सरकार का बड़ा फैसला, भूमि अधिग्रहण पर किसानों को मिलेगा अधिक मुआवजा

Share Product प्रकाशित - 23 Apr 2026 by Vivek Tailang

सरकार का बड़ा फैसला, भूमि अधिग्रहण पर किसानों को मिलेगा अधिक मुआवजा

विकास परियोजनाओं के लिए ली जाने वाली जमीन पर अब पहले से 4 गुना तक मुआवजे का प्रावधान

मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों के हित में एक बड़ा और अहम फैसला लेते हुए भूमि अधिग्रहण नीति में महत्वपूर्ण बदलाव को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया कि अब विकास परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की जाने वाली जमीन पर किसानों को पहले से चार गुना तक मुआवजा दिया जाएगा। इसके लिए वर्ष 2015 के भूमि अधिग्रहण नियमों में संशोधन को भी मंजूरी मिल गई है।

सरकार के इस फैसले को किसानों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से भूमि अधिग्रहण में उचित मुआवजे की मांग उठती रही है। विभिन्न किसान संगठनों, खासकर भारतीय किसान संघ ने लगातार यह मुद्दा उठाया था कि मौजूदा मुआवजा दरें किसानों के हित में पर्याप्त नहीं हैं। सरकार ने इस मांग को गंभीरता से लेते हुए नीति में बड़ा बदलाव किया है। 

गुणांक बढ़ने से बदली पूरी व्यवस्था

भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में अब तक गुणांक 1 लागू था, जिसके चलते किसानों को सीमित मुआवजा मिलता था। कई मामलों में यह राशि दो गुना तक ही पहुंच पाती थी। इससे किसानों में असंतोष और विरोध की स्थिति बनती थी, जिससे कई विकास परियोजनाएं भी प्रभावित होती थीं। नई व्यवस्था में सरकार ने गुणांक को बढ़ाकर 2 कर दिया है। इसके परिणामस्वरूप अब किसानों को कुल मिलाकर चार गुना तक मुआवजा मिलने का रास्ता साफ हो गया है। सरकार का मानना है कि इससे भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सहज होगी। 

उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों पर मुहर

इस पूरे मुद्दे पर विचार करने के लिए सरकार ने एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था। इसमें लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट और एमएसएमई मंत्री चैतन्य कश्यप शामिल थे। समिति ने किसानों को राहत देने और विकास परियोजनाओं को गति देने के लिए मुआवजा ढांचे में बदलाव की सिफारिश की थी, जिसे कैबिनेट ने स्वीकार कर लिया। 

सिंचाई और विकास पर भी फोकस

कैबिनेट बैठक में केवल मुआवजे से जुड़ा फैसला ही नहीं लिया गया, बल्कि सिंचाई क्षेत्र के विस्तार को लेकर भी बड़ा रोडमैप सामने आया है। राज्य सरकार ने 100 लाख हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र का लक्ष्य तय किया है, जिससे कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी की उम्मीद है। इसके साथ ही छिंदवाड़ा में केन-बेतवा लिंक परियोजना से जुड़ी सिंचाई योजना के लिए 128 करोड़ रुपये की अतिरिक्त स्वीकृति दी गई है। इस परियोजना से लगभग 600 गांवों और करीब 1.90 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सीधा लाभ मिलेगा। 

किसानों और विकास दोनों को फायदा

सरकार का दावा है कि इस निर्णय से किसानों को उनकी जमीन का बेहतर मूल्य मिलेगा और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। वहीं दूसरी ओर, भूमि अधिग्रहण में आने वाली अड़चनें कम होने से सड़क, उद्योग और सिंचाई जैसी विकास परियोजनाओं को गति मिलेगी। इस फैसले को सरकार किसानों के हित और विकास कार्यों के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मान रही है, जिसका असर आने वाले समय में राज्य की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण ढांचे पर साफ दिखाई दे सकता है।

“भूमि अधिग्रहण पर किसानों को मिलेगा अधिक मुआवजा” के संबंध में पूछे जाने वाले सवाल और उनके जवाब (FAQ)

प्रश्न 1: भूमि अधिग्रहण पर किसानों को अब कितना मुआवजा मिलेगा?

उत्तर: अब किसानों को अधिग्रहित जमीन पर पहले के मुकाबले चार गुना तक मुआवजा दिया जाएगा, जो नए संशोधित नियमों के तहत तय किया गया है।

प्रश्न 2: मुआवजा बढ़ाने के लिए क्या बदलाव किया गया है?

उत्तर: सरकार ने भूमि अधिग्रहण में लागू गुणांक (फैक्टर) को 1 से बढ़ाकर 2 कर दिया है, जिससे कुल मुआवजा राशि बढ़कर चार गुना तक पहुंच सकेगी।

प्रश्न 3: यह फैसला किसके सुझाव पर लिया गया?

उत्तर: सरकार द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों के आधार पर यह निर्णय लिया गया, जिसमें कई वरिष्ठ मंत्री शामिल थे।

प्रश्न 4: इस फैसले से किसानों को क्या फायदा होगा?

उत्तर: किसानों को उनकी जमीन का बेहतर और उचित मूल्य मिलेगा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और जमीन देने में हिचक कम होगी।

प्रश्न 5: क्या इस फैसले का विकास परियोजनाओं पर असर पड़ेगा?

उत्तर: हाँ, भूमि अधिग्रहण आसान होने से सड़क, सिंचाई और उद्योग जैसी परियोजनाओं को तेजी मिलेगी और विकास कार्यों में आने वाली बाधाएं कम होंगी।

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