एग्री कमोडिटी साप्ताहिक रिपोर्ट: ग्वार में ठहराव, जीरा मजबूत
प्रकाशित - 14 Mar 2026 by Vivek Tailang
सरसों और मक्का पर उत्पादन का दबाव, आगे मांग और निर्यात तय करेंगे बाजार
देश की एग्री कमोडिटी मार्केट में इस सप्ताह कई प्रमुख फसलों के भाव में अलग-अलग रुझान देखने को मिला। ग्वार के बाजार में फिलहाल ठहराव बना हुआ है, जबकि जीरा में मजबूत मांग के कारण कीमतें टिके रहने की संभावना है। सरसों के बाजार में अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और उत्पादन के अनुमान के कारण उतार-चढ़ाव बना हुआ है। वहीं मक्का में वैश्विक बाजार से कुछ समर्थन मिला, लेकिन रिकॉर्ड उत्पादन के अनुमान के कारण तेजी सीमित रहने की संभावना जताई जा रही है।
बाजार एक्सपर्ट्स के अनुसार आने वाले दिनों में बाजार की दिशा मुख्य रूप से निर्यात मांग, आवक और वैश्विक बाजार के संकेतों पर निर्भर करेगी।
ग्वार बाजार में फिलहाल ठहराव
ग्वार के बाजार में इस सप्ताह सीमित दायरे में कारोबार देखने को मिला। उद्योगों से मांग बनी हुई है, लेकिन बड़े स्तर पर नई खरीद नहीं होने के कारण कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव नहीं आया। मंडी आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में ग्वार का औसत भाव करीब 4,900 से 5,100 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास देखा गया। कुछ मंडियों में यह भाव 5,400 रुपये प्रति क्विंटल तक भी पहुंचा। बाजार जानकाराें का कहना है कि ग्वार गम उद्योग की मांग और निर्यात गतिविधियों से बाजार को समर्थन मिल रहा है। वहीं किसानों की सीमित बिक्री भी कीमतों को सहारा दे रही है।
सरसों बाजार में उतार-चढ़ाव
सरसों के बाजार में इस सप्ताह मिलाजुला रुख देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेलों की कीमतों में हलचल और घरेलू आवक बढ़ने से बाजार में अस्थिरता बनी रही। देश की कई मंडियों में सरसों का औसत भाव लगभग 5,900 से 6,300 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास दर्ज किया गया। कुछ मंडियों में अधिकतम भाव 8,000 रुपये प्रति क्विंटल तक देखा गया। व्यापारियों का कहना है कि नई फसल की आवक बढ़ने के साथ बाजार पर दबाव आ सकता है, हालांकि तेल मिलों की मांग बाजार को पूरी तरह गिरने से रोक सकती है।
जीरा में मजबूत मांग से बाजार स्थिर
मसाला फसलों में जीरा का बाजार इस समय अपेक्षाकृत मजबूत बना हुआ है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार जीरा उत्पादन में कमी की आशंका और निर्यात मांग के कारण कीमतों को सहारा मिल रहा है। कुछ प्रमुख मंडियों में जीरा का भाव करीब 18,000 से 19,000 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास देखा गया, जबकि बड़े बाजारों में यह इससे भी अधिक स्तर पर कारोबार करता रहा। वैश्विक बाजार में भी जीरा की आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, क्योंकि भारत में मौसम और बीमारी के कारण उत्पादन में 5 से 20 प्रतिशत तक कमी की आशंका जताई जा रही है।
मक्का को कच्चे तेल से मिला सहारा
मक्का बाजार में इस सप्ताह अंतरराष्ट्रीय बाजार से कुछ समर्थन देखने को मिला, खासकर ऊर्जा बाजार में तेजी के कारण। हालांकि भारत में उत्पादन और बुवाई का क्षेत्र बढ़ने के कारण बड़ी तेजी की संभावना सीमित मानी जा रही है। कुछ मंडियों में मक्का का भाव करीब 1,700 से 1,800 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास दर्ज किया गया। बाजार विश्लेषकों के अनुसार अगर निर्यात मांग मजबूत रहती है तो मक्का में कीमतों को सहारा मिल सकता है, लेकिन रिकॉर्ड उत्पादन की स्थिति में तेजी सीमित रह सकती है।
प्रमुख फसलों के भाव (औसत भाव)
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फसल |
भाव (रुपये/क्विंटल) |
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ग्वार |
4900 – 5200 |
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सरसों |
5900 – 6400 |
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जीरा |
18000 – 19500 |
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मक्का |
1700 – 1850 |
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बासमती धान (1509) |
3000 – 3400 |
एग्री सेक्टर के शेयरों में सीमित हलचल
इस सप्ताह एग्री सेक्टर से जुड़े कई शेयरों में भी सीमित उतार-चढ़ाव देखने को मिला। खाद, बीज और एग्री प्रोसेसिंग कंपनियों के शेयरों में निवेशकों की रुचि बनी रही, लेकिन बाजार में बड़ी तेजी नहीं आई। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कमोडिटी बाजार में स्थिरता और निर्यात मांग मजबूत होती है तो आने वाले समय में एग्री सेक्टर के शेयरों में बेहतर प्रदर्शन देखने को मिल सकता है।
एग्री मार्केट को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारण
- निर्यात मांग में बदलाव
- नई फसल की आवक
- मौसम और उत्पादन अनुमान
- अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार
- खाद्य तेल और ऊर्जा बाजार की चाल
एग्री सेक्टर के प्रमुख शेयर जिन पर निवेशकों की नजर
- यूपीएल (UPL)
- पीआई इंडस्ट्रीज (PI Industries)
- कोरोमंडल इंटरनेशनल (Coromandel International)
- चंबल फर्टिलाइजर्स (Chambal Fertilisers)
- रैलिस इंडिया (Rallis India)
आगे क्या रहेगा बाजार का रुख
कुल मिलाकर इस सप्ताह एग्री कमोडिटी बाजार में स्थिरता और सीमित उतार-चढ़ाव का माहौल रहा। विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में बाजार की दिशा इन प्रमुख कारकों पर निर्भर करेगी:
- निर्यात मांग और वैश्विक बाजार
- नई फसलों की आवक
- मौसम और उत्पादन अनुमान
- तेल और ऊर्जा बाजार का प्रभाव
अगर निर्यात मांग मजबूत रहती है तो जीरा और ग्वार जैसे कमोडिटी में तेजी संभव है, जबकि सरसों और मक्का में आवक और उत्पादन के कारण सीमित दायरे में कारोबार जारी रह सकता है।
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