भावांतर योजना : 1.33 लाख किसानों के खातों में 233 करोड़ रुपए ट्रांसफर

किसान 15 जनवरी तक सोयाबीन बेच सकेंगे, मिलेगा भावांतर योजना का लाभ

मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के सोयाबीन किसानों को बड़ी राहत देते हुए गुरुवार को भावांतर भुगतान योजना की राशि किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने देवास में आयोजित एक विशाल जनसभा में बताया कि प्रदेश सरकार ने किसानों के हित में की गई घोषणा को बेहद कम समय में पूरा किया है। योजना के तहत 1.33 लाख किसानों के खातों में कुल 233 करोड़ रुपए सीधे जमा कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि भावांतर भुगतान योजना अब अन्नदाता के उत्थान का प्रतीक बन चुकी है और यह किसानों को फसल का उचित मूल्य दिलाने में अहम भूमिका निभा रही है।

एमएसपी गारंटी वाला देश का पहला राज्य एमपी

मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी प्रदान करने के लिए भावांतर योजना लागू की। इस योजना के माध्यम से बाजार भाव और एमएसपी के बीच के अंतर की भरपाई सरकार द्वारा की जाती है, जिससे किसानों को उनकी मेहनत का पूरा मूल्य मिल सके। सीएम ने बताया कि योजना की शुरुआत के मात्र 15 दिनों के भीतर ही किसानों के खातों में राशि ट्रांसफर करने का वादा सरकार ने पूरा किया है। 

सोयाबीन के समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी, किसानों को मिलेगी अतिरिक्त आमदनी

इस वर्ष सोयाबीन का समर्थन मूल्य बढ़ाकर 5300 रुपए प्रति क्विंटल से अधिक कर दिया गया है। इसके चलते किसानों को प्रति क्विंटल 500 रुपए अतिरिक्त लाभ मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि प्रदेश के 9 लाख से अधिक किसानों ने भावांतर योजना में पंजीयन कराया है। उन्होंने आश्वस्त किया कि किसान 15 जनवरी तक मंडियों में सोयाबीन बेच सकेंगे और योजना का पूरा लाभ ले पाएंगे। 

राज्य में 280 स्थानों पर हो रही सोयाबीन की खरीद

राज्य में सोयाबीन खरीदी के लिए 220 से अधिक मुख्य मंडियाें और 80 उपमंडियां संचालित की जा रही हैं। सभी खरीद केंद्रों पर पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से संचालित हो रही है। ई-मंडी पोर्टल के माध्यम से दरें तय की जा रही हैं और राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जा रही है। खरीदी केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों की निगरानी, रियल टाइम एंट्री और मॉनिटरिंग की व्यवस्था से किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोकने के प्रयास किए गए हैं। 

देवास में विकास कार्यों का भूमि-पूजन, योजनाओं का लाभ वितरण

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने 183.25 करोड़ रुपए की लागत से होने वाले विकास कार्यों का भूमि-पूजन किया। साथ ही किसानों को जैविक खेती व कृषि यंत्र वितरण एवं अन्य योजनाओं के हितलाभ भी सौंपे। उन्होंने कृषि यंत्रों और जैविक खेती से संबंधित प्रदर्शनी का अवलोकन किया और कहा कि आने वाला वर्ष 2026, कृषि आधारित उद्योग वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। 

प्राकृतिक खेती पर 4 हजार रुपए प्रति एकड़ सब्सिडी

सीएम यादव ने कहा कि किसानों की खुशहाली ही प्रदेश की पहचान है। इसी सोच के अंतर्गत राज्य सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रही है। प्राकृतिक खेती अपनाने पर किसानों को सरकार द्वारा 4,000 रुपए प्रति एकड़ की सब्सिडी दी जा रही है। साथ ही डेयरी व्यवसाय को सुदृढ़ करने के लिए डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना लागू की गई है। इस योजना के तहत 40 लाख रुपए के डेयरी प्रोजेक्ट पर 10 लाख रुपए की सब्सिडी प्रदान की जा रही है। 

पराली प्रबंधन के लिए बायोगैस प्लांट की स्थापना और श्रीअन्न पर बोनस 

मुख्यमंत्री ने कहा कि नरवाई (पराली) की समस्या से निपटने के लिए प्रदेश में कम्प्रेस्ड बायोगैस प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं। इससे किसानों को अवशेष प्रबंधन में मदद मिलेगी और अतिरिक्त आय का मार्ग भी खुलेगा। वहीं धान, गेहूं के साथ-साथ मोटे अनाज ‘श्रीअन्न’ को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार किसानों को 1000 रुपए प्रति क्विंटल बोनस भी दे रही है। इसके अलावा लाड़ली बहना योजना की राशि बढ़ाकर 1500 रुपए किए जाने की जानकारी भी मुख्यमंत्री ने दी। उन्होंने कहा कि अब सरकार प्रत्येक सप्ताह अलग-अलग योजनाओं की राशि लाभार्थियों के खातों में ट्रांसफर करेगी। 

कृषि मंत्री और जनप्रतिनिधियों ने की सराहना

कार्यक्रम में कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने कहा कि भावांतर योजना लागू करने वाला मध्य प्रदेश देश का इकलौता राज्य है और यह किसानों की आर्थिक सुरक्षा का मजबूत आधार बन रही है। सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी और विधायक गायत्री राजे पंवार ने भी मुख्यमंत्री के प्रयासों की सराहना की। सभा में किसान मोर्चा और स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का जोरदार स्वागत किया।

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