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बाजार में हाईब्रिड टमाटर की बढ़ी मांग, मिल रहे हैं अच्छे दाम

बाजार में हाईब्रिड टमाटर की बढ़ी मांग, मिल रहे हैं अच्छे दाम

17 September, 2020

हाईब्रिड टमाटर से होगा दुगुना मुनाफा, किसानों की बढ़ेगी आदमनी

आधुनिक समय में कृषि में नए-नए प्रयोगों को अपनाकर उत्पादन तकनीक उन्नत करते हुए पैदावार को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार भी नवाचार करने वाले किसानों को प्रोत्साहित कर रही है ताकि खेती के परंपरागत तरीकों को छोडक़र किसान आधुनिक तरीके से खेती कर उत्पादन को बढ़ाएं ताकि देश की सवा करोड़ आबादी के लिए खाद्यान्न का संकट पैदा नहीं हो। इधर किसान भी नए तरीकों को अपनाकर खेती को उन्नत बनाने में लगा हुआ है। आज किसान नई विधियों को अपनाकर खेती करने की ओर अग्रसर हो रहा है। यही कारण है कि आज ऐसी विधियां व तकनीक प्रयोग में लाई जा रही है जिससे उत्पादन बढऩे के साथ ही श्रम व समय की भी बचत हो। इसी दिशा में उन्नत बीजों को अपनाकर उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है। 

 

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हाईब्रिड बीजों के प्रयोग से उत्पादन में बढ़ोतरी 

आजकल किसानों को ध्यान हाईब्रिड खेती की ओर अधिक हो गया है। हाईब्रिड बीजों को अपनाकर किसान उत्पादन को और अधिक बढ़ा सकते हैं। साधारण बीज की तुलना में हाईब्रिड बीजों के प्रयोग से उत्पादन में बढ़ोतरी की जा सकती है। इस दिनों आलू, प्याज व टमाटर के दाम मंडी में आसमान छू रहे हैं वहीं अन्य सब्जियां भी महंगी हो रही है। इससे आजमन का बजट बढ़ गया है। इस समस्या के समधान के लिए किसानों को हाईब्रिड बीजों का उपयोग कर टमाटर की खेती को करनी चाहिए ताकि उत्पादन बढऩे के साथ ही किसान की आमदनी में भी इजाफा हो सके।

 


हाईब्रिड टमाटर में बढ़ी किसानों की रूचि, मिल रहा है अधिक मुनाफा

बाजार में अच्छे दाम मिलने से किसानों का रूचि अब हाईब्रिड टमाटर के उत्पादन पर हो रही है। इसमें खास बात यह है कि ये 40 डिग्री तापमान पर भी नमी को बरकरार रखता है जिससे टमाटर जल्दी खराब नहीं होता और साधारण बीजों की तुलना में इसके इस्तेमाल से उत्पादन भी दुगुना होता है। इसे देखते हुए यूपी के बलिया, गाजीपुर, बाराबंकी, मऊ, सुलतानपुर, बनारस, सोनभद्र समेत कई जिलों में किसानों ने हाइब्रिड बीज से टमाटर की खेती शुरू कर दी है। जानकारों का दावा है कि इससे फसल की पैदावार डेढ़ से दो गुना तक बढ़ेगी। इसके अलावा यह साधारण बीजों की तुलना में तापमान के साथ बेहतर सामजंस बनाने में सफल होते है। गाजीपुर जिले के किसान गोरख राय बताते हैं कि वे पहले देशी बीज वाले टमाटर लगते थे, लेकिन अब हाइब्रिड टमाटर से खेती होती है। इससे मुनाफा बढ़ रहा है।


क्या है हाईब्रिड टमाटर

हाईब्रिड टमाटर से तात्पर्य यह है कि टमाटर की उन्नत पैदावार के लिए हाईब्रिड बीजों का इस्तेमाल करना, जिससे पैदावार बढ़ाई जा सके। हाईब्रिड बीज बनाने वाली कंपनियों का दावा है कि साधारण बीज से एक बीघा में अमूमन 15 क्विंटल पैदावार होती है। वहीं हाइब्रिड बीजों की खेती के बाद यह पैदावार 25 से 30 क्विंटल तक पहुंच जाएगी। सबसे अच्छी बात यह है कि यह 40 डिग्री के तापमान में भी नमी बरकरार रखता है जिससे टमाटर की स्वस्थ व अधिक पैदावार प्राप्त होती है।


हाईब्रिड टमाटर के बीजों की किस्में ( टमाटर की किस्में )

