ICAR-NIBSM की बड़ी पहल: किसानों में बांटे 140 बैटरी पावर स्प्रेयर और सोलर पैनल

Share Product प्रकाशित - 02 Sep 2026 by Tractor Junction

ICAR-NIBSM की बड़ी पहल: किसानों में बांटे 140 बैटरी पावर स्प्रेयर और सोलर पैनल

ICAR-NIBSM: आधुनिक कृषि उपकरण के साथ किसानों को मिली कीट प्रबंधन और जल संरक्षण की जानकारी

मौजूदा खरीफ सीजन में धान की फसल पर तना छेदक और पत्ती लपेटक कीट का प्रकोप देखा जा रहा है। ऐसे में देश के कृषि अनुसंधान संस्थानों द्वारा किसानों को फसल बचाने के लिए समय पर कीट नियंत्रण और दवा के छिड़काव पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है। इसके लिए जरूरी गाइडलाइन भी जारी की जा रही हैं। इसी कड़ी में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान (ICAR-NIBSM) रायपुर ने किसानों के लिए एक पहल की है। 

संस्थान ने अनुसूचित जाति उप-योजना (SCSP) के तहत किसानों और महिला किसानों को 140 बैटरी चालित पावर स्प्रेयर और सोलर पैनल के 3 सेट वितरित किए। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान और महिला किसान शामिल हुए और उन्हें फसल सुरक्षा, आधुनिक कृषि उपकरणों के इस्तेमाल तथा जल संरक्षण के बारे में जरूरी जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शामिल हुए किसान और महिला किसान

इस कार्यक्रम में मुर्रा, बेठिया, देवगांव, अडसेना और बेलटुकरी गांवों के कुल 160 किसान और महिला किसान शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान किसानों को कृषि उपकरण उपलब्ध कराने के साथ धान की फसल में कीट–रोग प्रबंधन, बारिश के पानी को इकट्‌ठा कर उसे आगामी रबी सीजन में फसलों की सिंचाई के लिए इस्तेमाल करने और फसल विविधीकरण की जानकारी भी दी गई। ICAR-NIBSM की इस पहल का उद्देश्य खेती में आधुनिक उपकरणों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना, फसल प्रबंध के लिए किसानों की मेहनत कम करना और रबी फसलों की खेती के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ाना है।

किसानों को मिले बैटरी स्प्रेयर और सोलर पैनल 

ICAR-NIBSM ने SCSP योजना के तहत किसानों को 140 बैटरी चालित पावर स्प्रेयर वितरित किए। इन आधुनिक उपकरणों से किसानों की मेहनत कम करने और खेती में मशीनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। इसके अलावा किसानों के उपयोग के लिए सोलर पैनल के 3 सेट भी दिए गए। संस्थान के अनुसार ऐसी पहल से कृषि की उत्पादकता बढ़ाने और टिकाऊ खेती पद्धतियों को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है। संस्थान द्वारा SCSP कार्यक्रम के अंतर्गत अलग-अलग गांवों में किसानों की जरूरत के अनुसार तकनीकी जानकारी, फसल प्रबंधन का प्रशिक्षण, कृषि सामग्री और जरूरी कृषि उपकरण भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

वर्षा जल जल संरक्षण और फसल विविधीकरण के लिए टिप्स 

आईसीएआर-एनआईबीएसएम (ICAR-NIBSM) के निदेशक डॉ. पी. के. राय ने किसानों को इस मानसून में बारिश के पानी को बचाने और खेती में सही तरीके से इस्तेमाल करने की सलाह दी। उन्होंने किसानों से कहा कि उपलब्ध जल-संचयन और जल-संरक्षण संरचनाओं में बारिश का पानी जमा करें और बाद में इसे रबी सीजन में फसलों की सिंचाई के लिए समझदारी से उपयोग करें। इससे उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है और रबी फसलों के लिए अतिरिक्त पानी उपलब्ध हो सकेगा।

कार्यक्रम में किसानों को फसल विविधीकरण अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया। यानी किसानों को केवल एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग फसलों की खेती करने की सलाह दी गई। डॉ. राय के अनुसार इससे उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग, आय बढ़ाने और खेती से जुड़े जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

तना छेदक से फसल बचाव के लिए जरूरी प्रबंधन की सलाह

कार्यक्रम के दौरान किसानों को धान की मौजूदा फसल की नियमित निगरानी करने की सलाह दी गई। संयुक्त निदेशक एवं कार्यक्रम समन्वयक डॉ. पंकज शर्मा के अनुसार इस समय धान की फसल रोपाई के करीब 40 से 50 दिन की अवस्था में है। इस अवधि के दौरान फसल पर पीला तना छेदक (Yellow Stem Borer) और पत्ती लपेटक (Leaf Folder) जैसे कीटों का प्रकोप देखा जा रहा है। कुछ जगहों पर जीवाणु झुलसा रोग (Bacterial Leaf Blight) के लक्षण भी मिले हैं। किसानों को सलाह दी गई है कि वे फसल में कीट और रोग के शुरुआती लक्षणों पर नजर रखें और समस्या दिखाई देने पर समय रहते उचित प्रबंधन करें। इससे फसल में होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। 

अनावश्यक कीटनाशक छिड़काव से बचें किसान

विशेषज्ञों के अनुसार जरूरत से ज्यादा खाद-उर्वरक डालने और खेत में लंबे समय तक पानी भरा रहने से पीला तना छेदक और पत्ती लपेटक जैसे कीटों का प्रकोप बढ़ सकता है। इसलिए किसान फसल में जरूरत के अनुसार ही खाद-उर्वरक का इस्तेमाल करें और खेत में पानी की उचित निकासी रखें।

फसल में कीटों के शुरुआती लक्षण दिखते ही समय पर नियंत्रण के उपाय अपनाएं। बिना जरूरत रासायनिक कीटनाशकों का छिड़काव करने से बचें। धान में कीट नियंत्रण के लिए फेरोमोन ट्रैप और ट्राइकोकार्ड जैसे उपाय भी अपनाए जा सकते हैं। रासायनिक कीटनाशकों का इस्तेमाल केवल जरूरत और कीट प्रकोप के स्तर को देखते हुए करें। इससे अनावश्यक दवा खर्च कम करने और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।

किसानों को कृषि उपकरणों के साथ मिल रहा जरूरी प्रशिक्षण

ICAR-NIBSM रायपुर की यह पहल केवल कृषि उपकरण उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। संस्थान किसानों और महिला किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार तकनीकी जानकारी, प्रशिक्षण, कृषि सामग्री और जरूरी उपकरण भी उपलब्ध करा रहा है। कार्यक्रम में शामिल किसानों और ग्राम प्रतिनिधियों ने पावर स्प्रेयर और सोलर पैनल के वितरण को खेती के काम को आसान बनाने की दिशा में उपयोगी पहल बताया।

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