• Home
  • News
  • Agriculture News
  • मूंग की खेती : मूंग की बुवाई का आया समय, ऐसे करें तैयारी

मूंग की खेती : मूंग की बुवाई का आया समय, ऐसे करें तैयारी

मूंग की खेती : मूंग की बुवाई का आया समय, ऐसे करें तैयारी

जानें, मूंग की बुवाई का सही तरीका और इन बातों का रखें ध्यान?

दलहनी फसलों में मूंग का अपना एक विशिष्ट स्थान है। मूंग की फसल को खरीफ, रबी एवं जायद तीनों मौसम में सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है। मूंग में काफी मात्रा में प्रोटीन पाए जाने से हमारे लिए स्वास्थ्यवर्धक होने के साथ ही खेत की मिट्टी के लिए भी बहुत फामदेमंद है। मूंग की फसल से फलियों की तुड़ाई के बाद खेत में मिट्टी पलटने वाले हल से फसल को पलटकर मिट्टी में दबा देने से यह हरी खाद का काम करती है। मूंग की खेती करने से मृदा में उर्वराशक्ति में वृद्धि होती है। यदि सही तरीके से इसकी खेती जाए तो इससे काफी अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है।

 

सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1


मूंग में पाए जाने वाले पोषक तत्व

मूंग में प्रोटीन बहुत अधिक मात्रा में पाई जाती है। इसके अलावा मूंग की दाल में मैग्नीज, पोटैशियम, मैग्नीशियम, फॉलेट, कॉपर, जिंक और विटामिन्स जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। इस दाल के सेवन से शरीर के लिए जरुरी पोषक तत्वों की कमी को पूरा किया जा सकता है। बता दें कि इस दाल का पानी पीकर आप कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं। यह दाल डेंगू जैसी खतरनाक बीमारी से भी बचाव करती है।

 


भारत में कहां-कहां होती है मूंग की खेती

मूंग का अधिक उत्पादन करने वाले देशों में भारत, रूस, मध्य अमेरिका, इटली, फ्रांस और उत्तर अमेरिका और बेल्जियम आदि हैं। वहीं भारत में इसका ज्यादातर उत्पादन उत्तर प्रदेश, बिहार, केरल, कर्नाटक के अलावा उतरी पूर्वी भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में किया जाता है।


मूंग की अधिक उत्पादन देने वाली उन्नत किस्में

मूंग की अधिक उत्पादन देने वाली किस्मों में के.-851, पूसा 105, पी.डी.एम. 44, एम.एल.-131, जवाहर मूंग 721, पी.एस.-16, एच.यू.एम.-1, किस्म टार्म 1, टी.जे.एम.-3 आती हैं। इसके अलावा निजी कंपनियों की किस्मों में शक्तिवर्धक : विराट गोल्ड, अभय, एसव्हीएम 98, एसव्हीएम 88, एसव्हीएम 66 आदि शामिल हैं।


भूमि की तैयारी

दो या तीन बार हल या बखर से जुताई कर खेत अच्छी तरह तैयार करना चाहिए तथा पाटा चलाकर खेत को समतल बना लेना चाहिए। दीमक से बचाव के लिए क्लोरोपायरीफॉस चूर्ण 20 किग्रा प्रति हेक्टर की दर से खेत की तैयारी के समय मिट्टी में मिलाना चाहिए।


बीज की मात्रा

उन्नत किस्म का बीज बोने से अधिक पैदावार मिलती है। प्रति हेक्टर 25-30 किलो बीज की बुवाई के लिए पर्याप्त होगा ताकि पौधों की संख्या 4 से 4.5 लाख तक हो सके।


बीजोपचार

बीजों को बोने से पहले बीज फफूंद नाशक दवा तथा कल्चर से उपचारित कर लेना चाहिए। फफूंद नाशक दवा से उपचारित करने के लिए प्रति किलोग्राम बीज कार्बेन्डाजिम की 2.5 ग्राम मात्रा पयाप्त होती है। इसके बाद राइजोबियम तथा पी.एस.बी. कल्चर 10 ग्राम मात्रा प्रति किलो बीज के मान से उपचारित कर तुरंत बुवाई कर देनी चाहिए।


बुवाई का समय व तरीका

मूंग की बुवाई 15 जुलाई तक कर देनी चाहिए। देरी से वर्षा होने पर शीघ्र पकने वाली किस्म की वुबाई 30 जुलाई तक की जा सकती है। सीडड्रिल की सहायता से कतारों में बुवाई करें। कतारों के बीच की दूरी 30-45 से.मी. रखते हुए 3 से 5 से.मी. गहराई पर बीज बोना चाहिए। वहीं पौधे से पौधे की दूरी 10 से.मी. रखना उचित रहता है। ध्यान रहे मूंग के बीज उत्पादन का प्रक्षेत्र किसी दूसरी प्रजाति के मूंग के प्रक्षेत्र से 3 मीटर दूर होना चाहिए।


खाद एवं उरर्वक

प्रति हेक्टर 20 किलोग्राम नत्रजन तथा 50 किलो ग्राम स्फुर बीज को बोते समय उपयोग में लायें इस हेतु प्रति हेक्टर एक क्विंटल डायअमोनियम फास्फेट डी.ए.पी. खाद दिया जा सकता है। पोटाश एवं गंधक की कमी वाले क्षेत्र में 20 किग्रा. प्रति हेक्टर पोटाश एवं गंधक देना लाभकारी होता है।


