नेपियर घास की खेती से पशुपालकों को मिलेगा सालभर हरा चारा, सरकार दे रही बीज

चारे की कमी दूर करने के लिए नेपियर घास की खेती को बढ़ावा, जानें किसानों को कैसे मिलेगा लाभ

उत्तर प्रदेश में पशुपालकों और किसानों के लिए सालभर हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पशुधन विभाग बड़े स्तर पर काम कर रहा है। राज्य सरकार की ओर से नेपियर घास, बरसीम और ज्वार चारा बीज का वितरण किया जा रहा है ताकि पशुओं को पौष्टिक चारा आसानी से मिल सके और पशुपालकों की लागत कम हो।

पशुधन, दुग्ध विकास एवं मत्स्य विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने बताया कि सरकार का लक्ष्य प्रदेश में हरे चारे का उत्पादन बढ़ाकर किसानों और पशुपालकों को राहत देना है। इसके साथ ही दूध उत्पादन बढ़ाने और पशुओं के पोषण स्तर में सुधार पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

नेपियर घास पर सबसे ज्यादा फोकस

पशुपालन विभाग इस समय प्रदेश में नेपियर घास की खेती को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दे रहा है। अधिकारियों के अनुसार नेपियर घास की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी कटाई सालभर में लगभग छह बार तक की जा सकती है। यही वजह है कि इसे पशुपालकों के लिए हरे चारे का बेहतर विकल्प माना जा रहा है। अपर मुख्य सचिव ने बताया कि प्रदेश के सभी 75 जिलों में हरा चारा उत्पादन बढ़ाने की दिशा में काम शुरू हो चुका है। इसके लिए विभाग करोड़ों रुपये खर्च कर रहा है। सरकार का मानना है कि यदि किसानों को पर्याप्त हरा चारा उपलब्ध होगा तो पशुपालन की लागत कम होगी और दूध उत्पादन में भी बढ़ोतरी होगी। 

किसानों को बांटे गए बीज और रूट स्लिप

पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. सुनील कुमार राय ने बताया कि अतिरिक्त चारा विकास कार्यक्रम के तहत किसानों और पशुपालकों को बरसीम तथा ज्वार चारा बीज वितरित किए गए हैं। इससे करीब 4,156 हेक्टेयर क्षेत्र में हरे चारे की खेती होने का अनुमान है। इस योजना पर विभाग ने लगभग 2 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। वहीं इस साल 230 हेक्टेयर क्षेत्र में नेपियर घास की खेती कराने का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत प्रदेश के 75 जिलों में करीब 60 लाख नेपियर रूट स्लिप वितरित की जा चुकी हैं। इस कार्य पर विभाग ने लगभग 64 लाख रुपये खर्च किए हैं। किसानों को प्रोत्साहन देने के लिए 4 हजार रुपये तक की सहायता भी दी जा रही है। 

गोचर भूमि पर भी होगा चारा उत्पादन

सरकार केवल किसानों के खेतों तक ही सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि गो आश्रय स्थलों और गोचर भूमि पर भी हरे चारे का उत्पादन बढ़ाने की योजना बना रही है। योजना के तहत 2,815 हेक्टेयर क्षेत्र में ज्वार, मक्का और बाजरा के बीज वितरित किए गए हैं। इन फसलों का उपयोग हरे चारे के रूप में किया जाएगा। इस योजना पर विभाग ने करीब 6.5 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। सरकार का उद्देश्य है कि प्रदेश की गोशालाओं और पशुपालकों को सालभर पर्याप्त मात्रा में हरा चारा मिल सके, जिससे पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार हो और दुग्ध उत्पादन में बढ़ोतरी हो। 

किसानों को दिया जा रहा है प्रशिक्षण

पशुधन विभाग का कहना है कि केवल बीज वितरण से ही लक्ष्य पूरा नहीं होगा, इसलिए किसानों को आधुनिक तरीके से चारा उत्पादन की ट्रेनिंग भी दी जा रही है। अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने बताया कि प्रत्येक जिले से दो अधिकारियों को भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान, झांसी में प्रशिक्षण दिलाया जा रहा है। इनमें एक अधिकारी कृषि विभाग और दूसरा पशुपालन विभाग से शामिल है। प्रशिक्षण के बाद यही अधिकारी मास्टर ट्रेनर के रूप में किसानों और पशुपालकों को चारा उत्पादन की तकनीक सिखाएंगे। इसके अलावा हर जिले से 15-15 किसानों और पशुपालकों को तकनीकी संस्थानों और विभागीय प्रक्षेत्रों का एक्सपोजर विजिट भी कराया जा रहा है। सरकार का मानना है कि इन प्रयासों से आने वाले समय में प्रदेश में हरे चारे की कमी काफी हद तक दूर हो सकेगी और इसका फायदा सीधे पशुपालकों को मिलेगा।

“नेपियर घास की खेती से पशुपालकों को मिलेगा सालभर हरा चारा, सरकार दे रही बीज” के संबंध में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल और उनके जवाब (FAQs): 

प्रश्न 1. नेपियर घास की खेती क्यों फायदेमंद मानी जाती है?

उत्तर: नेपियर घास तेजी से बढ़ने वाली हरे चारे की फसल है, जिसकी साल में कई बार कटाई की जा सकती है। इससे पशुओं को लगातार पौष्टिक चारा मिलता है और दूध उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलती है।

प्रश्न 2. सरकार किसानों को क्या सहायता दे रही है?

उत्तर: उत्तर प्रदेश सरकार किसानों और पशुपालकों को नेपियर रूट स्लिप, बरसीम और ज्वार चारा बीज वितरित कर रही है। साथ ही किसानों को प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है।

प्रश्न 3. नेपियर घास की कटाई साल में कितनी बार की जा सकती है?

उत्तर: नेपियर घास की कटाई सालभर में लगभग 6 बार तक की जा सकती है, इसलिए इसे हरे चारे का अच्छा विकल्प माना जाता है।

प्रश्न 4. नेपियर घास योजना का लाभ किन लोगों को मिलेगा?

उत्तर: इस योजना का लाभ किसानों, पशुपालकों, डेयरी संचालकों और गोशालाओं को मिलेगा, जिन्हें सालभर हरे चारे की आवश्यकता रहती है।

प्रश्न 5. किसानों को चारा उत्पादन की ट्रेनिंग कैसे दी जा रही है?

उत्तर: पशुपालन विभाग द्वारा प्रत्येक जिले में मास्टर ट्रेनर तैयार किए जा रहे हैं, जो किसानों और पशुपालकों को आधुनिक तरीके से हरा चारा उत्पादन की ट्रेनिंग देंगे।

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