गेहूं की अगेती बुवाई के लिए ये 5 किस्में हैं बेहतर, जानें पैदावार और खासियत
प्रकाशित - 04 Nov 2026 by Vivek Tailang
जानें, DBW 303, WH 1270 समेत 5 उन्नत किस्मों की विशेषताएं
देश के कई राज्यों में धान की कटाई शुरू हो गई है। इसके साथ ही किसान रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं की बुवाई की तैयारी में जुट गए हैं। गेहूं की अच्छी पैदावार हासिल करने के लिए खेत की तैयारी और समय पर बुवाई के साथ उन्नत बीजों का चुनाव भी बेहद जरूरी है। अलग-अलग किस्मों की पैदावार क्षमता, पकने की अवधि, रोगों से लड़ने की क्षमता और अनुकूल जलवायु अलग-अलग होती है। ऐसे में किसानों को अपने क्षेत्र, सिंचाई की सुविधा और बुवाई के समय के हिसाब से किस्म का चयन करना चाहिए। किसान तक की रिपोर्ट के मुताबिक, गेहूं की पांच किस्में अपनी विशेषताओं के कारण किसानों के लिए उपयोगी हो सकती हैं।
किसान गेहूं की इन 5 किस्मों पर कर सकते हैं विचार
1. DBW 303 (करण वैष्णवी)
DBW 303, जिसे करण वैष्णवी के नाम से भी जाना जाता है, गेहूं की उन्नत किस्म है। इसे भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल ने विकसित किया है। यह उत्तर-पश्चिमी भारत के सिंचित क्षेत्रों में अगेती बुवाई के लिए उपयुक्त बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, इसकी औसत पैदावार करीब 32 क्विंटल प्रति एकड़ और संभावित पैदावार लगभग 39 क्विंटल प्रति एकड़ तक हो सकती है। इसके दानों में करीब 12.1 प्रतिशत प्रोटीन पाया जाता है। यह किस्म पीले और भूरे रतुआ जैसे रोगों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता भी रखती है।
2. WH 1270 किस्म
WH 1270 गेहूं की अगेती किस्म है, जिसे हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय ने विकसित किया है। यह कम अवधि में अच्छी पैदावार और मोटे दानों के लिए जानी जाती है। अनुकूल मौसम और उचित देखभाल मिलने पर इसकी पैदावार करीब 28 से 30 क्विंटल प्रति एकड़ तक हो सकती है। किसान इस किस्म का चयन करने से पहले अपने क्षेत्र में इसकी उपयुक्तता और अनुशंसित बुवाई अवधि की जानकारी जरूर लें।
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3. DBW 327 (करण शिवानी)
DBW 327 को करण शिवानी के नाम से जाना जाता है। इस किस्म की खासियत इसका मजबूत तना है। मजबूत तने के कारण तेज हवा और बारिश की स्थिति में फसल के गिरने यानी बिछने का जोखिम कम हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसकी पैदावार क्षमता 30 क्विंटल प्रति एकड़ से अधिक हो सकती है। हालांकि, वास्तविक उत्पादन मौसम, मिट्टी, सिंचाई और फसल प्रबंधन पर निर्भर करेगा।
4. HD 3226 (पूसा यशस्वी)
HD 3226 यानी पूसा यशस्वी उत्तर-पश्चिमी भारत के सिंचित क्षेत्रों में समय पर बुवाई के लिए उपयुक्त किस्म है। रिपोर्ट में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के हवाले से इसकी औसत पैदावार लगभग 57 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बताई गई है। इसके दानों में करीब 12.8 प्रतिशत प्रोटीन पाया जाता है। यह किस्म पीले, भूरे और काले रतुआ सहित गेहूं के कई प्रमुख रोगों के प्रति अच्छी प्रतिरोधक क्षमता रखती है।
5. DBW 187 (करण वंदना)
