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अब मध्यप्रदेश पर टिड्डी दल का हमला, फसलों को नुकसान की आशंका

अब मध्यप्रदेश पर टिड्डी दल का हमला, फसलों को नुकसान की आशंका

21 May, 2020

15 किलोमीटर तकछाए हुए हैं टिड्डी के झुंड

राजस्थान के बाद अब मध्यप्रदेश में टिड्डी दल पहुंचने से वहां के किसानों की चिंता बढ़ गई है। वे फसल को टिड्डियों से बचाने की जुगत में लग गए हैं। इधर प्रशासन के द्वारा किसानों को आपदा के प्रकोप से निपटने के लिए सर्तक किया जा रहा है। कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, टिड्डी के झुंड राजस्थान से होता हुआ नीमच, मंदसौर, आगर मालवा व झाबुआ तक पहुंच गया है। टिड्डियों का कारवां कई किलोमीटर लंबा है। ये खेतों में उतरकर फसलों को नुकसान पहुंचा सकती है। आगर मालवा जिले के कृषि विभाग के उपसंचालक आरपी कनेरिया ने कहा है कि टिड्डी के झुंड लगभग 15 किलोमीटर तक छाए हुए हैं। 

 

सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1

 

टिड्डियां क्या है, इन्हें कैसे पहचाने

सयाजी के कृषि विज्ञानियों के अनुसार, टिड्डियों को अनके चमकीले पीले रंग और पिछले लंबे पैरों से उन्हें पहचाना जा सकता। आपको दूर से ऐसा लगेगा, मानो आपकी फसलों के ऊपर किसी ने एक बड़ी चादर बिछा दी हो। है। टिड्डियों का झुंड एकबारगी फसलों का सफाया कर देता है।

 

 

ऐसे कर सकते है किसान टिड्डी दल से फसलों की सुरक्षा

परंपरागत उपाय : जिन जिलों में टिड्डियों के झुंड के आने का खतरा है, वहां के किसानों को टिड्डियों को भगाने के लिए ध्वनि-विस्तार यंत्र, जैसे- मांदल, ढोलक, डीजे, ट्रैक्टर का साइलेंसर निकालकर आवाज करना, खाली टीन के डिब्बे, थाली इत्यादि स्थानीय स्तर पर तैयार रखें, सामूहिक प्रयास से ध्वनि-विस्तारक यंत्र का उपयोग करें। ऐसा करने से टिड्डी झुंड नीचे नहीं आकर, फसल या वनस्पति पर न बैठते हुए आगे चला जाएगा।

रासायनिक उपाय :  कृषि विशेषज्ञों का अनुसार टिड्डियों का आगमन शाम को लगभग छह से आठ बजे के बीच होता है तथा सुबह साढ़े सात बजे तक दूसरे स्थान के लिए प्रस्थान करने लगता है। ऐसी स्थिति में टिड्डी का प्रकोप होने पर तत्काल बचाव के लिए उसी रात की सुबह तीन बजे से लेकर साढ़े सात बजे तक रासायनिक दवाओं का छिडक़ाव कर टिड्डी झुंड पर नियंत्रण पाया जा सकता है। 

विशेष 

इस आपदा पर प्रभावी नियंत्रण के लिए अनुविभाग स्तर एवं जिला स्तर व राज्य स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं। किसान वहां से भी इस संबंध में मदद प्राप्त कर सकता है।

 

सभी कंपनियों के ट्रैक्टरों के मॉडल, पुराने ट्रैक्टरों की री-सेल, ट्रैक्टर खरीदने के लिए लोन, कृषि के आधुनिक उपकरण एवं सरकारी योजनाओं के नवीनतम अपडेट के लिए ट्रैक्टर जंक्शन वेबसाइट से जुड़े और जागरूक किसान बने रहें।
 

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सरकारी गेहूं की खरीद : पंजाब व मध्यप्रदेश के किसानों ने बाजी मारी, उत्तर-प्रदेश पिछड़ा

सरकारी गेहूं की खरीद : पंजाब व मध्यप्रदेश के किसानों ने बाजी मारी, उत्तर-प्रदेश पिछड़ा

