गन्ने की अधिक पैदावार देने वाली तीन किस्में जारी, किसानों को होगा लाभ
प्रकाशित - 14 Feb 2025
by Tractor Junction
जानें, कौनसी है किस्में और इससे कितना मिल सकता है उत्पादन
Three New varieties of sugarcane released : किसानों को अधिक उत्पादन प्राप्त हो ताकि उनकी आय में इजाफा हो सके, इस उद्देश्य से कृषि वैज्ञानिकों द्वारा नई-नई किस्में विकसित की जाती है। इसी कड़ी में उत्तरप्रदेश के गन्ना एवं चीनी आयुक्त की ओर से हाल ही में “बीज गन्ना एवं गन्ना किस्म स्वीकृति उप समिति” की बैठक में गन्ने की तीन नई किस्मों को जारी किया गया है। बैठक में गन्ना किस्म को.से. 17451, को. शा 19231 और को लख. 16470 को जारी किया गया है। बैठक में इन नई गन्ना किस्मों की पैदावार और इसमें शर्करा की मात्रा के आंकड़े भी दिए गए हैं। बताया जा रहा है कि ये किस्में गन्ने की खेती (Sugarcane cultivation) करने वाले किसानों को बेहतर परिणाम दे सकती है और गन्ने के उत्पादन को बढ़ा सकती है।
गन्ने की को.शा. 19231 किस्म से कितना मिल सकता है उत्पादन
गन्ने की नई किस्म को.शा. 19231 पूर्व में प्रचलित गन्ना किस्म को.से. 95422 के पॉलीक्रॉस द्वारा शाहजहांपुर संस्थान पर विकसित की गई है। आंकड़ों के अनुसार इसकी औसत उपज 92.05 टन प्रति हैक्टेयर पाई गई है। जनवरी महीने में इसके रस में शर्करा 17.85 प्रतिशत और गन्ने में शर्करा 13.20 प्रतिशत पाई गई है। यदि उत्पादन की बात करें तो इस किस्म से प्रति हैक्टेयर चीनी का अनुमानित उत्पादन 12.23 टन दर्ज किया गया है। को.शा. 19231 गन्ना किस्म को काकोरी कांड के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में शहीद राजेंद्र नाथ लाहिड़ी के नाम पर “लाहिड़ी” नाम दिया गया है। गन्ने की इस किस्म को संपूर्ण उत्तर प्रदेश में अगेती खेती के लिए उपयुक्त पाया गया है।
गन्ने की को.से. 17451 किस्म से कितनी मिल सकती है पैदावार
गन्ने की को.से. 17451 किस्म पुरानी गन्ने की किस्म बि.उ. 120 जी.सी. द्वारा सेवरही संस्थान पर विकसित की गई है। आंकड़ों के मुताबिक पौधा गन्ना की औसत उपज 87.96 टन प्रति हैक्टेयर है। इस किस्म से जनवरी महीने में रस में शर्करा की मात्रा 16.63 प्रतिशत और गन्ने में शर्करा 12.82 प्रतिशत पाई गई है। वहीं नवंबर व जनवरी महीने में क्रमश: 17.82 एवं 13.73 प्रतिशत शर्करा पाई गई है। इस किस्म से प्रति हैक्टयर चीनी का अनुमानित उत्पादन 10.81 टन दर्ज किया गया है। गन्ना किस्म 17451 को विकसित करने वाले वैज्ञानिक डाॅ. कृष्णानंद के सड़क दुर्घटना में असामयिक निधन के कारण उनके नाम पर इस किस्म को “कृष्णा” नाम दिया गया है। गन्ने की इस किस्म को पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए अनुशंसित किया गया है।
गन्ने की को. लख. 16470 किस्म से कितना मिल सकता है उत्पादन
भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ की ओर से विकसित और भारत सरकार द्वारा नोटिफाइड गन्ना किस्म को. लख. 16470 मध्य देर से पकने वाली गन्ना किस्म है। इसकी औसत उपज 82.50 टन प्रति हैक्टेयर है और 12 माह पर रस में शर्करा 17.37 प्रतिशत पाई गई है। वहीं गन्ने में शर्करा 13.20 प्रतिशत है। यह किस्म मध्य–देर से बुवाई के लिए उपयुक्त पाई गई है। गन्ने की इस किस्म को पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए जारी किया गया है।
गन्ना किस्म 0238 से बेहतर हैं को.से. 17451 और को. लख. 16470 किस्म
गन्ने की किस्म को.से. 17451 और को. लख. 16470 किस्म को गन्ने की 0238 किस्म से बेहतर पाया गया है। इन दोनों अगेती गन्ना किस्मों का गन्ना मध्यम मोटा, ठोस, पोरी लंबी होती है। को.शा. 19231 में गूदे के मध्य बारीक छिद्र और अगोला पर हल्के रोयें पाए जाते हैं। यह लाल सड़न रोग से प्रति मध्यम रोग प्रतिरोधी किस्म है। परीक्षण आंकड़ों के अनुसार बहुप्रचलित गन्ना किस्म को. 0238 की औसत उपज 82.97 टन प्रति हैक्टेयर पाई गई तथा नवंबर, जनवरी एवं मार्च में रस शर्करा 16.01, 17.88 और 19.19 प्रतिशत तथा माह नवंबर, जनवरी व मार्च में शर्करा क्रमश: 11.69, 13.09 व 14.21 प्रतिशत पाई गई है। वहीं प्रति हैक्टेयर चीनी का अनुमानित उत्पादन 10.89 टन है। दोनों नई अगेती किस्मों को.शा. 19231 एवं को.से. 17451 को गन्ने की 0238 व को.लख. 94184 से उपज एवं चीनी आंकड़ों में बेहतर पाया गया है।
इन किस्मों को अवमुक्त व विलोपित किया
गन्ना शोध परिषद की ओर से को.से. को पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए अवमुक्त किए जाने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा पहले स्वीकृत की गई गन्ना किस्मों को. 12029, को.शा. 99259 और को.शा. 96268 को नगण्य क्षेत्रफल एवं अलोकप्रिय होने के कारण स्वीकृत गन्ना किस्मों की सूची से विलोपित कर दिया गया है।
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