मानसून 2026: बारिश की रफ्तार पर ब्रेक, मौसम विभाग ने बताए 5 अहम कारण
प्रकाशित - 20 Jun 2026
by Vivek Tailang
देश के कई हिस्सों में कमजोर पड़ा मानसून, खरीफ फसलों की बुवाई पर असर की आशंका
देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 की रफ्तार फिलहाल कई क्षेत्रों में सुस्त पड़ गई है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। खासकर कोंकण और मध्य महाराष्ट्र जैसे इलाकों में मानसून कई दिनों से ठहरा हुआ है। खरीफ फसलों की बुवाई के लिए बारिश का इंतजार कर रहे किसानों के बीच सवाल उठ रहा है कि आखिर इस बार मानसून की रफ्तार पर ब्रेक क्यों लग गया है। इसी पर भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने पांच प्रमुख कारण बताए हैं, जिनकी वजह से इस बार बारिश की गतिविधियां कमजोर पड़ रही हैं।
1. अरब सागर से मजबूत हवाओं का अभाव और अल-नीनो का असर
मौसम विभाग (IMD) के अनुसार इस समय अरब सागर से आने वाली मानसूनी हवाओं में वह ताकत नहीं दिख रही है, जो सामान्य तौर पर भारी बारिश और नमी लाने के लिए जरूरी होती है। मजबूत सर्ज न होने से मानसून आगे नहीं बढ़ पा रहा है। इसका एक बड़ा कारण प्रशांत महासागर में विकसित हो रहा अल नीनो प्रभाव भी माना जा रहा है, जो सामान्य से कम वर्षा की स्थिति पैदा करता है।
2. कमजोर दक्षिण-पश्चिमी हवाएं और सूखी हवाओं का प्रवेश
अरब सागर के ऊपर निचले स्तर की दक्षिण-पश्चिमी हवाएं कमजोर हो गई हैं, जिससे महाराष्ट्र के तटीय और आंतरिक इलाकों तक नमी नहीं पहुंच पा रही है। इसके साथ ही उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत से आने वाली सूखी हवाएं (ड्राई वेस्टर्ली विंड्स) मानसून क्षेत्र में घुस रही हैं, जिससे बादलों का निर्माण बाधित हो रहा है। वहीं पश्चिमी विक्षोभ की बार-बार सक्रियता भी मानसून पैटर्न को प्रभावित कर रही है।
3. मौसम प्रणालियों की कमी
अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में इस समय कम दबाव के क्षेत्र या चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) का अभाव है। इसके अलावा पश्चिमी तट पर बनने वाली ऑफशोर ट्रफ भी कमजोर है, जो मानसून को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है। इन प्रणालियों की कमी से बारिश की गतिविधियां सीमित हो गई हैं।
4. क्रॉस-इक्वेटोरियल फ्लो का कमजोर होना
पश्चिमी हिंद महासागर और अरब सागर में भूमध्य रेखा को पार करने वाली हवाएं, जिन्हें क्रॉस-इक्वेटोरियल फ्लो कहा जाता है, इस बार कमजोर पड़ गई हैं। ये हवाएं मानसून के लिए नमी का मुख्य स्रोत होती हैं। इनके कमजोर होने से मानसूनी गतिविधियां धीमी हो गई हैं।
5. मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO) की कमजोर स्थिति
मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO) एक महत्वपूर्ण मौसमीय प्रणाली है, जो 30 से 60 दिनों के चक्र में बादल और बारिश को प्रभावित करती है। इस बार MJO कमजोर स्थिति में है और हिंद महासागर से दूर बना हुआ है, जिससे दक्षिण भारत और आसपास के क्षेत्रों में बादलों का निर्माण कम हो रहा है और बारिश प्रभावित हो रही है।
देश में मौसम का मिला-जुला असर
इस समय देश में मौसम के दो विपरीत रंग देखने को मिल रहे हैं। एक ओर पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के कई हिस्सों में लू और गर्मी का असर बना हुआ है, जबकि दूसरी ओर पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 21 जून तक अत्यधिक भारी बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार 23 जून के आसपास महाराष्ट्र, ओडिशा, झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के कुछ हिस्सों में मानसून के आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन सकती हैं, जिससे मध्य और पूर्वी भारत में बारिश की गतिविधियां तेज होने की उम्मीद है।
20 से 24 जून तक का मौसम पूर्वानुमान
20 जून को देशभर में मौसम का मिश्रित प्रभाव देखने को मिलेगा। उत्तर-पश्चिम भारत के जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में गरज-चमक के साथ बारिश जारी रहने की संभावना है।
- राजस्थान के कुछ इलाकों में धूलभरी आंधी और तेज हवाएं चल सकती हैं।
- बीकानेर, जयपुर, भरतपुर संभाग के कुछ भागों में 21 से 24 जून को भी मेघगर्जन के साथ कहीं-कहीं आंधी बारिश की गतिविधियां जारी रहने की संभावना है।
- दक्षिणी राजस्थान के कुछ भागों में आगामी दिनों में बारिश की गतिविधियों में कमी रहने की संभावना है।
- पूर्वी भारत में पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार और झारखंड में बारिश की गतिविधियां सक्रिय रहेंगी।
- मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ में हल्की से मध्यम बारिश के आसार हैं।
- छत्तीसगढ़ के कई जिलों में अगले दो दिनों तक गरज-चमक के साथ वज्रपात हो सकता है।
- पश्चिम भारत के गुजरात, गोवा, कोंकण और मध्य महाराष्ट्र में भी हल्की बारिश का दौर जारी रह सकता है।
- दक्षिण भारत में केरल, कर्नाटक, तेलंगाना और तमिलनाडु के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना है।
- पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में 22 से 24 जून तक लू की स्थिति बनी रह सकती है।
दिल्ली-एनसीआर का मौसम
दिल्ली-एनसीआर में 20 जून को आंशिक बादल छाए रह सकते हैं। दोपहर या शाम के समय हल्की बारिश और तेज हवाओं (40–50 किमी/घंटा) की संभावना है, जबकि झोंके 60 किमी/घंटा तक पहुंच सकते हैं। अधिकतम तापमान 37 से 39 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 24 से 26 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।
किसानों के लिए सलाह
मौसम विभाग और कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि जहां तेज बारिश या आंधी का अलर्ट है, वहां कटी हुई फसल को सुरक्षित स्थान पर रखें और तिरपाल से ढक दें। खेतों में जलनिकासी की व्यवस्था बनाए रखें। हीटवेव वाले क्षेत्रों में हल्की सिंचाई और मल्चिंग का उपयोग करें। पशुओं को छायादार स्थान पर रखें और पर्याप्त पानी उपलब्ध कराएं, ताकि मौसम की अनिश्चितता से नुकसान कम किया जा सके। इस तरह, कमजोर मानसून और बदलते मौसम के बीच किसानों को सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि आने वाले दिनों में मौसम में तेजी से बदलाव देखने को मिल सकता है।
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