तीनों राज्यों में एक साथ शुरू हुई थी गेहूं की खरीद गेहूं की समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीद 320 लाख टन पहुंच गई है। इसमें सबसे ज्यादा गेहूं की खरीद पंजाब और मध्यप्रदेश से हुई है। जबकि गेहूं का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य माना जाने वाला उत्तर प्रदेश इन राज्यों से पिछड़ गया है। बता दें चालू रबी में केंद्र सरकार ने 407 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य तय किया हुआ है। पंजाब, मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश से गेहूं की सरकारी खरीद 15 अप्रैल से शुरू हुई थी। वहीं हरियाणा में गेहूं की खरीद 20 अप्रैल को शुरू की गई। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 पंजाब में तय लक्ष्य की 92.43 फीसदी हुई गेहूं की खरीद राज्य के कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू रबी में गेहूं का उत्पादन 185 लाख टन होने का अनुमान है। यहां चालू रबी विपणन सीजन 2020-21 में 21 मई तक कुल गेहूं की खरीद 319.95 लाख टन हुई है। इसमें पंजाब से गेहूं की खरीद 124.78 लाख टन की हो चुकी है जो कि तय लक्ष्य 135 लाख की 92.43 फीसदी है। वहीं पिछले साल राज्य से समर्थन मूल्य पर 129.12 लाख टन गेहूं ही खरीदा गया था। मध्यप्रदेश से सबसे ज्यादा 98.70 लाख टन, लक्ष्य पूरा होने की ओर मध्य प्रदेश राज्य से 100 लाख टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा गया जिसमें चालू रबी में समर्थन मूल्य पर 98.70 लाख टन गेहूं की खरीद हो चुकी है जो तय लक्ष्य को पूरा करने में केवल 1.3 फीसदी ही बचा हुआ है। वहीं पिछले रबी सीजन में राज्य की मंडियों से समर्थन मूल्य पर केवल 67.25 लाख टन गेहूं ही खरीदा गया था। चालू रबी में मध्य प्रदेश में 190 लाख टन गेहूं के उत्पादन का अनुमान है। उत्तर प्रदेश से तय लक्ष्य का केवल 32.2 फीसदी ही पूरा राज्य उत्तर प्रदेश से चालू रबी में समर्थन मूल्य पर अभी तक केवल 17.71 लाख टन गेहूं की खरीद ही हो पाई है जो कि तय लक्ष्य 55 लाख टन का केवल 32.2 फीसदी ही है। पिछले रबी में राज्य में 37 लाख टन गेहूं खरीदा गया था जबकि पिछले साल भी खरीद का लक्ष्य 55 लाख टन का ही तय किया गया था। चालू रबी में राज्य में 363 लाख टन गेहूं के उत्पादन का अनुमान है। हरियाणा में खरीद तय लक्ष्य से कम रहने का अनुमान हरियाणा से चालू रबी में समर्थन मूल्य पर अभी तक 69.15 लाख टन गेहूं की खरीद हो चुकी है जो कि तय लक्ष्य 95 लाख टन का 72.79 फीसदी है। पिछले रबी सीजन में हरियाणा से 93.20 लाख टन गेहूं की खरीद हुई थी। हरियाणा के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राज्य के 4.67 लाख किसानों से गेहूं की खरीद हुई है। वहीं राज्य में 115 लाख टन गेहूं का उत्पादन होने का अनुमान है। सभी कंपनियों के ट्रैक्टरों के मॉडल, पुराने ट्रैक्टरों की री-सेल, ट्रैक्टर खरीदने के लिए लोन, कृषि के आधुनिक उपकरण एवं सरकारी योजनाओं के नवीनतम अपडेट के लिए ट्रैक्टर जंक्शन वेबसाइट से जुड़े और जागरूक किसान बने रहें।

ओलावृष्टि से प्रभावित फसल : राजस्थान सरकार ने आवंटित किये  55.38 करोड़ रुपए की राशि

ओलावृष्टि से प्रभावित फसल : राजस्थान सरकार ने आवंटित किये 55.38 करोड़ रुपए की राशि

