दुनिया में खाद्य कीमतों में फिर तेजी, 2027 में महंगाई बढ़ने का खतरा

S&P ग्लोबल ने जताई चिंता, अल नीनो और खाद-डीजल की बढ़ती लागत से प्रभावित हो सकता है कृषि उत्पादन, गेहूं और मक्का की कीमतों में भी उछाल

दुनियाभर में खाने-पीने की चीजों की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है। आने वाले समय में यह दबाव और बढ़ सकता है। S&P ग्लोबल की रिपोर्ट के अनुसार, खाद और डीजल की बढ़ती लागत के साथ अल नीनो की आशंका वर्ष 2027 में वैश्विक खाद्य बाजार के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। यदि प्रतिकूल मौसम के कारण प्रमुख कृषि उत्पादक देशों में फसलों को नुकसान पहुंचता है, तो अनाज की उपलब्धता प्रभावित होने के साथ खाद्य पदार्थों की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है।

इस संभावित संकट की एक बड़ी वजह खेती की बढ़ती लागत है। खाद के महंगे होने और डीजल की उपलब्धता में बाधा से किसानों के लिए फसल उत्पादन महंगा पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में कुछ किसान उर्वरकों का इस्तेमाल घटा सकते हैं या खेती का रकबा कम कर सकते हैं। इसका असर आने वाले महीनों में उत्पादन पर दिखाई दे सकता है। हालांकि, कीमतों में कितनी बढ़ोतरी होगी, यह मौसम, वैश्विक व्यापार और कृषि उत्पादन की वास्तविक स्थिति पर निर्भर करेगा।

सितंबर में 1.5 फीसदी बढ़ा वैश्विक खाद्य मूल्य सूचकांक

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के आंकड़े भी खाद्य बाजार में बढ़ते दबाव की ओर इशारा करते हैं। सितंबर 2026 में वैश्विक खाद्य मूल्य सूचकांक 1.5 फीसदी बढ़कर 136 अंक पर पहुंच गया। यह पिछले साल सितंबर की तुलना में 5.8 फीसदी अधिक रहा। खाद्य पदार्थों की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में इस बढ़ोतरी के पीछे अनाज, वनस्पति तेल और चीनी की कीमतों में तेजी प्रमुख कारण रहे।

गेहूं और मक्का की कीमतों ने बढ़ाई चिंता

वैश्विक बाजार में अनाज की कीमतों में तेजी खाद्य महंगाई की चिंता बढ़ा रही है। सितंबर में FAO का अनाज मूल्य सूचकांक पिछले महीने के मुकाबले 5.1 फीसदी बढ़ा। इसी दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं की कीमतों में 6.3 फीसदी और मक्का की कीमतों में 5.6 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। गेहूं की कीमतों पर उत्तरी अमेरिका के कुछ हिस्सों में बुवाई से पहले शुष्क मौसम और ब्लैक सी क्षेत्र में परिवहन संबंधी बाधाओं का असर पड़ा। वहीं, मक्का के बाजार में अमेरिका में संभावित कम पैदावार, ब्राजील से निर्यात के लिए सीमित उपलब्धता और व्यापारिक मार्गों में व्यवधान ने दबाव बढ़ाया। मक्का की मांग और आपूर्ति में बदलाव का असर खाद्य उद्योग के साथ पशु आहार की लागत पर भी पड़ सकता है।

चीनी और वनस्पति तेल भी हुए महंगे

सितंबर में खाद्य महंगाई केवल अनाज तक सीमित नहीं रही। FAO के अनुसार, वनस्पति तेल मूल्य सूचकांक में मासिक आधार पर 0.9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, जबकि चीनी मूल्य सूचकांक 6.1 फीसदी चढ़ गया। दक्षिण-पूर्व एशिया में मौसम संबंधी चिंताओं और मजबूत आयात मांग ने पाम ऑयल की कीमतों को सहारा दिया। दूसरी ओर, मांस मूल्य सूचकांक में 1.1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जबकि डेयरी सूचकांक लगभग स्थिर रहा। इससे स्पष्ट है कि सभी खाद्य श्रेणियों में कीमतों का रुख एक जैसा नहीं है।

अल नीनो से फसलों पर पड़ सकता है असर

S&P ग्लोबल की रिपोर्ट में संभावित रूप से शक्तिशाली अल नीनो को एक अतिरिक्त जोखिम बताया गया है। अल नीनो प्रशांत महासागर के समुद्री तापमान में बदलाव से जुड़ी जलवायु घटना है, जो दुनिया के विभिन्न हिस्सों में बारिश और तापमान के सामान्य पैटर्न को प्रभावित कर सकती है। इसके कारण कहीं सूखे की स्थिति बन सकती है, तो कहीं अत्यधिक बारिश और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। यदि वर्ष 2027 में प्रमुख कृषि उत्पादक क्षेत्रों में मौसम प्रतिकूल रहता है, तो गेहूं, मक्का और अन्य फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है। खासकर उन किसानों के लिए स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है, जो बढ़ती लागत के कारण पहले ही खाद का इस्तेमाल कम कर रहे हैं। हालांकि, अल नीनो का वास्तविक असर अलग-अलग देशों, फसलों और क्षेत्रों में अलग हो सकता है।

आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है असर

खाद, ईंधन और परिवहन की लागत बढ़ने का प्रभाव खेत से बाजार तक पहुंचने वाली पूरी आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ सकता है। यदि उत्पादन घटता है और परिवहन महंगा बना रहता है, तो खाद्य पदार्थों की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। इसका असर विशेष रूप से उन देशों में अधिक महसूस हो सकता है, जो खाद्य पदार्थों, उर्वरकों और ईंधन के आयात पर निर्भर हैं। फिलहाल वर्ष 2027 में खाद्य कीमतों में कितनी तेजी आएगी, इसका निश्चित अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी। लेकिन वैश्विक बाजार के मौजूदा रुझान संकेत दे रहे हैं कि मौसम, खेती की लागत और अंतरराष्ट्रीय व्यापार आने वाले समय में खाद्य महंगाई की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे।

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