किसानों को भूमि अधिग्रहण का मिलेगा उचित मुआवजा, तय होगा नया सर्किल रेट

जानें, क्या है सरकार की योजना और इससे कैसे होगा किसानों को लाभ

हाईवे या रोड बनाने के लिए सरकार की ओर से किसानों की भूमि का अधिग्रहण किया जाता है जिसमें उनको जो मुआवजा दिया जाता है, वे पुरानी सर्किल रेट के आधार पर दिया जाता है, ऐसा इसलिए की बहुत अधिक समय होने के बावजूद प्रदेश सरकार की ओर से जमीन के सर्किल रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है जिससे किसानों को अपनी जमीन का उचित मुआवजा नहीं मिल पाता है। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार की ओर से जल्द ही जमीनों के सर्किल रेट का पुनरीक्षण कराया जाएगा। इसके तहत जिन जनपदों में सालों से जमीन की सर्किल रेट का पुनरीक्षण नहीं हुआ है, वहां प्राथमिकता पर कार्रवाई को पूरा किए जाने पर फोकस किया जाएगा। 1 जनवरी 2024 से अब तक प्रदेश के 37 जिलों में जमीनों के सर्किल रेट के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। कुछ जिलों में पुनरीक्षण प्रक्रिया जारी है। वहीं अन्य जिलों में भी इसे जल्द ही शुरू किए जाने की योजना है। 

सर्किल रेट के पुनरीक्षण से किसानों को क्या होगा लाभ

दरअसल यूपी सरकार की योगी आदित्यनाथ सरकार की ओर से प्रदेश में जमीन के सर्किल रेट का पुनरीक्षण का कार्य किया जा रहा है। जमीन के सर्किल रेट के पुनरीक्षण होने से सबसे अधिक लाभ किसानों को होगा। पुनरीक्षण प्रक्रिया पूरी होने पर कानून के अनुसार भूमि अधिग्रहण में किसानों को जमीन का सही मूल्य मिल सकेगा। वहीं सरकार को राजस्व में बढ़ोतरी होगी। इसके अलावा रियल एस्टेट सेक्टर को मजबूती मिलने के साथ ही जमीन की खरीद–फरोख्त में पारदर्शिता आएगी। यही कारण है कि यूपी सरकार की ओर से प्रदेश में जारी विकासपरक कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए सभी जिलों में जमीनों के सर्किल रेट से जुड़ी पुनरीक्षण प्रक्रिया को पूरा करने पर फोकस किया जा रहा है। 

कैसे किया जाता है जमीन के न्यूनतम मूल्य का निर्धारण

डीएम द्वारा जमीन के न्यूनतम मूल्य का निर्धारण किया जाता है। इसलिए उत्तर प्रदेश स्टाम्प (संपत्ति का मूल्यांकन) की द्वितीय संशोधन नियमावली– 2013 नियम 4 (1) के अंतर्गत जिलाधिकारी द्वारा अगस्त के महीने में वार्षिक रूप से जिले के विभिन्न भागों में स्थित कृषि व अकृषि भूमि का न्यूनतम मूल्य प्रति हैक्टेयर या प्रति वर्गमीटर का दर निर्धारित किए जाने का उल्लेख है। जरूरत पड़ने पर जिलाधिकारी द्वारा वर्ष के मध्य में भी सर्किल दर सूची का पुनरीक्षण कार्य किया जा सकता है। ऐसे में प्रदेश में 1 जनवरी 2024 से लेकर अब तक 37 जिलों में जमीनों के सर्किल रेट के पुनरीक्षण की प्रक्रिया का पूरा किया जा चुका है। 

अभी इन जिलों में जारी है पुनरीक्षण की प्रक्रिया

हाल ही में मुख्य सचिव की बैठक में इस प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। जिन जिलों में सर्किल रेट सालों से नहीं बदला है उनमें लखनऊ, वाराणसी, इटावा, बागपत, गोरखपुर, हापुड़, कन्नौज, मेरठ, बुलंदशहर, महाराजगंज, कुशीनगर, अयोध्या, एटा, अंबेडकर नगर, कासगंज, बदायूं, झांसी, मुजफ्फरपुर, ललितपुर, संत कबीरनगर, जालौन, कौशाम्बी व प्रयागराज आदि प्रमुख हैं। इन सभी जिलों में शीघ्र ही पुनरीक्षण की कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा शामली, सहारनपुर, अलीगढ़, हमीरपुर, बांदा, मीरजापुर, आगरा, सुल्तानपुर, अमेठी व गौतमबुद्ध नगर सहित कई जिलों में फिलहाल पुनरीक्षण की प्रक्रिया जारी है।

क्या है सर्किल रेट 

सर्किल रेट जमीन का वह न्यूनतम मूल्य होता है जिस पर सरकार जमीन को खरीदने या बेचने के लिए मान्यता देती है। इससे कम कीमत पर जमीन की रजिस्ट्री नहीं कराई जा सकती है। यूपी के कई जिलों में सर्किल रेट काफी पुराना हो गया था जिससे किसानाें को अपनी जमीन को बेचने पर उसका उचित मूल्य नहीं मिल पाता था। किसानों की इस समस्या काे दूर करने के लिए राज्य सरकार की ओर से जमीन के सर्किल मूल्य में बदलाव किया गया है जिससे किसानों को अपनी जमीन का बेहतर मूल्य मिल सके। बता दें कि जमीन की खरीद फरोख्त के समय स्टांम्प ड्यूटी लगती है जो सरकार के लिए राजस्व आय का स्त्रोत हैं। ऐसे में सरकार अलग–अलग क्षेत्र के लिए वहां की जमीन रेट के हिसाब से सर्किल रेट तय कर देती है ताकि इस रेट से नीचे किसी जमीन की खरीद फरोख्त नहीं की जा सकती है। 

सर्किल रेट व मार्केट रेट में कितना होता है अंतर 

सर्किल रेट प्रशासन द्वारा तय किया गया किसी जमीन का न्यूनतम रेट होता है जिससे आपको उस जमीन की कीमत के बारे में मोटा–मोटा अंदाजा लग सकता है। लेकिन यह रेट मार्केट रेट से बहुत कम होता है। मार्केट रेट हमेशा सर्किल रेट से अधिक होता है। हालांकि सर्किल रेट को वास्तविक रेट के करीब रखने की कोशिश की जाती है, लेकिन यह कभी वास्तविक रेट के बराबर नहीं होता है। जमीन का मार्केट रेट इससे अधिक ही होता है। क्योंकि बिल्डर आपको जो फ्लैट देता है वे मार्केट रेट पर देता है जो सर्किल रेट से काफी अधिक होता है। यदि बिल्डर आपको सर्किट रेट पर फ्लैट या जमीन बेचता है तो उसको काफी नुकसान हो सकता है। ऐसे में सर्किल रेट से मार्केट रेट हमेशा अधिक होता है। सर्किल रेट तय करने के मुख्य उद्देश्य सरकारी टैक्स चोरी को रोकना है। सर्किल रेट से कम में किसी भी जमीन को बेचा या खरीदा नहीं जा सकता है। सर्किल रेट से कम में किसी जमीन की रजिस्ट्री नहीं कराई जा सकती है।

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