अतिरिक्त बजट के लिए केंद्र सरकार को भेजा ज्ञापन राजस्थान में राज्य सरकार किसानों को फसल नुकसानी का मुआवजा देने जा रही है। इससे राज्य के करीब 57 हजार से अधिक किसान लाभान्वित होंगे। राजस्थान राज्य सरकार ने रबी सीजन के दौरान हुई ओलावृष्टि से हुए फसल खराबे से प्रभावित किसानों को कृषि आदान-अनुदान भुगतान के लिए 55.38 करोड़ रुपए तथा अंधड एवं तूफान से हुई जन हानि वाले प्रभावित आश्रितों को 52 लाख रुपए की सहायता राशि आवंटित की है। गौरतलब है कि फरवरी महीने के अन्तिम सप्ताह एवं मार्च के पहले सप्ताह में हुई ओलावृष्टि से भरतपुर जिले की भरतपुर, कुम्हेर, नदबई. डीग, नगर एवं रूपवास तहसीलों में रबी की फसलों में काफी नुकसान हुआ था। इस नुकसान की भरपाई के लिए राज्य सरकार ने किसानों को मुआवजा देने की घोषणा की थी। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 किन किसानों को मिलेगा लाभ इसका लाभ उन किसानों को मिलेगा जिनकी फसल को ओलावृष्टि व बारिश से सबसे ज्यादा खराबा हुआ है यानि 33 प्रतिशत से अधिक का खराबा हुआ है और किसान ने अपनी फसल का बीमा करा रखा है। वहीं दूसरी ओर वे किसान जिन्होंने अपनी फसल का बीमा नहीं कराया है उन्हें अभी तक सरकार की ओर से अनुदान की राशि नहीं मिली है। मुआवजा मिलने में क्यूं हो रही है देरी आपदा प्रबन्धन एवं सहायता विभाग के शासन सचिव श्री सिद्धार्थ महाजन ने बताया कि राज्य सरकार ने भरतपुर विधान सभा क्षेत्र में ओलावृष्टि के कारण हुये नुकसान के मुआवजे के रूप में 28 करोड़ रुपये की राशि जिला कलक्टर को मुहैया करा दी है लेकिन कुछ पटवारियों द्वारा नुकसान को समय पर ऑनलाइन नहीं किया गया है जिसकी वजह से इन किसानों को समय पर मुआवजा नहीं मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में सभी पटवारियों को निर्देश जारी करें कि वे कोरोना संक्रमण की रोकथाम के कार्य के साथ-साथ ऑनलाइन का कार्य भी करें। तहसीलदार को प्रतिदिन ऑनलाइन कार्य की प्रगति की सूचना भिजवानें के निर्देश भी दिए गए है। अतिरिक्त राशि आवंटन के लिए केंद्र सरकार को भेजा ज्ञापन बाढ़ एवं अत्यधिक वर्षा से प्रभावितों को सहायता प्रदान करने के लिए केंद्र सरकार से अतिरिक्त सहायता राशि उपलब्ध कराने के लिए 2645.86 करोड़ रुपए का ज्ञापन प्रेषित किया गया जिसके विरूद्ध 622.97 करोड़ रुपए विभाग को प्राप्त हो गए हैं। खरीफ फसल 2019 में सूखे से प्रभावितों को राहत प्रदान करने के लिए केंद्र सरकार से अतिरिक्त सहायता राशि चाहने के लिए 707 करोड़ का ज्ञापन भिजवाया गया जिसके विरुद्ध 161.63 करोड़ रुपए प्राप्त हुए हैं। वहीं रबी फसल 2019 में टिड्डी से प्रभावितों को राहत प्रदान करने के लिए केंद्र सरकार से अतिरिक्त सहायता राशि आवंटन के लिए 303.40 करोड़ रुपए का ज्ञापन भिजवाया गया है। सभी कंपनियों के ट्रैक्टरों के मॉडल, पुराने ट्रैक्टरों की री-सेल, ट्रैक्टर खरीदने के लिए लोन, कृषि के आधुनिक उपकरण एवं सरकारी योजनाओं के नवीनतम अपडेट के लिए ट्रैक्टर जंक्शन वेबसाइट से जुड़े और जागरूक किसान बने रहें।

