गेहूं की एमएसपी पर खरीद के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू, यहां कराएं पंजीकरण
प्रकाशित - 13 Feb 2026
by Vivek Tailang
जानें कब से शुरू होगी गेहूं की एमएसपी पर खरीद और क्या मिलेगा रेट
रबी खरीद मौसम 2026-27 को लेकर सरकार ने गेहूं उत्पादक किसानों के लिए अहम जानकारी जारी की है। इस बार गेहूं की सरकारी खरीद अप्रैल 2026 से शुरू होने की संभावना है। सरकार चाहती है कि किसान अपनी उपज सही समय पर और तय न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर बेच सकें। इसके लिए गेहूं बेचने से पहले किसानों का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि खरीद प्रक्रिया पारदर्शी और आसान बनी रहे।
गेहूं बेचने के लिए पंजीकरण जरूरी
जो किसान एमएसपी पर गेहूं बेचना चाहते हैं, उन्हें कृषि विभाग के पोर्टल dbtagriculture.bihar.gov.in पर ऑनलाइन पंजीकरण करना होगा। यह प्रक्रिया 21 जनवरी 2026 से शुरू हो चुकी है। बिहार सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन किसानों ने पिछले साल इसी पोर्टल पर पंजीकरण कराया था, उन्हें दोबारा आवेदन करने की आवश्यकता नहीं है। उनका पंजीकरण इस वर्ष भी मान्य रहेगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि खरीद के समय किसी तरह की भीड़भाड़ या तकनीकी दिक्कत न हो और किसानों को समय पर भुगतान मिल सके।
जानकारी में बदलाव की सुविधा
अगर किसी किसान की जमीन, बैंक खाता या नामित सदस्य से जुड़ी जानकारी में बदलाव हुआ है, तो वह पोर्टल पर लॉग इन कर इसे अपडेट कर सकता है। इससे भुगतान में गड़बड़ी की संभावना कम होगी और रिकॉर्ड भी सही रहेगा। कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे खरीद से पहले अपनी जानकारी की जांच जरूर कर लें।
गेहूं का एमएसपी बढ़ा
किसानों को राहत देते हुए सरकार ने रबी विपणन मौसम 2026-27 के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। यह पिछले वर्ष की तुलना में 160 रुपये अधिक है। बढ़े हुए रेट से किसानों को उनकी मेहनत का बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर खरीद और बढ़े हुए एमएसपी से किसानों की आय में सुधार होगा और बाजार में अनावश्यक दबाव भी कम पड़ेगा।
48 घंटे में मिलेगा भुगतान
सरकार ने यह भी भरोसा दिलाया है कि गेहूं बेचने के बाद किसानों को 48 घंटे के भीतर उनके बैंक खाते में पैसा ट्रांसफर कर दिया जाएगा। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) प्रणाली के माध्यम से भुगतान होने से बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी और किसान को सीधे लाभ मिलेगा।
कहां बेच सकते हैं गेहूं
किसान अपनी सुविधा के अनुसार पंचायत स्तर पर स्थित पैक्स (PACS) या प्रखंड स्तर के व्यापार मंडल में जाकर गेहूं बेच सकते हैं। सरकार ने कोशिश की है कि खरीद केंद्र किसानों के नजदीक हों, ताकि उन्हें ज्यादा दूरी तय न करनी पड़े।
धान खरीद में आई समस्या पर उठे सवाल
इस बीच बिहार में धान खरीद के दौरान आई समस्याओं को लेकर भी चिंता जताई गई है। नेता उपेंद्र कुशवाहा ने पत्र लिखकर कहा है कि कई खरीद केंद्रों पर फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (FRK) की पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो रही है। एफआरके विशेष प्रकार के चावल के दाने होते हैं, जिनमें आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन बी-12 जैसे पोषक तत्व मिलाए जाते हैं। एफआरके की कमी के कारण धान की तौल और खरीद प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। कई किसानों को खरीद केंद्रों पर लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा है।
समाधान की मांग
उपेंद्र कुशवाहा ने सरकार से आग्रह किया है कि एफआरके की आपूर्ति जल्द से जल्द सुनिश्चित की जाए। साथ ही धान खरीद की समय सीमा बढ़ाने और प्रभावित किसानों को आर्थिक सहायता देने की भी मांग की गई है। इधर सरकार का कहना है कि गेहूं खरीद को लेकर सभी तैयारियां की जा रही हैं, ताकि किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो। पंजीकरण की व्यवस्था, बढ़ा हुआ एमएसपी और 48 घंटे में भुगतान जैसी सुविधाएं किसानों के हित को ध्यान में रखकर ही लागू की गई हैं। कुल मिलाकर, गेहूं की एमएसपी पर खरीद के लिए पंजीकरण शुरू होने से किसानों को समय रहते तैयारी करने का मौका मिला है। यदि किसान निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हैं, तो वे आसानी से अपनी फसल सरकारी दर पर बेच सकेंगे और तय रेट का पूरा लाभ उठा पाएंगे।
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