पीएम किसान योजना: 14 हजार किसान हुए बाहर, अब नहीं मिलेगी अगली किस्त
प्रकाशित - 25 Mar 2026 by Vivek Tailang
वेरिफिकेशन में बड़ा खुलासा, अपात्र लोग ले रहे थे योजना का लाभ
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। यूपी के सोनभद्र जिले में किए गए सत्यापन के दौरान पता चला कि करीब 14 हजार ऐसे लोगों को योजना का लाभ मिल रहा था, जो इसके लिए पात्र ही नहीं थे। इनमें मृतक, भूमिहीन, आयकरदाता और नाबालिग तक शामिल पाए गए हैं।
जिला प्रशासन द्वारा कराए गए वेरिफिकेशन में खुलासा हुआ कि कई ऐसे किसानों के खातों में भी किस्त जा रही थी, जिनकी मृत्यु हो चुकी है या जिन्होंने अपनी कृषि भूमि बेच दी है। जांच पूरी होने के बाद अब इन सभी अपात्र लाभार्थियों की किस्तें रोक दी गई हैं और उनकी सूची मुख्यालय को भेज दी गई है।
वेरिफिकेशन में सामने आई बड़ी गड़बड़ी
कृषि विभाग के अनुसार, यह योजना वर्ष 2019 से लागू है और तब से अब तक बड़ी संख्या में किसानों की स्थिति बदल चुकी है। कई किसानों की मृत्यु हो गई, कुछ ने जमीन बेच दी, जबकि कुछ लोग शुरुआत से ही अपात्र थे, फिर भी उन्हें लगातार ₹2000 की किस्त मिलती रही। जब “फार्मर रजिस्ट्री” अभियान के तहत घर-घर जाकर सत्यापन किया गया, तब इस बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। जांच में यह भी सामने आया कि कई लाभार्थी ऐसे थे जिनके पास कृषि योग्य भूमि ही नहीं थी, जबकि कुछ आयकरदाता भी इस योजना का फायदा उठा रहे थे।
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नाबालिगों के नाम पर भी जा रही थी किस्त
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ मामलों में नाबालिगों के नाम पर भी योजना का लाभ लिया जा रहा था। विभाग को पहले इसकी जानकारी नहीं थी, क्योंकि समय पर e-KYC और आधार वेरिफिकेशन नहीं हो पाया था। हर तीन महीने में मिलने वाली ₹2000 की किस्त बिना पूरी जांच के जारी होती रही। लेकिन हाल के सख्त वेरिफिकेशन अभियान में यह गड़बड़ी उजागर हो गई।
ई–केवाईसी (e-KYC) और आधार वेरिफिकेशन से रुकी कई किस्तें
अधिकारियों ने बताया कि जिन किसानों ने e-KYC, आधार सीडिंग और लैंड सीडिंग पूरी नहीं की थी, उनकी किस्तें पहले ही स्वतः रुक चुकी थीं। अब नए सिरे से किए गए वेरिफिकेशन के बाद करीब 14 हजार अपात्र लोगों को पूरी तरह योजना से बाहर कर दिया गया है। इन सभी मामलों की रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है, ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके।
100 प्रतिशत फार्मर रजिस्ट्री पर जोर
सोनभद्र के उप कृषि निदेशक वीरेंद्र कुमार के अनुसार, जिले में सभी किसानों का डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। इसके तहत हर किसान के लिए फार्मर रजिस्ट्री कराना अनिवार्य किया गया है। उन्होंने बताया कि हर छह महीने में आधार वेरिफिकेशन, बैंक e-KYC और लैंड सीडिंग की प्रक्रिया होती है। अगर इनमें से कोई भी प्रक्रिया पूरी नहीं होती है, तो किस्त स्वतः ही रोक दी जाती है। प्रशासन अब 100% फार्मर रजिस्ट्री सुनिश्चित करने में जुटा है, ताकि भविष्य में इस तरह की गड़बड़ी दोबारा न हो।
आगे नहीं होगी गड़बड़ी
प्रशासन का कहना है कि जिन अपात्र लोगों की पहचान हुई है, उनके नाम सूची से हटाए जाएंगे और आगे से केवल पात्र किसानों को ही योजना का लाभ मिलेगा। इस कार्रवाई के बाद साफ हो गया है कि सरकार अब योजना में पारदर्शिता लाने के लिए सख्ती बरत रही है और फर्जी लाभार्थियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
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