बाजार में हाइब्रिड बीजों की कई किस्म उपलब्ध हैं। इसमें सेमिनियस हाइब्रीड बीजों अभिलाष , गर्व, टीओएस -369, करिश्मा, गणेश, अभिरंग, अशोका, अरिजित शामिल हैं। इसकी बाजार में कीमत प्रति दस ग्राम 350 से 500 रुपए है। इसमें करीब 3500 पौधे तैयार होते है। इसके अलावा इसकी अन्य संकर किस्मों में पूसा हाइब्रिड-1, पूसा हाइब्रिड -2, पूसा हाइब्रिड -4, अविनाश-2, रश्मि तथा निजी क्षेत्र से शक्तिमान, रेड गोल्ड, 501, 2535 उत्सव, अविनाश, चमत्कार, यू.एस. 440 आदि किस्में भी शामिल है।


हाईब्रिड टमाटर की खेती के लिए जलवायु व भूमि

टमाटर की फसल की खेती के लिए आदर्श तापमान 18 से 27 डिग्री सेटिग्रेट है। 21-24 डिग्री से.ग्रे तापक्रम पर टमाटर मे लाल रंग सबसे अच्छा विकसित होता है। तापमान 38 डिग्री से.ग्रे. से अधिक होने पर अपरिपक्व फल एवं फूल गिर जाते है। वहीं भूमि की बात करें तो टमाटर की खेती के लिए उचित जल निकास वाली बलुई दोमट भूमि जिसमें पर्याप्त मात्रा मे जीवांश उपलब्ध हो जाते हैं सबसे उपयुक्त रहती है।

 


बीज की मात्रा

एक हेक्टेयर क्षेत्र में फसल उगाने के लिए नर्सरी तैयार करने हेतु लगभग 350 से 400 ग्राम बीज पर्याप्त होता है। वहीं हाईब्रिड किस्मों के लिए बीज की मात्रा 150-200 ग्राम प्रति हेक्टेयर पर्याप्त रहती है।


बुवाई का उचित समय

टमाटर की बुवाई का उचित समय वर्षा ऋतु के लिए जून-जुलाई तथा शीत ऋतु के लिये जनवरी-फरवरी का होता है। फसल पाले रहित क्षेत्रो में उगायी जानी चाहिए या इसकी पाले से समुचित रक्षा करनी चाहिए।


बीज उपचार

बुवाई पूर्व थाइरम / मेटालाक्सिल से बीजोपचार करे ताकि अंकुरण पूर्व फफून्द का आक्रमण रोका जा सके।


नर्सरी एवं रोपाई

  • नर्सरी मे बुवाई हेतु 1 से 3 मी. की ऊठी हुई क्यारियां बनाकर फोर्मेल्डिहाइड द्वारा स्टेरीलाइजशन कर ले अथवा कार्बोफ्यूरान 30 ग्राम प्रति वर्गमीटर के हिसाब से मिला देना चाहिए।
  • बीज को कार्बेन्डाजिम/ट्राइकोडर्मा प्रति किग्रा. बीज की दर से उपचारित कर 5 से.मी. की दूरी रखते हुए कतारों में बीजो की बुवाई करनी चाहिए। बीज बोने के बाद गोबर की खाद या मिट्टी ढक दें और हजारे से छिडक़ाव करना चाहिए।
  • बीज उगने के बाद डायथेन एम-45/मेटालाक्सिल छिडक़ाव 8-10 दिन के अंतराल पर करना चाहिए।
  • 25 से 30 दिन का रोपा खेतों में रोपाई से पूर्व कार्बेन्डिजिम या ट्राईटोडर्मा के घोल में पौधों की जड़ों को 20-25 मिनट उपचारित करने के बाद ही पौधों की रोपाई करनी चाहिए।


ऐसे करें बुवाई

हाइब्रिड बीजों से खेती में ध्यान रखें कि खेत की जुताई बेहतर हुई हो। मिट्टी एकदम सॉफ्ट हो जानी चाहिए। क्यारियों के बीच करीब 80 से 100 सेमी और एक पौधे से दूसरे के बीच 50 से 60 सेमी की दूरी रखना चाहिए। इससे कि पौधा बड़ा होने के बाद अपना सही आकार ले सकेगा।


उर्वरक का प्रयोग

20 से 25 मैट्रिक टन गोबर की खाद/है एवं 200 किलो नत्रजन, 100 किलो फॉस्फोरस व 100 किलो पोटाश /है। बोरेक्स की कमी हो वहाँ बोरेक्स 0.3 प्रतिशत का छिडकाव करने से फल अधिक लगते है।


सिंचाई

सर्दियों मे 10-15 दिन के अन्तराल से एवं गर्मियों में 6-7 दिन के अन्तराल से हल्का पानी देते रहे। अगर संभव हो सके तो किसानों को सिंचाई ड्रिप इरीगेशन द्वारा करनी चाहिए।


