देश के कई राज्यों में फिर सक्रिय हुआ मानसून, भारी बारिश का अलर्ट
प्रकाशित - 29 Aug 2026 by Vivek Tailang
29 अगस्त से कई राज्यों में बारिश का दौर तेज होने की संभावना, किसानों को जलभराव से बचाव की सलाह
देश के कई हिस्सों में मानसून एक बार फिर सक्रिय होता नजर आ रहा है। मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार 29 अगस्त से सितंबर के शुरुआती दिनों तक उत्तर भारत से लेकर मध्य, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में बारिश का दौर जारी रह सकता है। इस दौरान कुछ राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। उत्तराखंड, पूर्वी मध्य प्रदेश, ओडिशा, असम-मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में मौसम का असर ज्यादा देखने को मिल सकता है।
मौसम विभाग के मुताबिक उत्तर-पूर्वी उत्तर प्रदेश और आसपास बना निम्न दबाव क्षेत्र अब कमजोर होने की ओर है, लेकिन इसके प्रभाव से कुछ क्षेत्रों में बारिश जारी रह सकती है। वहीं, बंगाल की खाड़ी के उत्तर में बने चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से 29 अगस्त के आसपास उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी तथा पश्चिम बंगाल-उत्तर ओडिशा के तटों के पास नया निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है। इसके कारण पूर्वी और मध्य भारत के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
उत्तराखंड में 31 अगस्त से बहुत भारी बारिश का खतरा
उत्तराखंड में 29 अगस्त से 3 सितंबर तक कई इलाकों में व्यापक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने 29 अगस्त के बाद भी बारिश को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। 30 अगस्त से 3 सितंबर के दौरान राज्य में कई स्थानों पर बारिश हो सकती है, जबकि 31 अगस्त से 1 सितंबर के बीच कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। हिमाचल प्रदेश में भी 30 अगस्त से 3 सितंबर के दौरान बारिश का दौर जारी रह सकता है। 31 अगस्त से 3 सितंबर के बीच कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई गई है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान और मुजफ्फराबाद में 31 अगस्त से 1 सितंबर के दौरान व्यापक बारिश हो सकती है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश में बढ़ेगी बारिश
उत्तर प्रदेश में भी मानसून की सक्रियता बनी रह सकती है। मौसम विभाग के अनुसार 1 से 3 सितंबर के दौरान पूर्वी उत्तर प्रदेश में कई जगहों पर व्यापक बारिश होने की संभावना है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 31 अगस्त से 3 सितंबर के बीच कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 2 से 3 सितंबर के दौरान भी कुछ स्थानों पर भारी बारिश का अनुमान है।
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में बारिश का दौर जारी
मध्य भारत में भी मानसून सक्रिय रहने वाला है। 29 अगस्त से 2 सितंबर के दौरान पूर्वी मध्य प्रदेश में कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। वहीं 3 सितंबर को भी कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश की संभावना है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में 2 से 3 सितंबर के दौरान भारी बारिश हो सकती है। छत्तीसगढ़ में 29 अगस्त से 3 सितंबर तक व्यापक बारिश का दौर बना रह सकता है। 29 अगस्त के बाद भी राज्य के कई इलाकों में बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। कुछ स्थानों पर भारी बारिश की भी संभावना है। विदर्भ में 29 अगस्त से 1 सितंबर के दौरान बारिश का अनुमान है।
ओडिशा में 30 अगस्त को भारी बारिश की संभावना
बंगाल की खाड़ी में बनने वाले नए निम्न दबाव क्षेत्र का सबसे ज्यादा असर ओडिशा और आसपास के क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग के अनुसार 30 अगस्त को ओडिशा में कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा 31 अगस्त और 1 सितंबर से 3 सितंबर के दौरान भी राज्य में कुछ स्थानों पर भारी बारिश का अनुमान है। ओडिशा में बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं का दौर भी देखने को मिल सकता है। ऐसे में निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को जलभराव की स्थिति को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत है।
पूर्वोत्तर राज्यों में भी जमकर बरसेंगे बादल
अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में मानसून की सक्रियता बनी रहेगी। 29 अगस्त से 3 सितंबर के बीच अरुणाचल प्रदेश और असम-मेघालय में कई स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है। वहीं 30 अगस्त को अरुणाचल प्रदेश और असम-मेघालय में कुछ जगहों पर बहुत भारी बारिश हो सकती है। नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी 29 अगस्त से 3 सितंबर तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है और कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है।
किसानों के लिए जरूरी सलाह
लगातार बारिश का यह दौर किसानों के लिए राहत के साथ चुनौती भी ला सकता है। जिन क्षेत्रों में अच्छी बारिश की कमी थी, वहां फसलों को फायदा मिल सकता है, लेकिन भारी बारिश वाले इलाकों में खेतों में जलभराव से फसलों को नुकसान होने की आशंका है। किसानों को खेतों में पानी की निकासी की उचित व्यवस्था रखने, निचले खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने और स्थानीय मौसम पूर्वानुमान पर लगातार नजर रखने की सलाह दी जाती है। तेज हवा और बिजली गिरने की संभावना के दौरान किसानों को खुले खेतों में काम करने से बचना चाहिए।
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