बीज नीति 2026: किसानों को उपलब्ध कराए जाएंगे उच्च उत्पादकता वाले प्रमाणित बीज

राज्य सरकार नई और आधुनिक बीज नीति लाने की तैयारी में, कृषि उत्पादन बढ़ाने पर जोर

खेती में बीज की भूमिका सबसे अहम मानी जाती है, क्योंकि फसल की गुणवत्ता और उत्पादन काफी हद तक बीज पर निर्भर करता है। इसी को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए उत्तर प्रदेश बीज नीति–2026 लाने की तैयारी में जुट गई है। इस नीति का उद्देश्य किसानों को समय पर उच्च गुणवत्ता वाले, प्रमाणित और भरोसेमंद बीज उपलब्ध कराना है, जिससे कृषि उत्पादन और उत्पादकता दोनों में बढ़ोतरी हो सके।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ स्थित अपने सरकारी आवास पर आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में बीज नीति–2026 को लेकर विस्तृत समीक्षा की। बैठक में कृषि उत्पादन बढ़ाने, किसानों की आय में इजाफा करने और बदलती जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप बीज व्यवस्था को मजबूत करने पर खास जोर दिया गया।

आधुनिक बीज नीति समय की जरूरत: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कृषि उत्पादन की असली ताकत उच्च गुणवत्ता, प्रमाणित और भरोसेमंद बीजों में निहित है। उन्होंने कहा कि बदलती जलवायु, घटती जोत और बढ़ती खेती लागत के दौर में प्रदेश के लिए एक आधुनिक और वैज्ञानिक बीज नीति बेहद जरूरी हो गई है। नई बीज नीति किसानों को बेहतर उत्पादन के साथ जोखिम से भी बचाने में मदद करेगी। 

उच्च उत्पादन और रोग प्रतिरोधी किस्मों पर दिया जोर

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि नई बीज नीति इस तरह तैयार की जाए, जो आने वाले वर्षों की कृषि चुनौतियों का प्रभावी समाधान प्रस्तुत कर सके। उन्होंने उच्च उपज देने वाली, रोग प्रतिरोधी और जलवायु सहनशील किस्मों के विकास को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब केवल कुल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रति हेक्टेयर उत्पादकता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए, ताकि किसानों की आमदनी में वास्तविक बढ़ोतरी हो सके। 

प्रमाणित बीज और ट्रैसेबिलिटी होगी अनिवार्य

बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि किसानों तक पहुंचने वाला हर बीज पैकेट प्रमाणित, परीक्षण किया हुआ और गुणवत्ता मानकों पर खरा होना चाहिए। बीज की शुद्धता और भरोसेमंद आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एंड-टू-एंड ट्रैसेबिलिटी सिस्टम लागू करने के निर्देश दिए गए। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि बीज कहां से आया है, किस प्रक्रिया से गुजरा है और उसकी गुणवत्ता क्या है। मुख्यमंत्री ने सख्त लहजे में कहा कि मिलावटी और अमानक बीजों के प्रति किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 

किस्म रिलीज प्रक्रिया में लाई जाएगी तेजी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीज अनुसंधान और नवाचार को तेज करने पर जोर देते हुए कहा कि कृषि विश्वविद्यालयों, आईसीएआर (ICAR) संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्रों और निजी बीज कंपनियों को एक साझा मंच पर लाया जाना चाहिए। इससे बीज अनुसंधान, नवाचार और नई किस्मों को जारी करने की प्रक्रिया में तेजी आएगी।

इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने अगले पांच वर्षों में प्रदेश में कम से कम 5 सीड पार्क स्थापित करने के निर्देश दिए। इन सीड पार्कों में बीज उत्पादन, प्रसंस्करण, गुणवत्ता परीक्षण और भंडारण की सभी आधुनिक सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध होंगी। 

इन फसलों के उच्च गुणवत्ता वाले बीजों पर रहेगा फोकस

फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने दलहन, तिलहन, मक्का, बाजरा, ज्वार और बागवानी फसलों के उच्च गुणवत्ता वाले बीजों की उपलब्धता बढ़ाने के निर्देश दिए। इसके लिए प्रदेश के 9 कृषि जलवायु क्षेत्रों के अनुसार प्रत्येक क्षेत्र में एक-एक कृषि विज्ञान केंद्र को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे क्षेत्र विशेष की फसलों के लिए उन्नत बीज और तकनीकी समाधान तैयार किए जा सकेंगे। साथ ही प्रगतिशील किसानों को भी बीज विकास कार्यक्रमों से जोड़ा जाएगा, ताकि स्थानीय अनुभव और आधुनिक तकनीक का बेहतर तालमेल बन सके। 

सिंचाई के लिए सौर ऊर्जा को बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने कृषि में ऊर्जा दक्षता बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक ट्यूबवेलों को सौर ऊर्जा से जोड़ा जाए, जिससे किसानों की सिंचाई लागत कम हो और स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग बढ़े। इसके साथ ही प्रदेश में स्थापित सोलर पैनल इकाइयों को प्राथमिकता देने से रोजगार, निवेश और कृषि अवसंरचना को मजबूती मिलेगी। 

कृषि उत्पादन और किसानों की आय में होगी बढ़ोतरी

कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश बीज नीति–2026 किसानों को गुणवत्ता युक्त बीज, बेहतर उत्पादन और स्थायी कृषि की दिशा में एक मजबूत आधार प्रदान करेगी। सरकार का मानना है कि इस नीति से न केवल कृषि उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि किसानों की आय और प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था भी सशक्त होगी।

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