बीच कई रोग लगते हैं। यदि बुवाई से पूर्व ही बीजों का शोधन कर इसे बोया जाए तो इससे रोगों की रोकथाम शुरुआत में ही हो जाती है। बीजों का शोधन करने से इसमें रोग लगने की संभावना बहुत ही कम हो जाती है और उत्पादन में भी बढ़ोतरी होती है। बीज शोधन से पहले करें पुष्ट बीजों का चयन धान के बीजों की बुवाई या रोपाई से पूर्व पुष्ट बीजों का चयन करना बहुत आवश्यक है। इसके लिए सबसे पहले बीज को नमक के घोल में डालें। दस लीटर पानी में 1.7 किलो सामान्य नमक डालकर घोल बनाएं और इस घोल में बीज डालकर हिलाएं, भारी एवं स्वस्थ बीज नीचे बैठ जाएंगे और हल्के बीज ऊपर तैरने लगेंगे। हल्के बीज निकालकर अलग कर दें तथा नीचे बैठे भारी बीजों को निकालकर साफ पानी में दो-तीन बार धोएं व छाया में सुखाए। कवक जनित रोगों से सुरक्षा के लिए यह करें उपाय धान को कवकजनित रोग से सुरक्षा के लिए इसके बीजों को 2.5 ग्राम कार्बेन्डाजिम प्रति किलो बीज की दर से उपचारित करें। बीज उपचार के लिए बीज उपचार यंत्र (सीड ट्रीटिंग ड्रम) में बीज आधा भर लें तथा बीज की मात्रा के अनुसार आवश्यक कवकनाशी डालकर घुमा कर 5 मिनट बाद बीज की बुआई करें। यदि आप प्रमाणिक किस्म के बीजों का उपयोग कर रहे हैं तो इसे नमक के घोल में डुबोने की आवश्यकता नहीं है। झुलसा एवं सडऩ रोग से बचाव के लिए इस तरह करें बीज शोधन धान की फसल में विभिन्न प्रकार के रोग लगते हैं इसमें से सडऩ तथा झुलसा रोग प्रमुख रोगों में से एक है। इस रोग से कभी-कभी 50 प्रतिशत तक फसल का नुकसान हो जाता है। इस रोग से बचाव के लिए धान की नर्सरी तैयार करने से पहले ही बीजोपचार करें। इससे बीजों का अंकुरण अच्छा होता है एवं फसलें फफूंदी जनित रोगों से मुक्त रहती है। इस रोग से धान को बचाने के लिए 04 किलोग्राम ट्राईकोडर्मा प्रति किलोग्राम बीज की दर से शुष्क बीजोपचार कर बुवाई करें। भूमि का शोधन भी जरूरी, करें यह उपाय भूमि शोधन के लिए 2.5 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर ट्राईकोडर्मा को लगभग 75 किलोग्राम गोबर कि सड़ी खाद में मिलाकर हल्के पानी का छींटा देकर 7-8 दिन के लिए छायादार स्थान पर रखें एवं बुवाई के पूर्व आखिरी जुताई पर भूमि में मिला दें। बैक्टरियल ब्लाईटरोग से प्रभावित क्षेत्र के लिए ऐसे करें बीज शोधन बैक्टरिया ब्लाईट रोग से प्रभावित क्षेत्र में 25 किलोग्राम बीज के लिए 04 किलोग्राम स्ट्रेप्टोसाईक्लिन या 40 ग्राम प्लाटोमाइसिन पानी में मिलाकर रात भर बीज को भिगोकर, दूसरे दिन छाया में सुखाकर नर्सरी में डालना चाहिए। इसके अतिरिक्त 25 किलोग्राम बीज को रात भर पानी में भिगोकर बाद में दूसरे दिन अतिरिक्त पानी निकालकर 75 ग्राम थीरम या 50 ग्राम कार्बेन्डाजिम को 8- 10 लीटर पानी में घोलकर बीज में मिला दें फिर छाया में अंकुरित कर नर्सरी में डालें। नर्सरी लगने के 10 दिन के भीतर ट्राईकोडर्मा का एक छिडक़ाव कर दें। यदि नर्सरी में कीटों का प्रभाव दिखाई दे तो 1.25 ली. क्यनालफास 25 ईसी या 1.5 ली. क्लोरपायरिफास 20 ईसी प्रति हेक्टेयर में छिडक़ाव करें। धान की फसल में लगने वाले अन्य रोग व उनके नियंत्रण के उपाय भूरी चित्ती रोग : धान की खेती में भूरी चित्ती का रोग ज्यादातर दक्षिण-पूर्वी राज्यों में देखने को मिलता हैं। धान के पौधों पर इस रोग का प्रभाव उसके कोमल भागों पर होता है। इस रोग के लगने पर पौधों की पत्तियों पर गोल, छोटे भूरे रंग के धब्बे बन जाते हैं। धीरे-धीरे