कटनी के किसान सुधीर ने बकरी पालन से कमाए 5 लाख रुपए

सरकार से मिली सहायता, खेती के साथ पशुपालन बन रहा आमदनी का नया जरिया

Earn 5 Lakh Rupees from Goat Rearing : सरकार की ओर से किसानों को खेती के साथ ही पशुपालन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके लिए किसानों को सरकार की ओर से सब्सिडी का लाभ भी प्रदान किया जाता है। इससे किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं। आज हम एक ऐसे ही किसान की सेक्सेस स्टोरी आपके साथ शेयर कर रहे हैं जिन्होंने सरकारी सहायता से खेती के साथ बकरी पालन का काम करके अपनी आय में बढोतरी की। यह किसान मध्यप्रदेश के कटनी जिले से हैं और इन्होंंने बकरी पालन के काम से 5 लाख रुपए तक की कमाई की है। आज हम कटनी के किसान सुधीर की सफलता की कहानी आपके सामने प्रस्तुत कर रहे हैं कि कैसे उन्होंने खेती के साथ ही बकरी पालन करके अपनी इनकम को बढ़ाया जो अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्पद साबित हो रही है। आइए जानते हैं, इसके बारे में। 

एक साल में कमाए 5 लाख रुपए

कटनी जिले के गांव खिरहनी कटंगी कला के किसान सुधीर कुमार चंद्राकर ने खेती के साथ बकरी पालन कर मात्र एक साल के भीतर साढ़े 5 लाख रुपए की अतिरिक्त आमदनी अर्जित कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है। यह सफलता उन्होंने राष्ट्रीय पशुधन मिशन योजना के तहत सरकार की ओर से मिलने वाले 50 प्रतिशत अनुदान की सहायता से हासिल की है। सुधीर ने पशुपालन को न केवल अपनी आय का नया जरिया बनाया है, बल्कि आस-पास के ग्रामीणों को भी पशुपालन से जोड़ने का काम किया है। उनके बकरी फार्म पर अन्य किसान भी पहुंचकर बकरी पालन के आधुनिक तरीकों को सीख रहे हैं। यह पहल ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देने के साथ ही किसानों की आर्थिक दशा सुधारने में महत्वपूर्ण साबित हो रही है।

बकरी पालन के लिए सरकार से मिली 50 प्रतिशत की सब्सिडी

पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग के उप संचालक डॉ. आर. के. सोनी ने बताया कि राष्ट्रीय पशुधन मिशन योजना के तहत सुधीर कुमार चंद्राकर ने 300 बकरियों और 15 ब्रीडेबल बकरों के साथ बकरी पालन की शुरुआत की। इस प्रोजेक्ट की कुल लागत लगभग 60 लाख 2 हजार 500 रुपए थी। योजना के अनुसार किसानों को कुल प्रोजेक्ट लागत का 50 प्रतिशत यानी करीब 30 लाख रुपए अनुदान के रूप में दिया जाता है। सुधीर को इसका 15 लाख रुपए की पहली किस्त मिल चुकी है और जल्द ही बाकी राशि भी मिलने वाली है।

शिक्षा और अनुभव के साथ आर्थिक संघर्ष से उबरने की कहानी

मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त सुधीर कुमार चंद्राकर खेती के साथ-साथ छोटे-मोटे निर्माण कार्य भी करते हैं। उन्होंने बताया कि ठेकेदारी के काम के बावजूद आर्थिक तंगी से जूझना पड़ता था। तब पशुपालन विभाग ने राष्ट्रीय पशुधन मिशन योजना के तहत बकरी पालन और अनुदान की जानकारी दी। सुधीर ने योजना का लाभ उठाकर एक साल के भीतर 50 बकरों को बिक्री के लिए तैयार किया और प्रत्येक बकरे को 10 से 15 हजार रुपए में बेचकर 5 लाख 50 हजार रुपए की अतिरिक्त आय अर्जित की। यह आय खेती और ठेकेदारी से मिलने वाली आमदनी के अलावा रही, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति काफी मजबूत हुई।

पशुपालन से जुड़ी ग्रामीण आर्थिक समृद्धि की पहल

सुधीर ने बताया कि उन्होंने अपने अनुभव से प्रेरणा लेकर अन्य ग्रामीणों को भी राष्ट्रीय पशुधन मिशन योजना का लाभ लेने और पशुपालन जैसे बकरी, भेड़, मुर्गी और शूकर पालन से अतिरिक्त आमदनी कमाने की सलाह दी है। इससे न केवल उनके गांव में रोजगार के अवसर बढ़े हैं, बल्कि कई परिवार आर्थिक रूप से मजबूत हुए हैं।

सरकारी योजनाओं से ग्रामीण विकास की राह

पशुपालन ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के साथ ही किसानों की दैनिक आय बढ़ाने का एक कारगर जरिया बन चुका है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार कई योजनाएं चला रही है, जिनका उद्देश्य युवाओं और किसानों को पशुपालन से जोड़ना है। राष्ट्रीय पशुधन मिशन योजना भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसके तहत पशु पालन के लिए आवश्यक संसाधन और वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

बकरी पालन के लिए मिलता है प्रशिक्षण

डॉ. आर. के. सोनी ने कहा कि योजना के तहत लाभार्थियों को बकरियों की क्वालिटी, बेहतर प्रबंधन तकनीक और बीमारियों से बचाव के लिए प्रशिक्षण भी दिया जाता है, जिससे पशुपालन का व्यवसाय लाभकारी हो सके। उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे इस योजना का लाभ उठाकर अपने रोजगार और आय के स्रोत को मजबूत करें।

सुधीर की कहानी से मिली प्रेरणा

सुधीर के फार्म पर आए कई लोग बकरी पालन की तकनीक सीख रहे हैं और अब वे भी अपने गांव में छोटे-बड़े पैमाने पर पशुपालन शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं। यह न केवल उनकी आर्थिक स्थिति सुधारने का जरिया है, बल्कि ग्रामीण समाज में आत्मनिर्भरता और समृद्धि का संदेश भी फैल रहा है। सुधीर के इस प्रयास ने यह साबित कर दिया है कि सरकारी योजनाओं के सही लाभ और ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं की सक्रिय भागीदारी से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

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