PM-KUSUM में बड़ा बदलाव, अब एक ही खेत से फसल और सौर बिजली से होगी कमाई
प्रकाशित - 12 Sep 2026 by Vivek Tailang
अगले चरण में एग्रीवोल्टिक्स के लिए अलग घटक लाने की तैयारी, छोटे और सीमांत किसानों पर रहेगा खास फोकस
देश के किसानों के लिए प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (PM-KUSUM) के अगले चरण में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। योजना के अगले चरण में एग्रीवोल्टिक्स (Agrivoltaics) यानी कृषि-वोल्टेइक ऊर्जा के लिए अलग और समर्पित घटक शामिल करने की तैयारी है। इसके तहत किसान एक ही खेत में फसल उत्पादन के साथ सौर ऊर्जा का उत्पादन करके अतिरिक्त आय हासिल कर सकेंगे।
केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने नई दिल्ली में 7वें एग्रीवोल्टिक्स विश्व सम्मेलन 2026 के पूर्व समारोह को संबोधित करते हुए इस दिशा में सरकार की योजना की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसान अब केवल ‘अन्नदाता’ नहीं, बल्कि ‘ऊर्जादाता’ भी बन रहे हैं। सरकार का विशेष फोकस छोटे और सीमांत किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (FPO), सहकारी समितियों और पंचायतों पर रहेगा।
PM-KUSUM के अगले चरण में एग्रीवोल्टिक्स के लिए अलग घटक
पीएम-कुसुम योजना के अगले चरण में कृषि-वोल्टेइक ऊर्जा के लिए अलग घटक लाने की तैयारी की जा रही है। एग्रीवोल्टिक्स मॉडल में सौर पैनल खेत में इस तरह लगाए जाते हैं कि उनके नीचे या आसपास खेती की जा सके। यानी किसान को खेती छोड़कर सौर ऊर्जा उत्पादन का विकल्प नहीं चुनना पड़ेगा। इस मॉडल में जमीन का स्वामित्व किसान के पास ही रहेगा। सरकार का उद्देश्य किसानों को ऐसा अतिरिक्त आय स्रोत उपलब्ध कराना है, जिससे उनकी आमदनी केवल फसल उत्पादन, मानसून और बाजार भाव पर निर्भर न रहे। खासकर छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह मॉडल आय के नए अवसर पैदा कर सकता है।
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एक एकड़ खेत से तीन तरह से कमाई का मॉडल
एग्रीवोल्टिक्स तकनीक के माध्यम से किसान एक ही जमीन से तीन तरह से लाभ हासिल कर सकते हैं। इसमें सबसे पहला स्रोत फसल से मिलने वाली आय होगी। सौर पैनलों के नीचे उपयुक्त फसलों की खेती जारी रखी जा सकेगी। दूसरा स्रोत सौर बिजली से होने वाली कमाई होगी। खेत में लगे सौर पैनलों से तैयार अतिरिक्त बिजली को डिस्कॉम (DISCOM) को बेचकर किसान आय प्राप्त कर सकते हैं। वहीं तीसरा लाभ सौर ऊर्जा से चलने वाले कृषि पंपों के इस्तेमाल से डीजल जैसे ईंधन पर होने वाले खर्च की बचत के रूप में मिलेगा। इस तरह एक ही खेत किसान के लिए फसल, बिजली और सिंचाई खर्च में बचत- तीनों का आधार बन सकता है।
PM-KUSUM योजना में अब तक कितनी प्रगति हुई
सरकार के अनुसार, पीएम-कुसुम योजना के तहत अब तक 29 लाख से अधिक कृषि पंपों को सौर ऊर्जा से संचालित किया जा चुका है। इसके अलावा पिछले वर्ष 16.3 गीगावाट विकेंद्रीकृत सौर क्षमता जोड़ी गई। इसमें पीएम-कुसुम से 7.6 गीगावाट और पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से 8.7 गीगावाट क्षमता शामिल है। इससे 56 लाख लाभार्थियों को फायदा मिला। भारत में 85 प्रतिशत से अधिक किसान छोटे और सीमांत श्रेणी में आते हैं, जिनके पास 2 हेक्टेयर से कम भूमि है। ऐसे में एग्रीवोल्टिक्स को खेती और सौर ऊर्जा को एक साथ आगे बढ़ाने वाली तकनीक के रूप में देखा जा रहा है।