किसानों के लिए बनेगा एक लाख करोड़ रुपए का कृषि अवसंरचना कोष

किसानों के लिए बनेगा एक लाख करोड़ रुपए का कृषि अवसंरचना कोष

सरकार के कृषि पैकेज से किसानों आय में होगी बढ़ोतरी कोरोना संक्रमण काल के दौरान चल रहे लॉकडाउन से हुए नुकसान से उबारने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 मई 2020 को भारत की जीडीपी के 10 प्रतिशत के बराबर 20 लाख करोड़ रुपए के विशेष आर्थिक और व्यापक पैकेज की घोषणा की। इसमें सभी वर्गों के लिए अलग-अलग योजनाओं की घोषणा की गई है। इसमें किसानों के लिए राहत पैकेज में कई योजनाएं शुरू की गई है। इसके तहत कृषि में आधारभूत ढांचा मजबूत करने के लिए 1 लाख करोड़ रुपए का कृषि अवसंरचना कोष बनाने की घोषणा की गई है। इससे किसानों को फायदा होगा। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 एक लाख करोड़ के कृषि अवसंरचना कोष से किन-किन को होगा फायदा केंद्र सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में किसानों की आय में बढोतरी करने के प्रयास किए जा रहे है। इसको ध्यान रखते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने कृषि में आधारभूत ढांचा मजबूत करने के लिए 1 लाख करोड़ रुपए की योजना की घोषणा की है। इसमें आत्मनिर्भर भारत के तहत किसानों के लिए फार्म-गेट अवसंरचना के लिए 1 लाख करोड़ रुपये का कृषि अवसंरचना कोष बनाया जाएगा। इस कोष से प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों, किसान उत्पादक संगठनों, कृषि उद्यमियों, स्टार्ट-अप आदि का लाभ मिलेगा। वहीं कृषि उपज, वैल्यू एडिशन सहित कई प्रकार की गतिविधियों को बढ़ावा मिलने से किसानों की आय में बढ़ोत्तरी होगी। किसानों से जिंस की सीधी खरीद पर रहेगा जोर केंद्र सरकार द्वारा कृषि उत्पाद का सही मूल्य दिलवाने के लिए किसानों से सीधे खरीदी करने कि योजना पर बल दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत जिंस खरीदने के लिए आसपास के क्षेत्रों में पर्याप्त कोल्ड चेन बनाए जाएंगे। इसके अलावा भंडारण बनाने के लिए 50 प्रतिशत कि सब्सिडी दी जाएगी। साथ ही सरप्लस (अतिरिक्त उत्पाद) से कमी वाले बाजारों तक ढुलाई पर 50 प्रतिशत सब्सिडी दिया जाएगा। उत्पाद सीधे किसान से खरीदने के लिए आसपास के क्षेत्र और संग्रह बिंदु, किफायती और आर्थिक रूप से व्यवहार्य के बाद उसके प्रबंधन के लिए बुनियादी ढांचे के विकास को प्रोत्साहन दिया जाएगा। इसके अंतर्गत आसपास के क्षेत्र और संग्रह बिन्दुओं (प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों, किसान उत्पादक संगठनों, कृषि उद्यमियों, स्टार्ट-अप आदि) पर मौजूद कृषि आधारभूत ढांचा परियोजनाओं को वित्तपोषण के लिए 1,00,000 करोड़ रुपये की वित्तपोषण सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। किसानों को मिल पाएगा एग्री जिंसों का अधिक मूल्य केंद्र सरकार द्वारा किसानों से जिंस की सीधी खरीद का फायदा किसानों को मिलेगा। इससे किसानों को अपनी जिंस की उचित कीमत मिल सकेगी। इस योजना के शुरू होने से अब किसानों को मजबूरन कम दाम पर अपनी जिंस बेचने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा। क्योंकि सरकार ने किसानों के हितों को देखते हुए पहले से ही जिंसों के समर्थन भाव निर्धारित कर रखे हैं। वहीं किसानों के पास अपनी जिंस कही भी जाकर बेचने का विकल्प भी सरकार ने दे रखा है। इससे किसान जहां भी उसे अपनी फसल की अधिक कीमत मिलेगी वहीं वह अपनी फसल बेच सकेगा। इससे किसानों को फायदा होगा। वहीं पर्याप्त भंडारण की सुविधा होने पर जिंसों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकेगा। किसानों की आय में होगी बढोतरी, जीवन स्तर हो सकेगा ऊंचा फसल की ज्यादा कीमत मिलने से किसानों की आय में वृद्धि होगी जिससे किसानों का जीवन स्तर ऊंचा हो सकेगा। पहले देखने में आता था कि व्यापारी किसानों से कम दामों में उनकी उपज खरीद कर ऊंचे दामों में बेचकर मुनाफा कमाते थे। वहीं सरकार द्वारा निर्धारित समर्थन मूल्य भी कम होता था जिससे किसानों को कम फायदा होता था। अब चूंकि किसान के लिए विकल्प खुले है और वह अपनी इच्छानुसार जहां भी दाम ज्यादा मिले अपनी फसल बेच सकता है। इससे किसानों की आय बढ़ेगी और स्वभाविक है जब आय बढ़ेगी तो किसानों का जीवन स्तर भी ऊंचा हो सकेगा। सभी कंपनियों के ट्रैक्टरों के मॉडल, पुराने ट्रैक्टरों की री-सेल, ट्रैक्टर खरीदने के लिए लोन, कृषि के आधुनिक उपकरण एवं सरकारी योजनाओं के नवीनतम अपडेट के लिए ट्रैक्टर जंक्शन वेबसाइट से जुड़े और जागरूक किसान बने रहें।