मिट्टी चढ़ाना व पौधों को सहारा देना ( स्टेकिंग ) 

टमाटर मे फूल आने के समय पौधो मे मिट्टी चढ़ाना एवं सहारा देना आवश्यक होता है। टमाटर की लंबी बढऩे वाली किस्मों को विशेष रूप से सहारा देने की आवश्यकता होती है। पौधों को सहारा देने से फल मिट्टी एवं पानी के संपर्क में नहीं आ पाते जिससे फल सडऩे की समस्या नहीं रहती है। सहारा देने के लिए रोपाई के 30 से 45 दिन के बाद बांस या लकड़ी के डंडों में विभिन्न ऊंचाइयों पर छेद करके तार बांधकर फिर पौधों को तारों से सुतली को बांधते है। इस प्रक्रिया को स्टेकिंग कहा जाता है।

 

खरपतवार नियंत्रण

खरपतवार नियंत्रण के लिए आवश्यकतानुसार फसलों की निराई-गुड़ाई करनी चाहिए। फूल और फल बनने की अवस्था मे निंदाई-गुड़ाई नहीं करनी चाहिए। इसके अलवा रासायनिक दवा के रूप मे खेत तैयार करते समय फ्लूक्लोरेलिन (बासालिन) या से रोपाई के 7 दिन के अंदर पेन्डीमिथेलिन छिडकाव करना चाहिए।

 

टमाटर के प्रमुख कीट

टमाटर में हरा तैला, सफेद मक्खी, फल छेदक कीट एंव तम्बाकू की इल्ली कीट का प्रकोप पाया जाता है। इसकी रोकथाम के लिए कीटनाशक दवाओं का छिडक़ाव करना चाहिए।

 

टमाटर की फसल को होने वाले प्रमुख रोग


टमाटर की फसल को प्रमुख रूप से आर्द्र गलन या डैम्पिंग आफ, झुलसा या ब्लाइट, फल सडऩ रोग का प्रकोप अधिक रहता है। इसके नियंत्रण के उपाय किए जाने जरूरी है।


कीट एवं रोग नियंत्रण के उपाय

  • गर्मियों में खेत की गहरी जुताई करनी चाहिए।
  • पौधशाला की क्यारियों भूमि धरातल से ऊची रखें एवं फोर्मेल्डिहाइड द्वारा स्टेरीलाइजेशन कर लें।
  • क्यारियों को मार्च अप्रेल माह मे पोलिथिन शीट से ढकें, भू-तपन के लिए मृदा में पर्याप्त नमी होनी चाहिए।
  • गोबर की खाद मे ट्राइकोडर्मा मिलाकर क्यारी में मिट्टी मे अच्छी तरह से मिला देना चाहिए।
  • पौधशाला की मिट्टी को कॉपर ऑक्सीक्लोराइड के घोल से बुवाई के 2-3 सप्ताह बाद छिडकाव करें।
  • पौधरोपण के समय पौध की जडो को कार्बेन्डाजिम या ट्राइकोडर्मा के घोल मे 10 मिनट तक डुबो कर रखे।
  • पौध रोपण के 15-20 दिन के अंतराल पर चेपा, सफेद मक्खी एवं थ्रिप्स के लिए इमीडाक्लोप्रिड या एसीफेट के 2 से 3 छिडक़ाव करें। माइट की उपस्थिति होने पर ओमाइट का छिडक़ाव करें।
  • फल भेदक इल्ली एवं तम्बाकू की इल्ली के लिए इन्डोक्साकार्ब या प्रोफेनोफॉस का छिडक़ाव ब्याधि के उपचार के लिए बीजोपचार, कार्बेन्डाजिम या मेन्कोजेब से करना चाहिए। खड़ी फसल मे रोग के लक्षण पाये जाने पर मेटालेक्सिल + मैन्कोजेब या ब्लाईटोक्स का घोल बनाकर छिडक़ाव करें। चूर्णी फफूंद होने सल्फर घोल का छिडक़ाव करें।

 

 


फलों की तुड़ाई, उपज एवं विपणन

जब फलों का रंग हल्का लाल होना शुरू हो उस अवस्था में फलों की तुडाई शुरू कर देनी चाहिए तथा फलों की ग्रेडिंग कर कीट व व्याधि ग्रस्त फलों दागी फलों छोटे आकार के फलों को छांटकर अलग कर लें। ग्रेडिंग किए फलों को कैरेट मे भरकर अपने निकटतम सब्जी मंडी या जिस मंडी में अच्छा टमाटर का भाव हो वहां ले जाकर बेचें। साधारण टमाटर की औसत उपज 400-500 क्विंटल/हैक्टेयर होती है। वहीं हाईब्रिड टमाटर की उपज 700 -800 क्विंटल/हैक्टेयर तक हो सकती है।