ये धब्बे आपस में मिलकर बड़ा आकार ले लेते हैं। इससे पौधे की पत्तियां सूखाने लगती है और पौधा विकास करना बंद कर देता है। इस रोग के लगने से पौधे में बालियां काफी कम मात्रा में आती है। उपाय - इस रोग की रोकथाम के लिए शुरुआत में धान के पौधों को रोपाई से पहले थिरम या कार्बनडाईजिम की उचित मात्रा से उपचारित कर लेना चाहिए। वहीं खड़ी फसल प्रभाव दिखाई देने पर 10 से 12 दिन के अंतराल में मैंकोजेब का छिडक़ाव पौधे पर करना चाहिए। इसके अलावा इणडोफिल एम 45 की ढाई किलो मात्रा को एक हजार लीटर पानी में मिलाकर छिडक़ाव करने से भी लाभ मिलता है। खैरा रोग : चावल की खेती में लगने वाला ये रोग भूमि में उर्वरक की कमी की वजह से देखने को मिलता है। इस रोग के लगने से शुरुआत में पौधे की निचली पत्तियों का रंग पीला दिखाई देने लगता है और पत्तियों पर कत्थई रंग के धब्बे बनना शुरू हो जाते हैं। इस रोग से पौधे की पत्तियां सूखकर गिरने लगती है। पौधों में ये रोग जस्ता की कमी की वजह से दिखाई देता है। उपाय - इस रोग से रोकथाम के लिए खेत में जिंक सल्फेट का छिडक़ाव आखिरी जुताई के समय करना चाहिए या फिर रोग दिखाई देने पर लगभग 5 किलो जिंक सल्फेट का छिडक़ाव पौधों पर 10 दिन के अंतराल में दो बार करना चाहिए। इसके अलावा ढाई किलो बुझे हुए चूने को प्रति हेक्टेयर की दर से 900 से 1000 लीटर पानी में मिलाकर पौधों पर छिडक़ना चाहिए। टुंग्रो रोग : धान के पौधों में लगने वाला ये रोग कीट की वजह से फैलता है। पौधों पर इस रोग का प्रभाव शुरुआती अवस्था में देखने को मिलता है। इस रोग के लगने पर पौधों की पत्तियों का रंग संतरे की तरह पीला दिखाई देने लगता है और इस रोग के लगने से पौधों का आकार बौना दिखाई देने लगता है। रोगग्रस्त पौधे में बालियां भी देरी से बनती है जिनका आकार बहुत छोटा दिखाई देता है। इससे दाने बहुत कम और हल्की मात्रा में पड़ते हैं। उपाय - इस रोग की रोकथाम के लिए शुरुआत में पौध रोपाई के समय इसके पौधों को क्लोरोपायरीफॉस की उचित मात्रा से उपचारित कर लेना चाहिए। यदि खड़ी फसल में रोग दिखाई दे तो मोनोक्रोटोफास 36 ई.सी., कार्बेरिल 50 डब्ल्यू. पी. या फोस्फेमिडोन 85 डब्ल्यू. एस.सी. की उचित मात्रा का छिडक़ाव पौधों पर करना चाहिए। पत्ती मरोडक रोग : पत्ती मरोडक रोग को पत्ती लपेटक के नाम से भी जानते हैं। धान के पौधों में पट्टी मरोडक रोग का प्रभाव पौधे की पत्तियों पर दिखाई देता है। इस रोग की सुंडी पौधे की पत्तियों को लपेटकर सुरंग बना लेती है और उसके अंदर रहकर पत्तियों का रस चूसती हैं। इससे पौधे की पत्तियों का रंग पीला दिखाई देने लगता हैं। रोग के अधिक बढऩे से पत्तियां जाली के रूप में दिखाई देने लगती हैं। उपाय - इस रोग की रोकथाम के लिए पौधे की समय से रोपाई करें और उसमें खरपतवार नहीं होने दें। इस रोग की रोकथाम के लिए पौधों पर कार्बोफ्यूरान 3 जी या कारटाप हाइड्रोक्लोराइड 4 जी की उचित मात्रा का छिडक़ाव करना चाहिए। इसके अलावा क्लोरपाइरीफास, क्यूनालफास, ट्राएजोफास या मोनोक्रोटोफास का छिडक़ाव भी रोग की रोकथाम के लिए अच्छा होता है। वहीं जैविक तरीके से रोग नियंत्रण करने के लिए रोगग्रस्त पत्तियों को तोडक़र उन्हें जला देना चाहिए। झोंका रोग : धान की फसल में लगने वाला झोंका रोग फसल की रोपाई के लगभग 30 से 40 दिन बाद शुरू हो जाता हैं। इस रोग की मुख्य वजह मौसम में होने वाला परिवर्तन को माना जाता हैं। इस रोग की शुरुआत में पौधों के पर्णच्छद और पत्तियों मटमैले धब्बे बन जाते हैं। इससे पौधे बहुत कमजोर हो जाते है और टूटकर गिरने लगते हैं। उपाय - इस रोग से धान की फसल को बचाने के लिए लिए शुरुआत में बीजों की रोपाई से पहले उन्हें थीरम या कार्बेन्डाजिम की दो से ढाई ग्राम मात्रा को प्रति किलो की दर से बीजों में मिलाकर उपचारित कर लेना चाहिए। यदि खड़ी फसल में रोग दिखाई दे तो कार्बेन्डाजिम 50 प्रतिशत डब्लू.