निंदाई-गुड़ाई

जब पौधा 6 इंच का हो तो एक बार डोरा चलाकर निंदाई करें। आवश्यकतानुसार 1-2 निंदाई करना चाहिए।


कब-कब करें सिंचाई

प्राय: खरीफ में मूंग की फसल को सिंचाई की आवश्यकता नहीं पड़ती परंतु जायद/ग्रीष्मकालीन फसल में 10-15 दिन के अंतर पर 4-5 सिंचाइयां की जानी चाहिये। सिंचाई के लिये उन्नत तकनीकों फब्बारा या रेनगन का प्रयोग किया जा सकता है।


खरपतवार नियंत्रण

फसल की बुवाई के एक या दो दिन बाद तक पेन्डीमेथलिन (स्टोम्प )की बाजार में उपलब्ध 3.30 लीटर मात्रा को 500 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टयर की दर से छिडक़ाव करना चाहिए फसल जब 25 -30 दिन की हो जाए तो एक गुड़ाई कस्सी से कर देनी चहिए या इमेंजीथाइपर(परसूट) की 750 मी. ली. मात्रा प्रति हेक्टयर की दर से पानी में घोल बनाकर छिडक़ाव कर देना चाहिए।


फसल चक्र अपनाएं

अच्छी पैदावार प्राप्त करने के लिए मूंग की खेती में फसल चक्र अपनाना बेहद जरूरी है। वर्षा आधारित खेती के लिए मूंग-बाजारा और सिंचित क्षेत्रों में मूंग- गेहूं/जीरा/सरसों फसल चक्र अपनाना चाहिए। सिंचित खेतों में मूंग की जायद में फसल लेने के लिए धान- गेहूं फसल चक्र में उपयुक्त फसल के रूप में पाई गई है। जिससे मृदा में हरी खाद के रूप में उर्वराशक्ति बढ़ाने में सहायता मिलती है।

 

कब करें फसल कटाई

जब फलियों का रंग हरे से भूरा होने लगे तब फलियों की तुड़ाई तथा एक साथ पकने वाली प्रजातियों में कटाई कर लेना चाहिये तथा शेष फसल की मिट्टी में जुताई करने से हरी खाद की पूर्ति भी होती है। फलियों के अधिक पकने पर तुड़ाई करने पर फलियों के चटकने का डर रहता है जिससे कम उत्पादन प्राप्त होता है।

 


उपज एवं कमाई

मूंग की 7 -8 कुंतल प्रति हेक्टयर वर्षा आधारित फसल से उपज प्राप्त हो जाती है। एक हेक्टयर क्षेत्र में मूंग की खेती करने के लिए 18-20 हजार रुपए का खर्च आ जाता है। मूंग का भाव 40 रुपए प्रति किलो होने पर 12000- से 14000 रुपए प्रति हेक्टयर शुद्ध लाभ प्राप्त किया जा सकता है।

 

अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

Top Agriculture News

पशुपालन : गर्मियों में पशुओं से चाहिए ज्यादा दूध तो आहार में करें ये परिवर्तन

पशुपालन : गर्मियों में पशुओं से चाहिए ज्यादा दूध तो आहार में करें ये परिवर्तन

पशुपालन : गर्मियों में पशुओं से चाहिए ज्यादा दूध तो आहार में करें ये परिवर्तन (If you want more milk from animals in summer, then change these in the diet)

नेशनल नर्सरी पोर्टल : अब किसानों को मिलेंगे गुणत्तापूर्ण बीज और पौधे

नेशनल नर्सरी पोर्टल : अब किसानों को मिलेंगे गुणत्तापूर्ण बीज और पौधे

नेशनल नर्सरी पोर्टल : अब किसानों को मिलेंगे गुणत्तापूर्ण बीज और पौधे (National Nursery Portal : Now farmers will get quality seeds and plants), जानें, क्या है नेशनल नर्सरी पोर्टल और इससे किसानों को लाभ?

किसानों की हुई मौज, 7000 रुपए प्रति क्विंटल बिक रही है सरसों

किसानों की हुई मौज, 7000 रुपए प्रति क्विंटल बिक रही है सरसों

किसानों की हुई मौज, 7000 रुपए प्रति क्विंटल बिक रही है सरसों ( Farmers' fun, mustard is being sold at Rs 7000 per quintal ) जानें, प्रमुख मंडियों के सरसों व सरसों खल के ताजा भाव

अप्रैल के कृषि कार्य : सूरजमुखी, उड़द, मूंग, गन्ना, लहसुन और आम में होगा फायदा

अप्रैल के कृषि कार्य : सूरजमुखी, उड़द, मूंग, गन्ना, लहसुन और आम में होगा फायदा

अप्रैल के कृषि कार्य : सूरजमुखी, उड़द, मूंग, गन्ना, लहसुन और आम में होगा फायदा (April's agricultural work), किसान भाइयों के लिए साबित होंगे उपयोगी

close Icon

Find Your Right Tractor and Implements

New Tractors

Used Tractors

Implements

Certified Dealer Buy Used Tractor