कितनी हो सकती है कमाई

यदि हाईब्रिड टमाटर की औसतन पैदावार हम प्रति हैक्टेयर 600 क्विंटल मानें तो भी इसकी लागत करीब 88158 रुपए आती है। यदि बाजार में आप इसे न्यूनतम मूल्य 800 रुपए प्रति क्विंटल भी बेचते हो तो भी आपको 600 क्विंटल टमाटर से 4,80,000 रुपए की आमदनी हो सकती है। यहां दिया गया आंकड़ा न्यूनतम है। आप बाजार में भावों के हिसाब से इससे अधिक कमाई भी कर सकते हैं। खर्चा हटाने के बाद आपका शुद्ध लाभ करीब 3,91,842 रुपए होगा।

 

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किसानों की पहुंच से बाहर हुए आलू के बीज, रकबा घटने की आशंका

किसानों की पहुंच से बाहर हुए आलू के बीज, रकबा घटने की आशंका

आलू के बीज (Potato seeds) : महंगे भावों के चलते किसानों ने दूसरी खेती करने का मन बनाया आलू के भावों में जोरदार तेजी ने स्टॉकिस्टों को मालामाल कर दिया है। कोल्ड स्टोरेज में आलू भरने वाले किसानों ने भी अच्छी कमाई की है लेकिन यह प्रतिशत बहुत कम है। आलू की तेजी ने किसानों के सामने आलू की नई फसल बोने को लेकर एक चुनौती खड़ी कर दी है। अब किसान असमंजस मेंं है कि महंगे भावों पर आलू के बीज खरीदकर बुवाई करें या ना करें। अगले साल नई फसल के दाम अच्छे मिलेंगे या नहीं। आपको बता दें कि आलू भारत की सबसे महत्वपूर्ण फसलों में से एक है। तमिलनाडु एवं केरल को छोडक़र सारे देश में आलू उगाया जाता है। भारत में आलू की औसत उपज 152 क्विंटल प्रति हैक्टेयर है जो विश्व औसत से काफी कम है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 आलू की कीमतों में उछाल / आलू के भावों में तेजी आलू की अच्छी कीमतों के कारण इस बार भी किसानों ने ज्यादा खेती करने का मन बना रखा है लेकिन आलू के बीज के भाव किसानों की पहुंच से बाहर हो गए हैं। खुले बाजार में आलू का बीज 60 रुपए किलो तक मिल रहा है। वहीं सरकार कोल्ड स्टोरों में ३२ रुपए किलो के हिसाब से बेचा जा रहा है। आलू बीजों की ज्याद कीमत की वजह से किसानों ने इस बार फसल बदलने का मन बना लिया है। इससे आलू की फसल का रकबा घटने का अंदेशा जताया जा रहा है। आलू की बुवाई सीजन में सबसे ज्यादा मंग कुफरी लालिमा, चंद्रमुखी, चिप्सोना और कुफरी बादशाह प्रजाति के बीजों की होती है। इन बीजों की कीमत बाजार में 55 से 60 रुपए प्रतिकिलो है। जबकि पिछले साल बीजों के भाव 10-12 रुपए किलो थे। किसानों का कहना है कि इस बार करीब 500-600 प्रतिशत तक बीजों के दाम बढ़ गए हैं। खेती की लागत भी बहुत बढ़ जाएगी। सामान्यत: देखा गया है कि जिस वर्ष आलू का बीज महंगा होता है उस साल फसल के दाम अच्छे नहीं मिलते हैं। किसानों के अनुसार इस साल आलू की पैदावार की लागत खासी ज्यादा हो जाएगी जबकि उस हिसाब से दाम नहीं मिलेंगे। उत्तर प्रदेश में होता है आलू का बंपर उत्पादन उत्तरप्रदेश में पिछले तीन सालों से आलू का बंपर उत्पादन हो रहा है। उत्तरप्रदेश में पिछले साल ही आलू की पैदावार 165 लाख टन से ज्यादा थी। फसल के बाजार में आने के बाद दाम गिरने पर प्रदेश सरकार ने आलू की सरकारी खरीदन शुरू की थी। प्रदेश सरकार ने खरीद केंद्र खोल कर दो लाख क्विंटल आलू की खरीद सीधी खरीद की थी। वहीं बाहरी प्रदेशों को माल भेजने वाले किसानों को भाड़े में सब्सिडी भी दी गई थी। देश में आलू का रकबा घटना तय कृषि विशेषज्ञों के अनुसार एक बीघा आलू की बुआई के लिए कम से कम चार क्विंटल बीज की जरूरत होती है। इसके बाद मजदूरी, खाद व सिंचाई की लागत को जोड़ दें तो पैदावार खासी महंगी हो जाती है। इस बार नयी फसल के बाजार में आने के बाद किसान को क्या कीमत मिलेगी यह कहा नहीं जा सकता है। इन आशंकाओं के चलते इस बार देश में आलू की खेती का रकबा घटना तय है। । लघु और सीमांत किसान आलू की बजाए सरसों प्याज और लहसुन की खेती करने का मन बना रहे हैं। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

