गन्ने में तेजी से फैल रहा जड़ सड़न रोग, फसल बचाने के लिए किसान तुरंत करें ये उपाय
प्रकाशित - 28 Aug 2025
by Tractor Junction
जानिए क्या है यह रोग, कैसे करता है फसल को नुकसान और किन तरीकों से करें प्रभावी बचाव
इस समय देश के कई हिस्सों में मानसून फिर से सक्रिय होने से बारिश का दौर शुरू हो गया है। विशेष रूप से यूपी के कई जिलों में हुई भारी बारिश से किसानों की फसलों को नुकसान पहुंच रहा है। इन दिनों बारिश से सबसे अधिक नुकसान गन्ने की फसल में देखने को मिल रहा है जिसने गन्ना किसानों की परेशानी को बढ़ा दिया है। गन्ने के खेत में जलभराव की स्थिति से गन्ने में जड़ सड़न रोग और कीटों का प्रकोप हो रहा है। इसे देखते हुए गन्ना विकास विभाग ने किसानों को राहत देने के लिए फील्ड में कार्यकर्ताओं की तैनाती के साथ ही ड्रोन द्वारा छिड़काव व कीटनाशक नियंत्रण का काम तेजी से शुरू कर दिया है ताकि गन्ने की फसल को नुकसान से बचाया जा सके।
क्या है जड़ सड़न रोग और इससे कैसे होता है फसल को नुकसान
जड़ सड़न रोग (Root Rot Disease) गन्ने की फसल में अत्यधिक पानी और खराब जल निकासी के कारण होता है। जब खेतों में लंबे समय तक जलभराव रहता है, तो गन्ने की जड़ें सड़ने लगती हैं। इससे पौधों की पोषण लेने की क्षमता घट जाती है, और धीरे-धीरे पौधे पीले पड़कर सूखने लगते हैं। पूर्व कृषि निदेशक डॉ. जितेंद्र कुमार तोमर के अनुसार, जुलाई, अगस्त और सितंबर के महीने गन्ने की वृद्धि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। लेकिन इस बार मानसून की तीव्रता के कारण खेतों में पानी भर गया है, जिससे गन्ना फसल में कीट व बीमारियों के फैलने का खतरा कई गुना बढ़ गया है।
गन्ना विभाग ने तेज की निगरानी, ड्रोन से छिड़काव जारी
गन्ना विकास विभाग, उत्तर प्रदेश ने सभी उप गन्ना आयुक्तों, जिला गन्ना अधिकारियों और चीनी मिलों के प्रबंधकों को निर्देश दिए हैं कि वे प्रभावित क्षेत्रों में प्रतिदिन फील्ड भ्रमण करें और किसानों को बचाव के उपायों की जानकारी दें। साथ ही ड्रोन तकनीक के जरिए कीटनाशकों का छिड़काव कराया जा रहा है। अब तक 329 ड्रोन के माध्यम से 24,218 हेक्टेयर गन्ना क्षेत्र में आवश्यक दवाओं का छिड़काव किया जा चुका है। इससे फसल को सफेद मक्खी, पोक्का बोइंग, जड़ बेधक, चोटी बेधक, रेड रॉट जैसे रोगों से बचाव में सहायता मिल रही है।
किसान कैसे करें जड़ सड़न रोग व कीट का नियंत्रण
गन्ना विकास विभाग ने किसानों को यह सलाह दी है कि वे जलभराव से जल्द छुटकारा पाने के लिए खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था करें। साथ ही फसल में कीट व रोग नियंत्रण के लिए वैज्ञानिकों द्वारा अनुमोदित कीटनाशकों और दवाओं का समय से छिड़काव करें। इसके अलावा इस रोग के प्रभावी उपाय के तौर पर 2 ग्राम थायोफेनेट मिथाइल 70 WP या कार्बेन्डाजिम 50 WP को प्रति लीटर पानी में घोलकर जड़ों के पास ट्रेंचिंग करें। वहीं किसान NPK 19:19:19 उर्वरक का 5 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से 1000 लीटर पानी में घोल बनाकर फोलियर छिड़काव भी कर सकते हैं। इसके अलावा, चीनी मिलें भी किसानों को लाइट ट्रैप मशीनें उपलब्ध करा रही हैं, जिससे हानिकारक कीटों की निगरानी और नियंत्रण संभव हो सके।
विभाग ने किसानों की सहायता के लिए जारी किया हेल्पलाइन नंबर
गन्ना किसानों को यदि किसी भी प्रकार की समस्या या सुझाव हो, तो वे गन्ना विकास विभाग की टोल फ्री हेल्पलाइन 18001213203 पर संपर्क कर सकते हैं। इस पर कीट नियंत्रण, रोग निदान, और जंगली जानवरों से सुरक्षा से संबंधित जानकारी साझा की जा सकती है। बता दें कि इस समय गन्ना किसानों के लिए जड़ सड़न रोग एक गंभीर समस्या बन चुकी है, लेकिन सही समय पर पानी की निकासी, उचित दवा छिड़काव और विभागीय सहयोग से फसल को बचाया जा सकता है। उत्तर प्रदेश सरकार व गन्ना विकास विभाग किसानों के साथ मिलकर कार्य कर रहा है, और आधुनिक उपायों से रोग नियंत्रण के प्रयास जारी हैं। किसान भाइयों से अपील है कि वे तुरंत खेत की स्थिति की समीक्षा करें और ऊपर दिए गए उपायों को अपनाकर अपनी गन्ना फसल को सुरक्षित करें।
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