शरदकालीन गन्ने की खेती : गन्ने की ये किस्में देंगी अधिक पैदावार, रोगों से भी होगा बचाव
प्रकाशित - 12 Oct 2025 by Vivek Tailang
जानें, गन्ने की कौनसी हैं ये अधिक उपज देने वाली रोगप्रतिरोधक किस्में और इनकी पैदावार क्षमता
देश के कई राज्यों में गन्ने की खेती होती है। गन्ना भारत की प्रमुख नकदी फसलों में से एक है। यदि किसान इसकी खेती सही समय, उपयुक्त किस्म और वैज्ञानिक तरीके करें तो इससे काफी अच्छा लाभ प्राप्त किया जा सकता है। खासकर शरदकालीन गन्ना जो अक्टूबर महीने में बोया जाता है, वह अधिक पैदावार, बेहतर क्वालिटी और अधिक शर्करा प्रतिशत के लिए जाना जाता है।
आइए जानते हैं इस मौसम में कौन-कौन सी गन्ने की किस्में सर्वश्रेष्ठ हैं, उनकी पैदावार क्षमता क्या है और खेती के प्रमुख वैज्ञानिक तरीके कौन से हैं।
सही गन्ना बीज का कैसे करें चयन
शरदकालीन गन्ने की बुआई के लिए 9-10 महीने पुराना, मोटा, ठोस और रोग-मुक्त गन्ना बीज के रूप में चुनें। बीज में आंख (बड) पूर्ण विकसित और जीवित होनी चाहिए। बुआई के लिए अक्टूबर का पहला पखवाड़ा सबसे अच्छा समय है। बीज अपने खेत से या नजदीकी प्रमाणित स्रोत से ही लें ताकि शुद्धता और उत्पादकता बनी रहे।
शरदकालीन गन्ने की खेती के लिए कौनसी किस्में हैं बेहतर
शरदकालीन गन्ने की खेती के लिए किसान जल्दी पकने वाली या मध्यम से देरी से पकने वाली किस्मों का चयन अपनी आवश्यकतानुसार कर सकते हैं, किसानों की सुविधा के लिए यहां दोनों तरह की किस्मों की जानकारी दी जा रही है, जो इस प्रकार से हैं:
गन्ने की जल्दी पकने वाली किस्में (Early Maturing Varieties of Sugarcane)
इन किस्मों की खासियत यह है कि ये 10-11 महीनों में तैयार हो जाती हैं और चीनी कारखानों के शुरुआती crushing season के लिए उपयुक्त रहती हैं :
- CoLk 14201 : यह किस्म लाल सड़न और ऊखमुड़िया रोग से प्रतिरोधी है। पैदावार लगभग 850-950 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक मिल सकती है।
- Co 16034 : शर्करा प्रतिशत 18-19% तक और औसत उत्पादन 900 क्विंटल/हेक्टेयर। यह किस्म सूखे हालात में भी बेहतर प्रदर्शन करती है।
- Co 17018 : पीलापन और कीट रोगों से प्रतिरोधक, रस की गुणवत्ता अत्यधिक। उपज क्षमता 950 क्विंटल/हेक्टेयर तक।
- Co 15023 : तेज वृद्धि, मोटे डंठल, और लाल सड़न रोग से बचाव। औसत उत्पादन 880 क्विंटल/हेक्टेयर।
गन्ने की मध्यम से देर पकने वाली किस्में (Mid to Late Maturing Varieties of Sugarcane)
ये किस्में अधिक शर्करा वाली होती हैं और लंबे समय तक खेत में रखने पर भी नहीं गिरती है।
- CoS 767 : यह किस्म रेड रॉट और स्मट रोग से बचाव में सक्षम है। औसत उपज 950-1000 क्विंटल/हेक्टेयर तक।
- CoS 8432 : गर्मी और सूखे में सहनशील, रस में 19% तक चीनी। औसत उत्पादन 1000 क्विंटल/हेक्टेयर।
- CoS 88216 : मोटा डंठल और अधिक रस वाली किस्म। रोगों से बचाव और 1050 क्विंटल/हेक्टेयर तक पैदावार।
- CoS 97264 : सफेद सड़न और दीमक से प्रतिरोधक। यह किस्म लंबी फसल अवधि में भी स्थिर रहती है, उपज 950 क्विंटल/हेक्टेयर।
