किसान ध्यान दें, बासमती धान में नहीं करें इन कीटनाशकों का इस्तेमाल, सरकार ने लगाया अस्थायी प्रतिबंध
प्रकाशित - 02 Sep 2025 by Tractor Junction
जानिए कौनसे हैं ये कीटनाशक और क्यों सरकार ने लिया ये बड़ा फैसला, 30 जिलों में लागू हुआ प्रतिबंध
प्रदेश सरकार की ओर से बासमती धान की खेती में इस्तेमाल किए जाने वाले 11 कीटनाशक का इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया दिया है। राज्य सरकार ने यह प्रतिबंध अस्थाई रूप से लगाया है। इस तरह अब बासमती धान की खेती में उपयोग में आने वाले इन कीटनाशकों के विक्रय, वितरण और उपयोग पर अस्थाई रोक रहेगी। यह प्रतिबंध फिलहाल सितंबर 2025 तक प्रभावी रहेगा। सरकार ने यह निर्णय 30 जिलों में लागू किया गया है। ऐसे में धान कि खेती करने वाले किसानों को इस बात का विशेष ध्यान रखना है कि वे बासमती धान में इन कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं करें और अपनी पैदावार को बेहतर बनाएं।
क्यों लगाया गया बासमती धान की खेती में इन कीटनाशकों पर प्रतिबंध
दरअसल उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से किसानों के हित में यह कदम उठाया गया है। राज्य सरकार की ओर से बासमती चावल के निर्यात को बढ़ावा देने और उसे कीटनाशकों के अवशेषों से मुक्त रखने के लिए यह प्रतिबंध लगाया गया है। अब बासमती धान की खेती में इस्तेमाल होने वाले 11 कीटनाशकों के इस्तेमाल पर अस्थायी रोक रहेगी। सरकार के इस निर्णय का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बासमती चावल अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को पूरा कर सके, जिससे भारत के बासमती चावल के निर्यात को और अधिक बढ़ाया जा सके।
बासमती धान में किन 11 कीटनाशकों के इस्तेमाल पर लगाया गया है प्रतिबंध (List of banned pesticides)
यूपी सरकार की ओर से बासमती धान में इस्तेमाल किए जाने वाले जिन 11 कीटनाशक रसायनों के प्रयोग, बिक्री और वितरण पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया गया है, उनकी लिस्ट इस प्रकार से है:
- ट्राईसाइक्लाजोल (Tricyclazole)
- ब्रूप्रोफेजिन (Bruprofezin)
- एसीफेट (Acephate)
- क्लोरपाइरीफ़ॉस (Chlorpyrifos)
- टेबुकोनाजोल (Tebuconazole)
- प्रोपिकोनाजोल (Propiconazole)
- थायोमेथॉक्सम (Thiamethoxam)
- प्रोफेनोफ़ॉस (Profenophos)
- इमीडाक्लोप्रिड (Imidacloprid)
- कार्बेंडाजिम (Carbendazim)
- कार्बोफ़्यूरान (Carbofuran)
ये सभी कीटनाशक पहले बासमती धान की फसल में बहुत प्रयोग किए जाते थे, लेकिन इनके अवशेष अंतरराष्ट्रीय निर्यात बाजार में उत्पाद की स्वीकार्यता को प्रभावित कर रहे थे। यही कारण है कि राज्य सरकार ने इन कीटनाशकों पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है।
निर्यात में गिरावट बनी प्रतिबंध का कारण
