सब्सिडी पर मिली मुर्राह भैंस ने बदली किसानों की किस्मत, ₹25 हजार महीना कमा रहे लाभार्थी
प्रकाशित - 21 Jan 2026 by Vivek Tailang
किस सरकारी योजना के तहत हुआ भैंस वितरण और कैसे बढ़ रही है दूध से आय
मध्यप्रदेश शासन की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना ग्रामीण अंचलों में पशुपालकों के जीवन में आर्थिक सशक्तिकरण की नई कहानी लिख रही है। इस योजना के माध्यम से पशुपालन को केवल पारंपरिक आजीविका तक सीमित न रखकर एक लाभकारी और व्यवस्थित व्यवसाय के रूप में स्थापित किया जा रहा है। बालाघाट जिले के विकासखंड लालबर्रा अंतर्गत ग्राम कनकी के पशुपालक संतोष बघेल इसकी एक जीवंत और प्रेरणादायक मिसाल बनकर सामने आए हैं।
योजना से बदली पशुपालक की आर्थिक स्थिति
लगभग दो माह पूर्व संतोष बघेल ने मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना का लाभ लेते हुए हरियाणा के रोहतक क्षेत्र से मुर्राह नस्ल की दो उन्नत भैंसों का चयन स्वयं किया। इस क्रय प्रक्रिया में कुल 11 हितग्राही शामिल रहे, जिनके साथ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुरेंद्र कुमार मर्सकोले भी मौजूद रहे। योजना के तहत पशुओं का चयन पूरी पारदर्शिता और तकनीकी जांच के बाद किया गया, ताकि हितग्राहियों को गुणवत्तापूर्ण नस्ल मिल सके।
50 प्रतिशत सब्सिडी के साथ मिली सुविधा
मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना के अंतर्गत एक इकाई की कुल लागत 2,95,000 रुपए निर्धारित की गई थी, जिसमें 50 प्रतिशत हितग्राही अंशदान शामिल रहा। खास बात यह है कि इस लागत में तीन वर्षों का पशु बीमा और परिवहन व्यय भी सम्मिलित किया गया, जिससे पशुपालकों को आर्थिक सुरक्षा और जोखिम से बचाव का लाभ मिला। इस सुविधा ने छोटे और मध्यम पशुपालकों के लिए योजना को और अधिक आकर्षक बना दिया है।
दुग्ध उत्पादन में आई उल्लेखनीय वृद्धि
उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवाएं, जिला बालाघाट डॉ. एन. डी. पुरी द्वारा किए गए भौतिक सत्यापन में यह सामने आया कि क्रय के समय प्रत्येक भैंस का दुग्ध उत्पादन 8 से 9 लीटर प्रतिदिन था। वर्तमान में यह बढ़कर 12 लीटर प्रतिदिन प्रति भैंस तक पहुंच गया है। बेहतर नस्ल, संतुलित आहार, समय पर टीकाकरण और नियमित पशु चिकित्सा देखरेख के कारण दुग्ध उत्पादन में यह उल्लेखनीय वृद्धि संभव हो सकी।
हर महीने 25 हजार रुपए की शुद्ध आय
संतोष बघेल बताते हैं कि दूध बिक्री से होने वाली कुल आय में से जब चारा, देखभाल, दवाइयों और अन्य खर्च घटा दिए जाते हैं, तब भी उन्हें लगभग 25,000 रुपए प्रतिमाह की शुद्ध आय प्राप्त हो रही है। यह आय उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही है और उन्हें भविष्य की योजनाएं बनाने का आत्मविश्वास भी दे रही है। पशुपालन अब उनके लिए सिर्फ सहायक काम नहीं, बल्कि मुख्य आय का स्रोत बन चुका है।
अन्य पशुपालकों के लिए बन रहे प्रेरणा स्रोत
संतोष बघेल की इस सफलता से प्रेरित होकर विकासखंड लालबर्रा क्षेत्र के अन्य पशुपालक भी मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना के प्रति रुचि दिखा रहे हैं। कई पशुपालक आगामी वर्ष योजना में आवेदन करने के लिए पशु चिकित्सा संस्थाओं और विभागीय कार्यालयों से जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को संगठित और व्यवसायिक रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रहा संबल
मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना न केवल पशुपालकों की आय में निरंतर वृद्धि कर रही है, बल्कि मध्यप्रदेश को दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में भी एक सशक्त कदम है। यह योजना ग्रामीण पशुपालकों के लिए स्थायी आजीविका, आत्मनिर्भरता और समृद्धि का भरोसेमंद माध्यम बनकर उभर रही है। सरकार की यह पहल स्पष्ट रूप से दिखाती है कि योजनाबद्ध समर्थन और तकनीकी मार्गदर्शन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दी जा सकती है।
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