भावांतर योजना: सोयाबीन किसानों के लिए रजिस्ट्रेशन की तारीख बढ़ाई सहित टॉप 5 खबरें

जानें, इस सप्ताह किसानों के लिए कृषि से लेकर योजना तक क्या है खास अपडेट्स

किसानों और पशुपालकों के लिए इस सप्ताह कई अहम अपडेट सामने आए हैं। मध्य प्रदेश में सोयाबीन किसानों को भावांतर योजना के पंजीयन के लिए अतिरिक्त समय मिला है। वहीं, इंदौर के सोयाबीन अनुसंधान संस्थान में उन्नत किस्मों के उत्पादन के उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। इसके अलावा, तमिलनाडु से जैविक ताड़ गुड़ पाउडर का बुल्गारिया निर्यात, पशुपालन विभाग की नई वेबसाइट और राजस्थान में फसल बीमा क्लेम से जुड़ी राहत भी इस सप्ताह की प्रमुख खबरों में शामिल हैं।

सोयाबीन किसानों को राहत, भावांतर योजना में रजिस्ट्रेशन की तारीख बढ़ाई

मध्य प्रदेश के सोयाबीन किसानों के लिए राहत की खबर है। खरीफ 2026 की भावांतर भुगतान योजना के तहत पंजीयन की अंतिम तारीख 17 अक्टूबर से बढ़ाकर 24 अक्टूबर 2026 कर दी गई है। इससे उन किसानों को अतिरिक्त समय मिलेगा, जो किसी कारण से निर्धारित समय तक पंजीयन नहीं करा पाए थे। किसान ई-उपार्जन पोर्टल के माध्यम से पंजीयन कर सकते हैं। आवेदन करते समय जमीन, किसान के नाम और अन्य जरूरी विवरणों की जांच करना आवश्यक है। योजना का लाभ निर्धारित पात्रता, फसल बिक्री और सरकारी नियमों के अनुसार मिलेगा।

सोयाबीन की NRC 268 और NRC 270 किस्मों से 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन के संकेत

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अंतर्गत राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर में आयोजित सोयाबीन कटाई दिवस के दौरान NRC 268 और NRC 270 किस्मों के शुरुआती उत्पादन परिणाम उत्साहजनक रहे। इसी अक्टूबर महीने में हुए इस आयोजन में दोनों किस्मों के एक-एक एकड़ के भूखंड पर कटाई के बाद लगभग 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन के संकेत मिले। यह परिणाम सोयाबीन की उत्पादकता बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण है। हालांकि, ये शुरुआती आंकड़े हैं और अलग-अलग क्षेत्रों में उत्पादन मिट्टी, मौसम, बीज की क्वालिटी तथा खेती की तकनीक पर निर्भर करेगा। किसानों को नई किस्म अपनाने से पहले अपने क्षेत्र के लिए उसकी उपयुक्तता की जानकारी लेनी चाहिए।

तमिलनाडु से पहली बार बुल्गारिया भेजा गया जैविक ताड़ गुड़ पाउडर

भारतीय कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने की दिशा में तमिलनाडु के इरोड जिले से बुल्गारिया के लिए जैविक ताड़ गुड़ पाउडर की पहली खेप रवाना की गई। 15 अक्टूबर 2026 को भेजी गई इस खेप में 1.755 मीट्रिक टन उत्पाद शामिल था। इसे राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (NPOP) और यूरोपीय संघ के मानकों के अनुरूप प्रमाणित बताया गया है। इस पहल से पारंपरिक ताड़ उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान मिलने की संभावना है। संबंधित रिपोर्ट के अनुसार, निर्यात आधारित मूल्य श्रृंखला से जैविक उत्पादकों को घरेलू बाजार की तुलना में 15 से 22 प्रतिशत अधिक दाम मिलने का अवसर मिल सकता है। इससे किसानों और उत्पादकों के लिए नए बाजार खुल सकते हैं।

पशुपालन और डेयरी योजनाओं की जानकारी के लिए नई वेबसाइट लॉन्च

केंद्र सरकार के पशुपालन और डेयरी विभाग (DAHD) ने अपनी नई वेबसाइट लॉन्च की है। इसका उद्देश्य किसानों, पशुपालकों और डेयरी उद्यमियों के लिए योजनाओं तथा सरकारी सेवाओं की जानकारी प्राप्त करना आसान बनाना है। नई वेबसाइट को डिजिटल ब्रांड आइडेंटिटी मैनुअल (DBIM) 3.0 के अनुरूप तैयार किया गया है। इसमें बहुभाषी जानकारी के लिए ‘भाषिणी’ टूल, बेहतर सर्च सुविधा और योजनाओं से संबंधित सामग्री तक आसान पहुंच जैसी सुविधाएं शामिल हैं। पशुपालक राष्ट्रीय गोकुल मिशन, राष्ट्रीय पशुधन मिशन और पशुपालन अवसंरचना विकास कोष जैसी योजनाओं की जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट का उपयोग कर सकते हैं।

राजस्थान में किसानों को 21.27 करोड़ रुपये के फसल बीमा क्लेम की मंजूरी

राजस्थान में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को राहत मिली है। राज्य स्तरीय शिकायत निराकरण समिति (SGRC) की बैठक में डूंगरपुर और जालौर जिलों से जुड़े मामलों में कुल 21.27 करोड़ रुपये के फसल बीमा क्लेम को मंजूरी दी गई। डूंगरपुर में खरीफ 2025 के 155 फसल कटाई प्रयोगों से संबंधित आपत्तियों के निस्तारण के बाद 7.69 करोड़ रुपये के क्लेम स्वीकृत किए गए। जालौर में रबी 2023-24 की सरसों फसल से संबंधित मामले में 1.22 करोड़ रुपये और खरीफ 2024 के 13 पटवार मंडलों से जुड़े मामलों में 12.36 करोड़ रुपये के क्लेम को मंजूरी दी गई। यह फैसला फसल बीमा से जुड़ी लंबित आपत्तियों के निस्तारण की दिशा में महत्वपूर्ण है। पात्र किसानों को नियमानुसार क्लेम का लाभ दिलाने के लिए विभागीय समन्वय और मामलों का समय पर निस्तारण जरूरी है।

यह सप्ताह किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए कितना महत्वपूर्ण 

इस सप्ताह की ये पांच खबरें किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं। सोयाबीन किसानों को पंजीयन के लिए अतिरिक्त समय मिला है, उन्नत किस्मों के शुरुआती उत्पादन परिणाम सामने आए हैं और जैविक कृषि उत्पादों के निर्यात से नए अवसर बनने की संभावना है। वहीं पशुपालकों के लिए सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त करना आसान बनाने और राजस्थान में फसल बीमा संबंधी शिकायतों का निस्तारण करने के प्रयास भी अहम हैं। किसानों को योजनाओं का लाभ लेने से पहले संबंधित आधिकारिक नियमों और पात्रता की पुष्टि करनी चाहिए।

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