30 फसलों पर एग्रीवोल्टिक्स तकनीक का परीक्षण
एग्रीवोल्टिक्स को अलग-अलग फसलों और जलवायु के अनुकूल बनाने के लिए शोध भी किया जा रहा है। पुणे स्थित बीएआईएफ के ग्रामीण नवाचार केंद्र में शोधकर्ता 30 फसलों पर 17 अलग-अलग सौर प्रणालियों का परीक्षण कर रहे हैं। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि किन फसलों और क्षेत्रों में सौर पैनलों के साथ खेती का मॉडल ज्यादा प्रभावी रह सकता है। इसके अलावा गांव स्तर पर सौर ऊर्जा प्रणालियों के रखरखाव और तकनीकी संचालन के लिए अब तक 70,000 ‘सूर्य मित्रों’ को प्रशिक्षित किया जा चुका है।
21 से 23 अक्टूबर तक होगा एग्रीवोल्टिक्स विश्व सम्मेलन
एग्रीवोल्टिक्स को बढ़ावा देने के लिए 7वां एग्रीवोल्टिक्स विश्व सम्मेलन 2026 का आयोजन 21 से 23 अक्टूबर 2026 तक भारत मंडपम, नई दिल्ली में होगा। सम्मेलन में दुनिया भर के नीति निर्माता, शोधकर्ता, किसान, उद्योगपति और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल हिस्सा लेंगे। इस दौरान ‘फार्म टू फोर्क इनोवेशन को बढ़ावा देना’ विषय पर आधारित एग्रीवोल्टिक्स पिच हब की भी घोषणा की गई है। इसमें 3F ढांचे—फूड, फ्यूल और फाइबर—पर जोर दिया जाएगा। नेशनल सोलर एनर्जी फेडरेशन ऑफ इंडिया (NSEFI) इसका ज्ञान भागीदार है।
सौर ऊर्जा से खुलेगा कमाई का अतिरिक्त रास्ता
अगर पीएम-कुसुम के अगले चरण में एग्रीवोल्टिक्स के लिए अलग घटक लागू होता है, तो किसानों के लिए खेती के साथ सौर ऊर्जा से अतिरिक्त आय का नया रास्ता खुल सकता है। खासकर छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह मॉडल खेती की आय को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
“PM-KUSUM में बड़ा बदलाव” के संबंध में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल और उनके जवाब (FAQ):
प्रश्न 1. PM-KUSUM योजना के अगले चरण में क्या बदलाव होगा?
उत्तर: PM-KUSUM के अगले चरण में एग्रीवोल्टिक्स के लिए अलग समर्पित घटक लाने की तैयारी है। इसके तहत एक ही खेत में खेती और सौर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा।
प्रश्न 2. एग्रीवोल्टिक्स क्या है?
उत्तर: एग्रीवोल्टिक्स ऐसी व्यवस्था है, जिसमें खेत में सौर पैनल लगाने के साथ उनके नीचे या आसपास फसल उत्पादन भी किया जाता है। इससे किसान खेती के साथ सौर ऊर्जा से भी आय प्राप्त कर सकता है।
प्रश्न 3. किसान एक खेत से किन तरीकों से कमाई कर सकता है?
उत्तर: किसान फसल बेचकर आय प्राप्त कर सकता है, सौर पैनलों से बनी अतिरिक्त बिजली डिस्कॉम को बेच सकता है और सौर ऊर्जा से चलने वाले पंपों के इस्तेमाल से डीजल खर्च में बचत कर सकता है।
प्रश्न 4. PM-KUSUM योजना का छोटे और सीमांत किसानों को क्या लाभ मिलेगा?
उत्तर: योजना के अगले चरण में छोटे और सीमांत किसानों पर विशेष फोकस किया जाएगा। एग्रीवोल्टिक्स के माध्यम से उन्हें खेती के साथ अतिरिक्त आय का स्रोत उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।
प्रश्न 5. क्या किसान की जमीन का स्वामित्व खत्म हो जाएगा?
उत्तर: नहीं। एग्रीवोल्टिक्स मॉडल में सौर पैनल लगाने के बावजूद जमीन का स्वामित्व किसान के पास ही रहेगा। उद्देश्य खेती के साथ सौर ऊर्जा उत्पादन के जरिए आय के अतिरिक्त अवसर तैयार करना है।
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