ईरान-अमेरिका तनाव के बीच ग्वार के दामों में तेज उछाल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी मांग और सट्टा गतिविधियों से मंडियों में तेजी, किसानों को बेहतर भाव मिलने की उम्मीद

मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारतीय कृषि जिंस बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। खासतौर पर ग्वार और ग्वार गम के दामों में हाल के दिनों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। मंडियों और वायदा बाजार में कीमतों में तेजी आने से किसानों और व्यापारियों के बीच नई उम्मीदें जगी हैं।

जानकारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़े तनाव और ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के कारण ग्वार से जुड़े उत्पादों की मांग में बढ़ोतरी की संभावना बन रही है। यही कारण है कि पिछले कुछ दिनों में ग्वार के भाव में तेजी का रुख देखने को मिल रहा है। 

वैश्विक हालात का असर ग्वार बाजार पर

दरअसल, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़े सैन्य तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। फरवरी के अंत से शुरू हुए इस संघर्ष के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतों में भारी वृद्धि दर्ज की गई और कई दिनों में यह 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। ऊर्जा बाजार में इस उथल-पुथल का असर उन उत्पादों पर भी पड़ता है जिनका इस्तेमाल तेल और गैस उद्योग में होता है। ग्वार गम भी ऐसा ही एक उत्पाद है, जिसका उपयोग तेल और गैस की ड्रिलिंग प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर किया जाता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा क्षेत्र में गतिविधि बढ़ती है या भविष्य में मांग बढ़ने की संभावना बनती है, तो ग्वार गम की मांग भी बढ़ जाती है। इसी संभावना के कारण बाजार में ग्वार के दामों में तेजी देखने को मिल रही है।

मंडियों में बढ़ी हलचल

राजस्थान, हरियाणा और गुजरात की कई मंडियों में ग्वार के भाव में तेजी का माहौल बना हुआ है। व्यापारी बताते हैं कि अंतरराष्ट्रीय घटनाओं के चलते बाजार में सट्टा और निवेश की गतिविधियां बढ़ी हैं। कई किसानों ने भी फिलहाल अपनी उपज को बाजार में बेचने के बजाय रोककर रखना शुरू कर दिया है, क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि आने वाले समय में कीमतों में और वृद्धि हो सकती है। इस कारण मंडियों में आवक भी कुछ हद तक सीमित हो गई है, जिससे कीमतों को और सहारा मिला है। 

निर्यात मांग का भी असर

भारत दुनिया में ग्वार उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र है और इसका बड़ा हिस्सा निर्यात किया जाता है। ग्वार गम का उपयोग मुख्य रूप से तेल और गैस उद्योग में ड्रिलिंग के दौरान किया जाता है, जिससे इसकी अंतरराष्ट्रीय मांग सीधे ऊर्जा बाजार से जुड़ी रहती है। अगर वैश्विक ऊर्जा गतिविधियां तेज होती हैं या तेल-गैस कंपनियां उत्पादन बढ़ाती हैं, तो ग्वार गम की मांग में भी तेजी आती है। ऐसे में भारतीय ग्वार बाजार को भी इसका फायदा मिलता है। 

ग्वार के भाव में कितनी आई तेजी

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बाद ग्वार बाजार में तेजी का माहौल देखने को मिला है। पिछले कुछ दिनों में ग्वार सीड के भाव में करीब 400 से 600 रुपये प्रति क्विंटल तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पहले जहां ग्वार सीड का भाव लगभग 5200–5300 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास चल रहा था, वहीं अब यह बढ़कर करीब 5700–5900 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है।
वहीं ग्वार गम के भाव में भी 700 से 1000 रुपये प्रति क्विंटल तक तेजी देखने को मिली है। बाजार जानकारों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय मांग बढ़ने और पश्चिम एशिया की स्थिति को देखते हुए ग्वार बाजार में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। बता दें कि अलग-अलग मंडियों में ग्वार के भाव में थोड़ा अंतर हो सकता है।

किसानों के लिए बेहतर अवसर

ग्वार की कीमतों में आई तेजी को किसानों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। खासकर राजस्थान जैसे राज्यों में जहां ग्वार की खेती बड़े पैमाने पर होती है, वहां किसानों को बेहतर दाम मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तनाव की स्थिति बनी रहती है और ऊर्जा क्षेत्र में गतिविधियां बढ़ती हैं, तो ग्वार की कीमतों में आगे भी मजबूती बनी रह सकती है। हालांकि बाजार में उतार-चढ़ाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। 

आगे क्या रहेगा बाजार का रुख

व्यापारियों के अनुसार फिलहाल बाजार का रुख अंतरराष्ट्रीय घटनाओं और निर्यात मांग पर निर्भर करेगा। अगर वैश्विक ऊर्जा बाजार में तेजी बनी रहती है तो ग्वार और ग्वार गम की कीमतों में और मजबूती देखने को मिल सकती है। वहीं, यदि स्थिति सामान्य होती है या निर्यात मांग कमजोर पड़ती है, तो कीमतों में कुछ नरमी भी आ सकती है। इसलिए किसान और व्यापारी दोनों फिलहाल बाजार की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। कुल मिलाकर वैश्विक तनाव के बीच ग्वार बाजार में आई यह तेजी किसानों के लिए एक नया अवसर बनकर उभर सकती है, बशर्ते वे सही समय पर अपनी उपज का विक्रय करें।

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