अयोध्या में बनेगी प्रतिदिन 9 टन फूलों से धूपबत्ती, महिलाओं को मिल सकेगा रोजगार

8000  वर्ग फीट में बना है धूपबत्ती बनाने का प्लांट, CM योगी ने लॉन्च की परियोजना

अयोध्या में 22 जनवरी को श्रीरामलला की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम होने के साथ ही प्रतिदिन लाखों की संख्या में लोगों के राम मंदिर पहुंचने की उम्मीद है। ऐसे में मंदिर में काफी संख्या में फूल व उससे बनी मालाओं को चढ़ाया जाएगा। फूलों से मंदिर परिसर में गंदगी न हो इस बात का खास ध्यान रखा जा रहा है। भगवान श्री राम के चरणों में चढ़े हुए फूलों का सही उपयोग हो सके, इसके लिए अयोध्या नगर निगम ने एक अनूठी पहल शुरू की है। इसके तहत मंदिर में जो भी फूल या मालाएं चढ़ाई जाएंगी उनसे सुगंधित धूपबत्ती तैयार की जाएगी। इससे यहां महिलाओं को रोजगार मिलेगा और मंदिर की आय में भी वृद्धि होगी।

9 मीट्रिक टन फूल वेस्ट रिसाइकिल किए जाने की उम्मीद

एक अनुमान के मुताबिक अयोध्या धाम के मंदिरों से प्रतिदिन 9 मीट्रिक टन वेस्ट फूल इकट्‌टठा होने की उम्मीद है। इसे रिसाइकिल किया जाएगा और इसके बाद प्रोप्रेस करके सुगंधित धूपबत्ती तैयार की जाएगी। अभी यहां के मंदिरों से प्रतिदिन 2.3 मीट्रिक टन फूल ही इट्‌टठा हो रहे हैं जिनसे सुगंधित धूपबत्ती तैयार की जा रही है। धूपबत्ती बनाने का काम महिलाओें द्वारा किया जा रहा है। 

फूलों की प्रोसेसिंग में लाई जाएगी तेजी

अयोध्या विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष विशाल सिंह के मुताबिक श्री रामलला के प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम के बाद फूलों से धूपबत्ती बनाने के काम में तेजी लाई जाएगी। अयोध्या में प्रति वर्ष अनगिनत संख्या में तीर्थयात्री व श्रद्धालु आते हैं। वह मंदिरों में फूल व मालाएं चढ़ाते हैं जिससे काफी मात्रा में फूलों का ढेर लग जाता है। इस पुष्प को एकत्र करके प्राकृतिक अगरबत्ती में बदला जाता है। यह पहल यहां के मंदिरों में चढ़ाए गए फूलों के अवशिष्ट को नया जीवन प्रदान करने का काम करती है। अब इस पहल को और आगे बढ़ाया जाएगा जिससे रोजगार के और अवसर पैदा होंगे।

आयोध्या में कैसे शुरू हुआ फूलों से धूपबत्ती बनने का काम

एडीएम उपाध्यक्ष के ओएसडी विनीत पाठक के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 21 अक्टूबर 2023 को अयोध्या के मंदिरों में लोगों द्वारा चढ़ाए गए फूलों से बनी बांस रहित धूपबत्ती को लॉन्च किया था। यह परियोजना अयोध्या नगर निगम और नमामि गंगे कार्यक्रम से चलाई जा रही है। इसकी जिम्मेदारी फूल नाम के संगठन को सौंपी गई है।

कितने वर्ग फीट में फैला हुआ है फूल से धूपबत्ती बनाने का प्लांट

अभी राममंदिर से प्रतिदिन 2.3 मीट्रिक टन अपशिष्ट फूलों का पुनर्चक्रण किया जा रहा है। धूपबत्ती बनाने प्लांट 8000 वर्ग फीट क्षेत्र में स्थापित किया हुआ है। इस प्लांट में अभी करीब 20 महिलाएं काम कर रही हैं। आने वाले समय में मंदिर से करीब 9 मीट्रिक टन फूलों के अपशिष्ट का पुनर्चक्रण सुनिश्चित किया जाएगा। इससे यहां लगे प्लांट में करीब 275 महिलाओं को रोजगार मिल सकेगा। इतना ही नहीं, यहां आने वाले लोगों के लिए धूपबत्ती बनाने की प्रक्रिया देखने, विधि सीखने और हस्तनिर्मित धूपबत्ती ले जाने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी। इसके अलावा तीर्थयात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी होने पर फूलों के पुनर्चक्रण के लिए बड़े संयंत्र की स्थापना की जाएगी।