पी. या एडीफेनफास 50 प्रतिशत ई.सी. की आधा लीटर मात्रा को 500 से 700 लीटर पानी में मिलाकर पौधों पर छिडक़ाव करना चाहिए। इसके अलावा हेक्साकोनाजोल, मैंकोजेब या जिनेब की उचित मात्रा का पौधों पर छिडक़ाव करना भी रोग की रोकथाम के लिए उपयोगी होता है। हिस्पा रोग : धान की फसल में लगने वाला ये एक कीट रोग हैं। इस रोग के बीटल (कीड़े) पौधे की पत्तियों के अर्द्ध चर्म को खा जाते है जिससे पौधे की पत्तियों पर सफेद रंग के धब्बे दिखाई देने लगते है इस रोग के बढऩे से पौधों को काफी ज्यादा नुक्सान पहुंचता हैं। उपाय - इसकी रोकथाम के लिए धान की रोपाई समय पर करनी चाहिए। खड़ी फसल में रोग दिखाई देने पर कारटाप हाइड्रोक्लोराइड 4 जी या कार्बोफ्यूरान 3 जी की 18 से 20 किलो मात्रा को 500 से 700 लीटर पानी में मिलकर पौधों पर छिडकना चाहिए। इसके अलावा ट्राएजोफास, मोनोक्रोटोफास, क्लोरपाइरीफास या क्यूनालफास की उचित मात्रा का छिडक़ाव भी किसान भाई पौधों पर कर सकते हैं। तना छेदक रोग : धान के पौधों में तना छेदक रोग का प्रभाव कीटों की वजह से फैलता हैं। इस कीट के रोग पौधे पर अपने लार्वा को जन्म देते हैं जो पौधे के तने में छेद कर उसे अंदर से खोखला कर देता हैं। इससे पौधे को पोषक तत्व मिलने बंद हो जाते हैं जिससे पौधा विकास करना बंद कर देता है और तने के खोखले हो जाने की वजह से पौधे जल्द ही टूटकर गिरने लगते हैं। उपाय - इस रोग की रोकथाम के लिए खेतों के चोरों तरफ फसल रोपाई के समय फूल वाले पौधों की रोपाई करनी चाहिए। यदि खड़ी फसल में रोग दिखाई देने पर पौधों पर क्लोरपाइरीफास 20 प्रतिशत ई.सी. या क्यूनालफास 25 प्रतिशत ई.सी.की डेढ़ लीटर मात्रा को 500 लीटर पानी में मिलाकर पौधों पर छिडक़ना चाहिए। इसके अलावा मोनोक्रोटोफास, कार्बोफ्यूरान या ट्रायजोफास की उचित मात्रा का छिडक़ाव भी फसल में लाभ पहुंचाता हैं। फुदका रोग : धान का फुदका रोग फसल के तैयार होने के समय देखने को मिलता है। धान की फसल में तीन तरह के फुदका रोग पाए जाते हैं जिन्हें एक सामान रूप से उपचारित किया जाता है। जिन्हें कीट की अवस्था के आधार पर हरा, भूरा और सफेद पीठ वाला फुदका के नाम से जानते हैं। रोग की शुरुआती अवस्था में इसके कीटों का रंग हरा दिखाई देता हैं जो बाद में कीट के व्यस्क होने के साथ बदलता हैं। इस रोग के कीट पौधे की पत्तियों का रस चूसकर और उन्हें खाकर पौधों को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे पौधे का विकास रूक जाता है। उपाय - इस रोग से धान की फसल को बचाने के लिए शुरुआत में खेत की गहरी जुताई कर फसल को समय पर उगा देना चाहिए। यदि खड़ी फसल में रोग दिखाई देने पर फेरोमोन ट्रैप की 5 से 7 ट्रैप को प्रति हेक्टेयर की दर से खेत में लगाना चाहिए। इसके अलावा फसल पर रोग दिखाई देने पर इमिडाक्लोप्रिड, फिप्रोनिल या कार्बोफ्यूरान की उचित मात्रा का छिडक़ाव पौधों पर करना चाहिए। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