बैंगन की खेती से करें सालभर कमाई, अक्टूबर-नवंबर बुवाई का सबसे सही समय

बैंगन की खेती से करें सालभर कमाई, अक्टूबर-नवंबर बुवाई का सबसे सही समय

जानिए बैंगन की खेती ( brinjal cultivation ) की बुवाई का सही समय और उन्नत किस्म के बारे में अक्टूबर व नवंबर का महीना किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है। इन दो महीनों में किसान रबी की फसल की बुवाई करते हैं। रबी के सीजन में किसानों के पास गेहूं, चना, सरसों, मटर, आलू व गन्ना आदि की फसल बोने का विकल्प होता है। इसके अलावा किसान इन दिनों में बैंगन की खेती करके भी लाखों रुपए कमा सकता है। बैंगन की खेती दो महीने में तैयार हो जाती है। बैंगन की सब्जी भारतीय जनसमुदाय में बहुत प्रसिद्ध है। बैंगन को भर्ता, आलू-बैंगन की सब्जी, भरवा बैंगन, फ्राई बैंगन सहित कई तरीकों से पकाया जा सकता है। उत्तर भारत के इलाकों में बैंगन का चोखा बहुत प्रसिद्ध है। बैंगन की उत्पत्ति भारत में ही हुई है। विश्व में सबसे ज्यादा बैंगन चीन में 54 फीसदी उगाया जाता है। बैंगन उगाने के मामले में भारत का दूसरा स्थान है। बैंगन विटामिन और खनिजों का अच्छा स्त्रोत है। इसकी खेती सारा साल की जा सकती है। बैंगन की फसल बाकी फसलों से ज्यादा सख्त होती है। इसके सख्त होने के कारण इसे शुष्क और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में भी उगाया जा सकता हैं। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 बैंगन की उन्नत किस्में / बैंगन की प्रजाति बैंगन की उन्नत किस्मों की खेती करके किसान अपनी आमदनी बढ़ा सकता है। बैंगन की उन्नत किस्मों में पूसा पर्पर लोंग, पूसा पर्पर कलस्टर, पूर्सा हायब्रिड 5, पूसा पर्पर राउंड, पंत रितूराज, पूसा हाईब्रिड-6, पूसा अनमोल आदि शामिल है। एक हेक्टेयर में करीब 450 से 500 ग्राम बीज डालने पर करीब 300-400 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक का उत्पादन मिल जाता है। बैंगन की फसल के लिए मिट्टी / बैंगन की फसल के लिए भूमि बैंगन एक लंबे समय की फसल है, इसलिए अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ रेतली दोमट मिट्टी उचित होती है और अच्छी पैदावार देती है। अगेती फसल के लिए हल्की मिट्टी और अधिक पैदावार के लिए चिकनी और नमी या गारे वाली मिट्टी उचित होती है। फसल की वृद्धि के लिए भूमि का पी.एच. मान 5.5-6.6 के बीच में होनी चाहिए। सिंचाई का उचित प्रबंधन भी होना चाहिए। बैंगन की फसल सख्त होने के कारण इसे अलग अलग तरह की मिट्टी में उगाया जा सकता है। खेत में बैंगन की बिजाई का तरीका / बैंगन के बीज बैंगन का अधिक उत्पादन पाने के लिए बैंगन के बीजों का सही रोपण होना चाहिए। दो पौधों के बीच की दूरी का ध्यान रखना चाहिए। दो पौधों और दो कतार के बीच की दूरी 60 सेंटीमीटर होनी चाहिए। बीज रोपण करने से पहले खेत