- CoS 96275 : रोगों से बेहद मजबूत और उच्च चीनी प्रतिशत। उत्पादन 900-1000 क्विंटल/हेक्टेयर।
- Pant 84212 : यह किस्म उत्तर भारत में बेहद लोकप्रिय है। ठंड सहनशीलता के साथ 18.5% चीनी सामग्री और 1050 क्विंटल/हेक्टेयर तक उत्पादन देती है।
क्या है गन्ने की बुआई का सही तरीका
- गन्ने की बुवाई करते समय पंक्तियों के बीच दूरी 75 सेमी रखनी चाहिए।
- यदि मिश्रित फसल (आलू, सरसों, चना) लगानी हो तो दूरी 90 सेमी करें।
कितनी रखें बीज की मात्रा
- एक आंख वाले टुकड़ों के लिए – 10 क्विंटल प्रति एकड़
- दो आंख वाले टुकड़ों के लिए – 20 क्विंटल प्रति एकड़
कैसे करें बीजों का उपचार
रासायनिक उपचार: 205 ग्राम एरीटॉन या 500 ग्राम एगलॉल को 100 लीटर पानी में मिलाएं और उसमें 25 क्विंटल बीज डुबाएं।
जैविक उपचार: 1 लीटर एजोटोबैक्टर + 1 लीटर पी.एस.बी. को 100 लीटर पानी में मिलाकर 30 मिनट तक बीज डुबाएं।
उपचार के बाद बीज सुखाकर ही बुआई करें।
गन्ने की खेती में कितनी डाले खाद व उर्वरक
यदि मिट्टी की जांच नहीं हुई है, तो निम्न मात्रा में उर्वरक प्रति हेक्टेयर के हिसाब से डाली जा सकती है।
- नाइट्रोजन – 60-75 कि.ग्रा.
- फॉस्फोरस – 60-80 कि.ग्रा.
- पोटाश – 20-40 कि.ग्रा.
- जिंक सल्फेट – 25 कि.ग्रा.
- खेत तैयार करते समय 10 टन प्रति हेक्टेयर प्रेसमड या गोबर की सड़ी खाद डालें। इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और गन्ने की जड़ें मजबूत होती हैं।
कैसे करें कीट एवं रोगों का प्रबंधन
दीमक और अंकुर बेधक की रोकथाम के लिए क्लोरोपाइरीफॉस (20 ईसी) – 6.25 लीटर/हेक्टेयर और क्लोरेन्ट्रेनिलिप्रोल (18.5 एससी) – 500-600 मि.ली./हेक्टेयर इन दोनों को 1500-1600 लीटर पानी में घोलकर छिड़कें। समय-समय पर खेत की निगरानी करें और खरपतवार नियंत्रण के लिए प्रारंभिक अवस्था में ही निराई-गुड़ाई करें।
उन्नत बीज से रोगों का कम खतरा, शर्करा प्रतिशत भी मिलता है अधिक
शरदकालीन गन्ने की खेती में अगर किसान बीज चयन, उर्वरक प्रबंधन और कीट नियंत्रण पर ध्यान दें, तो उन्हें 1000-1100 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक की उपज मिल सकती है। इन उन्नत किस्मों से रोगों का खतरा कम होता है और शर्करा प्रतिशत अधिक मिलता है, जिससे किसानों को अधिक लाभ प्राप्त होता है।
ट्रैक्टर जंक्शन हमेशा आपको अपडेट रखता है। इसके लिए ट्रैक्टरों के नये मॉडलों और उनके कृषि उपयोग के बारे में एग्रीकल्चर खबरें प्रकाशित की जाती हैं। प्रमुख ट्रैक्टर कंपनियों वीएसटी ट्रैक्टर, महिंद्रा ट्रैक्टर आदि की मासिक सेल्स रिपोर्ट भी हम प्रकाशित करते हैं जिसमें ट्रैक्टरों की थोक व खुदरा बिक्री की विस्तृत जानकारी दी जाती है। अगर आप मासिक सदस्यता प्राप्त करना चाहते हैं तो हमसे संपर्क करें।
अगर आप नए ट्रैक्टर, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण बेचने या खरीदने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार और विक्रेता आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु को ट्रैक्टर जंक्शन के साथ शेयर करें।
सर्टिफाइड पुराने ट्रैक्टर्स
ट्रैक्टर की प्राइस चेक करें