एआई फार्मिंग : कृषि में AI से बढ़ेगा उत्पादन, किसानों की आय में होगी बड़ी बढ़ोतरी
प्रकाशित - 26 Nov 2025
by Tractor Junction
एग्रो विजन नागपुर में नितिन गडकरी ने कहा, किसान AI तकनीक अपनाएं, FPO बनाकर समूह में काम करें
नागपुर में आयोजित 16वें एग्रो विजन कृषि प्रदर्शनी में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने खेती में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग को लेकर किसानों को नई दिशा दिखाई। उन्होंने कहा कि यदि किसान एआई तकनीक को अपनाते हैं तो इससे न सिर्फ उनकी फसल उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, बल्कि खेती की लागत भी कम होगी। गडकरी ने किसानों का आह्वान करते हुए कहा कि वे आधुनिक तकनीक का अधिक से अधिक इस्तेमाल करें और समूह में काम करने के लिए FPO मॉडल को अपनाएं।
AI से कम होगी प्रति एकड़ लागत, बढ़ेगा मुनाफा
एग्रो विजन प्रदर्शनी में मीडिया से बातचीत के दौरान नितिन गडकरी ने कहा कि छोटे से छोटा किसान भी एआई की मदद ले सकता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि यदि किसी किसान को प्रति एकड़ 5000 रुपए की लागत आती है, तो AI आधारित खेती अपनाने पर यह लागत घटकर करीब 3500 रुपए रह जाएगी। यानी किसानों को प्रति एकड़ 1500 रुपए की सीधी बचत होगी। गडकरी ने यह भी बताया कि AI तकनीक का उपयोग करने पर यदि 500 रुपए की लागत अतिरिक्त भी आती है, तब भी किसान कुल मिलाकर 1000 रुपए प्रति एकड़ बचा पाएंगे। यह किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
फसलों में रोग और कीट प्रबंधन में भी AI उपयोगी
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिर्फ पानी और खाद के बेहतर प्रबंधन में ही नहीं, बल्कि रोग और कीटों से बचाव में भी अत्यंत प्रभावी है। संतरा, तुअर, गन्ना और कई अन्य फसलों में संभावित रोगों की पहचान और उनके नियंत्रण में एआई (AI) महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इस वर्ष एग्रो विजन प्रदर्शनी में ‘AI with Agriculture’ को विशेष रूप से केंद्र में रखा गया ताकि किसान नई तकनीक को बेहतर तरीके से समझ सकें।
विदर्भ में 3 से 4 हजार FPO सक्रिय
गडकरी ने कहा कि यदि किसान समूह में मिलकर तकनीक अपनाते हैं, तो इसका लाभ कई गुना बढ़ जाता है। विदर्भ क्षेत्र में आज 3 से 4 हजार फार्मर प्रोड्यूस कंपनियां (FPO) सक्रिय हैं, जो AI आधारित खेती और आधुनिक कृषि मॉडल अपनाने में अहम भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने किसानों को प्रेरित किया कि वे FPO का हिस्सा बनें और तकनीकी बदलावों को अपनाकर खेती को लाभकारी बनाएं।
नागपुर में एग्रो विजन प्रदर्शनी, किसानों के लिए बड़ा मंच
एग्रो विजन प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य विदर्भ क्षेत्र में किसानों की आत्महत्या को रोकना और उन्हें आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराना है। इस वर्ष प्रदर्शनी में 450 से अधिक संगठनों ने हिस्सा लिया, जिनमें प्रमुख कृषि कंपनियां, बहुराष्ट्रीय संस्थान, सरकारी विभाग, शोध संस्थान, कृषि विश्वविद्यालय, बैंक, बीमा कंपनियां, स्टार्टअप्स और MSME शामिल रहे। देशभर से लाखों किसान, कृषि वैज्ञानिक, शोधकर्ता और विशेषज्ञ इस प्रदर्शनी का हिस्सा बने। किसानों ने नई तकनीकों, आधुनिक उपकरणों और AI आधारित खेती के विभिन्न मॉडलों के बारे में विस्तार से जाना।