की अच्छे तरीके से 4 से 5 बार जुताई करके खेत को समतल करना चाहिए। फिर खेत में आवश्यकतानुसार आकार के बैड बनाने चाहिए। बैंगन की खेती में प्रति एकड़ 300 से 400 ग्राम बीजों को डालना चाहिए। बीजों को 1 सेंटीमीटर की गहराई तक बोने के बाद मिट्टी से ढक देना चाहिए। बैंगन बिजाई का सही समय / बैंगन की वैज्ञानिक खेती बैंगन की फसल पूरे सालभर की जा सकती है लेकिन अक्टूबर और नवंबर का महीना सबसे उपयुक्त माना जाता है। किसान पहली फसल के लिए अक्टूबर में पनीरी बो सकते हैं जिससे नवंबर तक पनीरी खेत में लगाने के लिए तैयार हो जाए। दूसरे फसल के लिए नवंबर में पनीरी बोनी चाहिए जिससे फरवरी के पहले पखवाड़ तक पनीरी खेत में लगाने के लिए तैयार हो जाए। तीसरी फसल के लिए फरवरी के आखिरी पखवाड़़े और मार्च के पहले पखवाड़े में पनीरी बोनी चाहिए जिससे अप्रैल के आखिरी सप्ताह में पनीरी खेत में लगाने के लिए तैयार हो जाए। चौथी फसल के लिए जुलाई में पनीरी बोनी चाहिए ताकि अगस्त तक पनीरी खेत में लगाने के लिए तैयार हो जाए। बैंगन की खेती में खाद और उर्वरक बैंगन की खेती में मिट्टी की जांच के अनुसार खाद और उर्वरक डालनी चाहिए। अगर मिट्टी की जांच नहीं हो पाती है तो खेत तैयार करने समय 20-30 टन गोबर की सड़ी खाद मिट्टी में मिला देनी चाहिए। इसके बाद 200 किलो ग्राम यूरिया, 370 किलो ग्राम सुपर फॉस्फेट और 100 किलो ग्राम पोटेशियम सल्फेट का इस्तेमाल करना चाहिए। बैंगन की खेती में सिंचाई बैंगन की खेती में अधिक पैदावार लेने के लिए सही समय पर पानी देना बहुत जरूरी है। गर्मी के मौसम में हर 3-4 दिन बाद पानी देना चाहिए और सर्दियों में 12 से 15 के अंतराल में पानी देना चाहिए। कोहरे वाले दिनों में फसल को बचाने के लिए मिट्टी में नमी बनाए रखें और लगातार पानी लगाएं। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि बैंगन की फसल में पानी खड़ा न हो, क्योंकि बैंगन की फसल खड़े पानी को सहन नहीं कर सकती है। बैंगन की फसल की तुड़ाई खेत में बैंगन की पैदावार होने पर फलों की तुड़ाई पकने से पहले करनी चाहिए। तुड़ाई के समय रंग और आकार का विशेष ध्यान रखना चाहिए। बैंगन का मंडी में अच्छा रेट मिले इसके लिए फल का चिकना और आकर्षक रंग का होना चाहिए। बैंगन का स्टोरेज / बैंगन का भंडारण बैंगन को लंबे समय के लिए स्टोर नहीं किया जा सकता है। बैंगन को आम कमरे के सामान्य तापमान में भी ज्यादा देर नहीं रख सकते हैं क्योंकि ऐसा करने से इसकी नमी खत्म हो जाती है। हालांकि बैंगन को 2 से 3 सप्ताह के लिए 10-11 डिग्री सेल्सियस तापमान और 9२ प्रशित नमी में रखा जा सकता है। किसान भाई बैंगन को कटाई के बाद इसे सुपर, फैंसी और व्यापारिक आकार के हिसाब से छांट लें और पैकिंग के लिए, बोरियों या टोकरियों का प्रयोग करें। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

