चक्रवात अर्नब से फसल नुकसान पर मिलेगा मुआवजा, सरकार ने शुरू कराई सर्वे की तैयारी

Share Product प्रकाशित - 01 Nov 2026 by Vivek Tailang

चक्रवात अर्नब से फसल नुकसान पर मिलेगा मुआवजा, सरकार ने शुरू कराई सर्वे की तैयारी

किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत कैसे दें फसल नुकसान की सूचना? जानें सर्वे, क्लेम और मुआवजे से जुड़ी जरूरी जानकारी

छत्तीसगढ़ में चक्रवात ‘अर्नब’ के प्रभाव से हुई बेमौसम बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाया है। कई जिलों में खेतों में खड़ी फसलें प्रभावित हुई हैं, जबकि कटाई के बाद खेतों में सुखाने के लिए रखी गई उपज भी बारिश की चपेट में आई है। प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए राज्य सरकार ने फसल नुकसान का सर्वे जल्द पूरा कराने और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत पात्र किसानों को बीमा क्लेम का भुगतान सुनिश्चित करने की तैयारी शुरू कर दी है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर कृषि विभाग ने सभी जिला कलेक्टरों, उप संचालक कृषि और संबंधित बीमा कंपनियों को निर्धारित समय-सीमा में सर्वे पूरा करने के निर्देश दिए हैं। कृषि विभाग के अनुसार, अब तक फसल नुकसान की कुल 59,666 सूचनाएं प्राप्त हुई हैं। इनमें से 88 मामलों का सर्वे पूरा हो चुका है, जबकि बाकी मामलों में आकलन की प्रक्रिया जारी है।

नुकसान की सूचना के बाद शुरू होगी क्लेम की प्रक्रिया

सरकार ने प्रभावित किसानों के बीमा दावों का जल्द निपटारा करने के लिए सर्वे और भुगतान की समय-सीमा निर्धारित की है। इसके तहत किसान को फसल क्षति होने के 72 घंटे के भीतर सूचना दर्ज करानी होगी। सूचना मिलने के बाद बीमा कंपनी को 48 घंटे के अंदर सर्वेयर नियुक्त करना होगा। इसके बाद सर्वेयर को 10 दिनों के भीतर फसल नुकसान का आकलन पूरा करना है। सर्वे के बाद पात्र किसानों को 15 दिनों के भीतर बीमा क्लेम की राशि सीधे उनके बैंक खाते में जमा करने का प्रावधान है। हालांकि, भुगतान बीमा कवरेज, सर्वे रिपोर्ट और योजना की लागू शर्तों के आधार पर किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ में 11 फसलों को मिला है बीमा कवरेज

कृषि विभाग के अनुसार, प्रदेश में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत धान सिंचित, धान असिंचित, मक्का, सोयाबीन, मूंगफली, अरहर, मूंग, उड़द, कोदो, कुटकी और रागी सहित कुल 11 फसल श्रेणियां अधिसूचित हैं। प्रदेश में करीब 21,26,576 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की फसल का बीमा किया गया है। असामयिक बारिश से उत्पादन प्रभावित होने की स्थिति में फसल कटाई प्रयोगों के आधार पर भी बीमा दावा भुगतान का प्रावधान है। इसके लिए कृषि विभाग आवश्यक फसल कटाई प्रयोग करा रहा है।

कटाई के बाद खेत में रखी उपज को भी मिल सकती है सुरक्षा

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत कुछ परिस्थितियों में कटाई के बाद होने वाले नुकसान पर भी बीमा सुरक्षा मिल सकती है। यदि किसान फसल काटकर उसे खेत में सुखाने के लिए रखता है और इस दौरान चक्रवात, चक्रवाती बारिश या बेमौसम बारिश से उपज खराब हो जाती है, तो वह बीमा दावे के लिए पात्र हो सकता है। इस प्रावधान के तहत फसल कटाई के बाद अधिकतम 14 दिनों की अवधि में हुए नुकसान को योजना की शर्तों के अनुसार कवर किया जा सकता है। खेत में कटाई के बाद सुखाने के लिए रखी गई फसल को स्थानीय भाषा में ‘करपा’ भी कहा जाता है। किसानों को यह ध्यान रखना चाहिए कि कटाई के बाद नुकसान के लिए 14 दिनों का कवरेज और फसल क्षति की सूचना दर्ज कराने की 72 घंटे की समय-सीमा अलग-अलग हैं। इसलिए नुकसान होने पर देरी किए बिना सूचना देना जरूरी है।

14447 नंबर पर कॉल करके दर्ज कराएं शिकायत

जिन किसानों की फसल बारिश या तेज हवाओं से प्रभावित हुई है, वे नुकसान होने के 72 घंटे के भीतर कृषि रक्षक हेल्पलाइन के टोल-फ्री नंबर 14447 पर सूचना दर्ज करा सकते हैं। शिकायत दर्ज कराने से पहले किसान अपना नाम, मोबाइल नंबर, गांव, तहसील और जिले का विवरण, बीमित फसल का नाम और नुकसान की तारीख तैयार रखें। उपलब्ध होने पर खसरा नंबर और बीमा पॉलिसी या आवेदन से जुड़ी जानकारी भी साथ रखें। नुकसान की फोटो और वीडियो सुरक्षित रखना तथा शिकायत दर्ज होने के बाद मिलने वाला संदर्भ नंबर संभालकर रखना उपयोगी हो सकता है। इसके अलावा किसान सहायता के लिए अपने क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, उप संचालक कृषि या संबंधित बैंक शाखा से संपर्क कर सकते हैं।

अधिकारियों और बीमा कंपनियों को दिए गए हैं निर्देश

छत्तीसगढ़ राज्य शासन ने जिला प्रशासन, कृषि विभाग और बीमा कंपनियों को आपसी समन्वय से सर्वे का काम तेजी से पूरा करने को कहा है। कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी के मार्गदर्शन में विभाग इस प्रक्रिया की निगरानी कर रहा है। सरकार का उद्देश्य प्रभावित किसानों के पात्र बीमा दावों का समय पर निपटारा कर उन्हें आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। ऐसे में जिन किसानों की फसल को नुकसान पहुंचा है, उन्हें सलाह है कि वे सर्वे का इंतजार किए बिना निर्धारित 72 घंटे की अवधि में अपनी शिकायत जरूर दर्ज कराएं।

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