यूपी में 10 लाख से अधिक किसान जुड़े AI तकनीक से
जहां किसान एआई अपनाने की ओर बढ़ रहे हैं, वहीं उत्तर प्रदेश इस क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। विश्व बैंक समर्थित ‘UP Agris’ प्रोजेक्ट के जरिए अब तक 10 लाख से अधिक किसान AI आधारित सलाह से जुड़ चुके हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तकनीक को शासन का मूल सिद्धांत बनाते हुए इसे बड़े पैमाने पर लागू किया है।
एआई से सटीक कृषि : उपग्रह से लेकर मिट्टी विश्लेषण तक
एआई आधारित कृषि प्रणाली में यूपी सरकार उपग्रह चित्रों, मिट्टी विश्लेषण, मौसम पूर्वानुमान मॉडल और RFID आधारित ट्रैकिंग का उपयोग कर रही है। इससे किसानों को फसल उत्पादन में सुधार, जोखिम का तेज पूर्वानुमान, पानी व खाद की सही मात्रा का उपयोग, संसाधनों की निगरानी जैसे लाभ मिल रहे हैं। लखनऊ देश का पहला पूर्ण विकसित एआई सिटी बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, जहां तकनीकी ढांचे को अत्याधुनिक स्तर पर विकसित किया जा रहा है।
एआई आधारित शासन व्यवस्था और इनोवेशन हब
उत्तर प्रदेश सरकार ने ‘AI Innovation Hub’ की स्थापना की है, जिसमें 10,000+ GPUs वाला सुपरकंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, बहुभाषी एआई मॉडल, वैश्विक AI कंपनियों के लिए R&D, इंडिया एआई मिशन के अनुरूप नीति ढांचा उपलब्ध कराया गया है।
कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में भी एआई की बड़ी भूमिका
राज्य सरकार एआई (AI) की सहायता से कई काम कर रही है जिसमें लाभार्थी का डेटाबेस तैयार करना, धोखाधड़ी को रोकना, DBT को तेज और सटीक बनाना, योजनाओं को सही नागरिक तक पहुंचाना शामिल है। इसके अलावा यह मॉडल सार्वजनिक सेवाओं को रियल-टाइम और अधिक प्रभावी बना रहा है। एआई का उपयोग भूमि विवाद और अवैध खनन की समस्या से निपटने के लिए भी किया जा रहा है। सरकार एआई और सैटेलाइट विश्लेषण का भूमि रिकॉर्ड डिजिटल मानचित्रण, अतिक्रमण की पहचान, अवैध खनन पर निगरानी, जिलों के प्रदर्शन का ट्रैकिंग के लिए कर रही है, जिससे शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी है। AI आधारित खेती और शासन का यह मॉडल स्पष्ट करता है कि भारत तेजी से डिजिटल कृषि और स्मार्ट प्रशासन की दिशा में आगे बढ़ रहा है। नागपुर से लेकर उत्तर प्रदेश तक, कृषि का भविष्य तकनीक आधारित, लाभकारी और टिकाऊ बनने की ओर अग्रसर है।
ट्रैक्टर जंक्शन हमेशा आपको अपडेट रखता है। इसके लिए ट्रैक्टरों के नये मॉडलों और उनके कृषि उपयोग के बारे में एग्रीकल्चर खबरें प्रकाशित की जाती हैं। प्रमुख ट्रैक्टर कंपनियों वीएसटी ट्रैक्टर, महिंद्रा ट्रैक्टर आदि की मासिक सेल्स रिपोर्ट भी हम प्रकाशित करते हैं जिसमें ट्रैक्टरों की थोक व खुदरा बिक्री की विस्तृत जानकारी दी जाती है। अगर आप मासिक सदस्यता प्राप्त करना चाहते हैं तो हमसे संपर्क करें।
अगर आप नए ट्रैक्टर, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण बेचने या खरीदने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार और विक्रेता आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु को ट्रैक्टर जंक्शन के साथ शेयर करें।