किसानों को मालामाल करेगी मल्टीलेयर फार्मिंग, जानें इस खेती के तरीके

प्रकाशित - 13 Aug 2022

किसानों को मालामाल करेगी मल्टीलेयर फार्मिंग, जानें इस खेती के तरीके

इस खेती से होती है 70 प्रतिशत पानी की बचत

भूमिगत जल स्तर हर साल नीचे जाने से किसानों को पानी की समस्या का सामना करना पड़ता है। वहीं आजकल महंगाई के चलते परंपरागत खेती करना मुश्किल होता जा रहा है, इस तरह की खेती में बचत कम होती है। वर्तमान में कृषि वैज्ञानिकों को खेती का नया तरीका ढूंढा है, यह है मल्टीलेयर फार्मिंग। इस तरह की खेती में एक ही खेत में चार से पांच तरह की फसलें पैदा कर सकते हैं। किसानों के लिए यह खेती मालामाल करने वाली साबित हो रही है। यहां ट्रैक्टर जंक्शन पर आपको मल्टीलेयर फार्मिंग के बारे में उपयोगी जानकारी दी जा रही है। इसे अधिक से अधिक शेयर करें ताकि किसानों को इसका लाभ मिल सके।

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क्या है मल्टीलेयर फॉर्मिंग?

बता दें कि मल्टीलेयर फार्मिंग खेती का वह तरीका है जिसमें एक ही समय और एक ही स्थान पर 4 से 5 फसलों की खेती की जाती है। इसमें किसान पहले जमीन में ऐसी फसल लगाए जो कि भूमि के अंदर उगती है। फिर उसी स्थान पर सब्जी और अन्य पौधों को लगा सकते हैं। इसके अलावा फलदार और छायादार पौधे लगा सकते हैं। जब ये फसलें तैयार होने लगती हैं तो एक के बाद एक फसल आपको मिलेगी और इसके अच्छे दाम आपको मालामाल कर सकते हैं।

मल्टीलेयर खेती का प्रशिक्षण क्यों है जरूरी?

मल्टीलेयर खेती में किस्मत आजमाने वाले किसानों को चाहिए कि वे किसी अनुभवी किसान साथी या कृषि अधिकारियों से इस खेती के बारे में उचित प्रशिक्षण ग्रहण करे। इसका कारण यह है कि अलग-अलग इलाकों में जलवायु भी भिन्न होती है ऐसे में किस जलवायु के लिए कौन सी फसल उपयुक्त रहेगी? यह कृषि विशेषज्ञ बेहतर बता सकते हैं। लघु और मझौले किसानों के लिए तो यह खेती सोने पर सुहागा की तरह है। वे कम जमीन होने पर भी इसमें चार-पांच गुना अधिक पैदावार कर सकते हैं। इससे किसानों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति का कायाकल्प हो सकता है।

जमीन की उर्वरा शक्ति में होगा इजाफा

मल्टीलेयर फार्मिंग अपनाने से किसानों को जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में भी फायदा मिलेगा। एक से अधिक फसलों के कारण पेड-पौधों के पत्ते आदि जमीन पर गिर कर प्राकृतिक खाद में बदल जाते हैं। इससे भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ती है। वहीं खाद की बचत होने से लागत कम आएगी और कुल उत्पादन में वृद्धि होगी।

बहुमंजिला इमारत पर भी हो सकती है मल्टीलेयर फार्मिंग

मल्टीलेयर फार्मिंग खेती की ऐसी विधि है जिसे आप जमीन के अलावा अपने मकान की छत पर भी कर सकते हैं। इसके लिए छत पर देसी खाद मिली मिट्टी की मोटी परत बिछानी होगी। इसमें कम गहराई वाली फसल आप आसानी से उगा सकते हैं जैसे गाजर, मूली, पालक, बैंगन, मैथी, भिंडी आदि।

इस तरह से करें फसलों का चयन

मल्टीलेयर फार्मिंग में आप फसलों का चयन कैसे करेंगे? इसके बारे में बता दें कि पहली परत में हल्दी या अदरक उगा सकते हैं। इसके बाद दूसरी लेयर के रूप में ऐसी फसलों का चयन करें जो कम गहराई और कम ऊंचाई वाली हों जैसे साग-सब्जियों की फसलें। इसी तरह तीसरी लेयर में पपीता या अन्य फलदार ऐसे पौधे लगाएं जो कम समय में फल देने लगें। इनके भरपूर दाम आपको बाजार में मिल जाएंगे। अब चौथी लेयर की बारी में आप बेलदार फसल लगाएं। ये जमीन से पोषण तो लेंगी ही लेकिन इनका विस्तार मचान आदि बना कर किया जा सकता है।

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ऐसे होती है पानी की बचत

मल्टीलेयर फार्मिंग में किसानों को फसलों की एक साथ सिंचाई करने का लाभ यह मिलता है कि एक ही फसल में सिंचाई से सभी फसलों को पानी मिल जाता है। इससे एकल फसल की तुलना में करीब 70 प्रतिशत कम पानी का उपयोग होता है। ऐसे में खेती की यह नई तकनीक पानी बचाने में भी सहायक है।

 

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