अब मजदूरों को 100 नहीं, 125 दिन का मिलेगा रोजगार

वीबी-जी राम जी बिल को मिली मंजूरी, जानें किसानों और मजदूरों को क्या-क्या मिलेंगे फायदे

ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए केंद्र सरकार ने लोकसभा में विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण (वीबी-जी राम जी) विधेयक पेश किया है। यह विधेयक मौजूदा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (MGNREGA) की जगह लेने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। सांसदों की मंजूरी के बाद यह नया कानून लागू होगा और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार व विकास कार्यों की रूपरेखा नए सिरे से तय की जाएगी।

क्या है वीबी-जी राम जी बिल

वीबी-जी राम जी बिल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में केवल मजदूरी आधारित काम तक सीमित न रहते हुए रोजगार को आजीविका और स्थायी परिसंपत्तियों से जोड़ना है। इस विधेयक के तहत गांवों में विकास कार्यों को एक समेकित ढांचे के तहत संचालित किया जाएगा, जिससे स्थानीय जरूरतों के अनुसार काम तय हो सकें। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि ग्रामीण मजदूरों के लिए रोजगार के दिनों की सीमा 100 से बढ़ाकर 125 दिन करने का प्रावधान किया गया है। इससे मजदूरों को साल में अधिक दिनों तक काम और आमदनी का अवसर मिलेगा। 

गांवों के विकास के लिए चार प्राथमिक क्षेत्र

वीबी-जी राम जी के तहत ग्रामीण विकास को चार प्रमुख प्राथमिकताओं में बांटा गया है, जो इस प्रकार से हैं: 

जल सुरक्षा: गांवों में जल संरक्षण संरचनाएं, सिंचाई सहायता, भूजल पुनर्भरण, जल निकायों का पुनर्जीवन, वाटरशेड विकास और वनीकरण जैसे कार्य किए जाएंगे। इससे खेती और पेयजल दोनों को मजबूती मिलेगी।

मुख्य ग्रामीण इन्फ्रास्ट्रक्चर: ग्रामीण सड़कों, स्कूल भवनों, सार्वजनिक भवनों, स्वच्छता प्रणालियों, नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़ी सुविधाओं और आवास निर्माण पर विशेष जोर दिया जाएगा।

आजीविका से जुड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर: कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, भंडारण, बाजार, कौशल विकास और मूल्य संवर्धन से जुड़ी परिसंपत्तियों का निर्माण किया जाएगा, जिससे ग्रामीणों की आय के स्रोत बढ़ सकें।

मौसमी घटनाओं के लिए विशेष कार्य: आपदा या प्रतिकूल मौसम के समय भी रोजगार बनाए रखने के लिए बाढ़ प्रबंधन, तटबंध निर्माण, आश्रय स्थल, पुनर्वास और वनाग्नि नियंत्रण जैसे कार्य शामिल किए जाएंगे। 

मनरेगा से कैसे अलग होगा नया कानून

सरकार का कहना है कि वीबी-जी राम जी के जरिए मनरेगा की ढांचागत कमियों को दूर किया गया है। सभी कार्यों को विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण इन्फ्रास्ट्रक्चर स्टैक में शामिल किया जाएगा, जिससे गांवों में होने वाले विकास कार्य एक राष्ट्रीय फ्रेमवर्क के तहत संचालित होंगे। इससे टिकाऊ और दीर्घकालिक परिसंपत्तियों का निर्माण सुनिश्चित किया जाएगा। 

किसानों और मजदूरों को क्या मिलेगा फायदा

इस विधेयक से मजदूरों को जहां 125 दिन का रोजगार मिलेगा, वहीं किसानों को भी बड़ा लाभ होगा। राज्यों को यह अधिकार दिया गया है कि वे बुवाई और कटाई के मौसम को ध्यान में रखते हुए साल में 60 दिन तक कार्य रोकने की अवधि तय कर सकें। इससे खेती के पीक सीजन में किसानों को मजदूरों की कमी नहीं होगी। मजदूरों को भी फायदा यह होगा कि वे खेती के मौसम में खेतों पर काम कर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेंगे और बाकी समय वीबी-जी राम जी के तहत रोजगार पा सकेंगे। इससे दोनों वर्गों की आय में संतुलन बनेगा। 

तकनीक से बढ़ेगी पारदर्शिता

वीबी-जी राम जी में बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, जीपीएस आधारित प्लानिंग, मोबाइल रिपोर्टिंग और रियल-टाइम डैशबोर्ड जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। ग्राम पंचायत स्तर पर हर सप्ताह काम, भुगतान और प्रगति की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। साल में दो बार सोशल ऑडिट भी अनिवार्य होगा। 

कब से लागू होगा वीबी-जी राम जी बिल

विधेयक के कानून बनने के बाद राज्यों को छह माह के भीतर अपनी-अपनी योजना तैयार करनी होगी। इसके बाद इसे केंद्रीय प्रायोजित योजना के रूप में लागू किया जाएगा। कुल मिलाकर, वीबी-जी राम जी बिल ग्रामीण भारत में रोजगार, आजीविका और विकास को एक साथ जोड़ने की कोशिश है। रोजगार के दिन बढ़ने से मजदूरों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी, जबकि किसानों को खेती के अहम समय पर पर्याप्त श्रमिक उपलब्ध हो सकेंगे। पारदर्शी और तकनीक आधारित व्यवस्था से योजना के प्रभावी क्रियान्वयन की उम्मीद की जा रही है।

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