सूखा प्रभावित किसानों को ₹5,000 की मदद, पहली किस्त का भुगतान शुरू
प्रकाशित - 08 Nov 2026 by Tractor Junction
सूखे से बर्बाद हुई फसल तो सरकार देगी ₹5,000, किसानों के खाते में भेजे ₹2,500
सूखे की मार झेल रहे कर्नाटक के किसानों के लिए राहत की खबर है। राज्य सरकार ने पात्र सूखा प्रभावित किसानों को अधिकतम ₹5,000 की आर्थिक मदद देने का ऐलान किया है। इसकी पहली किस्त के रूप में ₹2,500 जारी कर दिए गए हैं। बाकी ₹2,500 आने वाले हफ्तों में दिए जाने हैं। राशि आधार आधारित DBT से सीधे बैंक खाते में जा रही है।
कर्नाटक सूखा राहत: किसे और कितना मिलेगा पैसा?
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और उपमुख्यमंत्री व राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने बेंगलुरु के विधान सौध में पहली किस्त के भुगतान की शुरुआत की। यह इनपुट सब्सिडी के रूप में उन किसानों के लिए है जिनकी फसल इस साल सूखे से खराब हुई है।
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| अधिकतम सहायता | ₹5,000 प्रति पात्र किसान |
| पहली किस्त | ₹2,500 (जारी) |
| दूसरी किस्त | ₹2,500 (आने वाले हफ्तों में) |
| पात्रता | सूखे से फसल खराब होने वाले किसान |
| भुगतान का तरीका | आधार आधारित DBT |
सरकार के मुताबिक पहली किस्त का खर्च राज्य अपने संसाधनों से उठा रहा है। इसके लिए करीब ₹1,250 करोड़ रखे गए हैं और लगभग 45 से 50 लाख किसानों को फायदा मिलने का अनुमान है। परमेश्वर ने कहा कि दूसरी किस्त की प्रक्रिया केंद्र से NDRF (राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष) की मदद मिलने के बाद पूरी की जाएगी।
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दूसरी किस्त कब आएगी?
सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार बाकी राशि अगले तीन हफ्तों के भीतर जारी होनी है। मुख्यमंत्री शिवकुमार ने मीडिया से बात करते हुए करीब 15 दिन में दूसरी किस्त के लिए फंड जुटाने की बात कही। किसानों को सलाह है कि भुगतान की स्थिति अपने पोर्टल या कृषि विभाग से देखते रहें।
पैसा सीधे बैंक खाते में कैसे पहुंचेगा?
सरकार ने पात्र किसानों की पहचान के लिए तीन डिजिटल सिस्टम जोड़े हैं:
- परिहारा पोर्टल
- डिजिटल क्रॉप सर्वे
- FRUITS पोर्टल
पहचान के बाद राशि आधार आधारित DBT से सीधे खाते में जाएगी। सरकार के अनुसार किसानों को दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने होंगे और नए दस्तावेज भी जमा नहीं करने पड़ेंगे।
कर्नाटक में सूखा: बारिश 35% कम, 226 तालुके प्रभावित
राज्य सरकार ने 226 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया है। इनमें 177 तालुके पहले घोषित हुए थे और 49 बाद में जोड़े गए। 1 जून से 30 सितंबर के बीच कर्नाटक में सामान्य 852 मिमी की जगह सिर्फ 551 मिमी बारिश हुई, यानी करीब 35% कम। सरकारी पत्र के अनुसार यह 1956 के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून की दूसरी सबसे कम बारिश है। क्षेत्रवार कमी इस तरह रही:
| क्षेत्र | बारिश में कमी |
|---|---|
| उत्तर आंतरिक कर्नाटक | 42% |
| दक्षिण आंतरिक कर्नाटक | 41% |
| मलनाड | 38% |
| तटीय कर्नाटक | 28% |
57.93 लाख हेक्टेयर में फसल प्रभावित
इस खरीफ सीजन में 84.10 लाख हेक्टेयर में बुवाई का लक्ष्य था, पर किसानों ने 69.57 लाख हेक्टेयर में ही बुवाई की। राजस्व, कृषि और बागवानी विभागों के संयुक्त सर्वे में 57.93 लाख हेक्टेयर में फसल प्रभावित मिली, जो बोए गए रकबे का 83.26% है। इसमें करीब 53.92 लाख हेक्टेयर कृषि फसलें और 4.01 लाख हेक्टेयर बागवानी फसलें हैं। सरकार का अनुमान है कि सूखे से राज्य को लगभग ₹62,481.88 करोड़ का आर्थिक नुकसान हुआ है।
सबसे ज्यादा प्रभावित फसलों में मक्का (11.82 लाख हेक्टेयर), अरहर (10.12 लाख हेक्टेयर), कपास (6.68 लाख हेक्टेयर), रागी (5.56 लाख हेक्टेयर) और गन्ना (4.88 लाख हेक्टेयर) शामिल हैं।
केंद्र से ₹22,400 करोड़ की मांग
कर्नाटक सरकार ने NDRF के तहत केंद्र से ₹22,400.58 करोड़ की सहायता मांगी है:
| मद | मांगी गई राशि |
|---|---|
| 61.91 लाख छोटे-सीमांत किसानों की आजीविका | ₹12,146.99 करोड़ |
| फसल नुकसान की भरपाई (इनपुट सब्सिडी) | ₹7,943.55 करोड़ |
| पीने के पानी की व्यवस्था | ₹1,727 करोड़ |
| पशुधन की सुरक्षा | ₹583.04 करोड़ |
| कुल | ₹22,400.58 करोड़ |
राज्य सरकार का कहना है कि मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री को कई बार पत्र लिख चुके हैं। इनमें NDRF के नियमों में ढील और जल्द राहत जारी करने की मांग की गई है।
किसानों के लिए इस राहत के मायने
सूखे में फसल खराब होने से आमदनी पर सीधा असर पड़ता है, ऐसे में यह सहायता तात्कालिक आर्थिक सहारा दे सकती है। हालांकि यह हर किसान के लिए सामान्य भुगतान नहीं है। लाभ उन्हीं किसानों को मिलेगा जो सरकारी रिकॉर्ड में सूखे से प्रभावित और पात्र पाए जाएंगे।
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