अयोध्या के किन मंदिरों से किया जा रहा है फूलों का संग्रह

फूलों से धूपबत्ती बनाने के लिए अयोध्या के कई मंदिरों से फूलों का संग्रह किया जा रहा है। जिन मंदिरों से फूलों संग्रह किया जा रहा है उनमें स्वामीनारायण मंदिर, नागेश्वर नाथ मंदिर, हनुमान गढ़ी, कनक भवन, बड़े देवकाली मंदिर, छोटे देवकाली मंदिर, श्री काले राम मंदिर, गोरे राम मंदिर सहित राम जन्मभूमि मंदिर शामिल हैं, जहां से पुष्पों का संग्रह किया जा रहा है।

किसानों को क्या होगा लाभ

मंदिर में चढ़ने वाले फूलों से धूपबत्ती निर्माण होने से एक ओर महिलाओं को रोजगार मिल सकेगा तो दूसरी ओर फूलों की खेती करने वाले किसानों को भी लाभ होगा। मंदिर आने वाले भक्त फूल और मालाएं खरीदेंगे। इससे फूलों की डिमांड पहले से अधिक हो जाएगी और इसका सीधा फायदा फूलों की खेती करने वाले और फूल मालाएं बचने वालों को होगा। उनका काम पहले से अधिक चलेगा और उनकी कमाई में भी इजाफा होगा, क्योंकि राम मंदिर बनने से यहां प्रतिदिन लाखों की संख्या में देश-विदेश से श्रद्धालु श्रीरामलला के दर्शन को आएंगे। बता दें कि किसानों को फूलों की खेती के लिए सरकार की ओर से सब्सिडी भी दी जाती है। ऐसे में किसान सरकार की ओर से फूलों की खेती पर सब्सिडी का लाभ उठाकर इसकी खेती से काफी बेहतर कमाई कर सकते हैं।

ट्रैक्टर जंक्शन हमेशा आपको ट्रैक्टर इंडस्ट्री और खेती से संबंधित सटीक जानकारी देकर अपडेट रखता है। ट्रैक्टर और कृषि उपकरणों के नए मॉडल और उनके उपयोग की जानकारी आपको सबसे पहले ट्रैक्टर जंक्शन पर मिलती है। हम सरकारी योजनाओं की खबरों को प्रमुखता से प्रकाशित करते हैं। हमारी वेबसाइट पर प्रमुख ट्रैक्टर कंपनियों मैसी ट्रैक्टर, जॉन डियर ट्रैक्टर आदि की मासिक सेल्स रिपोर्ट सबसे ज्यादा पढ़ी जाती है। अगर आप मासिक सदस्यता प्राप्त करना चाहते हैं तो हमसे संपर्क करें।

अगर आप किफायती कीमत पर नया ट्रैक्टर खरीदना चाहते हैं तो महिंद्रा, स्वराज, टैफे, सोनालिका, जॉन डियर आदि कंपनियों में से उचित ट्रैक्टर का चयन कर सकते हैं। साथ ही हम आपको ट्रैक्टर लोन ( Tractor Loan ) की सुविधा भी प्रदान करते हैं।

अगर आप नए जैसे पुराने ट्रैक्टर व कृषि उपकरण बेचने या खरीदने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार और विक्रेता आपसे संपर्क करें और आपको अपने ट्रैक्टर या कृषि उपकरण का अधिकतम मूल्य मिले तो अपने बिकाऊ ट्रैक्टर / कृषि उपकरण को ट्रैक्टर जंक्शन के साथ शेयर करें।

सर्टिफाइड पुराने ट्रैक्टर्स

स्वराज 855 एक्स एम

48 एचपी | 2014 Model | देवास, मध्यप्रदेश

₹ 2,17,000
प्रमाणित
icon icon-phone-callविक्रेता से संपर्क करें
पॉवर ट्रैक 434 डीएस

35 एचपी | 2010 Model | देवास, मध्यप्रदेश

₹ 1,30,000
प्रमाणित
icon icon-phone-callविक्रेता से संपर्क करें
पॉवर ट्रैक यूरो 50

50 एचपी | 2021 Model | रायसेन, मध्यप्रदेश

₹ 3,51,150
प्रमाणित
icon icon-phone-callविक्रेता से संपर्क करें
मैसी फर्ग्यूसन 7250

46 एचपी | 2012 Model | अजमेर, राजस्थान

₹ 2,50,000
प्रमाणित
icon icon-phone-callविक्रेता से संपर्क करें

सभी देखें

ट्रैक्टर ऑफ़र जांचें
ट्रैक्टर की कीमत जानें