मंडी में सब्जियों की आवक कम होने से बढ़े दाम, किसानों को हो रहा है मुनाफा

मंडी में सब्जियों की आवक कम होने से बढ़े दाम, किसानों को हो रहा है मुनाफा

आमसान छू रहे सब्जियों के भाव, टमाटर 80 से 100 रुपए किलो तक बिका इन दिनों मंडी में सब्जियों के भाव आसमान को छू रहे हैं। इस समय सभी प्रकार की सब्जियों के भावों में तेजी देखने को मिल रही है। इनमें टमाटर के भावों ने तो प्याज और आम को भी पीछे छोड़ दिया है। जहां आम का बाजार भाव 20-40 रुपए किलो व प्याज के भाव 20-25 रुपए किलो चल रहा है। वहीं टमाटर 80 से 100 रुपए तक के भाव में बिक रहा है। बता दें कि पिछले कुछ महीनों पहले यही टमाटर बाजार में 10-20 रुपए किलो बिक रहा था और किसानों को इसके अच्छे दाम भी नहीं मिल पा रहे थे। हालात ये हो गए थे कि किसानों की लागत भी नहीं निकल पा रही थी लेकिन अब टमाटर के भावों में तेजी आने से किसानों को भी टमाटर के अच्छे दाम मिल रहे हैं। इधर टमाटर के बढ़े भावों का असर आम लोगों पर भी पड़ा है। अब उन्हें टमाटर के अधिक दाम चुकाने पड़ रहे है। टमाटर के भावों में आए उछाल को लेकर सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि मंडी में पहले लोकल स्तर का टमाटर आ रहा था लेकिन अब ज्यादातर सब्जी की फसल खत्म होने से का दौर चल रहा है। आगे से सब्जियां नहीं आ रही है। इसलिए इनकी कीमतें बढ़ रही है। वहीं अदरक, धनिया और लहसुन के भाव भी सौ से डेढ़ सौ रुपए तक पहुंच गए है। इसके अलावा आलू सहित अन्य सब्जियों के भाव में बढ़ोतरी देखी गई। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

