दाल-चावल बाजार में उतार-चढ़ाव: उड़द-तूर में दबाव, चना-मटर में सुधार, बासमती में स्थिरता
प्रकाशित - 17 Mar 2026 by Vivek Tailang
देश के कृषि जिंस बाजार में इस समय मिलाजुला रुख, वैश्विक स्तर पर सप्लाई और आयात नितियों का प्रभाव
देश के कृषि जिंस बाजार में इस समय मिलाजुला रुख देखने को मिल रहा है। एक ओर जहां उड़द और तूर दाल पर दबाव बना हुआ है, वहीं चना और मटर में गिरावट के बाद रिकवरी देखने को मिली है। मूंगफली (ग्राउंडनट) बाजार संतुलन की स्थिति में है, जबकि बासमती चावल में मांग स्थिर बनी हुई है। वैश्विक स्तर पर सप्लाई और आयात नीतियां इन सभी कमोडिटी के ट्रेंड को प्रभावित कर रही हैं।
उड़द और तूर दाल पर दबाव क्यों
उड़द और तूर दाल के बाजार में फिलहाल सुस्ती का माहौल है। इसका प्रमुख कारण सरकार द्वारा आयात नीति में ढील देना है। वर्तमान में पीली मटर, तूर और उड़द के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति 31 मार्च 2026 तक बढ़ाई गई है, जिससे घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ी है और कीमतों पर दबाव बना हुआ है। ग्लोबल मार्केट की बात करें तो अफ्रीका और म्यांमार जैसे देशों से दालों की सप्लाई सामान्य बनी हुई है, जिससे भारत में आयात का दबाव और बढ़ा है। इसके चलते निकट भविष्य में उड़द और तूर में बड़ी तेजी की संभावना कम नजर आ रही है, हालांकि लंबी अवधि में मांग बढ़ने से सुधार संभव है।
चना बाजार में गिरावट के बाद सुधार
चना बाजार में हाल ही में गिरावट देखने को मिली थी, लेकिन अब इसमें रिकवरी के संकेत मिल रहे हैं। रबी फसल की आवक बढ़ने के बावजूद मजबूत मांग के कारण कीमतों में स्थिरता लौट रही है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा दलहन उत्पादक देश है और चना इसकी प्रमुख फसल है, जिससे घरेलू मांग हमेशा मजबूत बनी रहती है। व्यापारियों का मानना है कि यदि निर्यात में सुधार होता है और सरकारी स्टॉक सीमित रहता है, तो चना के दाम में आगे और तेजी देखने को मिल सकती है।
मूंगफली बाजार संतुलन में
मूंगफली (ग्राउंडनट) बाजार इस समय संतुलन की स्थिति में है। एक ओर जहां उत्पादन अच्छा रहा है, वहीं तेल मिलों की मांग भी बनी हुई है। हाल के आंकड़ों के अनुसार मूंगफली तेल का औसत भाव लगभग 7000–8000 रुपए प्रति क्विंटल के बीच बना हुआ है, जो बाजार को स्थिरता प्रदान कर रहा है। ग्लोबल स्तर पर वनस्पति तेलों की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर भी मूंगफली पर पड़ रहा है, लेकिन फिलहाल बाजार में बड़ी तेजी या गिरावट के संकेत नहीं हैं।
मटर में मजबूत रिकवरी
मटर (पीज) के बाजार में हाल ही में तेज गिरावट के बाद अब जोरदार रिकवरी देखने को मिल रही है। आयातित मटर की उपलब्धता और घरेलू उत्पादन के बीच संतुलन बनने से कीमतों में सुधार आया है। हालांकि, आगे की तेजी इस बात पर निर्भर करेगी कि आयात नीति में क्या बदलाव होते हैं और घरेलू स्टॉक कितना उपलब्ध रहता है।
बासमती चावल में स्थिरता
बासमती चावल के बाजार में फिलहाल स्थिरता बनी हुई है। निर्यात मांग सामान्य है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय बासमती की अच्छी पकड़ बनी हुई है। मध्य पूर्व और यूरोप के देशों में मांग स्थिर रहने से कीमतों में बड़े उतार-चढ़ाव नहीं देखे जा रहे हैं। हालांकि, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां और डॉलर के उतार-चढ़ाव भविष्य के ट्रेंड को प्रभावित कर सकते हैं।
ग्लोबल ट्रेंड का असर
- पूरे कमोडिटी बाजार पर ग्लोबल फैक्टर्स का गहरा असर है।
- दालों में आयात नीति और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई
- तेल बीजों में क्रूड ऑयल और वेजिटेबल ऑयल के दाम
- चावल में निर्यात मांग और करेंसी मूवमेंट
इन सभी कारकों के चलते आने वाले समय में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
आगे क्या रह सकता है बाजार का रुख
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार उड़द और तूर में फिलहाल दबाव बना रह सकता है। चना और मटर में धीरे-धीरे तेजी की संभावना बनी हुई है। मूंगफली में संतुलित बाजार और बासमती चावल में स्थिर रुख रह सकता है। कुल मिलाकर, बाजार अभी ट्रांजिशन फेज में है, जहां सप्लाई और डिमांड का संतुलन ही कीमतों की दिशा तय करेगा।
प्रमुख जिंसों के भाव और बाजार ट्रेंड (अनुमानित)
|
जिंस (Commodity) |
औसत भाव (₹/क्विंटल) |
बाजार रुख |
मुख्य वजह |
|
उड़द दाल |
8000 – 8800 |
कमजोरी |
आयात बढ़ने से दबाव |
|
तूर दाल (अरहर) |
8500 – 9500 |
नरमी |
ड्यूटी-फ्री आयात जारी |
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चना |
5200 – 5800 |
सुधार |
मांग मजबूत, गिरावट के बाद रिकवरी |
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मटर (पीज) |
3000 – 3400 |
तेजी |
गिरावट के बाद मजबूत उछाल |
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मूंगफली |
5500 – 6500 |
स्थिर |
सप्लाई और मांग संतुलित |
|
मूंगफली तेल |
7000 – 8000 |
स्थिर |
वेजिटेबल ऑयल ट्रेंड का असर |
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बासमती धान (1509) |
3200 – 3600 |
स्थिर |
निर्यात मांग सामान्य |
|
बासमती चावल |
7000 – 9000 |
स्थिर |
इंटरनेशनल डिमांड बनी हुई |
नोट:
- भाव अलग-अलग मंडियों में थोड़ा ऊपर-नीचे हो सकते हैं
- ये औसत बाजार ट्रेंड पर आधारित अनुमानित रेंज है
- आयात नीति और ग्लोबल मार्केट के अनुसार बदलाव संभव
किसानों को सलाह
उपरोक्त दिए गए जिंसों/फसलों के अनुमानित औसत भाव हैं। मंडी भावों में प्रतिदिन उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी रहती है। ऐसे में किसानों को चाहिए कि वे अपनी फसल बेचने से पहले अपने क्षेत्र की निकटतम मंडी से भावों की जानकारी अवश्य लें और उसके बाद ही अपनी फसल को बेचने के संबंध में उचित निर्णय लें।
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