उपज को गिरवी रखकर मिलेगा लोन, ब्याज मात्र 3 प्रतिशत

उपज को गिरवी रखकर मिलेगा लोन, ब्याज मात्र 3 प्रतिशत

ट्रैक्टर जंक्शन पर किसान भाइयों का स्वागत है। कोरोना लॉकडाउन से कमजोर हुई देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए केंद्र की मोदी सरकार ने 20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज की घोषणा की है। इस 20 लाख करोड़ के पैकेज में से 30 हजार करोड़ रुपए कृषि क्षेत्र को दिए गए हैं। इसके अलावा कृषि क्षेत्र के लिए कई अन्य घोषणाएं की गई है। सभी जानते हैं कि केंद्र सरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने की दिशा में लगातार काम कर रही है। इस काम में राज्य सरकारें भी सहयोग कर रही हैं। लॉकडाउन में किसानों को राहत देने के लिए सरकार की एक जोरदार स्कीम आई है। इसमें किसान अपनी उपज को सरकार के पास गिरवी रखकर लोन ले सकेंगे। इस योजना की खास बात यह है कि इस योजनों में किसानों को लोन मात्र 3 प्रतिशत ब्याज पर दिया जाएगा। तो आज हम ट्रैक्टर जंक्शन के माध्यम से जानते हैं योजना की खास बातें। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 उपज को गिरवी रखकर लोन योजना की खास बातें कोरोना लॉकडाउन में किसानों को राहत देने के लिए राजस्थान सरकार ने किसानों के लिए उपज को गिरवी रखकर लोन देने की योजना शुरू की है। किसानों को राहत देने के लिए कृषक कल्याण कोष से सहकार किसान कल्याण योजना में प्रतिवर्ष 50 करोड़ रुपए का अनुदान देने का फैसला किया है। इससे किसानों को अब अपनी उपज को रेहन या गिरवी रखकर मात्र तीन फीसदी ब्याज दर पर कर्ज मिल सकेगा। इसमें सात फीसदी ब्याज राज्य सरकार द्वारा कृषक कल्याण कोष से वहन किया जाएगा। पहले राज्य सरकार द्वारा केवल 2 फीसदी ब्याज वहन किया जाता था। इसके अलावा राजस्थान सरकार ने कई महत्वपूर्ण फैसले किए हैं, जिनमें उन्हें फसल का बेहतर मूल्य दिलाना, खरीद के लिए सुगम व विकेन्द्रीकृत व्यवस्था करना शामिल है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इन प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है। उपज को गिरवी रखकर लोन योजना में समय सीमा व पात्रता योजना के तहत किसानों को उनके द्वारा गिरवी रखी गई उपज के बाजार मूल्य या समर्थन मूल्य, जो भी कम हो, के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा तथा मूल्यांकित राशि की 70 फीसदी राशि रेहन ऋण के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी। लघु एवं सीमान्त किसानों के लिए 1.50 