जोधपुर व बाड़मेर में टिड्डी दल ने तबाह हुई कई हेक्टेयर फसलें

जोधपुर व बाड़मेर में टिड्डी दल ने तबाह हुई कई हेक्टेयर फसलें

टिड्डी दल से सबसे ज्यादा राजस्थान प्रभावित बीकानेर में बड़ी मात्रा में मिले टिड्डी के अंडे, बहरोड़ में फसलों को नुकसान, अलवर के शहरी इलाके में घुसा टिड्डी दल, आसपास गांव में फसल के नुकसान अंदेशा पाकिस्तान से आए टिड्डी दल ने देश के 105 जिलों में अपना आतंक मचाया है। यह टिड्डी दल एक राज्य से दूसरे राज्य व एक जिले से दूसरे जिले की ओर बढ़ रही है। इसी क्रम में टिड्डी दल राजस्थान के अलवर जिले के बहरोड़ और उसके आसपास पहुंचा जिसने वहां फसलों को काफी नुकसान पहुंचाया। शुक्रवार करीब 12 बजे टिड्डी दल अलवर के शहरी इलाकों में दिखाई दिया। लोग कौतुहल वश इस टिड्डी दल को देख रहे थे, वहीं शहर के आसपास लगते गांवों के किसानों को फसल के नुकसान का डर सता रहा था। जानकारी के अनुसार देश में टिड्डियों के एक से ज्यादा दल सक्रिय है जो देश के अलग-अलग राज्यों में देखे गए हैं। ये हवा के रूख के साथ आगे बढ़ते हैं और एक राज्य से दूसरे राज्य की ओर बढ़ रहे हैं। इस तरह देश के कई इलाकों में फसलों को अपना निशाना बनाते हुए इनका दल बढ़ता जा रहा है। हालांकि हर राज्य में प्रशासन पूरी तैयारी के साथ इन पर नियंत्रण करने की पुरजोर कोशिश कर रहा है लेकिन इन पर पूर्णरूप से नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। यदि हम पिछले दो महीनों की बात करें तो इस दौरान टिड्डी दल के हुए हमलों में सबसे ज्यादा राजस्थान के जोधपुर व बाड़मेर जिले प्रभावित हुए। जोधपुर में 383 जगहों से टिड्डियों को खदेड़ा गया। वहीं बाडमेर में 378 जगहों पर ऑपरेशन किए गए। इसके अलावा बीकानेर, श्रीगंगानर, जैसलमेर और नागौर में भी टिड्डी दल से नुकसान हुआ। पेस्टीसाइड छिडक़ाव की बात करे तो पिछले दो महीनों में राजस्थान में सबसे अधिक 87 प्रतिशत पेस्टीसाइड का छिडक़ाव किया गया और केंद्र व राज्य सरकार की ओर से 90 प्रतिशत ऑपरेशन राजस्थान में ही किए गए। इसका मतलब यहां काफी पैमाने पर नुकसान को देखते हुए प्रशासन द्वारा ये कदम उठाए गए। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

close Icon

Find Your Right Tractor and Implements

New Tractors

Used Tractors

Implements

Certified Dealer Buy Used Tractor