सरकार ने यह कदम यूरोपीय संघ, अमेरिका और खाड़ी देशों जैसे आयातकों की ओर से कीटनाशकों के अवशेष स्तर (MRL) को लेकर लगाए जा रहे कड़े मानकों को ध्यान में रखते हुए उठाया है। वर्ष 2020-21 की तुलना में 2021-22 में बासमती चावल के निर्यात में 15% की गिरावट आई थी। इसके पीछे प्रमुख कारण यही रहा कि अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार बासमती चावल में कीटनाशकों के अवशेष अधिक पाए गए। इस चुनौती को देखते हुए एपीडा (APEDA) और सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय, मेरठ ने राज्य सरकार से इन कीटनाशकों पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की थी। विश्वविद्यालय ने इसके विकल्प के रूप में एकीकृत रोग प्रबंधन (IPM) मॉड्यूल का सुझाव दिया है, ताकि रोगों और कीटों को बिना रासायनिक दवाओं के नियंत्रित किया जा सके।
राज्य के किन जिलों में लागू हुआ प्रतिबंध
उत्तर प्रदेश सरकार ने जिन 30 जिलों में इन कीटनाशकों पर रोक लगाई है, जिनमें आगरा, अलीगढ़, ओरैया, बागपत, बरेली, बिजनौर, बदायूं, बुलंदशहर, एटा, कासगंज, फर्रुखाबाद, फिरोजाबाद, इटावा, गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, हापुड़, हाथरस, मथुरा, मैनपुरी, मेरठ, मुरादाबाद, अमरोहा, कन्नौज, मुजफ्फरनगर, शामली, पीलीभीत, रामपुर, सहारनपुर, शाहजहांपुर और संभल शामिल हैं। इन सभी जिलों में प्रमुख रूप से बासमती चावल की खेती होती है और यही क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए बासमती उत्पादन में योगदान करते हैं।
कृषि विभाग की कीटनाशक विक्रेताओं को चेतावनी और दिशा-निर्देश
कृषि विभाग ने सभी कीटनाशक विक्रेताओं को निर्देशित किया है कि वे इन प्रतिबंधित कीटनाशकों की न तो बिक्री करें और न ही वितरण। साथ ही किसानों को जागरूक करने के लिए भी अभियान चलाया जा रहा है। यदि कोई विक्रेता या किसान इन निर्देशों की अवहेलना करता है, तो उसके खिलाफ कीटनाशी अधिनियम 1968 के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सरकार ने की जागरूकता की पहल
बासमती उत्पादकों और व्यापारियों को इस नीति के तहत जागरूक करने के लिए ग्राम स्तर पर प्रशिक्षण, प्रचार सामग्री और किसानों की कार्यशालाएं भी आयोजित की जा रही हैं। स्थानीय कृषि अधिकारी, विस्तार कार्यकर्ता, और कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) भी इस प्रक्रिया में सहयोग कर रहे हैं।
वैकल्पिक समाधान, एकीकृत रोग प्रबंधन (IPM)
सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय द्वारा सुझाए गए IPM मॉडल को अब बासमती उत्पादकों को अपनाने की सलाह दी जा रही है। इसमें जैविक नियंत्रण, फसल चक्र, रोग प्रतिरोधी किस्मों और उचित फसल प्रबंधन उपाय शामिल हैं।
किसानों के लिए समय रहते सावधानी जरूरी
यह प्रतिबंध भले ही अस्थायी हो, लेकिन यह बासमती चावल के भविष्य और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिहाज से बेहद जरूरी है। यदि किसान इस निर्णय का पालन करते हैं, तो इससे न केवल निर्यात में बढ़ोतरी होगी, बल्कि भारत की कृषि उत्पादों की साख भी वैश्विक स्तर पर मजबूत होगी। सरकार की मंशा किसानों को नुकसान पहुंचाने की नहीं, बल्कि उन्हें लंबी अवधि में लाभ पहुंचाने की है। अतः सभी किसान और विक्रेता सावधानी बरतें, प्रतिबंधित कीटनाशकों का प्रयोग ना करें और वैकल्पिक कृषि प्रबंधन तकनीकों को अपनाएं। किसान राज्य सरकार के इस निर्णय का पालन करें और बासमती की गुणवत्तापूर्ण खेती की ओर कदम बढाएं।
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