सरसों के भाव 6500 रुपए प्रति क्विंटल!, अब आगे क्या?

सरसों के भाव 6500 रुपए प्रति क्विंटल!, अब आगे क्या?

जानिएं त्योहारी मांग के कारण सरसों सहित अन्य तिलहनों में आई कितनी तेजी सरसों में तेजी रोजाना नए रिकॉर्ड बना रही है। पिछले साल 2019 में 25 अक्टूबर के आसपास सरसों के भाव 4500 रुपए प्रति क्विंटल था। इस बार अक्टूबर 2020 में सरसों के भाव जयपुर मंडी में 6000-6100 के आसपास चल रहे हैं। आगरा की कई बड़ी तेल कंपनियों द्वारा सरसों 6500 रुपए प्रति क्विंटल के भाव से खरीदने के समाचार भी हैं। सरसों के अलावा अन्य तिलहनों में भी तेजी बनी हुई। त्योहारी मांग के कारण सरसों का तेल 120 से 130 रुपए किलो बिक रहा है। अन्य तेलों के भावों में भी तेजी है। सरसों की नई फसल आने में अभी 5-6 महीने का समय है। इस बार सरसों उत्पादक क्षेत्रों में बारिश भी कम हुई है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार सरसों का स्टॉक कम है इसलिए भविष्य में सरसों में मंदी की संभावना कम है। सरसों सहित अन्य तिलहनों के भावों में कमी सरकार की नीतियों पर निर्भर करेगा। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 सरसों के भाव त्योहारी मौसम में विशेषकर उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में सरसों की मांग वृद्धि होने से भी सरसों दाना सहित इसके तेल-तिलहन कीमतों में सुधार आया। जम्मू-कश्मीर में सरसों दाना (तिलहन फसल) की मांग में काफी वृद्धि हुई है, जहां की मंडियों में हरियाणा से खरीदी गई सरसों 6250 रुपये क्विन्टल के भाव से बिक रही है। जयपुर की हाजिर मंडी में सरसों दाना का हाजिर भाव बढक़र 6000-6100 रुपए क्विंटल हो गया है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार नफैड को अब सोच-समझ के साथ सीमित मात्रा में सरसों की बिकवाली करनी होगी, क्योंकि अगली पैदावार आने में अभी पांच-छह महीने का समय है और त्योहारों के साथ साथ सर्दियों की मांग और भी बढऩे वाली है। मूंगफली का भाव त्योहारी मांग के कारण तेल-तिलहन बाजार में तेजी बनी हुई है और भविष्य में भी तेजी की धारणा है। विदेशी बाजारों में मूंगफली दाना के साथ-साथ मूंगफली तेलों की भारी मांग ने भावों में तेजी को बल दिया है। नंबर एक गुणवत्ता वाले मूंगफली दाने की निर्यात मांग में भारी तेजी के कारण मूंगफली तेल-तिलहन कीमतों में तेजी बनी है। मूंगफली का सर्वाधिक उत्पादन भारत व चीन में होता है। नंबर वन मूंगफली दाने की कीमत 70 रुपए किलो तक पहुंच गई है। सबसे सस्ते तेल सोयाबीन में तेजी / सोयाबीन का भाव हल्के तेलों में शामिल सोयाबीन इस समय सबसे सस्ता है। इस साल सोयाबीन की खपत में पिछले साल के मुकाबले 40 फीसदी की वृद्धि हुई है। सूरजमुखी फसल के कम उत्पादन होने, सरसों जैसे हल्के तेल में 'ब्लेंडिंग' (सम्मिश्रण) की मांग बढऩे तथा उत्तर भारत के मौसम की वजह से सोयाबीन तेल मांग के बढऩे से इसके तेल कीमतों में तेजी आई है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार अगस्त में कम बारिश के कारण मध्य प्रदेश में सोयाबीन की फसल और इसकी उपज प्रभावित हुई है। वहीं महाराष्ट्र में अधिक बारिश के कारण इसकी फसल प्रभावित हुई है, जिससे सोयाबीन किसानों की हालत पतली है और उनके लिए अपनी लागत निकालना मुश्किल हो रहा है। त्योहारी मांग होने और फसल को पहुंचे नुकसान से समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान सोयाबीन दाना और लूज की कीमतें 105-105 रुपये सुधरकर 4300-4325 रुपये और 4170-4200 रुपये प्रति क्विन्टल के आसपास चल रही हैं। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