DBW 187 को करण वंदना के नाम से भी जाना जाता है। यह किस्म करीब 120 दिनों में पककर तैयार हो जाती है और पीले तथा भूरे रतुआ जैसे प्रमुख रोगों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता रखती है। रिपोर्ट के अनुसार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, असम और पश्चिम बंगाल सहित उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्रों में सिंचित और समय पर बुवाई की स्थिति में इसकी औसत पैदावार करीब 19 क्विंटल प्रति एकड़ बताई गई है। इस किस्म का चुनाव करते समय किसान अपने क्षेत्र के लिए जारी कृषि संबंधी सिफारिशों की पुष्टि कर लें।
गेहूं की बुवाई से पहले इन बातों का रखें ध्यान
अच्छी पैदावार के लिए खेत को अच्छी तरह तैयार करना और स्वस्थ बीज का इस्तेमाल करना जरूरी है। बुवाई से पहले बीज उपचार कृषि विशेषज्ञ की सलाह और उत्पाद के लेबल पर दिए निर्देशों के अनुसार करें। रिपोर्ट में समय पर बुवाई के लिए करीब 40 किलो बीज प्रति एकड़ की मात्रा और कतारों के बीच 22 से 25 सेंटीमीटर दूरी रखने का उल्लेख किया गया है। हालांकि, बीज की सही मात्रा किस्म, बुवाई की विधि और स्थानीय कृषि सिफारिशों के अनुसार अलग हो सकती है। बुवाई के समय खाद का इस्तेमाल मिट्टी की जांच और जरूरत के अनुसार करना चाहिए। फसल को सिंचाई भी उसकी अवस्था, मिट्टी में नमी और मौसम के मुताबिक दें। केवल ज्यादा उत्पादन के दावे के आधार पर बीज न चुनें। अपने जिले और कृषि-जलवायु क्षेत्र के लिए अनुशंसित किस्म को प्राथमिकता दें। किसान स्थानीय कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विश्वविद्यालय से सलाह लेकर सही किस्म चुन सकते हैं।
“गेहूं की अगेती बुवाई की 5 उन्नत किस्मों” के संबंध में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल और उनके जवाब (FAQ):
प्रश्न 1. गेहूं की अगेती बुवाई के लिए कौन-कौन सी किस्में बेहतर हैं?
उत्तर: गेहूं की अगेती बुवाई के लिए DBW 303 (करण वैष्णवी), WH 1270, DBW 327 (करण शिवानी), HD 3226 (पूसा यशस्वी) और DBW 187 (करण वंदना) जैसी किस्मों पर विचार किया जा सकता है। किस्म का चयन अपने क्षेत्र और बुवाई के समय के अनुसार करना चाहिए।
प्रश्न 2. DBW 303 (करण वैष्णवी) गेहूं की पैदावार कितनी है?
उत्तर: DBW 303 की औसत पैदावार करीब 32 क्विंटल प्रति एकड़ और संभावित पैदावार लगभग 39 क्विंटल प्रति एकड़ तक हो सकती है। यह उत्तर-पश्चिमी भारत के सिंचित क्षेत्रों में अगेती बुवाई के लिए उपयुक्त बताई गई है।
प्रश्न 3. WH 1270 गेहूं की किस्म की क्या खासियत है?
उत्तर: WH 1270 को हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय ने विकसित किया है। यह अगेती बुवाई, मोटे दानों और कम अवधि में अच्छी पैदावार की क्षमता के लिए जानी जाती है। अनुकूल परिस्थितियों में इसकी पैदावार करीब 28 से 30 क्विंटल प्रति एकड़ तक हो सकती है।
प्रश्न 4. गेहूं की किस्म DBW 327 (करण शिवानी) की खासियत क्या है?
उत्तर: DBW 327 यानी करण शिवानी का मजबूत तना इसकी प्रमुख विशेषता है। इससे तेज हवा और बारिश के दौरान फसल के गिरने का जोखिम कम हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसकी पैदावार क्षमता 30 क्विंटल प्रति एकड़ से अधिक हो सकती है।
प्रश्न 5. गेहूं की बुवाई के लिए प्रति एकड़ कितना बीज इस्तेमाल करना चाहिए?
उत्तर: समय पर बुवाई के लिए करीब 40 किलो बीज प्रति एकड़ की आवश्यकता होती है। हालांकि, बीज की सही मात्रा किस्म, बुवाई की विधि और स्थानीय कृषि सिफारिशों पर निर्भर करती है। इसलिए बुवाई से पहले कृषि विशेषज्ञ या कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लेना बेहतर रहेगा।
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