लाख तथा बड़े किसानों को 3 लाख रुपए तक का ऋ ण मात्र तीन फीसदी ब्याज दर पर मिल सकेगा। इसमें किसान को 90 दिन के लिए कर्ज मिलेगा। हालांकि विशेष परिस्थितियों में यह सीमा 6 माह तक हो सकेगी। यह भी पढ़ें : आत्म निर्भर भारत अभियान : किसानों को मिलेंगे 30 हजार करोड़ कृषि मंडियों में भूखंड आवंटियों को मिली राहत इसी तरह मंडियों में भूखंडों पर निर्माण नहीं करा पाने वाले आवंटियों को भी गहलोत सरकार की ओर से राहत दी गई है। मंडियों में आवंटित भूखंड पर निर्माण नहीं कराने के कारण जिनके आवंटन निरस्त हो गए थे अगर उन भूखंडों का किसी अन्य को आवंटन नहीं किया गया है तो ऐसे आवंटन पुन: बहाल हो सकेंगे। इसके लिए आवंटियों को 30 जून तक आवंटन राशि का 25 प्रतिशत शास्ति जमा कराने की छूट प्रदान की है। प्रमाणित बीज के लिए 200 मंडियों में बनेंगे बिक्री केंद्र राजस्थान की गहलोत सरकार के एक अन्य फैसले के तहत किसानों को प्रमाणित बीज उपलब्ध कराने के लिए 200 मंडियों में बिक्री केंद्र बनेंगे। मुख्यमंत्री ने राजस्थान राज्य बीज निगम को बीज वितरण केंद्र स्थापित करने के लिए प्रदेश के 200 कृषि उपज मंडी परिसरों में भूखंड तथा रिक्त निर्मित परिसंपत्तियां उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। इसी तरह निजी लघु मंडी को प्रतिभूति राशि एवं भूमि की आवश्यकता की अनिवार्यता में ढील दी गई है। समझदार किसान ऐसे उठा सकते हैं योजना का फायदा कृषि विशेषज्ञों के अनुसार फसल को गिरवी रखकर कम ब्याज पर लोन उठाकर किसान भाई कई तरीकों से फायदा उठा सकते हैं। जानकारों का मामना है कि अगर किसान अपनी उपज के संबंध में भविष्य की तेजी-मंदी की जानकारी रखता है तो वह फायदा उठा सकता है। किसान को अगर लगता है कि वर्तमान में उसकी उपज का भाव कम है और भविष्य में इसमें तेजी आ सकती है तो वह सरकार के पास अपनी उपज गिरवी रखकर लोन ले सकता है। इस लोन की रकम को अन्य उत्पादक कार्यों में लगा सकता है और उससे आमदनी पैदा कर सकता है। भविष्य में गिरवी रखी उपज के भावों में तेजी आने पर अपनी को गिरवी से छुड़ाकर बाजार में बेच सकता है। इस तरह वह ज्यादा लाभ कमा सकता है। लेकिन इसके लिए किसानों का जागरूकता होना अति आवश्यक है। सभी कंपनियों के ट्रैक्टरों के मॉडल, पुराने ट्रैक्टरों की री-सेल, ट्रैक्टर खरीदने के लिए लोन, कृषि के आधुनिक उपकरण एवं सरकारी योजनाओं के नवीनतम अपडेट के लिए ट्रैक्टर जंक्शन वेबसाइट से जुड़े और जागरूक किसान बने रहें।

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