अब कृषि विभाग वाट्सएप पर देगा किसानों को खेती की जानकारी

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राजस्थान सरकार की नई पहल : अब तक 5 लाख किसानों को जोड़ा जा चुका है ग्रुप में राजस्थान सरकार ने किसानों को सरकारी योजनाओं सहित खेती- बाड़ी की जानकारी पहुंचाने के लिए अब सोशल मीडिया और स्मार्ट फोन का सहारा लिया है। मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार अब प्रदेश सरकार सोशल मीडिया और स्मार्ट फोन का उपयोग खेती में करना चाह रही है। इसके लिए सरकार की ओर से कृषि अधिकारियों को निर्देश भी दिए जा चुके है। इस निर्देश के बाद प्रदेश के कृषि विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत खेती-बाड़ी की जानकारी देने के लिए प्रदेशभर में किसानों के करीब पांच हजार वॉट्सएप गु्रप बनाए जा चुके हैं। इनसे करीब पांच लाख किसानों को जोड़ा जा चुका है। अगर सरकार की ये योजना रंग लाई तो प्रदेश के किसानों को कृषि से जुड़ी जानकरियां उनको घर बैठे-बैठे आसानी से मिलेंगी। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रैक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 किसानों को मिलेंगी ये जानकारियां मीडिया में प्रकाशित खबरों के अनुसार कृषि मंत्री लालचंद कटारिया के मुताबिक प्रदेश के किसानों को अब विभागीय योजनाओं की जानकारी के साथ ही खेती के उन्नत तरीकों और नवाचारों की जानकारी वॉट्सएप गु्रप के जरिए मिलेगी। इन गु्रप पर कृषि पर्यवेक्षक सफलता की कहानियां और खेती से जुड़ी डॉक्युमेंट्री समेत विभागीय सूचनाएं साझा करेंगे। यह प्रयोग फसल में रोग और टिड्डी प्रकोप जैसी समस्याओं से निपटने में भी मदद करेगा। कृषि पर्यवेक्षकों दिए गए थे 250-250 किसानों को जोडऩे के निर्देश प्रदेश में कार्यरत सभी कृषि पर्यवेक्षकों को वॉट्सएप गु्रप बनाकर अपने-अपने क्षेत्र के 250-250 किसानों को इससे जोडऩे के निर्देश कृषि विभाग द्वारा दिए गए थे। बता दें कि प्रदेश में करीब साढ़े 5 हजार कृषि पर्यवेक्षक कार्यरत हैं और इनके द्वारा अब तक 4 हजार 786 गु्रप बनाए जा चुके हैं। इनके जरिये लगभग 5 लाख किसानों को जोड़ा जा चुका है। जयपुर जिले में सबसे ज्यादा 53 हजार किसानों को व्हाट्सएप गु्रप से जोड़ा गया है। अगर यह प्रयोग सफल रहा तो विभाग को अपनी योजनाओं का प्रचार प्रसार करने में काफी आसानी हो जाएगी और किसानों तक विभाग की पहुंच भी आसान हो होगी। क्या कहते हैं अधिकारी कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आजकल काफी बड़ी संख्या में किसान स्मार्ट फोन का इस्तेमाल करते हैं। वे अब पंरपरागत खेती की बजाय आधुनिक तकनीक का अपनाने में भी खासा रुझान दिखा रहे हैं। खेती की जानकारी साझा करने में किसान भी सोशल मीडिया का फायदा उठाने में कोई गुरेज नहीं कर रहे हैं। इधर 99 कृषि सिंचाई परियोजना की निगरानी के लिए मोबाइल ऐप्लीकेशन लांन्च केंद्रीय जल शक्ति एवं सामाजिक न्याय तथा अधिकारिता राज्य मंत्री रतन लाल कटारिया ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत किए जाने वाले कामों की जानकारी प्राप्त करने कि लिए एक मोबाइल ऐप्लीकेशन लांच किया है। यह ऐप्लीकेशन परियोजनाओं की जियो टैगिंग करेगा। जिससे परियोजनाओं की निगरानी करने और उनकी प्रगति तथा उनके विकास में आने वाली बाधाओं का पता लगाया जा सकेंगा। इस एप्लीकेशन का विकास भास्कराचार्य नेशनल इंस्टीच्यूट आफ स्पेस ऐप्लीकेशंस एंड जियो-इंफार्मेटिक्स (बीआईएसएजी-एन) की सहायता से किया है। इससे 99 कृषि सिंचाई परियोजना की निगरानी की जाएगी। राज्य मंत्री रतन लाल कटारिया ने मीडिया को बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों के लाभ हेतु कृषि सिंचाई परियोजना की शुरुआत की थी। जिसमें 99 परियोजनाओं की शुरुआत की गई थी। जो कि देश में 34.64 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त कृषि भूमी की सिंचाई करने में सहायक होगी। वहीं इन परियोजनाओं में से अभी तक 44 सिंचाई परियोजनाओं का काम पूरा किया जा चुका है। जिससे देश की 21.33 लाख हेक्टेयर खेती योग्य भूमि की सिंचाई की जा रही है। मोबाइल एप्लीकेशन से इन सभी परियोजनाओं की सतत निगरानी आसानी से की जा सकेगी। किसानों को होगा फायदा इस एप्लीकेशन का उपयोग स्थान, नहर के प्रकार/संरचना, पूर्णता स्थिति आदि जैसे अन्य विवरणों के साथ परियोजना घटक की छवि लेने के लिए निगरानी टीम/परियोजना प्राधिकारियों द्वारा किया जा सकता है। इसके द्वारा एकत्रित की गई सूचना को जीआईएस पोर्टल पर प्रदर्शित करके किसानों को लाभ पहुंचाया जाएगा। मोबाइल ऐप्लीकेशन को क्षेत्र में उपलब्ध नेटवर्क को देखते हुए आनलाइन एवं आफलाइन दोनों ही तरीके से आपरेट किया जा सकता है। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

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