कपास की खेती : कपास की बिजाई में रखें इन खास बातों का ध्यान, होगी बंपर पैदावार
प्रकाशित - 03 Apr 2025
by Tractor Junction
जानें, कपास की बिजाई में ध्यान रखने वाली महत्वपूर्ण बातें
देश के कई राज्यों में कपास की खेती (Cotton Cultivation) की जाती है जिसमें हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, आंधप्रदेश तेलंगाना जैसे राज्य शामिल हैं। इसके अलावा मध्यप्रदेश के निबाड़ क्षेत्र में प्रदेश की 75 प्रतिशत कपास होती है। इसके अलावा धार, झाबुआ, देवास व छिदवाड़ा में भी कपास की खेती की जाती है। कपास की खेती सामान्य तौर पर अप्रैल व मई महीने में की जाती है। हालांकि इसका बुवाई समय अलग–अलग क्षेत्रों में कपास की किस्म के आधार पर अलग–अलग होता है। कई किसान रबी सीजन की समाप्ति के बाद कपास की खेती करते हैं। इस साल खरीफ सीजन में कपास की खेती के लिए चौधरी चरणसिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार की ओर से प्रारंभिक सलाह जारी की गई है। कृषि विश्वविद्यालय की ओर से कपास की बिजाई के समय को देखते हुए किसानों काे ध्यान रखने वाली खास बातें बताई गई हैं। इसके तहत विश्वविद्यालय ने सुझाव व सावधानियां दोनों बताए हैं, तो आइए जानते हैं, इसके बारे में।
रेतीले इलाकों में इस तरह करें कपास की बिजाई
कृषि विश्वविद्यालय के अनुसार रेतीले इलाकों में देसी कपास की बिजाई अप्रैल महीने के पहले पखवाड़े में करने की सलाह दी गई है। यदि किसान बीटी कपास (BT Cotton) की बिजाई अप्रैल के पहले पखवाड़े में करते हैं तो वे मूंग की 2 कतार और कपास की 2 कतार लगा सकते हैं। रेतीले इलाकों में बीटी कपास की बिजाई टपका (ड्रिप) विधि द्वारा भी की जा सकती है। जहां पानी खराब है व कपास के जमाव में परेशानी हो वहां कपास की बिजाई बेड बनाकर करें। वहीं किसान बीटी कपास की बिजाई में विश्वविद्यालय द्वारा सिफारिश किया हुआ बीज ही काम में लें। इसकी जानकारी के लिए किसान जिले के कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा किसान विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर भी बीटी कपास के बीजों की जानकारी ले सकते हैं।
बीटी कपास का बीज बाजार से खरीदने पर किसान यह रखें सावधानी
किसानों को बीटी कपास (BT Cotton) का प्रमाणिक बीज ही बुवाई के लिए इस्तेमाल करना चाहिए। बीटी कपास का बीज प्रमाणित संस्था या अधिकृत विक्रेता से ही खरीदना चाहिए। बीटी कपास की खरीद के समय विक्रेता से पक्का बिल अवश्य लेना चाहिए ताकि बीज में कोई गड़बड़ हो तो विक्रेता पर कार्रवाई की जा सके। वर्तमान में कपास के गुलाबी सुंडी के प्रति बीटी कॉटन का प्रतिरोधक बीज उपलब्ध नहीं है। ऐसे में 3जी, 4जी एवं 5जी के नाम से आने वाले बीजों से सावधान रहे। इनकी खरीद नहीं करें।
कपास की बुवाई से पहले खेत की मिट़्टी की जांच कराएं
किसानों को कपास की बुवाई से पहले अपने खेत की मिट्टी की जांच अवश्य करवानी चाहिए ताकि मिट्टी में कमी का पता लगा सके और मिट्टी की जांच के आधार पर अनुसंशित पोषक तत्वाें जैसे– खाद-उर्वरक की निर्धारित मात्रा दी जा सके। बता दें कि कपास की अच्छी पैदावार के लिए अच्छी जल धारण क्षमता वाली मिट्टी अच्छी रहती है। कपास की खेती के लिए सबसे अच्छी मिट्टी का मान 6 से 7.5 एचपी के बीच अच्छा माना जाता है।
कपास की गुलाबी सुंडी का करें नियंत्रण
किसान अपने खेत में या उसके आसपास रखी गई पिछले साल की नरमा की लकडियों के टिंडे एवं पत्तों को झड़क कर अलग कर दें और इकट्ठा हुए कचरे को नष्ट कर दें। इन लकड़ियों के टिंडों में गुलाबी सुंडी निवास करती है। किसानों को यह काम मार्च माह के अंत तक जरूर कर लेना चाहिए। वहीं गुलाबी सुंडी बीटी नरमें के दो बीजों (बिनौले) को जोड़कर भंडारित लकड़ियों में निवास करती है, इसलिए लकड़ी व बिनौले का भंडारण सावधानीपूर्वक करें। जिन किसानों ने अपने खेतों में बीटी नरमा की लकड़ियों को भंडारित करके रखा है या उनके खेतों के आसपास कपास की जिनिंग व बिनौले से तेल निकालने वाली मिल लगती है उन किसानों को अपने खेतों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है, क्योंकि इन किसानों के खेतों में गुलाबी सुंडी का प्रकोप अधिक होता है। विश्वविद्यालय की ओर से कपास की खेती के लिए हर 15 दिन में वैज्ञानिक सलाह जारी की जाती है। क्षेत्र के किसान इसके अनुसार ही सस्य क्रियाएं और कीटनाशकों का प्रयोग करें।
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